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दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ाने को लेकर डीएमआरसी और अरविंद केजरीवाल सरकार आमने-सामने हैं. इसके बावजूद मेट्रो प्रबंधन किराया बढ़ाने पर अड़ा हुआ है. वह खर्च बढ़ने की दुहाई दे रहा है. ऐसे में हमें यह जानना जरूरी है कि आखिर मेट्रो प्रबंधन इसके पीछे क्या दलील दे रहा है.डीएमआरसी के मुताबिक मेट्रो का नेटवर्क बढ़ने के साथ ही रखरखाव का खर्च भी बढ़ रहा है. वर्ष 2008-09 में ऑपरेशनल (परिचालन) खर्च कुल राजस्व का करीब 55 फीसदी था. जो 2016-17 में बढ़कर 74 फीसदी तक हो गया है. मतलब यह हुआ कि यदि दिल्ली मेट्रो एक लाख रुपये एकत्र करता है तो 74 हजार परिचालन पर खर्च हो जाता है.
बाकी पैसे से रखरखाव होता है और लोन चुकाया जाता है. 2008-09 में बिजली की कीमत 3.21 रुपये प्रति यूनिट थी जो अब बढ़कर 6.58 रुपये यूनिट हो गई है. इसी तरह पहले एक किलोमीटर की मरम्मत और रखरखाव का खर्च एक करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर 3.13 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इन खर्चों की वजह से ही मेट्रो किराया बढ़ाने पर मजबूर है.
डीएमआरसी का कहना है कि मेट्रो वाले सात शहरों की तुलना में यहां का किराया काफी कम है. देश में सबसे बड़ा 218 किलोमीटर का नेटवर्क दिल्ली मेट्रो का है. इसका अधिकतम किराया 60 रुपये होने जा रहा है. जबकि चेन्नई और मुंबई मेट्रो का नेटवर्क छोटा है और किराया यहां से ज्यादा.
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