Saturday, 30 September 2017

दशहरे में और भी खास हो जाता है मैसूर


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 जहाँ एक ओर देश में दशहरे के दिन रावण दहन की प्रथा है वहीँ दूसरी ओर मैसूर में देवी चामुंडा के राक्षस महिसासुर का वध करने पर धूमधाम से मनाया जाता. मैसूर के शाही परिवार द्वारा लगभग 500 साल पुरानी परम्परा के मुताबिक वे नवरात्रों के 9 दिन तक दरबार लगाते हैं और आखिरी दिन सोने-चांदी से सजे हाथियों का काफिला 21 तोपों की सलामी के बाद मैसूर राजमहल से नगर भ्रमण पर निकलते हैं. काफिले की अगुआई करने वाले हाथी की पीठ पर 750 किलो शुद्ध सोने का सिंहासन होता है. मैसूर के दशहरे की रौनक को देखने के लिए हर साल करीब 6 लाख लोग आते हैं.

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