Thursday, 28 September 2017

भारत-पाकिस्तान दोनों के हीरो हैं भगत सिंह


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शहीद-ए-आजम भगत सिंह के मुरीद जिस तरह भारत में हैं उसी तरह पाकिस्तान में भी. उनका जन्‍म 28 सितंबर 1907 को फैसलाबाद, लायलपुर (वर्तमान में पाकिस्‍तान) के गांव बंगा में हुआ था. दोनों देशों में इतनी कटुता के बाद भी लोग इन्‍हें दिल से चाहते हैं. इसलिए वे भारत-पाकिस्‍तान दोनों के हीरो हैं.भगत सिंह ने तब अंग्रेजों से लोहा लिया और देश के लिए फांसी पर चढ़ गए जब देश का बंटवारा नहीं हुआ था. इसलिए दोनों देशों में तनाव के बाद भी वह कई जगह भारत-पाकिस्‍तान की अवाम को जोड़ते नजर आते हैं.


भगत सिंह को 23 मार्च 1931 को उनके साथी राजगुरु व सुखदेव के साथ लाहौर जेल में अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी. दुनिया में यह पहला मामला था जब किसी को शाम को फांसी दी गई. वह भी मुकर्रर तारीख से एक दिन पहले.


तब भगत सिंह के उम्र सिर्फ 23 साल थी. उन्‍हें सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने और अंग्रेज अफसर जॉन सैंडर्स की हत्या  के आरोप में यह सजा दी गई थी. उनका जन्‍म और शहादत दोनों आज के पाकिस्‍तान में हुआ था. इसलिए वहां के लोग उन्‍हें नायक मानते हैं.Bhagat Singh, martyr status of Bhagat singh, Bhagat singh birthday, Indian freedom fighters movement, Bhagat singh quotes, Bhagat singh photos, Bhagat singh martyr status of rti, sukhdev rajguru, Bhagat Singh, birthday of Bhagat Singh, Indian freedom fighter movement, Bhagat Singh photo, Rajguru, Sukhdev, Bhagat Singh martyr status, भगत सिंह,                                            ऐसा था भगत सिंह का जीवन


वहां के भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने इसी साल 23 मार्च को भगत सिंह की पुण्यतिथि मनाने और कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए लाहौर हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी. फाउंडेशन को कट्टरपंथी समूह से डर था. पाकिस्‍तान में अब भी वह घर मौजूद है, जहां उनका जन्म हुआ था.


भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशनपाकिस्‍तान के अध्यक्ष वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने सांडर्स केस से भगत सिंह को बाइज्जत बरी करने के लिए लाहौर हाईकोर्ट में अपील लगाई हुई है. वह पाकिस्‍तान सरकार को यह निर्देश देने की मांग कर रहे हैं कि वह भगत सिंह को राष्ट्रीय सम्मान दे. उनका कहना है कि भगत सिंह हमारे भी हीरो हैं. इन दिनों वह भारत में हैं.


उन्‍होंने अपनी याचिका में लाहौर कोर्ट को लिखा है कि भगत सिंह आजादी के सिपाही थे और उन्होंने अविभाजित भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी. हालांकि पाकिस्तान में आतंकी और कट्टरपंथी संगठन भगत सिंह के पक्ष में आवाज उठाने का विरोध करते रहे हैं. लेकिन वहां बड़ा तबका भगत सिंह को अपना हीरो मानता है.


पाकिस्‍तान के लोगों ने आखिर लाहौर के शादमन चौक का नाम बदलकर भगत सिंह चौक करवा लिया है. इसके लिए वहां की सिविल सोसायटी ने लड़ाई लड़ी है. हालांकि पाकिस्‍तान का कट्टरपंथी संगठन जमात-उद-दावा इसके विरोध में था.


भगत सिंह के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू का कहना है कि वह इस वक्‍त भारत-पाकिस्‍तान दोनों की साझी विरासत हैं. हम लोग यहां उन्‍हें शहीद का दर्जा देने के लिए लड़ रहे हैं तो पाकिस्‍तान में भी वहां के लोग उन्‍हें मान-सम्‍मान दिलाने के लिए लड़ रहे हैं.


jail diary of bhagat singh, why bhagat Singh still not martyr in government record?          भगत सिंह ने लाहौर सेंट्रल जेल में एक डायरी लिखी थी


पाकिस्‍तान के एक न्‍यूज चैनल के लिए भारत में काम करने वाले वरिष्‍ठ पत्रकार परवेज अहमद कहते हैं कि भगत सिंह को लेकर जितने संजीदा हम हैं उतनी ही पाकिस्‍तान की अवाम भी है. वहां के लोगों को यह एहसास है कि जितने वे भारत के हैं उतने ही पाकिस्‍तान के भी. दोनों देशों की अवाम को जोड़ने के लिए भगत सिंह एक बहाना भी हैं और कड़ी भी.


Article source: http://www.jagran.com/uttar-pradesh/meerut-city-16471175.html

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