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क्राइम ब्रांच इन दिनों अंडरवर्ल्ड एक्सटॉर्शन के कारोबार की कड़ियों को खंगाल रहा है. इसी जांच में पूरे एक्सटॉर्शन के एम्पायर के सी.ई.ओ यानी छोटा शकील से इस कारोबार में भूमिका के अहम सुराग हाथ लगे हैं. वहीं उन कोड्स की कड़ियां भी हाथ लगी हैं जिसका इस्तेमाल एक्सटॉर्शन के पूरे काले कारोबार को चलाने के लिए छोटा शकील सहित इकबाल कासकर और उसके शूटर्स तक करते थे.इकबाल कासकर के मामले में जांच में जुटी एंटी एक्सटॉर्शन सेल के मुताबिक, एक्सटॉर्शन के धंधे को चलाने के लिए कई कोड्स का इस्तेमाल अंडरवर्ल्ड कर रहा था. आइए नजर डालते हैं अंडरवर्ल्ड के खास कोड्स पर:
दाऊद इब्राहिम को इस कोडिंग भाषा में ‘बड़ा’ कहकर बुलाया जाता था.
छोटा शकील को कोड में ‘पाव टकला’ कहा जाता था. इकबाल कासकर को ‘इकबाल इक्का या इकबाल सेठ’ के नाम दिया गया था.
पुलिस के लिए ‘गंदे आदमी’ या ‘हाथी’ कोड वर्ड का इस्तेमाल होता था.
एनकाउंटर स्पेशिलिटी को ‘मामू’ बोला जाता था.
अगर किसी को पूछना है कि ‘इनफॉर्मेशन क्या है’ तो उसके लिए कहेंगे – ‘परफ्यूम कैसा है.
शूटर्स के लिए ‘कारीगर’ कोड बनाया गया था, तो वहीं पीड़ित विक्टिम को ‘पेशेंट’ कहा जाता था.
अगर 9mm की पिस्टल कहना है तो बोलेंगे- ‘9 नंबर की चप्पल’ और 32 बोर की गन के लिए ’32 नंबर की चप्पल’ कोड का इस्तेमाल होता था.

कुछ अलग तरह के कोड्स का भी होता था इस्तेमाल
एक्सटॉर्शन सेल से मिली जानकारी के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को डराना-धमकाना है या फिर फायरिंग के लिए कहना है तो कहा जाता था – ‘हाथ लगा दो’. वहीं, किसी को मौत के घाट उतारना है तो बोला जाता था – ‘आगे बढ़ा दो’. इतना ही नहीं पैसों को हवाला के जरिए पंप करने को ‘डायरी’ कहा जाता था. पासपोर्ट के लिए कोड था ‘पुट्ठा’ और ड्राइवर के लिए कोड था ‘हमाल’. अगर लाखों की रकम है तो उसे कहा जाता था ‘डिब्बा’ और करोड़ों की रकम को ‘बॉक्स’ कहकर बुलाया जाता था.
सूत्रों के मुताबिक, ये वो कोड्स थे जिनका इस्तेमाल छोटा शकील, इकबाल कासकर और शूटरों से बातचीत करते हुए करता था. इस मामले में छोटा शकील हर गतिविधि पर नजर रखता कि एक्सटॉर्शन के लिए पीड़ित किस बात और किस रकम पर राजी हो रहा है. ऐसे में उसे डराने धमकाने के लिए क्या कॉल लेना है इस पर फैसला लेते हुए वो इन्हीं कोड्स के जरिए निर्देश भी देता था.
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