Thursday, 28 September 2017

इकोनॉमी के लिए उपाध्याय मॉडल चाहिए?


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मौजूदा सरकार के बचाव में आरएसएस के लोग भी उतर आए हैं. बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने बुधवार को लिखा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 4 प्रतिशत के आसपास है, जबकि आरएसएस के अर्थव्यवस्था क्षेत्र से जुड़े संगठनों का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद अभी भारतीय अर्थव्यवस्था एक ट्रांज़ीशन दौर से गुज़र रही है. कुछ दिन बाद ये सही रास्ते पर आ जायेगी. ढ़िये कुछ और आरएसएस नेताओं के विचार-संपत तोशनीवाल, दिल्ली क्षेत्र महासचिव, लघु उद्योग भारती
नोटबंदी का प्रभाव खत्म हो चुका है और जो लोग इस मुद्दे को अभी उठा रहे हैं वो सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं. वास्तविकता ये है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर है और छोटे उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. पर मुझे लगता है कि ये सब जीएसटी को लागू करने की वजह से हुआ है.


हमारे देश मे काफी लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं. ये लोग अभी तक टैक्स की जो संरचना रही है उससे सुविधाजनक तरीके से अपना नहीं पाते थे पर अब जीएसटी के बाद ये लोग संगठित क्षेत्र में काम करने की ओर बढ़ेंगे. कोई चीज़ रातों-रात नहीं हो जाती. इसे कुछ समय लगता है.ब्रजेश उपाध्याय, महासचिव भारतीय मजदूर संघ
लगभग पूरी दुनिया में बाज़ार को जो मॉडल है वो बिल्कुल एक जैसा है. इन सभी देशों में बेरोजगारी और असमानता की समस्या है. पर भारत की स्थितियां इससे अलग हैं इसलिए हम इन देशों की नकल नहीं कर सकते. भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था की ज़रूरत है. कृषि के औद्योगिकीकरण की ज़रूरत नहीं है क्योंकि इससे बेरोजगारी की समस्या पैदा होगी. लेकिन इस मामले में चाहे जो सरकार सत्ता में आई है उस सबने एक जैसा ही काम किया है.


जहां कर बात नोटबंदी और जीएसटी की है तो इस मामले में अर्थशास्त्रियों के अलग अलग मत हैं इसलिए अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. सही स्थिति का पता लगाने के लिए हमें कुछ इंतज़ार करना होगा.


अश्वनी महाजन, राष्ट्रीय सह-संयोजक, स्वदेशी जागरण मंच
अभी की जो स्थिति है वो कुछ समय के लिए ही है. कुछ समय बाद ये समस्याएं खत्म हो जायेंगी. हमें दत्तोपंत थेंगडी और दीनदयाल उपाध्याय के मॉडल को अपनाने की ज़रूरत है और अंतिम व्यक्ति के लाभ के लिए काम करने की ज़रूरत है. ज़रूरत इस बात की है कि सब्सिडी कॉर्पोरेट को देने के बजाय छोटे उद्योगों को दिया जाये.


मोहिनी मोहन मिश्रा, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय किसान संघ
अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार में ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इस बात का पता नहीं है कि नोटबंदी से जो पैसे आए वो कहां गये पर उन्हें कहां निवेश किया गया. हमें पता नहीं कि क्या हो रहा है. किसान परेशान हैं. यहां तक कि भाजपा शासित राज्यों मे भी सरकारी नीतियां ठीक से लागू नहीं हो पा रही हैं. खाद्य प्रसंस्करण की इकाइयां भी ठीक से नहीं लगी हैं.


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