Sunday, 30 September 2018

देश के 150 जिलों में केंद्रीय विद्यालय नहीं, 50 जिले नवोदय विद्यालय से वंचित


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देश के करीब 150 जिलों में केंद्रीय विद्यालय (केवी) और 50 जिलों में जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) अभी भी नहीं हैं जबकि केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्थापना नवंबर 1962 में और नवोदय विद्यालय समिति की स्थापना 1985 में हुई थी. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों से यह बात सामने आई है.ये भी पढ़ें- 500 भारतीय स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देगी ब्रिटिश काउंसिल


मानव संसाधन विकास मंत्रालय के ब्यौरे के अनुसार, तमिलनाडु ने अब तक नवोदय विद्यालय योजना को स्वीकार नहीं किया है. मंत्रालय का कहना है कि देश के सभी जिले में एक-एक नवोदय विद्यालय स्वीकृत किये गए हैं.


ये भी पढ़ें- IISc Bengaluru बनी देश की बेस्ट यूनिवर्सिटी, जानिए दुनिया में कौन है टॉप परसंसद के मानसून सत्र के दौरान एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मध्य दिल्ली, मुम्बई, मुम्बई उप शहरी, हैदराबाद, कोलकाता जिलों में नवोदय विद्यालय मंजूर नहीं किये गए हैं क्योंकि इन जिलों में कोई ग्रामीण आबादी नहीं है.


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मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना के 26 जिले, मणिपुर के सात जिले, अरूणाचल प्रदेश, असम के छह-छह जिले, पश्चिम बंगाल के तीन जिले, हरियाणा, महाराष्ट्र के एक-एक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय नहीं है.


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जम्मू कश्मीर पुलिस की जो वर्दी कभी रुतबा थी आज बन गई है मुश्किलों का सबब


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(आकाश हसन)हाल ही में जब एक पड़ोसी हज से वापस आए तो ज़ोहरा ने पूछा कि पापा कब वापस आएंगे? ज़ोहरा के पापा अब्दुल रशीद जम्मू कश्मीर पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर थे. पिछले साल 28 अगस्त को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में एक आतंकी हमले में उनकी मौत हो गई थी.


वह अपने क्लासरूम में थी जब उसका भाई दौड़ता हुआ आया और उसके पिता के मृत शरीर के पास लेकर गया. ज़ोहरा ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी. जब ज़ोहरा को किसी भी तरह से समझाना मुश्किल हो गया तो उसकी मां नसीमा ने बताया कि उसके पिता हज गए हुए हैं. उनकी पोस्टिंग वहीं है.


नसीमा बताती हैं, ‘सरकारी नौकर के रूप में उनकी गांव में अच्छी प्रतिष्ठा थी. आतंकी (आमतौर पर स्थानीय युवक) पहले भी गांव में आते थे. उनको पता था रशीद पुलिस में हैं लेकिन उन्होंने कभी हमला नहीं किया.’ये भी पढ़ेंः टेरर फंडिंग का नागौर कनेक्शन ! एनआईए ने दिल्ली से किया आरोपी को गिरफ्तार


जब अब्दुल रशीद ज़िंदा थे तो उनके दो बेटे इरशाद और फैज़ल ने भी स्पेशल पुलिस ऑफीसर (एलपीओ) के रूप में पुलिस फोर्स ज्वाइन किया था. हालांकि रशीद की मौत के बाद उसके बड़े बेटे फैज़ल ने एक स्थानीय मस्जिद से घोषणा की कि उसने पुलिस की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया है. पिता की मौत के बाद छोटा बेटा इरशाद तब से घर पर है और अभी तक उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन नहीं किया है.


नसीमा कहती हैं, ‘मैं नहीं चाहती कि मेरे बेटे पुलिस में जाएं. मेरे पति एक अच्छे इंसान थे. वर्दी की वजह से उनकी जान गई.’


जम्मू कश्मीर में जिस तरह से पुलिस वालों पर हमले हो रहे हैं उसकी वजह से सिर्फ इस साल 30 पुलिस वाले मारे जा चुके हैं. यहां तक कि आतंकी एक पुलिस वाले के घर में घुस आए और उनके परिवार वालों का अपहरण कर लिया. पुलिस और स्थानीय आतंकियों के बीच लड़ाई गहरी होती जा रही है क्योंकि आतंकियों के परिवार वालों को लगता है कि पुलिस उन्हें परेशान करती है.


पुलिस वालों पर लगातार इसलिए भी हमले बढ़ रहे हैं क्योंकि आतंकवाद को रोकने के लिए उनकी भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है. कश्मीर में 2008 में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद से पुलिस वालों की छवि खराब हुई है. बाद में 2010 और 2016 के विरोध प्रदर्शन में पुलिस पर सामान्य नागरिकों को विरोध के दौरान मारने के आरोप लगे. यह भी आरोप लगा कि केंद्रीय बलों की तुलना में उनका रवैया ज्यादा सख्त था.


पुलिस वालों के सामाजिक संबंध कैसे प्रभावित हुए हैं?


इस वक्त पुलिस वालों के परिवार वाले काफी मुश्किल में हैं और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. हाल में हुए हमलों को देखते हुए इस वक्त दक्षिण दिल्ली में रहने वाले पुलिस वालों को घर न जाने की सलाह दी गई है.


पुलवामा के रहने वाले जम्मू कश्मीर पुलिस के एक जवान ने कहा कि हमारी नौकरी ने हमारे सामाजिक संबंधों पर गहरा असर डाला है. वह बताते हैं कि उनके परिवार में आठ लोग हैं और वह अकेले कमाने वाले हैं इसलिए नौकरी छोड़ने का कोई विकल्प उनके पास नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं मुश्किल से अपने घर जा पाता हूं. मुझे नहीं पता कि मेरे रिश्तेदार कैसे हैं. मेरे काम की वजह से मैं समाज से पूरी तरह कट गया हूं. हमारे अधिकारी अपने घर जा पाते हैं और सुरक्षित तरीके से रहते हैं लेकिन हम सुरक्षित नहीं हैं.’


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रहमान भट्ट (बदला हुआ नाम) इस वक्त आतंक-निरोधी विंग के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में काम कर रहे हैं. उन्होंने अपना गांव छोड़ दिया है और अपनी बीवी-बच्चों के साथ श्रीनगर के एक गांव में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमें यहां बच्चों की ज़्यादा फीस देनी पड़ती है. हम सोच रहे हैं कि गांव वाला घर बेचकर हमेशा के लिए यहां बस जाएं.


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चलती ट्रेन से मोबाइल फोन या कोई कीमती चीज गिरे तो इस तरह से वापस पा सकते हैं


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चलती ट्रेन को अलार्म चेन खींचकर रोकना कानूनी अपराध है. इसके लिए ऐसा करने वाले पर जुर्माना लग सकता है और उसे जेल भी जाना पड़ सकता है. यात्रियों को अक्सर इससे जुड़े कानूनों की जानकारी नहीं होती. कई बार यात्री मोबाइल वगैरह गिर जाने पर भी ट्रेन की चेन खींचकर उसे रोक लेते हैं. लेकिन रेलवे कानून के तहत यह अपराध है. ऐसा करने वालों पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) पूरी नज़र रखती है और बिना कारण चेन खींचने वालों को पकड़कर उनपर कड़ी कार्रवाई की जाती है.ऐसे में हम आपको ट्रेन की अलार्म चेन खींचने नियम बता रहे हैं ताकि कहीं आपको इन नियमों की जानकारी न होने के चलते जेल की हवा न खानी पड़े. और अगर आपका मोबाइल या कोई कीमती वस्तु चलती ट्रेन से गिर जाए तो वह भी आपको मिल जाए. सबसे पहले जानें कि किन परिस्थितियों में आप खींच सकते हैं ट्रेन की चेन-


अलार्म चेन खींचने पर तुरंत नहीं रुकती है ट्रेन
जैसा की इस जंजीर का नाम ही अलार्म चेन होता है. तो इसे खींचने का मतलब ड्राइवर के लिए बस एक अलार्म बजाना होता है. इसे खींचने से ट्रेन धीमी होती है लेकिन पूरी तरह से रुकती नहीं क्योंकि इसे खींचने से केवल ट्रेन के 8 से 12 पहिए ही प्रभावित होते हैं. दरअसल एक बोगी में 8 पहिए होते हैं उनपर तो सीधा असर पड़ता है साथ ही पीछे वाली बोगी के आगे के चार पहिए भी कई बार अचानक से रुकते हैं.


150 सौ साल पुराना ब्रेकिंग आइडिया आज भी कर रहा है काम
ट्रेन की जंजीर यूं काम करती है कि यह ट्रेन के मुख्य ब्रेक पाइप से जुड़ी होती है. इस पाइप के बीच हवा का एक निश्चित दबाव बना रहता है. इसे बनाया था जॉर्ज वेस्टिंगहाउस ने. और ट्रेन का ब्रेक आज भी उन्हीं के मॉडल पर काम कर रहा है. इस साल इस तरह के ब्रेकिंग सिस्टम के 150 साल पूरे हो गए हैं.


लोकोपायलट चाहे तभी रुकती है ट्रेन
पहले ट्रेन में अलार्म चेन बोगियों की दीवारों पर हर तरफ दी जाती थी. लेकिन गलत तरह से इसका बहुत इस्तेमाल होने के चलते इनकी संख्या घटा दी गई. अब ये ट्रेन की हर बोगी के बीचो-बीच वाले कंपार्टमेंट में होती है.


जिस कोच की अलार्म चेन खींची जाती है. उसके ब्रेक वाले एअरपाइप में लगा वॉल्व निकल जाता है और एअर रिलीज होने लगती है. जिससे ट्रेन धीमी होने लगती है. ट्रेन के ब्रेक का एअर प्रेशर कम हो रहा है इसे लोकोपायलट (ट्रेन का ड्राइवर) अपने सामने लगे प्रेशर मीटर पर देख लेता है. ऐसी हालत में वह तीन बार हॉर्न बजाने के बाद ट्रेन रोकता है. ये तीन हॉर्न ट्रेन के गार्ड और सुरक्षाकर्मियों को ‘चेन पुलिंग हुई है’ बताने का संकेत होते हैं. जिसके बाद वे नीचे उतरते हैं और चेक करते हैं कि कहां चेन पुलिंग हुई है? ऐसे में अगर कोई ट्रेन ने उतरकर जा रहा होता है तो रेलवे सुरक्षाकर्मी उसे पकड़ भी लेते हैं.


ऐसे पता चलता है कहां से खींची गई है ट्रेन की जंजीर
कुछ ट्रेनों की बोगियों में इमरजेंसी फ्लैशर्स भी लगे होते हैं जिससे पता चल जाता है कि कहां से ट्रेन की जंजीर खींची गई है. अगर फ्लैशर्स नहीं लगे होते तो ट्रेन के गार्ड को जाकर देखना होता है कि ट्रेन के किस कोच में वॉल्व निकला हुआ है? जहां एअरपाइप का वाल्व निकला होता पता चल जाता है कि चेन पुलिंग वहीं से हुई है.


ट्रेन की चेन पुलिंग के लिए क्या हो सकती हैं सजा?
इंडियन रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 141 के तहत अगर कोई यात्री या कोई दूसरा व्यक्ति बिना किसी जरूरी वजह के जंजीर का प्रयोग करता है या रेलवे कर्मचारी के काम में हस्तक्षेप करता है तो रेलवे प्रशासन, यात्रियों और रेल के कर्मचारियों के काम में व्यवधान डालने के चलते दोषी को एक साल की सजा और 1 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं. किसी भी हालत में यह सजा इससे कम नहीं होनी चाहिए –


चेन पुलिंग से रेलवे को हर साल होता है करोड़ों का नुकसान
2015 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत ज्यादा चेन पुलिंग के कारण रेलवे को एक साल में 3,000 करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बाद एक प्रायोगिक कदम के तौर पर कुछ ट्रेन में जंजीरें हटा दी गई थीं और उनकी जगह पर ट्रेन के लोकोपायलट यानि ड्राइवर और असिस्टेंट लोको पायलट यानि असिस्टेंट ड्राइवर का नंबर दे दिया गया था. जिसपर किसी इमरजेंसी की हालत में कॉल करके ट्रेन रोकने के लिए कारण बताकर मदद मांगी जा सकती थी. इसे अभी बड़े स्तर पर लागू नहीं किया गया है.


बड़े एक्सीडेंट का कारण बन सकती है चेन पुलिंग
तेज रफ्तार ट्रेन की चेन खींचने पर एक्सीडेंट भी हो सकता है. भारत में किसी बड़े एक्सीडेंट की घटना तो नहीं हुई है लेकिन फ्रांस में 1988 में तेज रफ्तार ट्रेन की चेन खींचने के चलते डिब्बे आपस में भिड़ गए थे और ट्रेन पटरी से उतर गई थी. इस रेल एक्सीडेंट में 56 लोगों की मौत हो गई थी.


मोबाइल गिर जाए तो क्या करें?
अगर मोबाइल चलती ट्रेन से गिरा है और किसी सूनसान जगह गिरा है तो उसका मिल जाना 90 फीसदी तय है. आपको बस इतना करना है कि मोबाइल के गिरते ही नीचे मोबाइल की ओर देखने की बजाए सामने के इलेक्ट्रिक पोल पर पड़ा हुआ नंबर देखना है. अब आप RPF की हेल्पलाइन पर कॉल करें और उन्हें बताएं कि आपका मोबाइल किन स्टेशन के बीच और कितने नंबर इलेक्ट्रिक पोल के पास गिरा है? RPF आपका मोबाइल ढूंढ लेगी. आप वापस उस स्टेशन पर जाकर उसे अपनी पहचान बताकर अपना मोबाइल कलेक्ट कर सकते हैं.


जरूरी नहीं है चेन खींचना, इन तरीकों से भी मिल सकती है मदद
दक्षिणी रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन अधिकारी एस धनंजय ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए चेन खींचने के बजाए यात्री क्या कर सकते हैं के मसले पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि यात्रियों को छोटी-छोटी बातों में रेल की चेन नहीं खींचनी चाहिए. रेलवे के अधिकारी कहते हैं कि वे किसी छोटी-मोटी इमरजेंसी की हालत में ट्रेन कैप्टन, टीटीई, आरपीएफ के ट्रेन एस्कॉर्ट, कोच अटेंडेंट और किसी दूसरे रेलवे के स्टाफ को आप इसकी जानकारी दे सकते हैं.


रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानि (RPF) का ऑल इंडिया सिक्योरिटी हेल्पलाइन नंबर 182 है. इसे आप किसी भी वक्त डायल करके मदद मांग सकते हैं. इनसे मदद मांगने पर फील्ड RPF तुरंत हरकत में आती है और वाजिब मदद तुरंत पहुंचा दी जाती है.


ऐसे ही GRP की हेल्पलाइन का नंबर है 1512. इसे भी डायल करके सुरक्षा आदि की मांग की जा सकती है. रेल पैसेंजर हेल्पलाइन नंबर है 138. रेल यात्रा के दौरान किसी परेशानी की हालत में इस नंबर को डायल करके भी मदद की मांग की जा सकती है.


 


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RRB Group D Admit Card 2018: 4 अक्टूबर की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी


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RRB Group D Admit Card 2018: रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB) ने 4 अक्टूबर तक होने वाले एग्जाम के लिए RRB ग्रुप डी के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. जो उम्मीदवार इन एग्जाम में बैठने वाले हैं वह RRB की ऑफिशियल वेबसाइट से शेड्यूल चेक कर सकते हैं. जिस रीजन के लिए आपने अप्लाई किया है उसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आप अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि वह एग्जामिनेशन वाले दिन RRB ग्रुप डी एडमिट कार्ड साथ लेकर जाएं. इसके साथ उम्मीदवारों को अपना आईडी प्रूफ और पासपोर्ट साइज फोटो भी साथ लेकर जाएं.ये भी पढ़ें- रेलवे में नौकरी पाने का एक और मौका, 15 अक्टूबर से पहले करें आवेदन


कैसे कर सकते हैं RRB Group D Admit Card 2018 डाउनलोड
– सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं.– इसके बाद ‘RRB Group D Admit Card’ के लिंक पर जाएं
– यहां से आप सीधा एक नए पेज पर जाएंगे
– अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, पासवर्ड और सब्मिट पर क्लिक करें
– आपका एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा, इसे डाउनलोड करके एक प्रिंट आउट भी ले लें


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रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1.9 करोड़ उम्मीदवारों ने RRB ग्रुप डी रिक्रूटमेंट 2018 के लिए अप्लाई किया था. एडमिट कार्ड उन्हीं उम्मीदवारों के जारी किए गए हैं जिन्होंने एग्जाम के लिए ठीक से अल्पाई किया था. उम्मीदवारों को CBT और PET के लिए अलग कॉल लेटर दिया जाएगा.


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एयरसेल मैक्‍सिस डील : आरोपियों के डिपार्टमेंट से सैंक्शन नहीं आया तो चार्जशीट होगी रद्द


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एयरसेल मैक्सिस डील मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करते हुए सीबीआई और ईडी को जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने एयरसेल मैक्सिस डील में सीबीआई और ईडी के सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर आरोपी अधिकारियों के डिपार्टमेंट से सैंक्शन नहीं आने पर सात सप्ताह का समय दिया है. मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर निर्धारित की गई है.पटियाल हाउस कोर्ट के स्पेशल जज ओ पी सैनी ने सीबीआई के वकील से कहा है कि अगर सात सप्ताह में आरोपी अधिकारियों के डिपार्टमेंट से सैंक्शन नहीं आया तो सीबीआई और ईडी की सप्लीमेंट्री चार्जशीट को रद्द कर दिया जाएगा. दरअसल, सीबीआई और ईडी के द्वारा दायर सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर सोमवार को कोर्ट को संज्ञान लेना था, लेकिन सीबीआई ने कोर्ट से 6 सप्ताह का समय मांगते हुए दलील दी की अभी आरोपी अधिकारियों के डिपार्टमेंट से सैंक्शन नहीं आया है. लिहाजा कोर्ट उन्हें समय दे.


सीबीआई और ईडी की इस मांग पर कोर्ट ने उन्‍हें फटकार लगाई और सीबीआई से सवाल किया कि अगर सैंक्शन नहीं आया था तो आपने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर क्यों कर दी. दरअसल, एयरसेल मैक्सिस डील में सीबीआई और ईडी ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और बेटे कार्ति चिदम्बरम समेत 10 लोगों और 8 कंपनियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है. इनमें से कई बड़े सरकारी अधिकारी हैं, जिनके डिपार्टमेंट से अभी सैंक्शन नहीं आया है. सीबीआई और ईडी के मुताबिक पी चिदंबरम ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कंपनी को फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की इजाजत गलत तरीके से दी. सीबीआई ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट में पी चिदंबरम और कार्ति चिदम्बरम के खिलाफ 120 B, 7, 12 और 13 PC Act तहत सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है.


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सुप्रीम कोर्ट ने एयरसेल मैक्सिस मामले में जांच पूरी करने की समय सीमा तीन महीन बढ़ाई


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जींद विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ेगी आप: केजरीवाल


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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी जींद विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ेगी. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि आम आदमी पार्टी अकेले अपने बूते हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ेगी.केजरीवाल जाटलैंड के नाम से मशहूर हिरयाणा में अग्रवाल समाज द्वारा आयोजित परिचय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने के लिए आए थे. यह कार्यक्रम पूरी तरह से सामाजिक था और इसमें हरियाणा के अलावा पड़ोसी राज्यों के हजारों लोग जुटे हुए थे.


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मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न नेताओं ने जींद के लोगों का राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पंचायती विकास मंत्री होने के बावजूद सिंह ने कभी भी पंचायतों को मजबूत करने की बात नहीं की है.यह भी पढ़ें: सुप्रीम आदेश के बाद केजरीवाल ने अफसरों से कहा, सरकार की परियोजनाओं में लाएं तेजी


उन्होंने कहा कि आप हरियाणा में न केवल पंचायतों को मजबूत करने की पक्षधर है, बल्कि सत्ता में आने के बाद गावों के विकास का खाका पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा ही तैयार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि आप की सरकार में पंचायतों को अधिक अधिकार देकर उन्हें मजबूत बनाया जाएगा.


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दोस्त ने मां को कहे अपशब्द तो काट डाला सिर, फिर थाने जाकर किया सरेंडर


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कर्नाटक के मंड्या जिले में 24 वर्षीय एक शख्स ने झगड़े में अपने दोस्त का सिर कलम कर दिया और फिर कटा हुआ सिर लेकर सरेंडर करने थाने पहुंच गया.पुलिस ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया, ‘पशुपति ने बताया कि 28 वर्षीय गिरीश ने शनिवार को उसकी मां को लेकर आपत्तिजनक बातें कहीं, जिसे लेकर उनके बीच झगड़ा हो गया. इसी दौरान उसने गिरीश का सिर कलम कर दिया.’


मंड्या के पुलिस अधीक्षक शिव प्रकाश देवराजू ने बताया कि आरोपी ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल किया है. उसने बताया कि झगड़े के दौरान उसने अपने दोस्त की हत्या कर दी. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि इस मामले में केस दर्ज कर आगे की जांच जारी है.


कर्नाटक में पिछले एक महीने के दौरान गला रेतकर हत्या की यह तीसरी घटना है. इससे पहले गुरुवार को श्रीनिवासपुरा में एक शख्स एक महिला का कटा हुआ सिर लेकर थाने पहुंचा था. वहीं चिंकमंगूलर में 11 सितंबर को हुई ऐसी ही एक घटना में एक शख्स अपनी पत्नी का कटा सिर लेकर पुलिस थाने में सरेंडर करने आया था. उस शख्स को शक था कि उसकी पत्नी का किसी के साथ अवैध संबंध है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उस शख्स ने अपनी पत्नी को दूसरे शख्स के साथ पकड़ लिया था. इस दौरान उसने दोनों पर हमला किया, हालांकि वह शख्स वहां से फरार हो गया. इस हमले में उसे शख्स को भी चोटें आई थीं.


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