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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में शनिवार को अपने भाषण में आतंकवाद पर पाकिस्तान को जमकर घेरा. साथ ही सुधार की जरूरत को लेकर संयुक्त राष्ट्र को चेताया. सुषमा ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि पाकिस्तान न केवल आतंक को पालता ह, बल्कि उसे नकारने में भी माहिर है. उन्होंने बातचीत रोकने के पाकिस्तान के आरोप को पूरी तरह से झूठ बताते हुए विश्व के नेताओं से सवाल किया कि ‘हत्यारों को महिमामंडित’ करने वाले देश के साथ ‘आतंकी रक्तपात’ के बीच कैसे बातचीत की जा सकती है.वहीं चेतावनी दी कि मूलभूत सुधारों के अभाव में संयुक्त राष्ट्र के अप्रासंगिक हो जाने का खतरा है और कहा कि अगर यह विश्व निकाय अप्रभावी रहा तो बहुपक्षवाद खत्म हो जाएगा. यहां पढ़िए उनके भाषण की बड़ी बातें…
सुषमा स्वराज ने कहा कि हमारे मामले में आतंक कहीं दूर से नहीं बल्कि सीमापार से है. हमारा पड़ोसी आतंक फैलाने के साथ ही उसे छुपा भी लेता है. आतंक पर पाकिस्तान के चेहरे पर न झेंप और न माथे पर शिकन.
आतंकवादियों से ज्यादा मानव अधिकारों का उल्लंघन करने वाला कौन हो सकता है? पाकिस्तान हत्यारों का महिमामंडन करता है और उसे निर्दोषों का खून नहीं दिखता.– पाकिस्तान की यह आदत हो गई है कि वह अपने दोषों को ढंकने के लिए भारत के खिलाफ छल का आरोप लगाता है.
पिछले साल पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने राइट टू रिप्लाई का उपयोग करते हुए भारत के मानवाधिकार उल्लंघन पर कुछ तस्वीरें दिखाई थी. वे तस्वीरें किसी और देश की थी. इसी तरह के झूठे आरोप वह कई बार लगा चुका है.
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने दो जनवरी को पठानकोट में हमारे वायु सेना अड्डे पर हमला किया. कृपया मुझे बताएं कि आतंकवादी रक्तपात के बीच हम कैसे वार्ता कर सकते हैं.
जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद से विश्व को सबसे बड़ी चुनौती
जहां तक भारत की बात है तो आतंकवाद कहीं दूर देश में नहीं, बल्कि सीमा पार से पनपा है
हमें आतंकवाद की एक परिभाषा पर अब अवश्य सहमत होना होगा या बाद में इस आग से जूझना होगा.
संयुक्त राष्ट्र को यह अवश्य स्वीकार करना चाहिए कि उसे मौलिक सुधार की जरूरत है. सुधार सिर्फ दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए. हमें संस्थान के दिलो-दिमाग में बदलाव करने की जरूरत है जिससे यह समसामयिक वास्तविकता के अनुकूल हो जाए. सुधार आज से ही शुरू होने चाहिए क्योंकि कल बहुत देर हो सकती है.
भारत वसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास रखता है और इसका सबसे अच्छा तरीका साझा बातचीत है….संयुक्त राष्ट्र को परिवार के सिद्धांतों के आधार पर काम करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र ‘मैं’ से नहीं चल सकता और यह सिर्फ ‘हम’ से चल सकता है.
भारत इस बात में विश्वास नहीं रखता कि संयुक्त राष्ट्र कई लोगों की कीमत पर महज कुछ लोगों की सुविधा का साधन बने.
Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/delhi-dtc-strike-arvind-kejriwal-temporary-employees-demand-1278880.html
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