READ MORE
̔हमारे लड़के कोई चोर-बदमाश नहीं थे. वो कढ़ाई का काम करते थे. इससे पहले कभी भी कोई पुलिस केस नहीं हुआ और न ही जेल गए. 16 सितंबर को पुलिस पूछताछ के बहाने उन्हें घर से बुलाकर ले गई थी. उसके तीन दिन बाद पुलिस ने कहा कि वो उनकी हिरासत से भाग गए हैं. 20 सितंबर को उनका एनकाउंटर कर दिया गया.̓ ये कहना है अलीगढ़ एनकाउंटर में मारे गए नौशाद और मुस्तकीम की मां का. शनिवार को यूनाइटेड अगेंस्ट हेट की ओर से प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने अलीगढ़ पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगाए.नौशाद की मां शाहीन ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए सवाल किया, ‘अगर पुलिस सही है तो हमें घर में कैद करके क्यों रखा गया है. क्यों हमे किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है? क्यों हमारे घर खाना लेकर आने वाले पड़ोसियों को रोका जा रहा है? हमारे घर के बाहर पुलिस क्यों और किस मंशा से बैठाई गई है?’
ये भी पढ़ें- अलीगढ़ एनकाउंटर: पुलिस का कारनामा, एक मर्डर केस के दो खुलासे
मुस्तकीम की मां ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘पुलिस 2007 के एक मामले में नौशाद और मुस्तकीम को अपराधी बता रही है. पुलिस कह रही है कि उन्हें इस मामले में डासना जेल में रखा गया था, जबकि मौत के वक्त नौशाद की उम्र 16 साल और मुस्तकीम की उम्र 22 साल थी. अब पुलिस बताए कि 10 और 12 साल के लड़कों ने लूट और गोली चलाने का अपराध कैसे किया होगा? इस उम्र के लड़के बाल सुधार गृह जाएंगे या जेल?वह सवाल करती हैं, ‘पुलिस क्यों एनकाउंटर से एक दिन पहले हमारे घर से दोनों लड़कों के आधार और वोटर कार्ड सहित दूसरे कागजात ले गई थी.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उन दोनों को मारने के बाद रीति रिवाज भी पूरे नहीं किए गए और उन्हें ऐसे ही मिट्टी में दबा दिया गया
ये भी पढ़ें- अलीगढ़ एनकाउंटर: पुलिस की कौन सी कहानी सच्ची
वहीं यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के प्रशांत टंडन ने कहा कि जब फैक्ट फाइंडिंग टीम अलीगढ़ में संबंधित थाने पहुंची तो वहां पुलिस ने हिन्दूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं को बुला लिया. एनकाउंटर से संबंधित कोई जानकारी नहीं दी. उन्होंने कहा, ‘पीड़ित परिवार की आवाज उठाने के लिए हम उन्हें दिल्ली ले आए, जिसके बाद पुलिस ने परिवार की एक महिला पर दबाव डालकर टीम के दो सदस्यों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर लिया.̓
ये भी देखें- तो क्या लाइव एनकाउंटर में फोटो खिंचाने गई थी अलीगढ़ पुलिस?
उधर एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन और मशकूर अहमद उस्मानी ने बताया कि वह इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं. इस मामले की जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराए जाने की मांग भी करेंगे. इस मौके पर यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सामाजिक कार्यकर्ता नदीम खान, जेएनयू के उमर खालिद और किरन आदि मौजूद थे.
Article source: http://timesofindia.feedsportal.com/c/33039/f/533928/s/37063a9d/sc/17/l/0Ltimesofindia0Bindiatimes0N0Centertainment0Ctv0Cnews0CAlok0ENath0Eturns0Erapper0Ethis0EValentines0EDay0Carticleshow0C30A279980A0Bcms/story01.htm
No comments:
Post a Comment