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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को शिक्षा के पुनर्जीवन पर अकादमिक नेतृत्व सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा कि समय की मांग है कि शिक्षा में इनोवेशन होना चाहिए. सरकार आज शिक्षा को लक्ष्य देने और उसे समाज के विकास से जोड़ने का लगातार प्रयास कर रही है. आज देश में 900 विश्वविद्यालय और 40,000 कॉलेज हैं.उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी समस्याओं से निपटने के लिए इन संस्थाओं की मदद लें तो संतुलित समाधान मिलेगा. ‘शिक्षा के पुनर्जीवन की बात होती है, तो उसमें बिना इनोवेशन के कुछ नहीं हो सकता है. बाबा साहब ने कहा था कि शिक्षा से अधिक महत्व चरित्र का होता है. साथ ही संतुलित विकास के लिए हमेशा नए इनोवेशन की जरूरत होती है.’
पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें एक और वास्तविकता को स्वीकार करना होगा कि आज दुनिया में कोई भी देश, समाज या व्यक्ति अलग होकर नहीं रह सकता. हमें ‘ग्लोबल सिटीजन और ग्लोबल विलेज’ के दर्शन पर सोचना ही होगा और ये दर्शन तो हमारे संस्कारों में प्राचीन काल से ही मौजूद हैं.
ये भी पढ़ें: शिक्षा विभाग में बदलाव की कवायद, पंचायत और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पद होंगे समाप्तविज्ञान भवन में आयोजित इस सम्मेलन में कई विश्वविद्यालयों के कुलपति और निदेशकों ने हिस्सा लिया. इसका आयोजन यूजीसी, एआईसीटीई, आईसीएसएसआर, आईजीएनसीए, जेएनयू और एसजीटी विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से कर रहे हैं. इस सम्मेलन के विषयों में भारतीय शिक्षा प्रणाली के समक्ष चुनौतियां और शिक्षा के क्षेत्र में हासिल किए जाने योग्य परिणाम और शिक्षा का नियमन शामिल है. इस सम्मेलन को आठ सत्रों में बांटा गया है.
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सम्मेलन में भारत की जरूरतों के अनुरूप शोध की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, अकादमिक संसाधनों को साझा करते हुए शैक्षणिक संस्थाओं में समन्वय बनाना, समावेशी और समन्वित परिसर बनाना, सहभागिता आधारित प्रशासनिक मॉडल, ठोस वित्तीय मॉडल का निर्माण और सार्वभौम मूल्यों पर आधारित नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने के विषय पर चर्चा होगी. सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर करेंगे.
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