Sunday, 30 September 2018

चलती ट्रेन से मोबाइल फोन या कोई कीमती चीज गिरे तो इस तरह से वापस पा सकते हैं


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चलती ट्रेन को अलार्म चेन खींचकर रोकना कानूनी अपराध है. इसके लिए ऐसा करने वाले पर जुर्माना लग सकता है और उसे जेल भी जाना पड़ सकता है. यात्रियों को अक्सर इससे जुड़े कानूनों की जानकारी नहीं होती. कई बार यात्री मोबाइल वगैरह गिर जाने पर भी ट्रेन की चेन खींचकर उसे रोक लेते हैं. लेकिन रेलवे कानून के तहत यह अपराध है. ऐसा करने वालों पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) पूरी नज़र रखती है और बिना कारण चेन खींचने वालों को पकड़कर उनपर कड़ी कार्रवाई की जाती है.ऐसे में हम आपको ट्रेन की अलार्म चेन खींचने नियम बता रहे हैं ताकि कहीं आपको इन नियमों की जानकारी न होने के चलते जेल की हवा न खानी पड़े. और अगर आपका मोबाइल या कोई कीमती वस्तु चलती ट्रेन से गिर जाए तो वह भी आपको मिल जाए. सबसे पहले जानें कि किन परिस्थितियों में आप खींच सकते हैं ट्रेन की चेन-


अलार्म चेन खींचने पर तुरंत नहीं रुकती है ट्रेन
जैसा की इस जंजीर का नाम ही अलार्म चेन होता है. तो इसे खींचने का मतलब ड्राइवर के लिए बस एक अलार्म बजाना होता है. इसे खींचने से ट्रेन धीमी होती है लेकिन पूरी तरह से रुकती नहीं क्योंकि इसे खींचने से केवल ट्रेन के 8 से 12 पहिए ही प्रभावित होते हैं. दरअसल एक बोगी में 8 पहिए होते हैं उनपर तो सीधा असर पड़ता है साथ ही पीछे वाली बोगी के आगे के चार पहिए भी कई बार अचानक से रुकते हैं.


150 सौ साल पुराना ब्रेकिंग आइडिया आज भी कर रहा है काम
ट्रेन की जंजीर यूं काम करती है कि यह ट्रेन के मुख्य ब्रेक पाइप से जुड़ी होती है. इस पाइप के बीच हवा का एक निश्चित दबाव बना रहता है. इसे बनाया था जॉर्ज वेस्टिंगहाउस ने. और ट्रेन का ब्रेक आज भी उन्हीं के मॉडल पर काम कर रहा है. इस साल इस तरह के ब्रेकिंग सिस्टम के 150 साल पूरे हो गए हैं.


लोकोपायलट चाहे तभी रुकती है ट्रेन
पहले ट्रेन में अलार्म चेन बोगियों की दीवारों पर हर तरफ दी जाती थी. लेकिन गलत तरह से इसका बहुत इस्तेमाल होने के चलते इनकी संख्या घटा दी गई. अब ये ट्रेन की हर बोगी के बीचो-बीच वाले कंपार्टमेंट में होती है.


जिस कोच की अलार्म चेन खींची जाती है. उसके ब्रेक वाले एअरपाइप में लगा वॉल्व निकल जाता है और एअर रिलीज होने लगती है. जिससे ट्रेन धीमी होने लगती है. ट्रेन के ब्रेक का एअर प्रेशर कम हो रहा है इसे लोकोपायलट (ट्रेन का ड्राइवर) अपने सामने लगे प्रेशर मीटर पर देख लेता है. ऐसी हालत में वह तीन बार हॉर्न बजाने के बाद ट्रेन रोकता है. ये तीन हॉर्न ट्रेन के गार्ड और सुरक्षाकर्मियों को ‘चेन पुलिंग हुई है’ बताने का संकेत होते हैं. जिसके बाद वे नीचे उतरते हैं और चेक करते हैं कि कहां चेन पुलिंग हुई है? ऐसे में अगर कोई ट्रेन ने उतरकर जा रहा होता है तो रेलवे सुरक्षाकर्मी उसे पकड़ भी लेते हैं.


ऐसे पता चलता है कहां से खींची गई है ट्रेन की जंजीर
कुछ ट्रेनों की बोगियों में इमरजेंसी फ्लैशर्स भी लगे होते हैं जिससे पता चल जाता है कि कहां से ट्रेन की जंजीर खींची गई है. अगर फ्लैशर्स नहीं लगे होते तो ट्रेन के गार्ड को जाकर देखना होता है कि ट्रेन के किस कोच में वॉल्व निकला हुआ है? जहां एअरपाइप का वाल्व निकला होता पता चल जाता है कि चेन पुलिंग वहीं से हुई है.


ट्रेन की चेन पुलिंग के लिए क्या हो सकती हैं सजा?
इंडियन रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 141 के तहत अगर कोई यात्री या कोई दूसरा व्यक्ति बिना किसी जरूरी वजह के जंजीर का प्रयोग करता है या रेलवे कर्मचारी के काम में हस्तक्षेप करता है तो रेलवे प्रशासन, यात्रियों और रेल के कर्मचारियों के काम में व्यवधान डालने के चलते दोषी को एक साल की सजा और 1 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं. किसी भी हालत में यह सजा इससे कम नहीं होनी चाहिए –


चेन पुलिंग से रेलवे को हर साल होता है करोड़ों का नुकसान
2015 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत ज्यादा चेन पुलिंग के कारण रेलवे को एक साल में 3,000 करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बाद एक प्रायोगिक कदम के तौर पर कुछ ट्रेन में जंजीरें हटा दी गई थीं और उनकी जगह पर ट्रेन के लोकोपायलट यानि ड्राइवर और असिस्टेंट लोको पायलट यानि असिस्टेंट ड्राइवर का नंबर दे दिया गया था. जिसपर किसी इमरजेंसी की हालत में कॉल करके ट्रेन रोकने के लिए कारण बताकर मदद मांगी जा सकती थी. इसे अभी बड़े स्तर पर लागू नहीं किया गया है.


बड़े एक्सीडेंट का कारण बन सकती है चेन पुलिंग
तेज रफ्तार ट्रेन की चेन खींचने पर एक्सीडेंट भी हो सकता है. भारत में किसी बड़े एक्सीडेंट की घटना तो नहीं हुई है लेकिन फ्रांस में 1988 में तेज रफ्तार ट्रेन की चेन खींचने के चलते डिब्बे आपस में भिड़ गए थे और ट्रेन पटरी से उतर गई थी. इस रेल एक्सीडेंट में 56 लोगों की मौत हो गई थी.


मोबाइल गिर जाए तो क्या करें?
अगर मोबाइल चलती ट्रेन से गिरा है और किसी सूनसान जगह गिरा है तो उसका मिल जाना 90 फीसदी तय है. आपको बस इतना करना है कि मोबाइल के गिरते ही नीचे मोबाइल की ओर देखने की बजाए सामने के इलेक्ट्रिक पोल पर पड़ा हुआ नंबर देखना है. अब आप RPF की हेल्पलाइन पर कॉल करें और उन्हें बताएं कि आपका मोबाइल किन स्टेशन के बीच और कितने नंबर इलेक्ट्रिक पोल के पास गिरा है? RPF आपका मोबाइल ढूंढ लेगी. आप वापस उस स्टेशन पर जाकर उसे अपनी पहचान बताकर अपना मोबाइल कलेक्ट कर सकते हैं.


जरूरी नहीं है चेन खींचना, इन तरीकों से भी मिल सकती है मदद
दक्षिणी रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन अधिकारी एस धनंजय ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए चेन खींचने के बजाए यात्री क्या कर सकते हैं के मसले पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि यात्रियों को छोटी-छोटी बातों में रेल की चेन नहीं खींचनी चाहिए. रेलवे के अधिकारी कहते हैं कि वे किसी छोटी-मोटी इमरजेंसी की हालत में ट्रेन कैप्टन, टीटीई, आरपीएफ के ट्रेन एस्कॉर्ट, कोच अटेंडेंट और किसी दूसरे रेलवे के स्टाफ को आप इसकी जानकारी दे सकते हैं.


रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानि (RPF) का ऑल इंडिया सिक्योरिटी हेल्पलाइन नंबर 182 है. इसे आप किसी भी वक्त डायल करके मदद मांग सकते हैं. इनसे मदद मांगने पर फील्ड RPF तुरंत हरकत में आती है और वाजिब मदद तुरंत पहुंचा दी जाती है.


ऐसे ही GRP की हेल्पलाइन का नंबर है 1512. इसे भी डायल करके सुरक्षा आदि की मांग की जा सकती है. रेल पैसेंजर हेल्पलाइन नंबर है 138. रेल यात्रा के दौरान किसी परेशानी की हालत में इस नंबर को डायल करके भी मदद की मांग की जा सकती है.


 


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