Friday, 28 September 2018

इन इंजीनियरों की मशीनों से लग सकती है सफाईकर्मियों की मौत पर लगाम


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देश में सीवर में उतरकर सफाई करने के चलते सफाईकर्मियों की लगातार हो रही मौतों के बीच दो इंजीनियरों ने इस समस्‍या का हल निकालने का प्रयास किया है. हिंदुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड(एचएएल) के दो रिटायर्ड इंजीनियरों का कहना है कि उन्हें सफाई के दौरान होने वाले खतरों को कम करने का तरीका मिल गया है.डॉ. के बालकृष्णन और जर्मिया ओन्गोलू ने ऐसे उपकरण को तैयार किया है जिसकी मदद से सीवर की सफाई करने वाले कर्मियों को उसके अंदर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दोनों इंजीनियरों ने चार उपकरण बनाए हैं सीवर की सफाई के खतरों को कम करने के साथ ही अंदर के ब्लॉकेज को भी आसानी से खत्म कर सकते हैं.


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इन उपकरणों में एक सीवर क्रोक और एक रोबोटिक कैमरा भी शामिल है जो पानी के फव्‍वारे की तरह का उपकरण है. इसके जरिए अलग-अलग नाप के पाइप में फंसे कचरे को हटाया जा सकता है. इसी तरह से ओवरफ्लो डिटेक्शन और लिड ओपनिंग इंडिकेटर नाम का उपकरण सेंसर बेस्ड सिस्टम है. इसमें लगे सेंसर की मदद से मेनहोल के अंदर ओवरफ्लो पर नज़र रखना आसान हो जाता है. किसी भी तरह के ओवरफ्लो के दौरान इसमें लगा सेंसर अलर्ट कर देता है.लिड आधारित गैस डिटेक्टर को मेनहोल के ढक्कन से जोड़ा जा सकता है. इससे मेनहोल के अंदर जहरीली गैसों की मौजूदगी का पता किया जा सकता है. यह यंत्र जहरीली गैसों को फिल्टर कर देता है और उन्‍हें लीक भी नहीं होने देता है. इसकी मदद से सीवर लाइन के 30 मीटर अंदर तक जहरीली गैसों का पता किया जा सकता है.


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70 वर्षीय बालकष्णन ने 38 सालों तक एचएएल में काम किया है. बालकृष्णन साल 2008 में ‘हेलीकॉप्टर डिजाइन’ के महाप्रबंधक के पद से रिटायर हुए थे. रिटायर होने के बाद बालकृष्णन ने ‘सफाई कर्मचारी’ आंदोलन के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन के एक इवेंट में भाग लिया. वह कई सालों से हाथों से सफाई कार्य के खिलाफ कार्य कर रहे हैं. बालकृष्णन ने बताया, ‘वह इस समस्या को हल करने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रहे थे ताकि सफाई के दौरान होने वाली मौतों को रोका जा सके. हमें इससे प्रेरणा मिली. हमें अहसास हुआ कि हें समाज के लिए कुछ करना चाहिए.’


इस प्रोजेक्ट से जुड़े दूसरे इंजीनियर 60 वर्षीय ओंगलू एचएएल में सिस्टम स्पेशलिस्ट थे. वह साल 2017 में बालकृष्णन के साथ जुड़े जब वह उपकरण डिजाइन कर रहे थे. ओंगलू साल 2018 में एचएएल से रिटायर हुए और आधिकारिक रूप से बालकृष्णन की कंपनी में शामिल हो गए.


बालकृष्णन और ओंगलू अब साल 2013 में बेंगलुरु में शुरू हुई ‘अजंता टेक्नोलॉजीज’ नाम की कंपनी में सीईओ और सीटीओ के तौर पर काम करते हैं. इस कंपनी को बालकृष्‍णन ने ही शुरू किया था. दोनों ने एक-दूसरे के साथ दशकों तक काम किया था और एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं. इसलिए दोनों ने महसूस किया कि डिजाइनिंग और इंजीनियरिंग में उनका अनुभव सीवर से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मददगार साबित होगा.


इस बारे में बालकृष्णन ने कहा कि वह और ओंगलू दोनों ही एक जैसा सोचते हैं और उनके बीच आइडियाज को लेकर पर्याप्त सामंजस्य है. बालकृष्णन ने बताया कि उन्होंने साल 2017 में विल्सन से संपर्क किया ताकि वह देख सकें कि वह कैसे मदद कर सकते हैं.


बकौल बालकृष्‍णन, ‘विल्सन ने अगस्त 2017 में दोनों को हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई और सीवरेज बोर्ड के अधिकारियों से मिलाया. हमें यह जानने की जरूरत थी कि इस समस्या से वे कैसे निपटते हैं, इस समस्या से निपटने में उन्हें क्या-क्या परेशानियां हैं और उनकी जरूरतें क्या हैं. इस मीटिंग में कर्मचारियों ने उन्हें सब कुछ दिखाया और बताया कि उन्हें किस तरह के उपकरणों की जरूरत है.’


एक साल के अंदर ही बालकृष्णन और ओंगलू ने ऐसे चार उपकरणों को डिजाइन करके तैयार कर लिया जिनकी मदद से न सिर्फ सीवर के अंदर मौजूद जहरीली गैसों का पता किया जा सकता है बल्कि सीवर के अंदर उपस्थित ओवरफ्लो से जुड़ी समस्याओं का पहले से ही पता किया जा सकता है. दोनों ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर में हाथ से सफाई के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन में भाग भी लिया. विल्सन ने कहा बालकृष्णन और ओंगलू ने जिस तरह के उपकरण बनाए हैं उनसे सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भविष्य में सीवर की सफाई के दौरान किसी अनुसूचित जाति के कर्मचारी की मौत न हो.


ओंगलू ने बताया, ‘गैस डिटेक्टर से मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी सीवर के अंदर मौजूद जहरीली गैसों के बारे में पता करके आसानी से फिल्टर किया जा सकता है. सीवर क्रोक की मदद से सीवर पाइप के अंदर के मलबे को आसानी से कम कर दिया जाएगा. वॉटर जेट का तेजी से घूमता टर्बाइन इसे अंदर ले जाएगा और इसके पंखों से कचरा और बाकी सामान हटता जाएगा. बालकृष्णन ने कहा कि डिवाइस को 200, 250, 300 और 400 मिलीमीटर के व्यास वाले पाइप के लिए डिजाइन किया गया है.


बालकृष्णन ने एम्फिबियन की खासियत के बारे में बताया कि यह किसी पनडुब्बी जैसी डिवाइस है, जो एक मेनहोल से दूसरे मेनहोल तक सीवर पाइप के अंदर ही घूमकर जहरीली गैसों करे बारे में पता लगा सकती है. उपकरण को कुछ इस तरह से डिजायन किया गया है कि इसमें मौजूद कई फिल्टर्स मलबे को रोकते हुए सिर्फ गैसों को ही गुजरने देते हैं.


बालकृष्ण ने बताया कि ‘अजंता टेक्नोलॉजीज’, ‘सैनीटर’ नाम की एक मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के साथ काम करती है. ‘अजंता टेक्नोलॉजीज’ का काम डिवाइस की डिजायनिंग और विकास करना है. जबकि ‘सैनीटर’ का काम इन उपकरणों का प्रोडक्शन करना है. ‘सैनीटर’ कंपनी के 65 प्रतिशत शेयर अनुसूचित जाति के लोगों के पास हैं. ‘अजंता टेक्नोलॉजीज’ के साथ ‘सैनीटर’ ने टेक्नॉलजी के हस्तांतरण के लिये समझौता किया है ताकि कंपनी उपकरणों का प्रोडक्शन कर सके.


 


 


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