Thursday, 28 September 2017

‘अन्‍याय, भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जो लड़ता हुआ नजर आए, वह तुम्‍हारा भगत सिंह होगा...’


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‘मेरा शव लेने आप नहीं आना और कुलबीर सिंह (छोटे भाई) को भेज देना. क्‍योंकि यदि आप आएंगी तो रो पड़ेंगी. मैं नहीं चाहता कि लोग यह बोलें कि भगत सिंह की मां रो रही है…’लाहौर सेंट्रल जेल में यह बात भगत सिंह ने मिलने पहुंची अपनी मां विद्यावती देवी से कही थी. इस बात की जानकारी शहीद-ए-आजम के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू ने दी. उन्‍होंने बताया कि ऐसा उनके पिता बाबर सिंह (भगत सिंह के छोटे भाई कुलबीर सिंह के बेटे) बताया करते थे.


जब विद्यावती देवी ने सवाल किया कि बेटा इतनी छोटी उम्र में तू मुझे छोड़कर चला जाएगा? तब उन्‍होंने कहा ‘मैं देश के लिए एक ऐसा दीया जलाकर जा रहा हूं जिसमें न तो तेल है और न ही घी. उसमें मेरा रक्‍त और विचार मिले हुए हैं. अंग्रेज मुझे मार सकते हैं पर मेरी सोच और विचारों को नहीं. जब भी अन्‍याय और भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जो भी शख्‍स तुम्‍हे लड़ता हुआ नजर आए, वह तुम्‍हारा भगत सिंह होगा...


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ग्रंथियों ने अरदास करते हुए कहा कि गुरु साहब, मां चाहती है कि उसके बच्‍चे को सजा न हो और बेटा देश पर न्‍योछावर होना चाहता है. मैंने दोनों पक्ष आपके सामने रख दिए हैं जो ठीक लगे वह मान लीजिए.


Shaheed-E-Azam bhagat singh, bhagat singh is not martyr in Indian government official record, भारत सरकार के रिकॉर्ड में शहीद नहीं हैं भगत सिंह    लोगों को प्रेरणा देते हैं भगत सिंह के विचार 


अरदास के बाद विद्यावती जब भगत सिंह से मिलने जेल पहुंची तो उन्‍होंने पूछा कि मां ग्रंथी जी ने क्‍या कहा? इस पर मां ने सारी बात बताई. जवाब में भगत सिंह ने कहा कि हमारे गुरु साहब भी यही चाहते हैं कि देश पर न्‍योछावर हो जाऊं. देश के लिए मिटना आपकी ममता से कहीं बड़ा काम है मां.


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/manoranjan/baar-baar-dekho-506724.html

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