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नासिकः समय पूर्व जन्मे एक बच्चे की यहां के सिविल अस्पताल में वेंटीलेटर सुविधा के अभाव में मौत हो गई. सिविल सर्जन सुरेश जगदले ने बुधवार को बताया कि जिले के आदिवासी बहुल गांव धनशेत की निवासी 23 वर्षीय एक महिला ने 32 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद हारसुल स्थित एक ग्रामीण अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया. उन्होंने बताया कि जच्चा-बच्चा को कल तड़के नासिक सिविल अस्पताल लाया गया और बच्चे को विशेष नवजात देखरेख यूनिट में रखा गया.
जगदले ने कहा कि क्योंकि बच्चे को वेंटीलेटर पर रखे जाने की आवश्यकता थी, इसलिए उसे नासिक के पास अडगांव स्थित एक अन्य अस्पताल भेज दिया गया. लेकिन वहां भी वेंटीलेटर उपलब्ध नहीं था. इसलिए मां और समय पूर्व जन्मा बच्चा वापस सिविल अस्पताल लाए गए. बच्चे के परिवार की मांग पर सिविल अस्पताल ने नवजात के उपचार के लिए एक निजी अस्पताल से संपर्क किया.
जगदले ने कहा कि हालांकि निजी अस्पताल ले जाते समय रास्ते में बच्चे की मौत हो गई. डॉ. जगदले के अनुसार क्योंकि नासिक सिविल अस्पताल ग्रेड-2 का अस्पताल है, इसलिए वहां वेंटीलेटर रखने की अनुमति नहीं है.
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पिछले महीने नासिक सिविल अस्पताल की विशेष नवजात देखभाल इकाई में 55 बच्चों की मौत हो गई थी, लेकिन अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया था कि ये मौत चिकित्सा लापरवाही की वजह से हुई थीं. जगदले ने पूर्व में कहा था कि अप्रैल से लेकर 187 बच्चों की मौत हुई है. इनमें विशेष नवजात देखरेख इकाई में पिछले महीने हुईं 55 मौतें भी शामिल हैं. उन्होंने कहा था कि इनमें से अधिकतर बच्चों की मौत इसलिए हुई क्योंकि उन्हें निजी अस्पतालों से ऐसी स्थिति में लाया गया था जब बचने के अवसर कम होते हैं. समय पूर्व जन्म और फेफड़ों की कमजोरी जैसे कारणों की वजह से भी बच्चों की मौत हुई.
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/politics/cm-akhilesh-meets-akhlaq-family-dadri-murder-case-414294.html
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