READ MORE
नई दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने कथित मेडिकल कॉलेज भ्रष्टाचार मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश इशरत मसरूर कुद्दुसी को आज जमानत दे दी और कहा कि उनकी ‘‘समाज में बहुत प्रतिष्ठा है ’’ और वह सबूतों से छेड़छाड़ नहीं कर सकते. हालांकि अदालत ने 67 साल के पूर्व न्यायिक अधिकारी से दो दिन के अंदर सीबीआई को अपना पासपोर्ट जमा करने और पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाने को कहा. विशेष न्यायाधीश मनोज जैन ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही रकम की जमानत राशि पर कुद्दुसी को जमानत दे दी. अदालत ने कहा कि उन्होंने सीबीआई जांच में सहयोग किया और उन्हें अब और जेल में रखने की जरूरत नहीं है.
कुद्दुसी फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं, जहां से उन्हें रिहा किया जाएगा. एक अन्य आरोपी भावना पांडेय को एक सप्ताह के लिये अंतरिम जमानत दी गई. हालांकि, अदालत ने लखनऊ स्थित प्रसाद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस के चेयरमैन बी पी यादव और उनके पुत्र पलाश यादव की जमानत याचिका को लंबित रखा. इसपर अगले महीने फैसला किया जाएगा.
यह भी पढ़ेंः भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट के पूर्व जज और चार अन्य गिरफ्तार
अदालत ने 25 सितंबर को न्यायमूर्ति कुद्दुसी से पूछताछ की सीबीआई की अर्जी खारिज कर दी थी. सीबीआई ने कुद्दुसी और यादव की हिरासत मांगी थी. उसने आरोप लगाया था कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और उनसे 46 मेडिकल कॉलेजों से संबंधित इसी तरह के मामलों के बारे में पूछताछ की जानी है. सरकार ने घटिया सुविधाओं की वजह से इन कॉलेजों के छात्रों का दाखिला लेने पर रोक लगाई थी.
प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज इसी तरह के 46 कॉलेजों में से एक है. सीबीआई के अनुसार, ये गिरफ्तारियां 20 सितंबर को की गई थीं जब कुद्दुसी के दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में आवास समेत आठ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया था. यह तलाशी अभियान कुद्दुसी के भुवनेश्वर और लखनऊ स्थित आवास में भी चलाया गया था.
Article source: http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/lucknow/akhilesh-yadav-says-central-government-will-copy-samajwadi-governments-work-in-union-budget-937825.html
No comments:
Post a Comment