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भारतीय सेना ने भारत-म्यांमार बॉर्डर पर नगा उग्रवादी समूह एनएससीएन-के के कई कैम्पों पर बड़ी कार्रवाई की है. बुधवार सुबह नगा समूह के उग्रवादियों ने म्यांमार बॉर्डर पर भारतीय सेना पर हमला कर दिया. सेना की जवाबी कार्रवाई में उग्रवादियों के कई कैम्प तबाह हो गए.एनएससीएन का यह गुट 1980 के दशक से सुरक्षा बलों पर हमले, जबरन धन वसूली और लूटपाट जैसी विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त रहा है.
मणिपुर में चार जून 2015 को घात लगा कर किए गए हमले में NSCN (K) का हाथ था. इस हमले में सेना के 18 जवान मारे गए थे. इस घटना के बाद भारतीय सेना ने सीमा पार जा कर म्यांमार के अंदर स्थित एनएससीएन-के के शिविरों पर हमला किया जिसमें कई उग्रवादी मारे गए थे.
इस गुट ने सेना के काफिले पर घात लगा कर हमला तब किया था जब वह केंद्र सरकार के एक वार्ताकार के साथ शांति वार्ता कर रहा था. इसके बाद सरकार ने बातचीत बंद कर दी और सितंबर 2015 में एनएससीएन-के को पांच साल के लिए प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया.इस समूह का गठन नगा राष्ट्रवादी आंदोलन के बाद हुआ था. एनएससीएन का गठन 1980 में हुआ था. इस ग्रुप को बनाने वाले प्रमुख लोगों में से एक ‘एसएस खपलांग’ 1988 में अगल हो गए और उन्होंने अपना अलग गुट एनएससीएन-के बना लिया था. एनएससीएन (आईएम) के इसाक चिशी स्वू और थुइंगलेंग मुइवा जैसे नेताओं से मतभेदों के चलते खापलांग ने अलग गुट बनाया था.
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Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/politics/cm-akhilesh-meets-akhlaq-family-dadri-murder-case-414294.html
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