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दुश्मन की जमीन पर एक निश्चित समय में उतरना, अपने काम को अंजाम देना और वक्त के साथ ही वापस लौटना. जी हां. कुछ इसी तरह के चार अहम बिन्दु होते हैं, जो पैरा कमांडो के ऑपरेशन को कामयाब बनाते हैं. अगर किसी भी एक बिन्दु पर चूक हुई तो समझो ऑपरेशन के साथ-साथ कमांडो की जिदंगी भी खतरे में पड़ जाती है. लेकिन यही हमारे पैरा कमांडो की खासियत है कि वो इन चारों ही बिन्दुओं पर काम करते हुए हर छोटे-बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हैं.कर्नल रिटायर्ड यूसी दुबे बताते हैं कि जिस तरह के ऑपरेशन को पीओके में अंजाम दिया गया है वो पैरा कमांडो की एक खास पहचान है. इस तरह के ऑपरेशन के लिए हमारे पैरा कमांडो चार बिन्दुओं पर काम करते हैं. वो चार बिन्दु हैं लक्ष्य निर्धारण, टाइम, लीडरशिप और सबसे अहम जो हमें हर परिस्थिति में लड़ने लायक बनाती है, जी हां वो है हिम्मत. एक पैरा कमांडो सिर पर कफन बांधकर दुश्मन के क्षेत्र में घुसता है बिना यह सोचे-समझे की मैं लौटकर आऊंगा भी या नहीं.
लक्ष्य निर्धारण- कर्नल दुबे का कहना है कि जहां भी ऑपरेशन करना होता है सबसे पहले वहां की सटीक जानकारी ली जाती है. सिर्फ टीम लीडर ही नहीं पूरी टीम को टारगेट के चप्पे-चप्पे से वाकिफ कराया जाता है. इसका जरिया फोटो या वीडियो कुछ भी हो सकता है. समय होने पर 24 से 48 घंटे तक टारगेट की निगरानी की जाती है.
समय- इस तरह के ऑपरेशन में समय बहुत महत्व रखता है. टीम में शामिल हर जवान को समय के हिसाब से मिले हुए काम को अंजाम देना होता है. अगर कोई एक जवान घायल हो जाता है या मर जाता है तो उसका काम उसी समय पर दूसरा जवान करेगा. क्योंकि किसी एक जवान की वजह से अगर समय गड़बड़ाता है तो पूरे ऑपरेशन के खतरे में पड़ने की आशंका खड़ी हो जाती है. जिससे टीम भी खतरे में आ जाती है. खास बात यह है कि ऐसे ऑपरेशन 30 मिनट से लेकर साढ़े तीन घंटे तक के होते हैं. निर्धारित समय में ही अपने देश की सीमा में भी लौटना होता है.लीडरशिप- लीडर पर ही पूरा ऑपरेशन और ऑपरेशन में लगे जवानों की जिम्मेदारी होती है. टीम लीडर को समय रहते, सीमित संसाधन और अपने जवानों की हिफाजत करते हुए ऑपरेशन को अंजाम देना होता है. अच्छी बात यह है कि पीओके वाले ऑपरेशन में भी कुछ ऐसा ही हुआ है. इसीलिए हमारे किसी भी जवान के घायल होने या किसी और तरह की कोई खबर नहीं है. अंदाजन इस ऑपरेशन में 40 से 60 जवान लगे होंगे. क्योंकि इस तरह के ऑपरेशन पूरी फौज के साथ नहीं किए जाते हैं. एक लांच पैड को आठ से 12 जवानों की टुकड़ी ने नष्ट किया होगा.
हिम्मत- हर तरह के हथियार, हैलीकॉप्टर, योजनाएं और दूसरी चीजें रखी रह जाती हैं जब कि जवान के दिल में जोश-जुनून और हिम्मत न हो. यह पता होते हुए कि हम दुश्मन के क्षेत्र में जा रहे हैं जिंदा लौटेंगे या मर कर इसी बात का भी कोई पक्का पता नहीं होता है. लेकिन बावजूद इसके पैरा कमांडो ऐसे ऑपरेशनों को अंजाम देते रहे हैं वो भी अपनी हिम्मत के बलबूते.
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/politics/cm-akhilesh-meets-akhlaq-family-dadri-murder-case-414294.html
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