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दरअसल, भारतीय सेना ने बीते वर्ष 28-29 सितंबर में बार्डर पार कर पाकिस्तान में आतंकियों के लॉन्च पैड को तबाह कर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देना और फिर सुरक्षित वापस लौटना सेना के जवानों के लिए आसान नहीं था। कश्मीर के उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले का जवाब भारत ने अपने तरीके से दिया था, जिसमें कई आतंकी मारे गए।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद रक्षा और विदेश मंत्रालयों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जिसमें मिलिट्री ऑपरेशन्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि 28 सितंबर की रात को भारतीय सैन्य बलों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर मौजूद आतंकी गुटों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।
जानें क्या हुआ था उस रात
उस रात सेना ने करीब 12.30 बजे कार्रवाई शुरू की और वह गुरुवार सुबह 4.30 बजे तक चली। इसमें एलओसी के 2 से 3 किमी दायरे में मौजूद आतंकियों के सात ठिकानों को निशाना बनाया गया। वही घुसपैठ के लिए तैयार इन आतंकियों पर डीजीएमओ ने लंबे समय नजर बनी हुई थी।
नौ पैराकमांडो की पांच क्रैक टीम ने कार्रवाई को सफल बनाया। यह ऑपरेशन हेलिकॉप्टर सेना और थलसेना की संयुक्त कार्रवाई में चलाया गया। पीओके के भिंबर, हॉटस्प्रिंग, तत्तापानी, केल, लीपा सेक्टरों में सैन्य कार्रवाई चली। ऊधमपुर के उत्तरी कमान से 200 पैराकमांडो ने हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी और इन ठिकानों पर उतर कर मोर्चा संभाला।
खास बात है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की निगरानी में की गई सर्जिकल हमले की तैयारी की गई थी। सैन्य कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों और उन्हें समर्थन करने वाले पाक सैनिकों को ढेर किया गया। इसके बाद सुबह 4.30 बजे सुरक्षित अपने ठिकाने पर लौट आए। भारतीय सेना के सर्जिकल आपरेशन से शहर के लोग जोश के साथ सड़क पर उतर आए थे।
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