Wednesday, 27 September 2017

क्या महंत नामदेव शास्त्री से हार गईं पंकजा मुंडे? लिखा ये भावनात्मक पत्र...


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बीड के भगवान गढ़ में हर साल होने वाली दशहरा रैली को इस बार महंत नामदेव शास्त्री ने आयोजित करने से मना कर दिया है. महंत और पंकजा मुंडे के बीच हुए विवाद के बाद महंत ने पंकजा मुंडे को दशहरा रैली करने से मना कर दिया है. इसके बाद अब पंकजा मुंडे ने भगवान गढ़ के महंत को एक मार्मिक पत्र लिखा है.पंकजा ने इस पत्र में लिखा – ‘पहले क्या हुआ मुझे इस विवाद में नहीं पड़ना है, लेकिन आज मैं आखिरी बार आपसे विनती कर रही हूं कि साल में सिर्फ बीस मीनट मुझे दीजिए. इस मामले में कोई भी दूसरा मध्यस्त नहीं है. मैं छोटी हूं आप बड़े बनिए और मुझे दशहरा के दिन 20 मिनट दशहरा रैली करने दीजिए.’ इस भावनात्मक लेटर के बाद अब पंकजा मुंडे को उम्मीद है कि महंत नामदेव शास्त्री मान जाएंगे और उन्हें दशहरा रैली करने की इजाजत देंगे.


गौरतलब है कि पिछले साल पंकजा मुंडे और भगवान गढ़ के महंत नामदेव शास्त्री के बीच वर्चस्व को लेकर विवाद बढ़ गया था. इसके बाद महंत नामदेव शास्त्री के खिलाफ पंकजा ने भगवान गढ़ के पास एक बड़ी रैली की थी. लेकिन, इस बार महंत नामदेव शास्त्री ने पंकजा मुंडे को गढ़ पर रैली करने से मना कर दिया.


क्या है भगवान गढ़?महाराष्ट्र के बीड में ‘श्री क्षेत्र भगवान गढ़’ है जो वादियों के बीच पहाड़ पर बसा है. इस गढ़ में भगवान विठ्ठल और पाण्डव के पुरोहित धौम्य ऋषि का मंदिर है. वहीं पर महाराष्ट्र के संत जनार्दन स्वामी, भगवान बाबा और भीम सिंह महाराज का समाधि स्थान है, इसके साथ ही यहां महाराष्ट्र के ओबीसी समाज का एक बड़ा तीर्थ स्थल भी है.


हर साल यहां पर दशहरा रैली होती है जिसको महंत के अलावा बीड जिले के ही गोपीनाथ मुंडे संबोधित करते थे. गोपीनाथ मुंडे की मौत के बाद उनकी बेटी उस दशहरा रैली में लोगों को संबोधित करती हैं. लेकिन पिछले साल महंत के साथ उनके विवाद के बाद पंकजा मुंडे ने भगवान गढ़ में अपना शक्ति प्रदर्शन किया था, जिससे महंत नाराज थे.

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