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एग्जिट पोल में राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत की संभावना जताई गई है. हालांकि असल नतीजे क्या होंगे ये 11 दिसंबर को ईवीएम के खुलने के साथ ही साफ होगा. लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे सही साबित हुए कांग्रेस के सत्ता में लौटने का रास्ता तो खुल जाएगा. वहीं मुख्यमंत्री की दावेदारी को लेकर पार्टी में घमासान हो सकता है.दोनों राज्यों में पार्टी ने किसी चेहरे को आगे नहीं किया बल्कि अनुभव और युवा जोश के मिश्रण के नेतृत्व में चुनाव लड़ा. राजस्थान में यह कमान अशोक गहलोत व सचिन पायलट के पास थी तो मध्य प्रदेश में नेतृत्व कमलनाथ व ज्योतिरादित्य सिंधिया को मिला. पहले बात करते हैं राजस्थान की…
अशोक गहलोत राजस्थान में कांग्रेस की ओर से सीएम पद के सबसे पहले दावेदार माने जा रहे हैं. अशोक राहुल गांधी के करीबी भी हैं. वो अशोक गहलोत ही थे जिन्होंने 2014 के बाद कांग्रेस के खेमे में जोश भरा था. वह चुनाव था गुजरात का विधानसभा चुनाव. इस चुनाव के दौरान गुजरात की कमान अशोक गहलोत के हाथ थी. तब कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी. अब सवाल उठ रहा है कि क्या राजस्थान में उन्हें इस चीज़ का फायदा मिल सकता है.
अशोक गहलोत अगर कांग्रेस आलाकमान के करीबी हैं तो सीएम पद की रेस में उनके सामने खड़े सचिन पायलट भी राहुल गांधी के करीबी हैं. सचिन पायलट को कांग्रेस की जीत होने पर प्रदेश का भावी मुख्यमंत्री माना जा रहा है. पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करने और सचिन पायलट व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दोनों को मैदान में उतारने से इन कयासों को बल मिला है.

लोकसभा चुनाव में राजस्थान से कांग्रेस का सफाया होने के बाद प्रदेश की कमान युवा नेता सचिन पायलट को दी गई. तब से सचिन पायलट लगातर काडर का आधार बढ़ाने के लिए जमीनी स्तर पर मेहनत करते रहे और राजस्थान के उपचुनावों में कांग्रेस की जीत से उनकी नेतृत्व क्षमता पर जीत की मुहर भी लगी.
सचिन पायलट कांग्रेस की राजनीति का वह चेहरा हैं जो 26 साल की उम्र में सांसद बनने का रिकॉर्ड बना चुके हैं. अब 41 साल की उम्र में वो सीएम भी बन सकते हैं क्योंकि उनकी दावेदारी भी गहलोत से कमज़ोर नहीं है. अनुमान अगर सच साबित होते हैं तो कांग्रेस के लिए खुशी का मौका होगा लेकिन इसी खुशी के साथ एक कलह भी सियासत की चादर ओढ़े कांग्रेस अध्यक्ष के सामने खड़ी होगी.
वैसे जो हाल राजस्थान का है उससे ज्यादा अलग मध्य प्रदेश का भी नहीं. यहां भी अंदरखाने दो चेहरों के बीच सत्ता का खेल चल रहा है. मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सामने चुनौती है बरसों पुराने एक वफ़ादार और जोश से भरे एक युवा के बीच मुख्यमंत्री का चेहरा चुनने की.

कमल नाथ, इन्दिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी के करीबियों में से एक हैं. इन्हें मध्य प्रदेश में 15 साल का वनवास खत्म करने की जिम्मेदारी खुद राहुल गांधी ने सौंपी थी. कमल नाथ ने जैसे ही राज्य में प्रचार की कमान संभाली उनके समर्थकों ने बाहुबली फिल्म की तर्ज पर उन्हें मध्य प्रदेश का बाहुबली बनाकर पेश कर दिया.
कमलनाथ कुर्सी की दावेदारी से पहले मध्य प्रदेश जीतने के लिए गुटबाज़ी की बात को काटते रहे हैं. कमल नाथ मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं. उनके समर्थकों ने इसीलिए मध्य प्रदेश में पोस्टर वॉर भी छेड़ दिया था.
कमल नाथ के सामने सीएम पद के दावेदार हैं सिंधिया परिवार से ज्योतिरादित्य सिंधिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी का वो युवा चेहरा हैं जिनके लिए मध्य प्रदेश में उनके समर्थक लंबे समय से उनके लिए पोस्टर जारी करते रहे हैं. इनमें एक पोस्टर पर लिखा है कि ‘दिग्विजय बनें द्रोण, सारथी बनें कमलनाथ श्रीमंत बनें अर्जुन, मध्य प्रदेश है आपके साथ.’
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो राहुल गांधी के लिए नेता चुनना बेहद मुश्किल होने वाला है. ऐसे प्रयोग की संभावना भी कम है जैसा बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में किया था. डिप्टी सीएम वाला फंडा शायद यहां कारगर साबित न हो लिहाजा, कांग्रेस नेतृत्व के पास किसी एक को चुनने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं.
Article source: https://hindi.news18.com/videos/nation-sau-baat-ki-ek-baat-197-1176047.html
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