Saturday, 8 December 2018

जस्टिस ज्ञान सुधा LGBT फैसले पर, ये एक मनोवैज्ञानिक कमी है और इसका इलाज ज़रूरी


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जागरण फोरम के दूसरे दिन शनिवार को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज ज्ञान सुधा मिश्रा ने समलैंगिकता से जुड़े  सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से अलग राय जाहिर की और कहा कि उनकी निजी राय में ये एक मनोवैज्ञानिक कमी है और इसका इलाज कराया जाना चाहिए. कार्यक्रम में पूर्व सॉलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी भी मौजूद रहे और उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर के संबंध में जो फैसला दिया है वो पूरी तरह गलत है.ज्ञानसुधा मिश्रा ने LGBT कम्युनिटी को बताया बीमार
एलजीबीटी मामले पर ज्ञानसुधा ने कहा कि आप (LGBT समुदाय) जो कर रहे हैं वो आपकी स्वतंत्रता है लेकिन समाज ने इसे सहमति दे दी है इसे ऐसे नहीं समझा जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि उनका निजी तौर पर मानना है कि ये वर्ग मनोवैज्ञानिक कमी का शिकार है उन्हें चिकित्सा की भी ज़रुरत है.


सबरीमाला वाले मामले पर उन्होंने कहा कि मूल अधिकारों के उल्लंघन के किसी भी मामले में कोर्ट काफी सख्त रहता है. धार्मिक अधिकारों के मामले पर उन्होंने कहा कि अगर ऐसे अधिकार मूल अधिकारों के आड़े आते हैं तो इन्हें ख़ारिज किया जा सकता है. उनके मुताबिक अगर सबरीमाला के फैसले को गलत कहा जाएगा ट्रिपल तलाक़ का फैसला भी गलत ही मानना होगा.सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट गलत
पूर्व सोलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि वो इस फैसले से काफी खुश हैं. मुकुल ने कहा कि शीर्ष अदालत में मैंने ही इसकी पैरवी की शुरुआत की थी और समाज इस फैसले के लिए तैयार था. धार्मिक अधिकारों पर मुकुल ने कहा कि नमाज़ हो या फिर सिखों के केश-कड़े वाला मामला हो इनमें दखल नहीं दिया जा सकता. सबरीमाला वाले मामले में उन्होंने खुलकर कहा कि मेरा मानना है कि ये फैसला गलत है, धार्मिक मान्यताओं को रीजन-लॉजिक के आधार पर नहीं तय किया जा सकता. हालांकि उन्होंने ट्रिपल तलाक के फैसले को सही बताया.


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/desh/dusu-jnu-election-live-blog-512526.html

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