READ MORE
(इरम आगा)अपनी मांगों को रखने के लिए 29 नवंबर को देश भर के किसानों ने दिल्ली में मार्च किया था. 2019 के लोकसभा के चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के मन में बार-बार एक ही सवाल आ रहा है. क्या किसानों का एकमुश्त वोट उन्हें मिल पाएगा?
इस बार विधानसभा चुनाव से हर पार्टी ने किसानों को रिझाने की कोशिश की है. उधारण के तौर पर राजस्थान में कांग्रेस ने किसानों से वादा किया कि वो सत्ता में आते ही 10 दिनों के अंदर कृषि से जुड़े सारे लोन माफ कर देंगे. साथ ही ये भी कहा कि वो सस्ते दरों पर भी उन्हें लोन देंगे. दूसरी तरफ प्रधानमंत्री साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रहे हैं. बीजेपी ने वादा किया है कि वो किसानों को अगले पांच साल में एक लाख करोड़ लोन देंगे.
चुनावी घोषणा पत्र और प्रचार में किसानों से वादा करना कोई नई बात नहीं है. लेकिन उन्हें किसानों की अहमियत अच्छी तरह पता है . देश में 60 फिसदी लोग खेतीबाड़ी से जुड़े हैं. कांग्रेस से जुड़े एक अधिकारी ने कहा. “इस वक्त हालात काफी अलग हैं. किसान इस वक्त काफी संगठित तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं. किसान सूखे और बाढ़ से परेशान हैं. ऐसे में चुनाव पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.”किसानों का एक मुश्त वोट
पीपुल्स पल्स NGO के लिए काम करने वाले राजनीतिक विश्लेषक सज्जन कुमार ने चुनाव से पहले मध्यप्रदेश सरकार के लिए रिपोर्ट तैयार की है. उनके मुताबिक 1970 के दशक से पहले किसान एकमुश्त वोटिंग करते थे. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. 1990 के दशक में भी किसान यूनियन बने. लेकिन ये सब जाति और संस्कृति के आधार पर बंट गए.
किसान भी मानते हैं
बिहार के नालंदा ज़िले के रहने वाले प्रकाश कुमार ने कहा, “दशकों से, हम विभाजित हो गए हैं. चाहे वो धर्म हो, चाहे वो जाति हो या यहां तक कि फसल भी. हमें बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में गन्ना किसान की जो परेशानी है वो बंगाल में आलू किसान से अलग है. लेकिन ये सच नहीं है. हम सभी एक ही समस्या का सामना कर रहे हैं. किसी भी किसान को अयोध्या नहीं चाहिए. हम चाहते हैं कि हमारे ऋणों को माफ कर दिया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाया जाए”
अखिल भारतीय किसान संघ समन्वय समिति के संयोजक हन्ना मोल्ला ने कहा. “हमारे देश में कृषि संकट अभूतपूर्व है और ये 2019 के चुनाव में एक अहम मुद्दा होगा. इसके लिए सरकार को सबसे पहले किसानों का लोन माफ करना होगा. साथ ही उन्हें राष्ट्रीय ऋण राहत आयोग बनाना होगा.”
हालांकि एक वरिष्ठ बीजेपी नेता का कहना है, ” जितना काम हमारी सरकार ने किसानों के लिए किया है उतना किसी और ने नहीं किया है. हमारी पूरी सरकार ने किसान की आय पर ध्यान केंद्रित किया है. ऐसे कुछ मुद्दे हैं, लेकिन वे राज्यों की दिक्कतें हैं और केंद्र सरकार उन्हें सुलझाने की कोशिश कर रही है.”
आरएसएस समर्थित भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय सचिव मोहिनी मोहन ने न्यूज़18 को बताया कि, “ये राजनीतिक आंदोलन है और किसानों के मुद्दों के बारे में नहीं. ये 201 9 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया है.”
भारतीय किसान संघ किसानों के संगठन द्वारा उठाए जा रहे सभी मांगों से सहमत नहीं है. उनका कहना है, “हम कर्ज माफी के पक्ष में नहीं हैं. हमने देखा है कि इसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है. हमारी मांग है न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाना”
राजनीतिक विश्लेषक सज्जन कुमार ने कहा, ”हाल में किसानों की फसलों की कीमतों में गिरावट आई है और उर्वरक, बीज, सिंचाई और मजदूरी के खर्चे बढ़ गए हैं.”
सज्जन कुमार के मुताबिक गुजरात में इसके चलते बीजेपी को नुकसान हुआ है. खास कर सौराष्ट्र में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. पार्टी ने माना है कि विजय रुपानी सरकार ने किसानों को कपास में MSP नहीं दिया.
ये भी पढ़ें:
VHP की धर्मसभा में भैय्याजी बोले- राम मंदिर पर अपना संकल्प पूरा करे बीजेपी
कांग्रेस के लिए ‘नाक’ का सवाल होगा मिज़ोरम जीतना
Article source: https://hindi.news18.com/news/nation/four-dead-and-five-injured-as-fire-breaks-out-in-mumbai-sakinaka-1219484.html
No comments:
Post a Comment