Friday, 31 August 2018

अमन का पैगाम लेकर पाकिस्तान गया था,अब दिखने लगा है असर- सिद्धू


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यादवेंद्र सिंह
पंजाब सरकार के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू का कहना है कि चाहे उनकी जितनी भी आलोचना हो, लेकिन करतारपुर साहिब के दर्शन अरदास के लिए पाकिस्तान की सीमा खोली जाना चाहिए. उनका कहना है कि वे अमन का संदेश ले कर गए थे और अब उसका असर दिखने लगा है. उनका ये भी कहना है कि वे किसी की भी आलोचना नहीं करना चाहते, न ही किसी तरह की क्रडिट लेना चाहते है.उनका संकेत भारतीय दूतावास के अधिकारियों की करतारपुर साहिब की यात्रा की ओर था. न्यूज 18 से खास बातचीत में उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि गुरु की डिक्शनरी में असंभव कुछ भी नहीं होता. सिद्धू ने कहा कि ये किसी एक का मुद्दा नहीं है, बल्कि साझा मुद्दा है. हलचल शुरू हो चुकी है और जल्द ही इसे हकीकत में तब्दील होते देखा जा सकेगा.


ये भी पढ़ें : पाकिस्तानी सेना प्रमुख के गले मिले, PoK के राष्ट्रपति के बगल में बैठे सिद्धूगुरु नानकदेव की शिक्षा और गुरुवाणी का हवाला देते हुए सिद्धू ने कहा कि करतारपुर साहिब मसले से फासले दूर खत्म होंंगे.  श्रद्धा को सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि जो प्रयास शुरु हुए हैं वो सब परमात्मा की कृपा से हुआ है और उम्मीद है कि बाबा नानक के पांच सौ पचासवीं जयंती के आयोजनों के बीच ही करतारपुर साहिब का मसला भी सुलझ जाएगा.


यह पूछे जाने पर क्या पाकिस्तान यात्रा के दौरान उनके जेहन में ये बात पहले से थी, सिद्धू कहते हैं कि नहीं उनके दिमाग में ये बात बिल्कुल नहीं थी क्योंकि वे दोस्त के रूप में गए थे. वहां उन्हे अगली कतार में पाकर बाजवा ने उनसे बातचीत की और करतारपुर साहिब मसले का जिक्र किया.


अन्तरराष्ट्रीय परिदृश्य का हवाला देते हुए सिद्धू ने कहा कि अगर दोनों पंजाब एक साथ हो जाए तो कोई मसला ही नहीं रह जाएगा. जब खान साहब कह रहे हैं कि भारत एक कदम चले तो वे दो कदम चलेंगे. फिर क्या दिक्कत है. पानी को लेकर देश में तमिलनाडु के अलावा पंजाब और हरियाणा के बीच संघर्ष चल रहा है और उधर पाकिस्तान से इंडस वॉटर समझौता की बात उठ रही है.. पाकिस्तान की इस पहल को वो बहुत पॉजिटिव मानते हैं.


वे कहते हैं बहुत से लोग गए थे, लेकिन नतीजा क्या रहा. वाजपेयी जी गए और करगिल हुआ. सैकड़ों जवान शहीद हुए. मोदी जी गए पठानकोट हो गया. वे दावा करते हैं एक सिद्धू गया और उसने अमन की बात की. खूब प्यार मिला. यहां लोगों ने बेकार में हंगामा कर दिया.


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लच्छेदार बातों के लिए मशहूर सिद्धू ने बताया कि चौधरी सरवर का 28 को पंजाब के गवर्नर पद के लिए शपथ-ग्रहण था. मेरे पास संदेश आया कि चौधरी चाहते हैं कि सिद्धू उसमें शामिल हो. उस समय उन्होंने जाने में असमर्थता जता दी थी और नहीं जा सके. किसी ने उन्हें फोटो भेजा कि भारत के हाई कमिश्नर करतापुर गए और वहां से सब देख करके आए. इस सबको वे प्रार्थना की ताकत बताते हैं.


करतारपुर का गुरुद्वारा में दर्शन की अगर अनुमति मिलती है तो इसका श्रेय किसे मिलना चाहिए, इस सवाल पर सिद्धू कहते हैं कि सबको मिले, उन्हें न मिले. फिर भी इस काम को होना चाहिए.
पाकिस्तानी जरनल के गले लगने पर सबने आलोचना की, कैप्टन अमरिंदर सिंह और अकाली दल ने भी क्या इससे दुख हुआ? इस सवाल पर सिद्धू संजीदा हो जाते हैं और कहते हैं कि इन्हें लग रहा है कि दुनिया लुट गई. वे कहते हैं सिद्धू का इसमें कुछ नहीं गया उन्हें तो सिर्फ मिला ही मिला है. परमात्मा ने उन्हें एक बड़े काम के लिए जरिया बनाया इस पर वे बहुत खुश हैं. क्रेडिट की होड़ में वे पहले भी नहीं थे अब भी नहीं है. इंसान का इंसान से हो भाईचारा यही पैगाम हमारा. गुरुनानक देव का बुनियाद यही है.


एक बार फिर आलोचना के सवाल पर उनका कहना हैं कि उनकी जवाबदेही जनता के प्रति है और जनता को सब पता है. जनता को कोई मूर्ख नहीं बना सकता. क्या इस पूरे प्रकरण में सिखों को लामबंदी करने की कोशिश हो रही है, वे कहते हैं कि दरबार साहिब का किसी के पास कॉपीराइट नहीं है. गुरुग्रंथ साहिब पर किसी का पेटेंट नहीं है. वहां बैठ कर हर बंदा उनकी वाणी सुन सकता है. ये सारी दुनिया के लिए निचोड़ है अच्छाइयों का. लिहाजा करतारपुर के लिए सभी मिल कर प्रयास करना चाहिए.

संघ ने अपनी आलोचना पर राहुल गांधी को दिया जवाब, हमारे लिए कोई विरोधी नहीं


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कांग्रेस की लगातार आलोचनाओं के बीच राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) ने शुक्रवार को कहा कि वह किसी को भी अपना विरोधी नहीं मानता और वह राष्ट्रीय हित के लिए काम करता है. आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह बात संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कही. आंध्र प्रदेश के राघवेन्द्र मठ में शुक्रवार से शुरू हुई बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत और बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह मौजूद थे.संघ ने एक बयान जारी करके कहा कि आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारी सदस्य तथा इससे संबद्ध संगठनों के राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में शामिल हो रहे हैं जहां समसामयिक मुद्दों पर चर्चा होगी. बैठक में भाग ले रहे कम से कम 200 कार्यकर्ता इसमें अपने अनुभव, दृष्टिकोण और उपलब्धियां साझा करेंगे.


आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरूण कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘संघ किसी के भी साथ अपने विरोधी के तौर पर बर्ताव नहीं करता. यह पूरे समाज को राष्ट्र हित के लिए संगठित करने के लिए कार्य करता है.’’


उनसे कांग्रेस तथा उसके अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से लगातार संघ की आलोचनाओं के बारे में पूछा गया था. आरएसएस ने संकेत दिए हैं कि वह भागवत के तीन दिवसीय व्याख्यान माला में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को बुला सकते हैं जिनमें राहुल गांधी और सीताराम येचुरी भी शामिल हैं.बैठक के एजेंड़े के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह बेहतर समन्वय पर केन्द्रित है और साल में दो बार सितंबर और जनवरी में आयोजित होती है. उन्होंने बताया कि इसमें कोई खास निर्णय नहीं लिया जाता.


बैठक को राघवेन्द्र मठ के प्रमुख स्वामी सुबुदेन्द्र तीर्थ ने भी संबोधित किया. उन्होंने कहा, ‘‘हम सब के प्रयासों से हिंदू समाज में जागरुकता आएगी और हिंदू धर्म अपना सम्मानित स्थान पा सकेगा.’’

90 वर्षीय पति ने 80 वर्षीय पत्नी की कर दी हत्या


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वेल्लिकुलान्गारा से 90 वर्षीय एक व्यक्ति को अपनी 80 वर्षीय पत्नी की कथित तौर पर हत्या करने और उसके शव को जलाकर ठिकाने लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि व्यक्ति की पहचान चेरयाकुट्टी के तौर पर हुई है. उसने इस सप्ताह अपनी पत्नी काच्चू थेरसिया के सिर पर लोहे की छड़ से वारकर उसकी हत्या कर दी और बाद में उसके शव को जलाकर ठिकाने लगा दिया था.पास ही रहने वाले दंपति के बच्चों ने 28 अगस्त को महिला के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई.


पुलिस ने घर के परिसर की तलाशी ली, जहां हड्डियों के टुकड़ों के साथ राख मिली, जिसके (हड्डियों के) बाद में महिला के होने का पता चला.


पुलिस ने बताया कि आरोपी ने बाद में पूछताछ के दौरान अपना गुनाह स्वीकार कर लिया.उन्होंने बताया कि स्थानीय अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

'आतंकियों से बात हो सकती है तो हार्दिक पटेल से क्यों नहीं?'


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अहमदाबाद स्थित अपने आवास पर आमरण अनशन पर बैठे पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल की लड़ाई शुक्रवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गई है. जल का भी त्याग कर चुके हार्दिक का वजन लगभग चार किलो, 900 ग्राम तक घट गया. शुक्रवार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन मोढ़वाडिया, भावनगर से डॉ. कनुभाई कलसारिया, कांग्रेसी विधायक शैलेश परमार, हिम्मत सिंह पटेल, इमरान खेड़वाला समेत कई नेता उनसे मिलने पहुंचे.कांग्रेसी नेताओं ने सरखेज-गांधीनगर हाईवे स्थित वैष्णोदेवी मंदिर परिसर में हनुमान जी की प्रतिमा के सामने हार्दिक के अच्छे स्वास्थ्य के लिए रामधुनका आयोजन भी किया. इस दौरान कांग्रेस नेता अर्जुन मोढ़वाडिया ने कहा कि हार्दिक प्रजागत समस्याओं के समाधान के लिए अनशन पर बैठे हैं. हम उसके अच्छे स्वास्थ्य  की प्रार्थना करते हैं. भगवान बीजेपी सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करें. सरकार को हार्दिक से संवाद करना चाहिए, किसी भी समस्या के समाधान का श्रेष्ठ मार्ग बातचीत ही हो सकता है.


उन्‍होंने सवाल किया कि नक्सली, आतंकी और कानून को अपने हाथ में ले रहे लोगों के साथ अगर बातचीत हो सकती है तो हार्दिक के साथ क्यों नहीं? हम हार्दिक से गुजारिश करेंगे कि वह अनशन जरूर कायम रखें, लेकिन जल त्याग न करें.


ये भी पढ़ें: हार्दिक पटेल को जबरन हॉस्पिटल शिफ्ट कर सकती है गुजरात सरकार!अहमदाबाद स्थित जमालपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक इमरान खेड़वाला और कांग्रेस नेता बदरुद्दीन शेख समेत कई मुस्लिम कांग्रेसी नेताओं ने हार्दिक के स्वास्थ्य और लम्बी उम्र के लिए मस्जिद में दुआ मांगी. कांग्रेस के मुताबिक गुजरात में लोकतंत्र मर चुका है. आम लोगों को हार्दिक से मिलने भी नहीं दिया जाता है. यहां तक की जरुरी सुविधाएं भी उन तक नहीं पहुंचाने नहीं दी जा रही. कांग्रेस हमेशा से लोगो के साथ खड़ी थी और रहेगी.


इस बीच उनके स्वास्थ्य की जांच करने वाले चिकित्सकों की टीम की अगुवा सोला सिविल हॉस्पिटल की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर नम्रता वडोदरिया ने कहा कि हार्दिक का हिमोडाइनेमिकली स्टेबल है, ऑक्सीजन नॉर्मल है. अगर वह पानी और खुराक लेना शुरू नहीं करेंगे तो अगले कुछ समय में समस्या हो सकती है.


गौरतलब है कि  किसानों की कर्ज माफी और पाटीदार आरक्षण के मुद्दे पर बाहर अनशन की सरकारी अनुमति नहीं मिलने के बाद हार्दिक पटेल अहमदबाद में  एसजी हाईवे के निकट स्थित अपने आवास पर 25 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे हैं.


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सिंधु घाटी के दोनों तरफ दौरा कराने पर सहमत हुए भारत-पाक


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भारत और पाकिस्तान सिंधु जल संधि के प्रावधानों के तहत अपने-अपने आयुक्तों के सिंधु धाटी का दोनों तरफ दौरा कराने की बात पर सहमत हुए हैं. यह निर्णय जम्मू-कश्मीर में पाकल दुल और निचली कलनाई समेत विभिन्न पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए लिया गया है.नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सिंधु जल संधि के बारे मे दो दिनों की उच्च स्तरीय बैठक में 1960 की इस संधि के तहत आने वाले मुद्दों पर सिंधु नदी स्थायी आयोग की भूमिका मजबूत करने पर चर्चा हुई. यह 18 अगस्त को इमरान खान के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने बाद दोनों देशों के बीच यह पहली आधिकारिक बैठक थी.


मंत्रालय ने कहा कि दोनों देश संधि के तहत दोनों तरफ पड़ने वाले सिंधु थाला क्षेत्र का दौरा आयोजित कराने पर सहमत हुए हैं.


इस बात पर भी सहमति जताई गई कि आपसी सहमति से तय तारीख को अगली बैठक भारत में की जाएगी.पाकिस्तान की मीडिया खबरों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान की आपत्तियों को दूर करने के लिए उसके विशेषज्ञों को चिनाब नदी पर बन रही पाकलदुल (1000 मेगा वाट) और निचली कलनाई जलविद्युत परियोजना (48 मेवा) क्षेत्र का दौरा करने का निमंत्रण दिया है. हालांकि भारत ने पनबिजली परियोजनाओं के निर्माण को लेकर पाकिस्तान की आपत्तियों को खारिज कर दिया.


एक अधिकारी ने कहा, ‘भारत ने दोनों पनबिजली परियोजनाओं पर काम जारी रखने का संकेत दिया है.’


पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव एस अहमद ख्वाजा ने समाचार पत्र डान से कहा, ‘लाहौर में दो दिन की बातचीत की यह बड़ी सफलता है कि भारत ने परियोजना स्थलों पर हमारे विशेषज्ञों को आने की अनुमति दी है. इसलिए हमारे विशेषज्ञ अगले महीने के अंत तक भारत की यात्रा करेंगे.’


उन्होंने कहा कि हमारे विशेषज्ञ परियोजना स्थल का निरीक्षण करेंगे और यह देखेंगे कि सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) के तहत निर्माण हो रहा है कि नहीं.


 

भारत में एक साल लेट शुरू हो सकती है बुलेट ट्रेन परियोजना


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अगस्त 2022 तक बुलेट रेल के 50 किलोमीटर के छोटे खंड को चालू करने पर विचार कर रहा है. पहले इसे इस अवधि में पूरे 508 किलोमीटर के मार्ग को चालू करने का लक्ष्य रखा गया था. सूत्रों ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना कार्यक्रम से पीछे चल रही है.नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारत के 75 वें स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, 2022 तक अगर काम पूरा नहीं हो पाता है तो गुजरात में सूरत से बिलिमोरा तक के एक छोटे खंड का परिचालन शुरू किया जा सकता है. सूत्रों ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए “व्यावहारिक समय सीमा” 2023 हो सकती है.


एनएचएसआरसीएल के सूत्रों ने बताया, “बुलेट ट्रेन परियोजना के निष्पादन में बाधा केवल भूमि अधिग्रहण तक ही सीमित नहीं है. इसमें कई प्रक्रियाएं शामिल हैं और कई विस्तृत योजनाएं हैं, जो अभी भी चल रही हैं.


सूत्र ने बताया, “हमारे आकलन के अनुसार, परियोजना पूरा होने में एक वर्ष की देर हो सकती है. पूरे 508 किलोमीटर के इस मार्ग को 2023 के अंत तक चालू किया जा सकता है.” पूरे हाई स्पीड रेल गलियारे में 1,434 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी जिसमें महाराष्ट्र में 353 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी. बाकी जमीन गुजरात में होगी.इसे गुजरात के 19 गांवों और महाराष्ट्र के 104 गांवों में 7,000 भूखंडों में बांटा गया है. इस परियोजना में महाराष्ट्र के तीन जिलों और गुजरात में आठ जिलों के अलावा दादरा और नागर हवेली के एक छोटे से क्षेत्र को लिया गया है. हालांकि, अब तक बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में केवल 0.9 हेक्टेयर जमीन का भौतिक हस्तांतरण हो सका है.


एक अन्य स्रोत ने कहा, ” यह एक ऐसा खंड है जो समय सीमा पर पूरा होगा. इसके अलावा, यह एक प्रोटोटाइप के रूप में कार्य कर सकता है, जो हमें उच्च स्पीड ऑपरेशन में शामिल प्रौद्योगिकियों का परीक्षण करने में मदद करेगा.” इस परियोजना में भारतीय रेलवे नेटवर्क के मौजूदा स्टेशन के ऊपर वडोदरा स्टेशन का निर्माण शामिल है. एक 220 मीटर गर्डर (जो स्वयं एक इंजीनियरिंग चुनौती होगी) का निर्माण इस स्टेशन परियोजना का हिस्सा होगा.


इस परियोजना की कई चुनौतियों का वर्णन करते हुए सूत्र ने कहा, “यह गर्डर ही मात्र वर्ष 2022 के अंत में ही पूरा होने की संभावना है.” सूत्रों ने कहा कि पालघर (महाराष्ट्र) और नवसारी (गुजरात) के किसानों के प्रतिरोध का हवाला देते हुए कहा कि एनएचएसआरसीएल जापान से 80 फीसदी ऋण के साथ 1.08 लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण करने की दिसंबर 2018 की समय सीमा पर खरा नहीं उतरेगा.


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चीन के नेपाल को लुभाने के बीच काठमांडू तक रेल लाइन बिछाएगा भारत


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भारत और नेपाल ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक महत्व के रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग को विकसित करने के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. यह रेलमार्ग बिहार के रक्सौल शहर को नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ेगा.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से द्विपक्षीय मुलाकात की. दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने समेत द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा भी की.


दोनों नेताओं की इस साल यह तीसरी बैठक थी. इससे पहले ओली की अप्रैल में भारत यात्रा के दौरान मोदी से मुलाकात हुई थी. उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की मई में नेपाल यात्रा के दौरान दोनों नेता मिले थे.


बैठक के बाद मोदी ने कहा, ‘‘विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई. इसमें भारत-नेपाल संबंधों से जुड़ी विभिन्न पहलू शामिल हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने आर्थिक, व्यापार तथा सांस्कृतिक संबंधों को आगे और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की. हमारे देशों के बीच संपर्क मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई.’’विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों के सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की. कुमार ने कहा, ‘‘दोनों नेता गर्मजोशी से मिले.’’


कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की मौजूदगी में भारत सरकार और नेपाल सरकार के बीच सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए. यह समझौता रक्सौल (भारत) और काठमांडू (नेपाल) के बीच ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के आरंभिक इंजीनियरिंग एवं यातायात सर्वेक्षण के लिए किया गया है.’’


इस सहमति ज्ञापन पर भारत की ओर से राजदूत मंजीव सिंह पुरी और नेपाल की ओर से वहां के भौगोलिक ढांचा एवं निर्माण मंत्रालय के सचिव मधुसुदन अधिकारी ने हस्ताक्षर किए. रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा और थोक में सामान की आवाजाही सरल हो सकेगी.


इस रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण कार्य भारत की कंपनी कोंकण रेल कार्पोशन करेगा. यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दो साल पहले ही चीन ने तिब्बत से नेपाल के बीच रेलमार्ग स्थापित करने पर सहमति जताई थी.


भारत और नेपाल के बीच तीन और रेलमार्ग स्थापित करने की योजना है. इनमें न्यू जलपाईगुड़ी-काकरभित्ता, नौटवाना-भैराह्वा और नेपालगंज रोड-नेपालगंज रेलमार्ग शामिल हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने चौथे बिम्स्टेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल) शिखर सम्मेलन के दौरान थाईलैंड और बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठक और चर्चा हुई. उन्होंने श्रीलंका और म्यांमार के राष्ट्रपतियों के साथ भी बैठकें की.