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जम्मू-कश्मीर में एक सिख लड़की अपनी एक मुस्लिम सहेली की जान बचाने के लिए उसे अपनी किडनी दान करना चाहती है. हालांकि उसका परिवार इस बात के खिलाफ है, जिससे ऑपरेशन की प्रक्रिया में देरी हो रही है. इसलिए अब उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा है.लड़की का नाम मनजोत सिंह कोहली (25) है. वह ऊधमपुर इलाके की एक सिख सामाजिक कार्यकर्ता है. उसकी मुस्लिम दोस्त समरीन अख्तर (22) राजौरी जिले की रहने वाली है. फिलहाल वह किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अस्पताल में भर्ती है. उसके अंगों ने काम करना बंद कर दिया है. इस पर मनजोत अपनी एक किडनी डोनेट कर समरीन की जान बचाना चाहती हैं. लेकिन, दोनों सहेलियों का धर्म अलग होने के कारण मनजोत का परिवार इसकी इजाजत नहीं दे रहा है.
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मनजोत कोहली कहती हैं, ‘हम पिछले चार साल से सहेली हैं. मैं भावनात्मक रूप से उससे जुड़ी हुई हूं. साथ ही मानवता में मेरा विश्वास है, जो मुझे मुझे किडनी दान करने के लिए प्रेरित कर रहा हैं’. कोहली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी देरी के यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत का रुख किया है.वहीं, अपने दोस्त की ओर से किडनी की दान करने की बात सुनकर समरीन अख्तर ने कहा, ‘वह बहुत ही उम्दा इंसान हैं. मैं उसके इस प्रेम और दया के लिए धन्यवाद करती हूं. मेरी बीमारी की खबर मिलते ही उन्होंने मुझसे संपर्क किया और अपनी किडनी डोनेट करने की इच्छा जाहिर की थी. मैं अपने कानों पर भरोसा नहीं करती, लेकिन जब देखा कि वह अस्पताल की प्रशासनिक टीम के साथ वह किडनी डोनेट करने का प्रोसेस पूरा कर रही है तो मैं दंग रह गई. यह कदम मेरी जिंदगी बदलने वाला था.’
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अख्तर ने किडनी दान किए जाने की प्रक्रिया में देरी किए जाने को लेकर कहा कि उसे समझ नहीं आ रहा है शेर ए कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (SKIMS) की ओर से क्यों देरी की जा रही है. उनका अरोप था कि संस्थान प्रक्रिया में गैर जरूरी बाधाएं पैदा कर रहा है. (एजेंसी इनपुट)
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/gavaskar-talks-about-460552.html
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