Sunday, 2 December 2018

तेलंगाना चुनाव: औवेसी की नज़र 'किंगमेकर' पर, लेकिन हैदराबाद में पार्टी को मिल रही है कड़ी टक्कर


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हैदराबाद में ऐतिहासिक चारमीनार से कुछ ही दूरी पर एआईएमआईएम (AIMIM) सुप्रीमो असदुद्दीन औवेसी भाषण दे रहे हैं. हज़ारों समर्थकों के सामने वो ऐलान करते हैं कि तेलंगाना में बिना उनकी पार्टी के समर्थन के कोई सरकार नहीं बना सकती है.उन्होंने कहा, ” अगर सिर्फ 37 विधायकों के साथ एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो मैं अपने राज्य का चीफ मिनिस्टर क्यों नहीं बन सकता.” असदुद्दीन औवेसी के इस ऐलान के साथ ही वहां मौजूद भीड़ ने जम कर तलाई बजाई.


औवेसी के इस ऐलान के साथ ही हर तरफ चर्चाओं का बाज़ार गर्म हो गया है. लोगों को लगता है कि शायद तेलंगाना में चुनावी नतीजों के बाद औवेसी के बड़े भाई किंगमेकर की भूमिका में आ जाएं. लेकिन असदुद्दीन औवेसी के समर्थकों की मानें तो सिर्फ वाहवाही लूटने के वो ऐसे बयान दे रहे हैं. जबकि ज़मीनी हक़ीकत कुछ और है. इस बार उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव में कड़ी चुनौती मिल रही है. तेलंगाना विधानसभा में AIMIM के सात विधायक थे और इस बार असदुद्दीन औवेसी की पार्टी 8 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.


चारमीनार के नजदीक दुकान चलाने वाले अलताफ अली खान का कहना है, ”दो महीने पहले चीजे़ं असदुद्दीन औवेसी की पार्टी के हक़ में थी. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. ऐसा लग रहा है कि वो चुनावी समीकरण को ठीक तरीके से समझ नहीं पाए. सात मे से तीन सीटों पर पार्टी को कड़ी टक्कर मिल रही है. उन्हें हैदराबाद में एक असरदार पार्टी बने रहने के लिए सभी सात सीटों पर जीत दर्ज करनी होगी.”राजनीतिक जानकार भी अली खान की बातों से सहमत हैं. उनका कहना है चारमीनार, मलाकपेट और नामपल्ली सीटों पर AIMIM के लिए ये करो या मरो की लड़ाई है. कांग्रेस और टीडीपी के गठबंधन को ‘महाकुटामी’ का नाम दिया गया है. कांग्रेस और टीडीपी ने यहां से तीन चार बड़े उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. ये ऐसे उम्मीदवार हैं जो हर मोर्चे पर असदुद्दीन औवेसी को चुनौती दे सकते हैं.


मलाकपेट से टीडीपी के उम्मीदवार मुज़फ्फर अली खान मैदान में हैं. नामपल्ली से कांग्रेस के फिरोज़ खान चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि चारमीनार से कांग्रेस के मोहम्मद गॉस हर किसी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक सैयद सज्जादुल हसन ने न्यूज़18 से कहा कि दो-से तीन सीटों पर इस बार बेहद कड़ा मुकाबला होने वाला है.


उन्होंने कहा, ”मैं ये नहीं कह सकता कि AIMIM हार रही है. लेकिन अगर वो सभी सात सीटों पर बाज़ी मार भी लेते हैं तो भी जीत का फांसला ज्यादा नहीं होगा. चुनावी कैंपेन की रणनीति भी बदल गई है. अब पार्टियां विकास की बात कर रही है न कि धर्म की.”राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर AIMIM मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव की पार्टी (TRS) को समर्थन भी देती है तो ये उनके लिए फायदे या नुकसान दोनों तरह के सौदे हो सकते हैं.


हैदराबाद के सीनियर पत्रकार मुबाशीरुद्दीन का कहना है, ”मुस्लिम को लगता है कि KCR दिल्ली में बीजेपी के साथ है. जबकि यहां उन्हें AIMIM से समर्थन मिल रहा है. पहली बार कई मुसलमान असदुद्दीन औवेसी के कमिटमेंट पर सवाल उठा रहे हैं.”


असदुद्दीन औवेसी बीजेपी के एजेंट होने के दावों को सीरे से खारीज करते हैं. उनका मानना है कि ये जरूरी नहीं है कि जो लोग भी बीजेपी के खिलाफ है वो कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव लड़े. उन्होंने कहा ” आने वाले लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 120 सीटें जीतने दीजिए. हमलोग बीजेपी से लड़ेंगे. हमें उनकी जरूरत नहीं है.”


हैदराबाद में मुसलमानों के मुकाबले हिंदू की संख्या ज़्यादा है. नए डेटा के मुताबिक यहां सात विधानसभा सीटों पर 52% हिंदू है जबकि 46-48% मुसलमान. पिछले चुनावों में AIMIM ने हमेशा यहां दूसरी बड़ी पार्टियों के साथ गठजोड़ किया है. कांग्रेस और टीडीपी के बीच हिंदू वोट के बंटवारे चलते AIMIM को हमेशा जीत मिली है. लेकिन इस बार हालात अलग हैं.


तेलंगाना में बीजेपी का बोलबाला नहीं है. लेकिन इसके बावजूद पार्टी हैदराबाद के आस-पास ज़ोरदार प्रचार कर रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी TRSऔर AIMIM के खिलाफ लोगों के वोट को बांटने काम कर रही है जिससे कि चन्द्रबाबू नायडू की हार हो. आपको बता दें कि बीजेपी से अलग हो कर नायडू ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है.


बीजेपी को यहां पांच सीटों पर जीत की उम्मीद है. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बीजेपी को कम से कम तीन सीटों पर जीत मिल सकती है. हैदराबाद में आमतौर पर 65 फीसदी वोटिंग होती है. कहा जा रहा है कि अगर यहां ज़्यादा वोटिंग हुई तो फिर AIMIM को नुकसान हो सकता है.


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Article source: http://ibnlive.in.com/news/sexual-minorities-fight-aids-with-ngos-help/207330-62-129.html

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