Sunday, 1 July 2018

क्या ओवैसी इस देश की मौजूदा राजनीति के 'नए जिन्ना' हैं ?


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असदुद्दीन ओवैसी के बारे में एक बड़े तबके का मानना है कि वो देश की सियासत में मुसलमानों की हिस्सेदारी की आवाज़ हैं. लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिनका मानना है कि ओवैसी की राजनीति कट्टरपंथ पर टिकी है. उनकी राजनीति का केंद्र है सिर्फ़ एक मज़हब है और वो मज़हब है इस्लाम. हाल ही में एक रैली में ओवैसी ने जब सेक्युलरिज्म को ही छल करार देते हुए मुसलमानों की ज़मात से एकजुट होने की अपील की तो आरोप लगा कि देश में एक नया जिन्नाह खड़ा हो रहा है. सवाल है क्या वाकई ओवैसी की सियासत में जिन्ना की झलक है ?असदुद्दीन ओवैसी को नया जिन्नाह कहे जाने के पीछें हैं असदुद्दीन ओवैसी की तक़रीरें. पुराने हैदराबाद की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत ऑल इंडिया मुस्लिमीन. ओवैसी के बारे में कहा जाता है कि वो मुस्लिमों के जज़्बात उभारने में माहिर हैं. देश की मुस्लिम सियासत का विकल्प सेक्यूलरिज्म की धुरी पर घूमता रहा है. ऐसे वक्त ओवैसी मुस्लिमों के लिए अलग ही राजनीति की लकीर खींचते हैं. वो मुसलमान एकजुट होकर मुस्लिम उम्मीदवारों को ही वोट देने की अपील करते हैं. यही बात उन्हें नया जिन्ना होने का आरोप लगाती है.


एमआईएम पार्टी का इतिहास भी ओवैसी का पीछा नहीं छोड़ता


असदुद्दीन ओवैसी 80 साल पुरानी पार्टी की नुमाइंदगी करते हैं. नवाब महमूद नवाज ने 1927 में मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लमीन की नींव रखी थी.आज़ादी से 3 महीने पहले यानी मई 1947 जब भारत की आज़ादी की तारीख़ तय हो चुकी थी. सरदार पटेल बड़ी-बड़ी रियासतों का विलय भारत में कराने में जुटे हुए थे.उस समय 562 रजवाड़ों में से सिर्फ़ तीन को छोड़कर सभी ने भारत में विलय का फ़ैसला किया. ये तीन रजवाड़े थे कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद.


7 सितम्बर, 1948 को हैदराबाद के निज़ाम ने भारतीय सेना के आगे आत्म-समर्पण किया
MIM उस वक्त कासिम राज़वी की अगुआई में हैदराबाद निज़ाम की निजी सेना थी. MIM के पास उस वक़्त 2 लाख रजाकार थे. आज़ादी के लिए कट्टरपंथी क़ासिम राज़वी के नेतृत्व में रज़ाकार जन सभाएं कर रहे थे और ग़ैर-मुस्लिमों पर हमले कर रहे थे. सरदार पटेल चाहते थे कि भारत के बीचों बीच पड़ने वाली रियासत हैदराबाद का निज़ाम किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहिए.


उस समय सरदार पटेल की प्राथमिकता थी हैदराबाद का भारत में विलय. 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने निज़ाम के महल पर हमला बोल दिया. निज़ाम के MIM वाले रजाकारो ने भारतीय सेना के साथ लड़ाई शुरू कर दी. ये संघर्ष 4 दिन तक चला. 17 सितम्बर, 1948 को हैदराबाद के निज़ाम ने आत्म-समर्पण कर दिया. रज़ाकारों ने हार मानकर हथियार डाल दिए.


असदुद्दीन के दादा मौलाना अब्दुल वहीद ओवैसी को भी नफरत फैलाने के लिए 11 महीने तक जेल हुई


1948 में MIM पर सरकार ने पाबंदी लगा दी. 1957 में रज़ाकार कासिम राज़वी पाकिस्तान चला गया और MIM की कमान असदुद्दीन ओवैसी के दादा अब्दुल वहीद ओवैसी को सौंप गया. यही वो साल था जब नेहरू सरकार ने MIM पर लगी पाबंदी को हटाया था और इसी साल से असदुद्दीन ओवैसी के दादा ने नफ़रत की सियासत फिर छेड़ दी थी. असदुद्दीन के दादा मौलाना अब्दुल वहीद ओवैसी को भी नफरत फैलाने के लिए 11 महीने तक जेल में रखा गया था.


अब्दुल वहीद ओवैसी को 14 मार्च 1958 को गिरफ़्तार किया गया था. वहीद पर हैदराबाद पुलिस ने सांप्रदायिक सद्भावना को भंग करने, मज़हबी नफरत फैलाने देश के ख़िलाफ़ मुसलमानों को भड़काने के आरोप लगाए थे.


MIM ने अपनी पहली चुनावी जीत 1960 में दर्ज की. तब असदुद्दीन ओवैसी के पिता सलाहुद्दीन ओवैसी हैदराबाद नगर पालिका के लिए चुने गए. फिर 2 साल बाद वह विधान सभा के सदस्य बने तब से मजलिस की ताकत लगातार बढती गई.


  जबसे असदुद्दीन ने पार्टी की कमान संभाली तबसे देशभर में उसको पहचान दिलाई
सलाहुद्दीन ओवैसी हैदराबाद से लगातार 6 बार सांसद रहे. 1984 से हैदराबाद लोकसभा सीट पर MIM का कब्ज़ा बरकरार है. 1984 वही दौर था जब असदुद्दीन ओवैसी सेंट मैरी जूनियर कॉलेज में पढ़ रहे थे. राजनीति से ज्यादा वास्ता नहीं था. 1989-1994 में उन्होंने लंदन के लिंकन कॉलेज से बैरिस्टर की डिग्री हासिल की, लेकिन 1994 से ही असदुद्दीन का नाता राजनीति से जुड़ गया.
1994 और 1999 में अदुद्दीन हैदराबाद की चारमीनार विधानसभा सीट से विधायक रहे. 2004, 2009 और 2015 में हैदराबाद लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. असदुद्दीन 2008 से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष हैं.


ओवैसी खानदान की पार्टी AIMIM की पहचान उनके पिता के ज़माने तक हैदराबाद और आस-पास के इलाकों में ही थी लेकिन जबसे असदुद्दीन ने पार्टी की कमान संभाली तबसे देशभर में उसको पहचान दिलाई और उसकी वज़ह है उनका हमलावर अंदाज़ और कड़क तेवर.


उनके छोटे भाई के भड़काऊ बयान के बाद ये धारणा और बढ़ी


असदुद्दीन ओवैसी की राजनीतिक शैली और आक्रामक है. यही उन्हें दूसरे अल्पसंख्यक नेताओं से अलग खड़ा करती है. उनकी ताकत है मुद्दों पर पकड़, बातचीत का हमलावर लहज़ा. लेकिन उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी की राजनीति बिल्कुल रज़ाकारों के कट्टरपंथ पर चलती है. अकबरुद्दीन के एक बयान की वजह से देश भर में उनकी पहचान नफरत और बांटने वाली राजनीति की होने लगी. असदुद्दीन तर्कपूर्ण तरीके से मुसलमानों के हक की बात करके उन्हें लामबंद करते हैं, लेकिन अकबरुद्दीन की राजनीति एकदम कट्टर है फिर भी असदुद्दीन ने उन्हें कभी नहीं रोका. इसको तो असदुद्दीन की राजनीति की कुटिल चाल ही माना जाना चाहिए.


राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि असदुद्दीन बांटने वाली राजनीति तो करते हैं लेकिन चालाकी भरे अंदाज़ में. वो इसी देश में रहने, जीने मरने की कसमें भी खाते हैं और इसी देश में मुसलमानों को बाकी समाज से अलग सिर्फ मुसलमानों के लिए जीने की कसमें भी दिलाते हैं. इसीलिए असदुद्दीन को बाकी मुस्लिम नेताओं की कतार में नहीं खड़ा किया जाता. उनकी हर बात अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिम युवाओं पर अलग प्रभाव छोड़ती है.


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अहमदाबाद: गैंगरेप पीड़िता का आरोप- ADG डाल रहे हैं बयान बदलने का दबाव


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गुजरात के अहमदाबाद में चलती कार के अंदर कथित गैंगरेप की शिकायत दर्ज कराने वाली युवती ने क्राइम ब्रांच की एडिशनल डीजी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. युवती का कहना है कि पुलिस अपराधियों का साथ दे रही है और उस पर बयान बदलने के लिए दबाव डाल रही है. युवती ने पुलिस पर पूछताछ के नाम पर उसे प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है.बता दें कि 22 वर्षीय युवती का आरोप है कि चार युवकों ने चलती कार में उसके साथ गैंगरेप किया. महिला ने शुक्रवार को पुलिस में इस बाबत शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बताया कि चार युवकों ने अपहरण कर उसे कार में बैठा लिया. फिर नशीला इंजेक्शन देकर उसके साथ गैंगरेप किया.


युवती का कहना है कि चारों लड़कों ने गैंगरेप का वीडियो भी बनाया था और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर तीन महीने तक उसका यौन शोषण भी किया.


इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की एडिशनल डीजी को सौंपी गई थी. हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार, युवती ने जो शिकायत दर्ज कराई वह उसके द्वारा पेश किए गए सबूतों से मेल नहीं खा रहे हैं. इसी के चलते अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है.


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GST की सालगिरह पर बोले मोदी- दूध और मर्सिडीज़ पर नहीं लग सकता समान टैक्स


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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जीएसटी व्यवस्था के तहत सभी वस्तुओं पर एक ही दर से टैक्स लगाने को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि मर्सिडीज कार और दूध पर एक ही दर से कर नहीं लगाया जा सकता. उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत सभी वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की एक समान दर से कर लगाने की कांग्रेस पार्टी की मांग को अगर मान लिया जाता है तो इससे अनाज और कई ज़रूरी वस्तुओं पर कर बढ़ जायेगा.प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के एक साल के भीतर ही अप्रत्यक्ष करदाताओं का आधार 70 प्रतिशत तक बढ़ गया. इसके लागू होने से चेक – पोस्ट समाप्त हो गए. इसमें 17 अलग-अलग करों और 23 उपकरों को समाहित किया गया है.


मोदी ने कहा कि जीएसटी समय के साथ बेहतर होने वाला सिस्टम है. इसमें राज्य सरकारों, व्यापार जगत के लोगों और संबंधित पक्षों से मिली जानकारी और अनुभवों के आधार पर इसमें लगातार सुधार किया गया है.


जीएसटी में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, सेवाकर, राज्यों में लगने वाले वैट तथा अन्य करों को समाहित किया गया है. इसका उद्देश्य इंस्पेक्टर राज को समाप्त करते हुए अप्रत्यक्ष करों को ‘‘सरल’’ बनाना है.प्रधानमंत्री ने ‘स्वराज्य’ पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह काफी आसान होता कि जीएसटी में केवल एक ही दर रहती लेकिन इसका यह भी मतलब होगा कि खाने-पीने की वस्तुओं पर टैक्स की दर शून्य नहीं होगी. क्या हम दूध और मर्सिडीज पर एक ही दर से टैक्स लगा सकते हैं?’’


पीएम मोदी ने कहा, ‘‘इसलिये कांग्रेस के हमारे मित्र जब यह कहते हैं कि हमारे पास जीएसटी की केवल एक दर होनी चाहिए तो उनके कहने का मतलब है कि वह खाने-पीने की चीज़ों और दूसरी उपभोक्ता वस्तुओं पर 18 फीसदी की दर से कर लगाना चाहते हैं जबकि वर्तमान में इन उत्पादों पर शून्य अथवा 5 प्रतिशत की दर से कर लगाया जा रहा है.’’


स्वराज पत्रिका की वेबसाइट पर जारी साक्षात्कार में मोदी ने कहा कि आजादी के बाद से जहां 66 लाख अप्रत्यक्ष करदाता ही रजिस्टर्ड थे वहीं 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद इन करदाताओं की संख्या में 48 लाख नये उद्यमियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है.


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एसएफसी में शामिल होगी 'अग्नि-5' मिसाइल प्रणाली, जद में होगा पूरा चीन


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भारत अपनी अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली ‘अग्नि-5’ के पहले बैच को शामिल करने की प्रक्रिया में है. ‘अग्नि-5’ की मारक क्षमता के दायरे में पूरा चीन आता है. इस मिसाइल प्रणाली से देश की सैन्य ताकत में जबर्दस्त इजाफा होने की उम्मीद है.आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 5,000 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल प्रणाली परमाणु सामग्री ले जाने में सक्षम है. इस मिसाइल प्रणाली को सामरिक बल कमान (एसएफसी) में शामिल करने की तैयारी है.


उन्होंने बताया कि देश के सबसे अत्याधुनिक हथियार को एसएफसी को सौंपे जाने से पहले कई परीक्षण किए जा रहे हैं.


रक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि यह मिसाइल बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझाऊ और हांगकांग जैसे शहरों सहित चीन के किसी भी इलाके को लक्ष्य बनाकर भेद सकती है.पिछले महीने ‘अग्नि-5’  का ओड़िशा तट से सफल परीक्षण किया गया था. सूत्रों का कहना है कि एसएफसी में शामिल किए जाने से पहले कई अन्य परीक्षण अगले कुछ हफ्तों में होने वाले हैं.


‘अग्नि-5’  कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, ‘‘यह एक सामरिक संपत्ति है जो दूसरे देशों के लिए रोक का काम करेगी. हम इस सामरिक परियोजना के अंतिम चरण में हैं.’’


उन्होंने कहा कि अपनी श्रृंखला में यह सबसे आधुनिक हथियार है, जिसमें नौवहन के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियां हैं और परमाणु सामग्री साथ ले जाने की इसकी क्षमता दूसरी मिसाइल प्रणालियों से कहीं ज्यादा है.


सूत्रों ने बताया कि अग्नि -5 का पहला बैच जल्द ही एसएफसी को सौंप दिया जाएगा. हालांकि, उन्होंने इस परियोजना के बारे में इससे ज्यादा बताने से इनकार कर दिया.


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Saturday, 30 June 2018

#SerialKillers: हर शिकार के लिए एक नया गमछा खरीदता था ये रिक्शेवाला


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देश दुनिया के सीरियल किलर्स #SerialKillers पर आधारित इस विशेष वीकेंड सीरीज़ में आप पिछले दो सप्ताह में  5 कहानियां पढ़ चुके हैं. इस हफ्ते पढ़िए भारत के एक ऐसे सीरियल किलर की कहानी जिसने अपनी एक लत के लिए खेला कत्ल का खेल.READ: #SerialKillers : हर कत्ल के लिए लेता था कुल्हाड़ी, हथौड़े या फावड़े जैसा नया हथियार


फरीदाबाद की एक इंडस्ट्री में काम करने वाला सीकरी निवासी रवि ओल्ड फरीदाबाद पुलिस चौकी के पास खड़ा था. साल 2014 की एक रात करीब सवा नौ बजे का वक्त था, तभी एक रिक्शे वाला रवि के पास पहुंचा. रवि रिक्शे में बैठ गया और कहा कि उसे एक बीयर खरीदना है तो किसी वाइन शॉप पर चले. थोड़ी दूर जाकर रिक्शा एक सुनसान सी जगह पर रुका. रिक्शे वाले ने कहा कि वह दो मिनट में हल्का होकर आता है. रवि इंतज़ार कर रहा था कि तभी उसके गले में पीछे से एक गमछा पड़ा, जो कसता चला गया.


READ: Serial Killer: काम था दवाएं देना लेकिन वो देता रहा मौतउस गमछे की जकड़ और बढ़ती गई और कुछ ही देर बाद रवि का दम घुटने लगा और उसकी आंखें बंद हो गईं. रवि के निढाल होते ही वह गमछा उसके गले से हटा. रिक्शे वाले ने वह गमछा वहीं फेंका और रवि की जेब से पर्स और मोबाइल फोन लेकर चला गया. थोड़ी देर बाद रवि को होश आ गया. बस यही उस रिक्शे वाले की गलती थी कि वह रवि को मरा हुआ समझकर छोड़ गया. यही गलती कुछ ही दिनों में इस किलर को ले डूबी.


रवि को समझा गया हत्यारा
रिक्शे वाले किलर के हाथों बाल-बाल बचे रवि को कुछ ही दिनों में पुलिस ने पकड़ लिया. पुलिस का मानना था कि रवि ही वह सीरियल किलर है, जो पिछले तीन महीनों से एक के बाद एक हत्याएं कर रहा है. रवि ने किसी तरह पुलिस को यकीन दिलाया कि वह सीरियल किलर नहीं, बल्कि उस किलर का एक शिकार था जो हमले में बाल-बाल बचा.


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अस्ल में, उस रिक्शे वाले किलर ने रवि की जेब से जो पर्स चुराया था, उसमें से पैसे निकालकर वह पर्स फरीदाबाद के सेक्टर 15 में निर्माणाधीन एक मेट्रो स्टेशन के नज़दीक फेंक दिया था. इस पर्स में रवि का फोटो भी था और इसी को सुराग मानते हुए पुलिस रवि तक पहुंच गई थी. लेकिन रवि की गवाही के बाद यह एक हद तक साफ हो गया था कि सीरियल किलर तक पहुंचने का महीनों से चल रहा पुलिस का सफर अभी खत्म नहीं हुआ.


एक और शिकार बचने में हुआ कामयाब
कुछ ही दिनों बाद रिक्शे वाले उस किलर के हाथों एक और व्यक्ति तेजेंद्र बच गया. तेजेंद्र भी उसी तरह लूट का शिकार हुआ था जैसे रवि. तेजेंद्र पुलिस के पास पहुंचा और उसने बताया कि उसे बेहोशी की हालत में वह किलर एनआईटी इलाके में फेंक कर उसका सामान लूटकर फरार हो गया. तेजेंद्र से पुलिस को एक खास बात यह पता चली कि वह रिक्शे वाला पूरे समय अपना मुंह गमछे से ढंके रहता था. इसके अलावा उसकी कद काठी के बारे में भी उसने जानकारी दी.


अब गमछा था किलर की पहचान
तेजेंद्र की गवाही के बाद साफ था कि वह किलर अपने दस्तखत के तौर पर गमछा अपने शिकार के पास छोड़ देता है. तीन महीनों में हुईं 5 हत्याओं में मृतकों के पास से गमछा ज़रूर बरामद किया गया था. एकाध केस में यह पता चल चुका था कि मृतक गमछा नहीं पहनता था लेकिन यह अब तक साफ नहीं था कि गमछा मृतकों का ही था, कातिल का या इत्तेफाकन किसी का. रवि और तेजेंद्र की गवाही के बाद साफ था कि यह गमछा उस किलर की पहचान है.


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रिक्शा चलाने वाला एक शख्स जो गमछे से मुंह ढंके रहता है, ऐसे आदमी की खोज में पुलिस भटक रही थी तभी एक ऐसे व्यक्ति के संदिग्ध होने की टिप मिली. एक पुलिस वाला सिविल ड्रेस में उस रिक्शे वाले के पास पहुंचा और सवारी के तौर पर उसे कहीं चलने को कहा. रिक्शे वाले ने रिक्शे को एक सुनसान जगह पर उसी बहाने से रोका. पुलिस वाला चौकन्ना था कि उस पर पीछे से हमला होगा. हमला हुआ, गले में गमछा डाला गया लेकिन कुछ ही पलों में पुलिस वाले ने जवाब देते हुए उस रिक्शे वाले को काबू कर लिया और यह गमछा किलर पुलिस की गिरफ्त में आ गया.


गमछा किलर की कहानी : गांजा, सुल्फा, शराब
गमछे वाले सीरियल किलर के रूप में बदनाम होने वाला यह शख़्स उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले का रहने वाला रिंकू था. जनवरी 2015 में जब इसे पकड़ा गया तब इसकी उम्र 27 साल थी. नशेड़ियों की संगत में नशे का आदी हो चुका था और गांव में वह उतना पैसा नहीं कमा पाता था जिससे नशे की तलब पूरी हो सके. इसी कारण से गरीब घर का लड़का रिंकू पैसे कमाने 2009 के आसपास दिल्ली आया था. यहां उसने दोस्तों की मदद से रिक्शे का इंतज़ाम कर उन्हीं की तरह रिक्शा चलाना शुरू किया. लेकिन इससे भी उसे ज़रूरत पूरी करने जितने पैसे नहीं मिल पा रहे थे.


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नशे के गुलाम रिंकू को जिस दिन सवारी न मिलती तो वह नशा नहीं कर पाता और बिना नशे के वह बेचैन हो उठता था. इसी बेचैनी में उसने जुर्म की दुनिया में एंट्री ली और अपने दो दोस्तों की मदद से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में 2009 से 2012 तक तीन कत्लों को अंजाम दिया. उसे शक की बिना पर पुलिस ने पकड़ा भी लेकिन वह 2014 में ज़मानत पर रिहा हो गया. इसके बाद रिंकू फिर अपने गांव गया लेकिन तीन महीनों से ज़्यादा वह गांव में रह नहीं सका और नशे की ज़रूरत उसे फरीदाबाद ले गई.


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दिल्ली में रिंकू पुलिस की नज़र में आ चुका था इसलिए फरीदाबाद चला गया. शुरुआत में उसने वहां अपनी बहन की मदद से कुछ दिन बिताए फिर एक रिक्शे का इंतज़ाम कर लिया. और रिक्शे वाले गमछे किलर के रूप में यहां रिंकू ने तीन महीनों के भीतर पांच हत्याओं को अंजाम दिया.


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पीएम मोदी के गढ़ से 2019 के लिए चुनावी अभियान का आगाज़ करेंगे राहुल गांधी


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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात में जल्द चुनावी अभियान का आगाज़ करेंगे. इस वक्त गुजरात में 77 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है. राहुल गांधी का यह अभियान 11 और 15 जुलाई को राज्य के दौरे के साथ ही शुरू हो जाएगा.राहुल गांधी ने पिछले साल 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में काफी यात्राएं की थीं और चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन में सुधार के साथ 77 सीटें हासिल होने का श्रेय उनकी इन्हीं यात्राओं को दिया गया था. कांग्रेस को 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में 2012 में सिर्फ 54 सीटें मिली थीं जो कि 2017 में बढ़कर 77 हो गईं.


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गुजरात विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने सत्ताधारी बीजेपी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधने में आक्रामक रवैया अपनाया था. राहुल गांधी सौराष्ट्र के जूनागढ़, राजकोट और भावनगर जिलों का दौरा करेंगे. इन इलाकों में कांग्रेस ने दो दशक बाद बेहतर प्रदर्शन किया और पिछले विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटें कांग्रेस को इन्हीं इलाकों में मिलीं.ये भी पढ़ेंः मंदसौर रेप केस: राहुल गांधी बोले- बच्चियों की हिफाजत के लिए एकजुट हो देश


पार्टी सूत्रों ने बताया कि वह राज्य में पार्टी के नेताओं के साथ लंबी बैठकें कर उनसे विचार-विमर्श करेंगे. राहुल गांधी दिसंबर तक राज्य के तीन से चार दौरे कर सकते हैं. वह यहां लोगों से दो बार संपर्क स्थापित करेंगे.


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