Sunday, 1 July 2018

बुराड़ी डेथ मिस्ट्रीः 11 मौतों के इस मामले को आखिर आत्महत्या क्यों नहीं कह सकते


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बुराड़ी के संतनगर में एक ही घर में एक साथ 11 लोगों की लाशों से सनसनी फैल गई है. न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि दिल्‍ली सरकार तक सकते में आ गई है. पहली नजर में जहां इस घटना को आत्‍महत्‍या माना जा रहा था. पुलिस की ओर से भी इसे आत्‍महत्‍या बताया गया हालांकि बाद में हत्‍या की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया. लेकिन अब चारों ओर से इसे साजिशन हत्‍या करार देकर जांच कराए जाने की मांग उठ रही है.बेहद ही चौंकाने वाला है कि एक ही घर में 11 सदस्‍यों की मौत हो जाती है और पड़ोसियों को कानों-कान खबर तक नहीं होती. इस घटना पर बुराड़ी में मृतकों के परिजनों और पड़ोसियों का कहना है कि सभी लोगों की हत्‍या की गई है. इस पूरी घटना के दौरान जो बातें सामने आ रही हैं उससे भी यही अनुमान लगाया जा रहा है कि यह हत्‍या है न कि आत्‍महत्‍या.


मुंह पर लगी टेप और बंधे हाथ बता रहे हत्‍या हुई हैमहावीर सिंह ने कहा कि हो सकता है पहले खाने में कुछ मिला दिया हो और फिर सबको लटका दिया हो. जिस हिसाब से चेहरे पर टेप या पट्टी लगाई गई है वह बहुत ही अजीब है. ऐसे में एक की आत्‍महत्‍या लेकिन बाकी सब की हत्‍या का अंदेशा हो रहा है. या तो बाहर के किसी जानकार ने या घर के ही किसी शख्‍स ने इसे अंजाम दिया है.


घर के सामने का सीसीटीवी तोड़ा
वहीं पड़ोसी वीरेंद्र कहते हैं कि मृतकों के घर के सामने सीसीटीवी कैमरा लगा था. इससे पूरी गली की निगरानी होती थी लेकिन कुछ दिन पहले ही सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया गया. ताकि गली में किसी के आने-जाने का कोई सुराग न मिल सके. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि हत्‍या की साजिश काफी समय से चल रही होगी. इसे पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया गया है.


घर और कमरे का गेट खुला था
पड़ोसी जितेंद्र ने बताया कि शनिवार रात को करीब पौने 12 बजे वे अपने ऑफिस को बंद करने लगे. तभी मृतक भाटी परिवार के बेटे उनके पास आकर खड़े हो गए. वे भी अपनी दुकान बंद कर रहे थे. कुछ देर बातचीत हुई. फिर सवा 12 बजे के करीब जितेंद्र अपना ऑफिस बंद करके चले गए. लेकिन सुबह जब सात बजे तक भाटी परिवार की परचून की दुकान नहीं खुली तो चिंता हुई. पड़ोस के ही सरदार जी और दूधवाला घर के दरवाजे पर गए तो मेन गेट खुला था. जब वे ऊपर पहुंचे तो कमरे का भी दरवाजा खुला था.


ऐसे में दोनों दरवाजों के खुले होने से ये आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग रात में हत्‍या करने आए हों और फिर चले गए हों. ये परिवार हमेशा दरवाजा बंद करके सोता था लेकिन घटना के बाद दोनों दरवाजे खुले मिले हैं.


तीसरी मंजिल पर मिला कुत्‍ता
मृतकों के परिवार से गहरा ताल्‍लुक रखने वाले प्रवीण मित्‍तल कहते हैं कि ये रहस्‍य जरूर है लेकिन एक बात स्‍पष्‍ट दिख रही है कि सभी लोगों की हत्‍या की गई है. इस परिवार का कुत्‍ता अभी भी जिंदा है. जो कि पहली ही मंजिल पर परिजनों के साथ रहता था. इस कुत्‍ते के लिए पहली मंजिल पर ही अगल कमरा भी बनाया गया है. रात में इसे खुला छोड़ा जाता था लेकिन इस घटना के बाद वह तीसरी मंजिल पर छत पर बंधा हुआ मिला है.


हालांकि ये हो सकता है कि इसे आत्‍महत्‍या दिखाने के लिए कुत्‍ते को जिंदा छोड़ दिया हो. इस परिवार को कोई परेशानी नहीं थी. कल ही सब मिले थे. ऐसे में आत्‍महत्‍या कैसे की जा सकती है. अगर परेशान थे तो कुछ तो चेहरे पर चिंता जैसा दिखाई देता लेकिन ऐसा कुछ नहीं था.


कल ही शॉपिंग करके लौटे बच्‍चे आत्‍महत्‍या तो नहीं करेंगे
रिश्तेदार केतन नागपाल ने कहा कि जब मृतकों को देखा तो नानी नीचे जमीन पर पड़ी थी. बाकी सब फांसी पर लटके थे. क्‍या सब एक साथ फांसी पर लटके? क्‍या सबको एक साथ मरना था ? अगर ऐसी मानसिक स्थिति बनी थी तो थोड़ी देर पहले ही तो सब शॉपिंग करके लौटे थे. अचानक फिर आत्‍महत्‍या करने के लिए उतावले हो गए ?


घर में कोई आर्थिक समस्‍या भी नहीं थी. कोई झगड़ा नहीं था. परिवार बेहद धार्मिक था.


ऐसे में कई ऐसे सवाल हैं जो परिजन और रिश्‍तेदार उठा रहे हैं. उनका मानना है कि यह आत्‍महत्‍या नहीं हत्‍या है. हालांकि पुलिस तफ्तीश, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट और पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्‍य से पर्दा उठ सकेगा.


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2019 में फिर '20' साबित होंंगे पीएम मोदी! जीत के लिए BJP ने बनाई ये छह रणनीतियां


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भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में साढ़े चार साल हो गए हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं. इसलिए बीजेपी विपक्ष के खिलाफ आक्रामक तेवर में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सबसे भरोसेमंद सिपहसालार अमित शाह ने वोटों की मोर्चेबंदी और अपने संगठन के कील-कांटे बुहारने में ताकत झोंक दी है. अब निशाना 2014 से ज्यादा बड़ा लक्ष्य हासिल करना है. इसके लिए पार्टी ने ‘मिशन स्वर्णिम अष्टभुज’ तैयार किया है.जीत के लिए BJP की 6 रणनीति
बीजेपी का मिशन जीत के लिए ‘6 कदम-6 रणनीतियों’ को मिलाकर तैयार हुआ है. इन रणनीतियों में कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक वोटों और सीटों का गणित शामिल है. रणभेरी बज चुकी है और बीजेपी अध्यक्ष से लेकर कार्यकर्ता तक मैदान में कूद चुके हैं.


मिशन 2019 के लिए बीजेपी की रणनीति के केंद्र में जम्मू-कश्मीर, गन्ना किसान,  प्लान ‘शहंशाह’, पश्चिम बंगाल, हिन्दुत्व, राम-मन्दिर और रूठों को मनाना है.रणनीति नंबर 1: कश्मीर दांव से राष्ट्रवादी छवि निखारी
यह उस (तस्वीर में) सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत जिसे विपक्ष ने 29 सितंबर 2016 को नकार दिया गया था. सेना की ओर जारी सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो से साफ है कि कैसे जाबांज़ जवानों ने LoC पार करके पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बने आतंक के कैंप तबाह किए थे. यह वीडियो सबूत जारी किए जाने के बाद बीजेपी का वो दावा भी मजबूत हुआ कि आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ सेना को खुली छूट है. साथ ही बीजेपी नेता विरोधियों पर हमलावर अंदाज में भी आ गए.



सर्जिकल स्ट्राइक की तस्वीर (फाइल फोटो)

 


लड़ाई में जीत का फायदा हर जगह सत्ता दल को मिलता है और हार का नुकसान भी उठाना पड़ता है. चाहे कोई दल उसका प्रचार करे या नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक भी पाकिस्तान के खिलाफ एक छोटी लड़ाई ही थी. जाहिर है कि अब बीजेपी इसका फायदा पूरे देश में उठाने की कोशिश करेगी.


2014 के चुनाव प्रचार में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी आतंकवाद, अलगाववादियों पर नरम रवैए के लिए यूपीए सरकार को कोसते थे. 4 साल में मोदी सरकार ने अलगाववादियों और आतंकवादियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं. जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने पहले सरकार से समर्थन वापिस लिया.


राज्यपाल शासन लगने के बाद से अलगाववादियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए. जेकेएलएफ के अध्यक्ष यासीन मलिक को पुलिस हिरासत में लिया गया. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंद किया गया. साथ ही कई अलगाववादियों पर ‘टेरर फंडिंग’ के केस भी दर्ज किए गए. बीजेपी को उम्मीद है कि कश्मीर की प्रयोगशाला में उठाए गए राजनीतिक और रणनीतिक कदम उसे पूरे देश में फायदा पहुंचाने वाले हैं.


रणनीति नंबर 2: गन्ने के गणित से वोटों पर नज़र
यूपी चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी का वादा था गन्ना किसानों को 15 दिन में भुगतान देना, लेकिन यह हो नहीं सका और इसके बाद कैराना में बीजेपी की हार का जिम्मेदार गन्ने को मान लिया गया. बीजेपी ने भी इस बात को समझा और शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में यूपी, उत्तराखण्ड, पंजाब, कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों से मुलाकात की.


प्रधानमंत्री ने हर फसल के लागत मूल्य से किसानों को डेढ़ गुना मूल्य देने का वादा दिया. कैराना की हार के बाद चीनी मिलों की मदद के लिए 8,500 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर किया गया था. देश में 9.2 करोड़ किसान परिवार हैं. इसका मतलब करीब 45 करोड़ लोग. सरकार अपने इस कदम से एक बड़े वोट बैंक को बचाना चाहती है.


प्रधानमंत्री सरकारी योजनाओं के स्तर पर जनता को बीजेपी के साथ जोड़ने में लगे हैं तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह अपने संगठन के जरिए जनता को पार्टी से जोड़ने का काम कर रहे हैं.


रणनीति नंबर 3: शाह का प्लान ‘शहंशाह’
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उत्तर प्रदेश में बीजेपी की तैयारियों का टेस्ट लेने के लिए 2 दिन के यूपी दौरे पर जाने वाले हैं. इसी कड़ी में 15-16 जुलाई को 2 दिन के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंच रहे हैं. अमित शाह 4 जुलाई को वाराणसी और मिर्जापुर में पार्टी नेताओं से मिलेंगे. इसके बाद वह 5 जुलाई को आगरा जाकर पश्चिमी यूपी के बीजेपी नेताओं की तैयारी का जायजा लेंगे.


बीजेपी को 2014 में उत्तर प्रदेश से ही सबसे ज्यादा सीट मिली थीं. पार्टी ने एसपी और बीएसपी के गठबंधन को देखते हुए उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति तेज कर दी है. लेकिन अमित शाह के प्लान में उत्तर प्रदेश के साथ इस बार पश्चिम बंगाल भी शामिल है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गुरुवार को पुरुलिया में रैली की. रैली के बहाने शाह ने मारे गए अपने दो पार्टी कार्यकर्ताओं के मसले पर तृणमूल कांग्रेस को घेरने की कोशिश की.


फिलहाल, पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रमुख विपक्षी दल सीपीएम और कांग्रेस को पछाड़कर नंबर दो की कुर्सी पर काबिज होने की जद्दोजहद कर रही है. उसे कुछ जगहों पर कामयाबी भी मिली है. इसीलिए अमित शाह ने इस बार पश्चिम बंगाल की 42 में से 22 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है.


पश्चिम बंगाल में वोटों का गणित
2009 में लोकसभा चुनाव में BJP को 6.14% वोट मिले थे जबकि 2014 में बीजेपी को वोट प्रतिशत 17.02 हो गया. BJP पंचायत चुनाव में भी दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी. इसीलिए अमित शाह को उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल से वो 22 सीट निकाल लेंगे, लेकिन यह इतना आसान नहीं होने वाला है.


BJP की रणनीतियां तैयार की जा रही हैं और अमल में लाई जा रही हैं, लेकिन उसका असल एजेंडा है हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण. इसी के बूते 2014 में बीजेपी ने चुनाव जीता था और 2019 से पहले एक बार फिर एक पुरानी तस्वीर सामने आई जो बीजेपी के हिन्दुत्व एजेंडे को दिखाने वाली साबित हुई.


रणनीति नंबर 4: हिन्दुत्व विचारधारा का आधार
2011 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोल टोपी पहनने से इनकार किया था और बीते हफ्ते योगी आदित्यनाथ जब मगहर में संत कबीर की मजार पर पहुंचे तो उन्होंने भी गोल टोपी पहनने से इनकार कर दिया. ये दोनों ही चेहरे बीजेपी के हिन्दूवादी एजेंडे के पोस्टर बॉय हैं.



पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

योगी का यह रुख बिल्कुल प्रधानमंत्री से मिलता जुलता था यानी साफ संदेश कि हिन्दुत्व के एजेंडे से कोई समझौता नहीं. हिन्दुत्व के एजेंडे के साथ-साथ बीजेपी के एजेंडे में ‘राम मंदिर’ सबसे ऊपर है.


रणनीति नंबर 5: चुनाव से पहले ‘राम-मंदिर’ कार्ड
‘राम मंदिर’ ही बीजेपी को पहली बार सत्ता तक लाया था और ‘राम मंदिर’ बनवाने की बीजेपी की मूल प्रतिज्ञा आज भी अधर में है. हाल ही में संत समाज ने भी ‘राम मंदिर’ बनवाने के मुद्दे को खूब हवा दी है. बीजेपी मान रही है कि इस मसले का हल सुप्रीम कोर्ट जल्द निकालेगी.


रणनीति नंबर 6: शाह रूठों को मनाने में जुटे
6 जून को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह सहयोगी दल शिव सेना से मिलने मुंबई पहुंचे. इसके अलावा अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल से भी मिले. बीजेपी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन में शामिल कई सहयोगी पार्टियां नाराज चल रही हैं. NDA में बीजेपी एक ऐसे संकट से गुजर रही है जैसे 2004 का सूरते हाल था. इसकी वजह है 4 साल तक सहयोगियों की उपेक्षा. मार्च में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देसम पार्टी ने गठबंधन से नाता तोड़ दिया. शिव सेना भी खफा हो गई लेकिन अब अमित शाह ने एनडीए को मजबूत करने के लिए अपने साथियों को मनाने की मुहिम छेड़ दी है.


ये बीजेपी के वो 6 रणनीतिक कदम हैं, जिनसे 2019 के लिए अपने किले को मजबूत बनाया जा रहा है. विपक्ष बीजेपी को हराने का सपना देख रहा है लेकिन अभी तक गठबंधन का सूरते हाल साफ नहीं है. सीटों की कलह जारी है, यह भी तय नहीं कि राहुल गांधी का नेतृत्व कौन-कौन मानने को तैयार. ठीक उसी वक्त विपक्ष की कलह के बीच बीजेपी अपनी लड़ाई छेड़ चुकी है.


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किश्‍तवाड़ जिला प्रशासन का फरमान- वॉट्सऐप ग्रुप बनाने से पहले लेनी होगी अनुमति


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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अफवाहों के प्रसार को रोकने के प्रयास के तहत किश्तवाड़ जिला प्रशासन ने वॉट्सऐप ग्रुप और फेसबुक चलाने वाले लोगों से पहले अपनी पृष्ठभूमि की पुलिस से जांच कराने और उसे चलाना जारी रखने के लिये 10 दिन के भीतर अनुमति मांगने को कहा है. कठोर कदम के तहत लोगों से यह भी कहा गया है कि वे अधिकारियों को शपथ पत्र देकर कहें कि उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड सामग्री के लिये वह व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे. इस तरह की सामग्री से कानून के संभावित उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिये उत्तरदायी होंगे.यह आदेश जिला विकास आयुक्त (डीडीसी) अंग्रेज सिंह राणा ने शुक्रवार को जारी किया. उन्होंने आगाह किया है कि ऐसे लोगों के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून, गैर कानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, रणबीर दंड संहिता और साइबर अपराध कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है. अधिकारियों ने कहा कि डीडीसी ने किश्तवाड़ के पुलिस अधीक्षक अबरार चौधरी द्वारा 22 जून को उन्हें भेजे गए पत्र के जवाब में यह आदेश जारी किया.


एसएसपी के पत्र में कहा गया था कि जिले में समाचार समूह समेत बड़ी संख्या में व्हाट्स ऐप समूह चल रहे हैं और अक्सर पाया गया है कि वीडियो, ऑडियो और लिखित सामग्री के रूप में अफवाह, गलत सूचना और अपुष्ट या आधी-अधूरी सूचना के रूप में प्रसार किया जा रहा है और इससे कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होने की आशंका जन्म ले रही है.


उन्होंने कहा कि जिले में किसी भी अप्रिय घटना या कानून व्यवस्था की समस्या पैदा होने से रोकने के लिए वॉट्सऐप न्यूज या अन्य समूह और फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गलत सूचना या अफवाहों के प्रसार को तत्काल रोकने की आवश्यकता है.


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बुराड़ी कांड: कहीं संयुक्‍त परिवार की कहानी तो नहीं बनी काल?


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दिल्‍ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्‍यों की मौत का मामला कई सवाल खड़े कर गया है. अभी तक यही गुत्‍थी नहीं सुलझ पा रही है कि ये हत्‍या का मामला है या आत्‍महत्‍या. ऐसे में रिश्‍तेदारों, पड़ौसियों और जांच अधिकारियों तक के मन में और भी कई आशंकाएं पैदा हो रही हैं.कुछ लोगों का कहना है कि राजस्‍थान से आकर दिल्‍ली बसा यह परिवार लंबे समय से संयुक्‍त रह रहा था. दोनों बेटों और बहुओं के अलावा बुजुर्ग महिला की एक विधवा बेटी और एक पोती भी साथ रह रही थीं. 25 साल से भी ज्‍यादा समय से सभी लोग एक साथ ही रह रहे हैं. पड़ौसियों का कहना है कि इस दौरान कोई भी लड़ाई-झगड़े की खबरें नहीं मिलीं लेकिन हो सकता है कि विवाद की जड़ संयुक्‍त परिवार में रहना ही हो.


लोगों का कहना है कि दिल्‍ली में रहना काफी खर्चीला और मुश्किल भरा है. हाल ही में इस परिवार ने अपनी एक दुकान भी बेची थी. कहीं ऐसा न हो कि इस दुकान को लेकर ही झगड़ा हो या दुकान बेचकर जो पैसा आया है उसको लेकर झगड़ा हो. हालांकि इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है.


रिश्‍तेदारों का कहना है कि ये बहुत शांत परिवार था. बहुत पूजा पाठ और धार्मिक भावनाओं वाले लोग थे. अगर किसी बात को लेकर कलह हुई भी है तो उसका अनुमान भी पड़ोसियों को नहीं है. सभी लोग पड़ोसियों से बात तो करते थे लेकिन सिर्फ दो घरों में ही आना जाना था. ऐसे में हो सकता है कि संयुक्‍त परिवार अौर पैसे को लेकर हुई कलह इस बड़ी घटना का कारण बनी हो.


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पूर्ण राज्‍य की मांग: केजरीवाल बोले- दिल्‍ली पहले मुगलों के अधीन थी, अब LG के काबू में


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आम आदमी पार्टी के संयोजक और मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने को ही सभी समस्याओं का हल बताते हुए अगले लोकसभा चुनाव में दिल्ली की जनता से आप को वोट देने की अपील की है. केजरीवाल ने रविवार को इस मांग पर पार्टी द्वारा आयोजित महासम्मेलन में कहा, ‘दिल्ली में चुनी हुई सरकार के बावजूद उपराज्यपाल का शासन चलता है. इसकी वजह से सरकार चाहकर भी कोई काम नहीं कर पाती है.’ केजरीवाल ने एनडीएमसी इलाकों को छोड़ कर शेष दिल्ली की शासन शक्तियां दिल्ली सरकार को देने की वकालत की.केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली पहले मुगलों के अधीन थी, उसके बाद अंग्रेज शासन करने आए और अब उपराज्यपाल के अधीन है. उन्होंने उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि सभी राज्यों में लोग अपनी सरकार चुनते हैं, लेकिन दिल्ली में उल्टा है. लोग वोट तो डालते हैं लेकिन उनका कोई काम नहीं होता.


सीएम ने कहा, ‘दिल्ली में चार महीने से आईएएस अधिकारियों ने हड़ताल कर रखी थी. हम उपराज्यपाल से मिलने गए लेकिन वे नहीं मिले. यदि पूर्ण राज्य होता तो वह मिलने से मना नहीं कर सकते थे. उपराज्यपाल ने दिल्ली के लोगों का अपमान किया है जिसका बदला दिल्ली के लोग 2019 के चुनाव में लेंगे.’


इससे पहले पार्टी की दिल्ली इकाई के प्रभारी गोपाल राय ने कहा कि पार्टी सोमवार से दिल्ली के पूर्ण राज्य के लिए अभियान चलाएगी. इसके लिए सभी विधानसभा कार्यालय पर दो जुलाई को बैठक बुलाई गई है. तीन जुलाई को सभी मतदान केन्द्र और वार्डों में तीन हजार आंदोलन केन्द्र खुलेंगे. उन्हीं केन्द्रों से इस आंदोलन का संचालन होगा.उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता टोली बनाकर घर-घर जाकर लोगों से हस्ताक्षर करवाएंगे. इसके साथ ही केजरीवाल की चिठ्ठी लोगों तक पहुंचाएगे. दस लाख फार्म इकट्ठा होने के बाद इसे प्रधानमंत्री तक पहुंचाया जाएगा. आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर जनसमर्थन के लिए टोल फ्री नम्बर जारी किया है.


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ब्रिटेन के रक्षा मंत्री ने निर्मला सीतारमण के साथ बैठक से किया इनकार


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भारतीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ एक द्विपक्षीय बैठक से इनकार करने पर ब्रिटेन के रक्षा मंत्री गेविन विलियमसन अपनी कैबिनेट में कथित रूप से निशाने पर आ गए हैं. सीतारमण लंदन में पहले ‘ब्रिटेन-भारत सप्ताह’ बैठक में शामिल होने वाली थीं.‘द संडे टाइम्स’ की एक खबर में दावा किया गया है कि बैठक के लिए एक महीने से अधिक वक्त पहले भारतीय अधिकारियों की ओर से बैठक के लिए अनुरोध किया गया था. ब्रिटेन के कम से कम दो मंत्रियों ने कथित तौर पर विलियमसन को सीतारमण के लिए समय निकालने के महत्व को समझाने का प्रयास किया था. इन दो मंत्रियों में विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन शामिल थे.


‘द संडे टाइम्स’ की खबर के अनुसार विलियमसन ने सीतारमण से 20 से 22 जून के बीच सुरक्षा सहयोग और रक्षा खरीद को लेकर द्विपक्षीय वार्ता पर मिलने से इनकार कर दिया. इस संबंध में नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई टिप्पणी नहीं आई है. समाचार पत्र ने ब्रिटिश सरकार के एक सूत्र के हवाले से कहा, ‘लोग इसे लेकर बहुत नाराज हैं.’


सूत्र ने कहा, ‘भारत का रक्षा बजट विश्व के तेजी से बढ़ते रक्षा बजटों में से एक है जिसमें वर्ष में 50 अरब डालर के करीब खर्च होता है. ऐसा लगता है कि यह विलियमसन का एक और बिना सोचा समझा निर्णय है.’ खबर में कहा गया है कि विलियमसन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी भारतीय समकक्ष सीतारमण को नजरंदाज करके विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश को नाराज कर दिया है.कार्यक्रम में दो दिवसीय सम्मेलन और ब्रिटेन-भारत पुरस्कार भी शामिल था. इसमें सीतारमण शामिल होने वाली थीं लेकिन उनकी यात्रा टाल दी गई क्योंकि विलियमसन के साथ मुलाकात तय नहीं हो पाई.


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