Sunday, 1 July 2018

बुराड़ी डेथ मिस्ट्रीः 11 मौतों के इस मामले को आखिर आत्महत्या क्यों नहीं कह सकते


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बुराड़ी के संतनगर में एक ही घर में एक साथ 11 लोगों की लाशों से सनसनी फैल गई है. न केवल पुलिस प्रशासन बल्कि दिल्‍ली सरकार तक सकते में आ गई है. पहली नजर में जहां इस घटना को आत्‍महत्‍या माना जा रहा था. पुलिस की ओर से भी इसे आत्‍महत्‍या बताया गया हालांकि बाद में हत्‍या की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया. लेकिन अब चारों ओर से इसे साजिशन हत्‍या करार देकर जांच कराए जाने की मांग उठ रही है.बेहद ही चौंकाने वाला है कि एक ही घर में 11 सदस्‍यों की मौत हो जाती है और पड़ोसियों को कानों-कान खबर तक नहीं होती. इस घटना पर बुराड़ी में मृतकों के परिजनों और पड़ोसियों का कहना है कि सभी लोगों की हत्‍या की गई है. इस पूरी घटना के दौरान जो बातें सामने आ रही हैं उससे भी यही अनुमान लगाया जा रहा है कि यह हत्‍या है न कि आत्‍महत्‍या.


मुंह पर लगी टेप और बंधे हाथ बता रहे हत्‍या हुई हैमहावीर सिंह ने कहा कि हो सकता है पहले खाने में कुछ मिला दिया हो और फिर सबको लटका दिया हो. जिस हिसाब से चेहरे पर टेप या पट्टी लगाई गई है वह बहुत ही अजीब है. ऐसे में एक की आत्‍महत्‍या लेकिन बाकी सब की हत्‍या का अंदेशा हो रहा है. या तो बाहर के किसी जानकार ने या घर के ही किसी शख्‍स ने इसे अंजाम दिया है.


घर के सामने का सीसीटीवी तोड़ा
वहीं पड़ोसी वीरेंद्र कहते हैं कि मृतकों के घर के सामने सीसीटीवी कैमरा लगा था. इससे पूरी गली की निगरानी होती थी लेकिन कुछ दिन पहले ही सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया गया. ताकि गली में किसी के आने-जाने का कोई सुराग न मिल सके. ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि हत्‍या की साजिश काफी समय से चल रही होगी. इसे पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया गया है.


घर और कमरे का गेट खुला था
पड़ोसी जितेंद्र ने बताया कि शनिवार रात को करीब पौने 12 बजे वे अपने ऑफिस को बंद करने लगे. तभी मृतक भाटी परिवार के बेटे उनके पास आकर खड़े हो गए. वे भी अपनी दुकान बंद कर रहे थे. कुछ देर बातचीत हुई. फिर सवा 12 बजे के करीब जितेंद्र अपना ऑफिस बंद करके चले गए. लेकिन सुबह जब सात बजे तक भाटी परिवार की परचून की दुकान नहीं खुली तो चिंता हुई. पड़ोस के ही सरदार जी और दूधवाला घर के दरवाजे पर गए तो मेन गेट खुला था. जब वे ऊपर पहुंचे तो कमरे का भी दरवाजा खुला था.


ऐसे में दोनों दरवाजों के खुले होने से ये आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग रात में हत्‍या करने आए हों और फिर चले गए हों. ये परिवार हमेशा दरवाजा बंद करके सोता था लेकिन घटना के बाद दोनों दरवाजे खुले मिले हैं.


तीसरी मंजिल पर मिला कुत्‍ता
मृतकों के परिवार से गहरा ताल्‍लुक रखने वाले प्रवीण मित्‍तल कहते हैं कि ये रहस्‍य जरूर है लेकिन एक बात स्‍पष्‍ट दिख रही है कि सभी लोगों की हत्‍या की गई है. इस परिवार का कुत्‍ता अभी भी जिंदा है. जो कि पहली ही मंजिल पर परिजनों के साथ रहता था. इस कुत्‍ते के लिए पहली मंजिल पर ही अगल कमरा भी बनाया गया है. रात में इसे खुला छोड़ा जाता था लेकिन इस घटना के बाद वह तीसरी मंजिल पर छत पर बंधा हुआ मिला है.


हालांकि ये हो सकता है कि इसे आत्‍महत्‍या दिखाने के लिए कुत्‍ते को जिंदा छोड़ दिया हो. इस परिवार को कोई परेशानी नहीं थी. कल ही सब मिले थे. ऐसे में आत्‍महत्‍या कैसे की जा सकती है. अगर परेशान थे तो कुछ तो चेहरे पर चिंता जैसा दिखाई देता लेकिन ऐसा कुछ नहीं था.


कल ही शॉपिंग करके लौटे बच्‍चे आत्‍महत्‍या तो नहीं करेंगे
रिश्तेदार केतन नागपाल ने कहा कि जब मृतकों को देखा तो नानी नीचे जमीन पर पड़ी थी. बाकी सब फांसी पर लटके थे. क्‍या सब एक साथ फांसी पर लटके? क्‍या सबको एक साथ मरना था ? अगर ऐसी मानसिक स्थिति बनी थी तो थोड़ी देर पहले ही तो सब शॉपिंग करके लौटे थे. अचानक फिर आत्‍महत्‍या करने के लिए उतावले हो गए ?


घर में कोई आर्थिक समस्‍या भी नहीं थी. कोई झगड़ा नहीं था. परिवार बेहद धार्मिक था.


ऐसे में कई ऐसे सवाल हैं जो परिजन और रिश्‍तेदार उठा रहे हैं. उनका मानना है कि यह आत्‍महत्‍या नहीं हत्‍या है. हालांकि पुलिस तफ्तीश, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट और पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इस रहस्‍य से पर्दा उठ सकेगा.


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