Saturday, 1 September 2018

नालासोपारा केस: हिन्दू धर्म के खिलाफ बोलने वाले थे निशाने पर, कोर्ट में ATS का खुलासा


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अमन सय्यदमुंबई में कथित हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ता वैभव राउत के घर से बरामद विस्फोटक मामले में एक सुनवाई करते हुए शुक्रवार को मुंबई की विशेष अदालत में बड़ा खुलासा हुआ. कोर्ट में ATS के जांच अधिकारियों ने मामले में गिरफ्तार पांचवें आरोपी अविनाश पवार की रिमांड लेने के लिए दलील में कहा की अब तक की जांच में परत दर परत कई बाते सामने आई है जिसमें एक बड़ी साजिश नजर आ रही है. ATS ने कोर्ट में दावा किया की पकड़े गए आरोपियों के निशाने पर ऐसे लोग थे जो हिन्दू धर्म के खिलाफ बयानबाजी करते हैं.


ATS ने कोर्ट में कहा, ‘जांच के दौरान आरोपियों से मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के 4 बड़े लोग जिनमें राजनैतिक पार्टी के नेता और समाजसेवियों की रेकी की गयी थी. इस रेकी के पीछे क्या मकसद था इसका पता लगाना जरुरी है जिसके लिए आरोपी की रिमांड बढ़ाई जाए.’ साथ ही ATS ने कोर्ट में बताया के अब तक की जांच में यह बात सामने आ चुकी है की मामले में गिरफ्तार आरोपियों ने बम बनाने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली है.


यह भी पढ़ें:  दाभोलकर हत्‍याकांड: सीबीआई और एटीएस ने औरंगाबाद से बरामद की पिस्‍टल और तलवारट्रेनिंग के लिए अविनाश पवार और उसके दूसरे साथी महाराष्ट्र के बाहर दूसरे राज्यो में जाकर यह ट्रेनिंग लेते थे. अब तक पूरे केस में ATS ने 4 मोटरसाइकल और 2 कार बरामद की है. यह जानकारी भी कोर्ट के समक्ष रखी गयी. हालांकि बचाव पक्ष ने दलील दी कि जिन चार लोगों की रेकी की गयी है उसको साबित करने के लिए ATS ने कोर्ट में अब तक कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया है.


जिसके चलते कोर्ट से ATS को फटकार भी लगाई, साथ ही अदालत ने गौरी लंकेश की हत्या के मामले में गिरफ्तार अमोल काले को अपनी कस्टडी में लेने के लिए एटीएस ने क्या प्रयास किये? यह सवाल उठाये और सख्त लहजे में ATS की जांच में ढिलाई और लापरवाही की बात कही. इस केस में ATS ने कोर्ट के समक्ष एक डायरी रखी जिसमे सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल हुआ है.


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यही आधार बनाकर अदालत ने कहा इन सांकेतिक भाषा में क्या लिखा गया जिसका पता लगाने लिए महाराष्ट्र ATS को जांच का का समय मिलना चाहिए इसलिए अविनाश पवार को 4 सितम्बर तक की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया.


महाराष्ट्र एटीएस ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए 10 अगस्त की रात मुंबई से सटे नालासोपारा में छापेमारी कर नालासोपारा और पुणे से तीन संदिग्ध आरोपियों गिरफ्तार किया था. पकड़े गए आरोपी हिंदू संगठन के सदस्य बताए जा रहे हैं.


एटीएस का दावा है कि ये संदिग्ध महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में आतंकी हमले को अंजाम देने की फिराक में थे. एटीएस ने इनके पास से देसी बम सहित भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है. नालासोपारा से वैभव राउत के घर और दुकान पर छापे में 20 देसी बम, दो जिलेटिन छड़, 22 नॉन इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, विस्फोटक पाउडर, जहर की दो बोतल, बैटरी आदि सामान मिले थे.


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दुष्यंत कुमार अगर आज वो होते तो क्या कह रहे होते?


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दुष्यंत कुमार अगर आज होते तो 84 साल के होते. मगर बड़ा सवाल ये है कि अगर आज वो होते तो क्या कह रहे होते? इमरजेंसी के दौर में जब बड़े लेखक और कवि सरकार की तारीफ में बिछे जा रहे थे. आकाशवाणी भोपाल का ये सरकारी कर्मचारी सीधे सरकार को निशाने पर रखकर ग़ज़लें कह रहा था. वो भी कुछ इस अंदाज़ में कि ‘एक गुड़िया की कई कठपुतलियों में जान है, आज शायर यह तमाशा देखकर हैरान है’इस शेर में गुड़िया तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए है. इसी ग़ज़ल में दुष्यंत कह जाते हैं कि ‘कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए, मैंने पूछा नाम तो बोला कि हिंदुस्तान है.’


अगर ये शेर आज कहा गया होता तो तय करना मुश्किल है कि ये दुष्यंत पहले ट्रोल होते, पहले उन पर टीवी चैनल विवादास्पद बयान का पैकेज करते या उन पर देशद्रोह का आरोप लगता.


खैर, दुष्यंत अपनी किताब ‘साए में धूप’ की 52 ग़ज़लों में जो कह गए वो मौजूं था है और रहेगा. शायद इसीलिए क्रांतिकारी होने का दावा करने के दौर में अरविंद केजरीवाल ‘हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए’ हर सभा में गाते थे.



हिंदी ग़ज़ल के पहले शायर
दुष्यंत हिंदी ग़ज़ल के पहले शायर कहे जाते हैं. ऐसा नहीं है कि दुष्यंत से पहले हिंदी में किसी ने ग़ज़ल नहीं कही. बलवीर सिंह रंग, गोपाल दास नीरज और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला तक ने अलग-अलग नामों के साथ ग़ज़ल को हिंदी में लाने की कोशिश की थी, लेकिन इन सबकी मूल प्रवृत्ति उर्दू ग़ज़ल की तरह ‘माशूक की ज़ुल्फों के पेंचोखम सुलझाने’ की ही थी. जबकि भाषा के स्तर पर दुष्यंत कहीं से भी हिंदी के खेमे खड़े नहीं दिखते हैं.


उनका शेर पढ़िए ‘कहां तो तय था चरागां हर घर के लिए, कहां चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए’ चरागां दीपावली के लिए इस्तेमाल होने वाला फारसी शब्द है जो हिंदी वालों के लिए बिलकुल अनजाना है. साथ ही साथ इस पूरे शेर में कोई ऐसा शब्द नहीं जिसे हिंदी के चलन से जोड़ कर देखा जा सकता है. फिर सवाल उठता है कि दुष्यंत कैसे हिंदी ग़ज़ल के पुरोधा कहे जा सकते हैं?


दुष्यंत के बहाने ग़ज़ल में तीन बदलाव हुए इनसे जो नए किस्म की ग़ज़ल बनी वो हिंदी ग़ज़ल कहलाई. सबसे पहला बदलाव विषय का था. परंपरागत तबके के लिए ग़ज़ल का मतलब इश्क, मोहब्बत की बातें करना था.


दुष्यंत ने ग़ज़ल का सब्जेक्ट ही नहीं बदला, शेर-ओ-शायरी के रूपक भी बदल दिए. परंपरागत जहां ग़ज़लों में शमा के बाद परवाना और शीशे के बाद पत्थर आना लगभग तय होता है. दुष्यंत ग़ज़ल में गंगा और हिमालय जैसे प्रतीक इस्तेमाल किए. ये प्रतीक नए होने के साथ-साथ हिंदुस्तान की आत्मा से जुड़े हैं जिनका आप शब्दानुवाद नहीं कर सकते. जब वो पत्नी के लिए कहते हैं, ‘तुमको निहारता हूं सुबह से ऋतंबरा, अब शाम हो रही है मगर मन नहीं भरा’ तो ऋतंबरा के मेटाफर को समझने के लिए आपको हिंदी पट्टी की संस्कृति को समझना पढ़ेगा.


दुष्यंत के बाद हिंदी-उर्दू के लगभग सभी शायरों ने इसे बखूबी इस्तेमाल किया. अदम गोंडवी का शेर पढ़िए ‘गलतियां बाबर की थीं, तो जुम्मन का घर फिर क्यों जले’ पता चल जाएगा कि ये दुष्यंत की ही ज़मीन पर कही गई बात है. इसके साथ-साथ दुष्यंत ने ग़ज़ल कहने के लिए उर्दू स्क्रिप्ट आने की मजबूरी को खत्म किया. आज के समय में ऐसे बहुत से शायर हैं जो देवनागरी में ही ग़ज़ल कहते हैं.
सिर्फ ग़ज़ल नहीं कह गए दुष्यंत


मंच की लोकप्रियता भुनाने के लिए कई चर्चित कवि दुष्यंत को अक्सर ‘कठिन अतुकांत कविताओं के सामने सरल हिंदी में बात कहने वाला कहते हैं’. ये गलत है. दुष्यंत की भाषा सरल ज़रूर है मगर उनके कंटेंट में सिर्फ जनता को लुभाने वाली तुकबंदी नहीं है. साथ ही साथ दुष्यंत ने अपनी 42 साल की छोटी सी ज़िंदगी में ग़ज़लों से इतर कविताएं, नाटक, उपन्यास कहानियां बहुत कुछ लिखा.


‘सूर्य का स्वागत’ की उनकी कविताएं उस दौर की नई कविता के सभी मानकों पर खरी उतरती हैं. हालांकि इस बात में कोई शक नहीं कि ग़ज़लों ने दुष्यंत को उस मुकाम तक पहुंचाया जहां कई लोग कई-कई महाकाव्य लिखकर भी नहीं पहुंच पाते हैं.
2015 में आई फिल्म ‘मसान’ का एक गाना दुष्यंत के शेर से शुरू होता है, ‘तू किसी रेल सी गुज़रती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं’ इस एक शेर से आगे की लिरिक्स वरुण ग्रोवर ने लिखी हैं और बहुत खूब लिखी हैं. लेकिन जिस ग़ज़ल से ये लिया गया है, उसका मतला (पहला शेर) दुष्यंत की ग़ज़लों की पूरी प्रवृत्ति को ज़ाहिर कर देता है, ‘मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं, वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूं.’


(अनिमेष मुख़र्जी)


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Friday, 31 August 2018

घाटी में अगस्त महीने में मारे गए सबसे ज्यादा आतंकवादी, इस साल 134 आतंकी हो चुके हैं ढेर


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कश्मीर घाटी में अगस्त महीने में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 25 आतंकवादी मारे गए हैं. यह संख्या इस साल की सबसे बड़ी संख्या है. इस संख्या के पीछे की वजह कश्मीर में बड़ी संख्या में हो रहे अपहरण को बताया जा रहा है.यहीं कारण है कि आतंकवादी बेताब हैं और उनका पूरा ध्यान सुरक्षा बलों के खुफिया लिंक को तोड़ने पर है.


सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के अधिकांश कमांडरों को खत्म कर दिया है. बचे हुए आतंकवादी अब सुरक्षाबलों के परिवारों को निशाना बना रहे हैं ताकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई को रोका जा सके.


सूत्रों के अनुसार अपहरण किए गए ज्यादातर लोगों को बाद में छोड़ा जा सकता है. अपहरण करने के पीछे मुख्य उद्देश्य सुरक्षा कर्मियों के परिवार में डर पैदा करना है. इस साल अबतक कुल 134 आतंकवादी मारे जा चुके हैं.ये भी पढ़ेंः कश्मीर: आतंकियों के मददगार 4 युवकों पर पर लगा PSA, भेजे गए जेल


सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए आतंकियों की संख्या: 


जनवरी- 8


फरवरी- 7


मार्च- 22


अप्रैल- 20


मई-19


जून- 22


जुलाई- 11


अगस्त- 25


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दिल्ली: घर बनाने के लिए साथ मिलकर स्नेचिंग करते थे गर्लफ्रेंड-ब्वॉयफ्रेंड, गिरफ्तार


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दिल्ली पुलिस ने ऐसे बंटी-बबली को गिरफ्तार किया है, जो पिछले दो साल से दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाके में स्नैचिंग की वारदात को अंजाम देते थे. ताबड़तोड़ हो रही स्नैचिंग की वारदातों ने पुलिस को परेशान कर रखा था. जिसके बाद पुलिस पिछले दो महीने से इनकी तलाश में जुटी थी.पुलिस के मुताबिक 19 तारीख को दिल्ली के करोल बाग इलाके में कविता नाम की महिला अपने पति के साथ शॉपिंग करने आई थी लेकिन शॉपिंग से पहले वो पास के मंदिर चले गए. मंदिर से निकलते ही जैसे ही कार में बैठने की कोशिश की इस जोड़ी ने उनके बैग उड़ा लिए. बैग में साढ़े सात लाख और सोने की ज्वैलरी थी.


जिसके बाद पुलिस बंटी और बबली की तलाश में जुट गई. पुलिस ने पहले स्नैचर मोरिसन उर्फ वोल्का को गिरफ्तार किया. मोरिसन ने पूछताछ में बताया कि वो अपनी गर्लफ्रैंड प्रीति के साथ मिलकर स्नैचिंग की वारदात को अंजाम देता था. मोरिसन और प्रीति पिछले दो साल से रिलेशन में हैं. प्रीति ड्रग्स लेती थी. दोनों की पहले दोस्ती हुई फिर प्यार.


जिसके बाद दोनों स्नेचिंग के धंधे में उतर आए. बता दें कि गिरफ्तार प्रीति के पिता भी इलाके का बदमाश है.डीसीपी मंदीप रंधावा के मुताबिक पकड़े गए दोनों आरोपी स्नेचिंग की कमाई से एक घर और एक दुकान लेना चाहते थे. लेकिन फिलहाल सलाखों के पीछे पहुंच गए.


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कचरे के निपटारे पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, इन राज्यों में कंस्ट्रक्शन पर लगाई रोक


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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ राज्यों द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन नीति तैयार नहीं करने पर उन्हें फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों में ये नीति तैयार होने तक निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है.जस्टिस मदन बी लोकूर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर उनके इस रवैये को लेकर जुर्माना भी लगाया. पीठ ने कहा, ‘‘अगर वे चाहते हैं कि लोग गंदगी और कूड़े कचरे के बीच रहे तो फिर क्या किया जा सकता है.’’


पीठ ने कहा कि ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और चंडीगढ़ सहित कुछ राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक 2016 के ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत दो साल बाद भी कोई नीति तैयार नहीं की है.


पीठ ने कहा, ‘‘अगर इन राज्यों के मन में जनता के हित और स्वच्छता तथा सफाई के विचार होता तो उन्हें ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के अनुरूप नीति तैयार करनी चाहिए ताकि राज्य में स्वच्छता रहे. राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों का दो साल बाद भी नीति तैयार करने के मामले में रवैया दयनीय है.राजधानी में 2015 में डेंगू से ग्रस्त सात साल के बच्चे की दर्दनाक मृत्यु की खबर का न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया था और इस मामले की सुनवाई के दौरान कचरे के प्रबंधन का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया था.


इसके बाद से अदालत ठोस कचरा प्रबंधन के मामले पर भी गौर कर रही है. इस मामले में सुनवाई के दौरान न्यायालय के निर्देशानुसार हलफनामा दाखिल नहीं करने पर पीठ ने आंध्र प्रदेश पर पांच लाख रुपए का जुर्माना और टिप्पणी की कि केंद्र को भी यह मालूम नहीं है कि राज्य ने इस बारे में नीति तैयार की है या नहीं.


पीठ ने राज्य की कचरा नीति तैयार नहीं करने और न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और केन्द्र शासित चंडीगढ़ पर भी तीन तीन लाख रूपए का जुर्माना किया.


न्यायालय ने कहा कि इन राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों पर लगाये गये जुर्माने की राशि दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा करायी जाये.  इस राशि का उपयोग किशोर न्याय मसलों के लिये होगा.


पीठ ने कहा कि बिहार, तमिलनाडु और अरूणाचल प्रदेश सहित राज्यों ने दस जुलाई को उन पर लगाये गये जुर्माने की रकम जमा करा दी है. न्यायालय इस मामले में अब नौ सितंबर को आगे सुनवाई करेगा.


केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने आज सुनवई के दौरान ठोस कचरा प्रबंधन के बारे में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से केन्द्र को मिला विवरण पीठ के समक्ष पेश किया.


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समय से पहले चुनाव कराए जाने की अफवाहों के बीच केसीआर ने बुलाई कैबिनेट की मीटिंग


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तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने रविवार को कैबिनेट की मीटिंग बुलाई है. सीएम ने यह बैठक हैदराबाद की रैली से ठीक दो घंटे पहले बुलाई है. अटकलें लगाई जा रही है कि तेलंगाना में समय से पहले चुनाव हो सकते हैं. तेलंगाना विधानसभा का कार्यकाल साल 2019 में लोकसभा के साथ पूरा होगा. ऐसी अफवाह है कि केसीआर नवंबर से दिसंबर के बीच में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के चुनाव के साथ ही तेलंगाना का भी चुनाव चाहते हैं.सत्ताधारी टीआरएस ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी में समय से पहले चुनाव कराए जाने के मसले पर चर्चा हुई हालांकि अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है. राज्य के आईटी मिनिस्टर केटी रामाराव ने कहा, ‘कई मुद्दों पर चर्चा हुई. समय से पूर्व चुनाव कराए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. जैसा कि मैंने कहा कि फिलहाल इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है ऐसे में अगर कोई फैसला होगा तो आपको पता चलेगा.’


समय से पूर्व चुनाव के मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों पर राव ने कहा कि टीआरएस हमेशा चुनाव के लिए तैयार है. राव ने कहा, ‘प्रायः जो पार्टी सत्ता में होती है अपना कार्यकाल पूरा करना चाहती है. कोई नहीं चाहता कि वह समय से पहले हट जाए. ठीक इसी तरह विपक्ष इस चीज के लिए बेसब्र रहता है और मौजूदा सरकार को जल्द से जल्द हटाना चाहता है.’


यह भी पढ़ें: BJP के साथ गठबंधन की बात टालने के लिए जल्द चुनाव कराना चाहते हैं KCR?राव ने कहा, ‘हालांकि तेलंगाना में यह उल्टा है. यहां टीआरएस चुनाव के लिए तैयार है. विपक्ष यह सवाल पूछ रहा है कि आप चुनाव जल्दी क्यों कराना चाहते हैं? अप्रैल में क्यों नहीं?’ टीआरएस सरकार जमीन पर विपक्ष से कोसों आगे है. इसके साथ ही केसीआर अभी भी राज्य में ज्यादा प्रसिद्ध और शक्तिशाली नेता हैं. अपनी प्रसिद्धि के बल पर साल 2014 में सत्ता में आए केसीआर ने जनता को 50 महीनों के दौरान तमाम योजनाओं से जनता को खुश करने में लगे हैं.


हालांकि राज्य में सब कुछ ठीक नहीं है. केसीआर ने यह महसूस कर लिया है जनता के लिए काम करने और राजनीतिक संकटों से निपटने के बावजूद जनता आखिरी समय में अपना मूड बदल सकती है और वह समय से पूर्व चुनाव ms चौंकाना चाहते हैं.


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दूसरी ओर, बीजेपी भी लोकसभा चुनाव के लिए केसीआर के साथ पूर्व चुनाव गठबंधन पर उत्सुक है और वह समय से पूर्व चुनाव कराए जाने के अनुरोध को ठुकराने के मूड में नहीं है. यदि केसीआर भाजपा के साथ गठबंधन कर विधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों चुनावों में जनता के बीच जाते हैं तो वह उस समय सामने आने वाली समस्याओं से अवगत है, जिनका उन्हें सामना करना पड़ सकता है. केसीआर का सोचना है कि विधानसभा चुनावों को पहले ही संपन्न कराना उनके सामने अच्छा विकल्प है.


राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो केसीआर समय से पूर्व चुनाव करा सुरक्षित होना चाहते हैं. अगर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में उनके गठबंधन को कोई नुकसान पहुंचता भी है तो कम से कम उनका आधार सुरक्षित रहेगा.


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जैन मुनि तरुण सागर का 51 वर्ष की उम्र में निधन


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जैन मुनि तरुण सागर का आज सुबह दिल्ली में निधन हो गया. उनकी उम्र 51 वर्ष थी और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. तरुण सागर का शनिवार तीन बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा.जैन मुनि को क़रीब 20 दिन पहले पीलिया की शिकायत के बाद मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. हालांकि इलाज के बाद भी उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद जैन मुनि ने अपना इलाज करवाने से मना कर दिया था और अपने अनुयायियों के साथ गुरुवार शाम को दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास आ गए.


जैन समाज की ओर से जारी बयान में जैन मुनि तरुण सागर के संथारा लेने का दावा किया गया. दिल्ली जैन समाज के अध्यक्ष चक्रेश जैन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तरुण सागर अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराज की स्वीकृति के बाद संथारा ले लिया और रविवार सुबह 3.11 बजे उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया है.


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