Sunday, 30 September 2018

अब गांव का हर सरकारी स्कूल होगा डिजिटल, उपराष्ट्रपति ने किया शुभारंभ


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देश में डिजिटल स्कूल की शुरुआत ग्वालियर से हो चुकी है. इसका शुभारंभ उपराष्ट्रपति ने 29 सिंतबर को रिमोट दबाकर किया. शुरुआत में ग्वालियर के 100 सरकारी स्कूलों को डिजिटलाइज्ड किया गया है. आने वाले दिनों में पूरे देश के सरकारी स्कूलों को किया जाएगा. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद थे. इस ड्रीम प्रोजेक्ट में ‘नरेद्र सिंह तोमर’ का महत्वपूर्ण योगदान है. केंद्रीय मंत्री के अलावा मंच पर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, नगरीय विकास और आवास मंत्री माया सिंह, महापौर विवेक नारायण शेजवलकर, ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक भारत सिंह कुशवाहा, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती मनीषा भुजबल सिंह यादव, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के सीईओ सुनील दुग्गल और मुस्कान फाउंडेशन के अभिषेक दुबे भी उपस्थित थे.


क्या है ‘मेरा स्कूल, डिजिटल स्कूल’?


‘मेरा स्कूल, डिजिटल स्कूल’ केंद्रीय ग्रामीण विकास, खनन एवं पंचायती राज मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की एक पहल हैंइस मुहिम से वो गांव के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को एक स्वस्थ माहौल दे रहे हैं ताकि देश का विकास सच्चे रूप में विकास हो सके.


इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री कहते हैं देश डिजिटल हो रहा है. हर कोई सूचना के इस संचार से जुड़ना चाह रहा है, ऐसे में हम चाहते हैं कि गांव-देहात के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे भी आगे बढ़ें और अपना भविष्य संवारे. डिजिटल स्कूल हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है, यह एक कोशिश है. इसके द्वारा गांव के बच्चे देश के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकते हैं और गर्व से कह सकते हैं कि हम किसी से कम नहीं हैं. साथ ही साथ मंत्री ने इस कार्यक्रम को देश के पूर्व प्रधानमंत्री व भाजपा के संस्थापक अटल बिहारी वाजेपयी  को समर्पित किया.


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अटलजी को सपर्पित है ये कार्यक्रम


कार्यक्रम में उपस्थित उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गांव एवं शहर के अंतर को कम करने के लिये साझा प्रयासों की जरूरत है और ग्रामीण डिजिटल स्कूलों का यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है.  डिजिटल स्कूलों ने देश को महत्वपूर्ण एवं बड़ा संदेश दिया है. ग्रामीण विद्यार्थी अब डिजिटल तरीके से विज्ञान व गणित की पढ़ाई करेंगे. यह प्रोजेक्ट से हम नए भारत के निर्माण की ओर तेजी से कदम बढ़ा सकते हैं, ये वो भारत है जिसकी कल्पना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजेपयी ने किया था. इस कार्यक्रम के लिए मुस्कान ड्रीम्स के संस्थापक अभिषेक दुबे व पूरी टीम को तहेदिल से बधाई देना चाहता हूं.



इस लड़के की ज़िद से डिजिटल हुए 100 सरकारी क्लास


“ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है” लिखने वाले क्या ख़ूब लिखा है. उपर्युक्त पंक्तियां ग्वालियर के रहने वाले अभिषेक दुबे पर सटीक बैठता है. आज से ठीक 5 साल पहले यानी 2013 मेंअपने साथियों की तरह अभिषेक अपनी करियर बनाना चाहते थे. करियर के लिए उन्होंने ग्वालियर के एक प्रतिष्ठित संस्थान आईटीएम में एडमिशन लिया. पढ़ाई में मन भी लग रहा था और पढ़ाई भी करना चाहता थे, मगर ग़रीब और बेसहारा बच्चों की पढ़ाई ने झकझोर दिया. वो बच्चों की पढ़ाई के लिए हमेशा चिंतित रहने लगे. समय बीतता गया और अभिषेक की चिंता भी बढ़ती गई. पढ़ाई के दौरान अपना समय निकालकर बच्चों को पढ़ाते थे, मगर अभिषेक के साथ समस्याएं आने लगीं. इजीनीयरिंग की पढ़ाई कर रहे थे ऐसे में प्रोजेक्ट्स और होम वर्क भी मिल रहे थे. अभिषेक ने ठान लिया कि बच्चों का भविष्य सुधारेंगे, इसके लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. अभिषेक के इस कदम से उनके पिताजी दुखी हुए और गुस्से में कह दिया कि या तो पापा चुन लो या फिर बच्चे. अभिषेक के लिए बहुत ही कठिन समय था, मगर हिम्मत नहीं हारी और बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने में लग गए.


दोस्तों ने मदद की


अभिषेक की मेहनत रंग लाई. साथ में पढ़ रहे साथियों ने अभिषेक की मदद की और शेल्टर होम्स में रह रहे बच्चों को पढ़ाने में लग गए. इतना ही नहीं, दोस्तों की मदद से 2014 में मुस्कान ड्रीम्स नाम की संस्था की स्थापना की. अभिषेक अपने धून में रम गए. इसी बीच बच्चों को स्कूल किट देने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया. इस काम में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और आईटीएम के प्रबंधक दौलत सिंह ने सहयोग किया.



कैसा होता है डिजिटल स्कूल?


यूं तो डिजिटल स्कूल के बारे में में कई ख़बरें पढ़ने, देखने व सुनने को मिलती हैं, मगर हक़ीक़त कुछ और ही होती है. आइए, आपको वास्तविक डिजिटल स्कूल की ख़ासियत के बारे में बताते हैं.


स्कूलों का सौंदर्यीकरण- सरकारी स्कूलों की मरम्मत की जाती है. उसके बाद दीवारों पर चर्चित कार्टून्स की पेंटिंग की जाती है. साथ ही साथ महापुरुषों के अनमोल विचारों को भी लिखा जाता है.


दीवारों पर एटलस- बच्चों का प्रैक्टिकल ज्ञान बढ़ाने के लिए दीवारों पर एटलस लगाए गए हैं. इसके अलावा फोटो सिंथेसिस चार्ट से लेकर बॉडी डायग्राम बनाए गए हैं. साथ ही साथ इस स्कूल में प्रोजेक्टर से पढ़ाई की व्यवस्था की गई है.


डिजिटल लर्निंग-  स्कूल में 2 कम्प्यूटर लगवाए जाते हैं. इनकी मदद से बच्चों को पढ़ाया जाता है.


प्रोजेक्टर- क्लासरूम में प्रोजेक्टर भी लगवाए गए हैं, इसकी मदद से बच्चों को बड़े पर्दे पर पढ़ाया जाता है.


कंटेंट- पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए कंटेंट पर काम किया गया है. EXTRA MARKS नाम की कंपनी ने विशेष तौर पर बच्चों के लिए पढ़ाई का कंटेंट तैयार किया है. इसकी मदद से बच्चे आसानी से पढ़ते हैं.


टीचर्स ट्रेनिंग-  स्कूल में कक्षा 6 से 8वीं की 109 छात्राएं अध्ययनरत हैं. प्रोजेक्टर के जरिए हर क्लास की छात्राओं को 2-2 घंटे पढ़ाया जाएगा.



इस पूरे कार्यक्रम और कोर्स डिजाइनिंग पर मुस्कान ड्रीम्स के संस्थापक अभिषेक दुबे बताते हैं कि हमारा मक़सद गांव के बच्चों को बेहतर भविष्य देना है. हम चाहते हैं कि कोई उनकी ग़रीबी पर दया न करे. अगर उनको अच्छी पढ़ाई मिल गई तो वो अपना रास्ता और भविष्य ख़ुद बना लेंगे. मुस्कान ड्रीम्स से जुड़े सभी लोग इस उद्धेश्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं. पहले बच्चों को पढ़ाई में कम इंटरेस्ट था, मगर अब वो पढ़ना चाहते हैं. आने वाले दिनों में यही बच्चे देश का भविष्य बनेंगे. हमें ख़ुशी है कि हमें सभी का साथ मिल रहा है.


बहुत कम लोग होते हैं जो गांव के विकास के बारे में सोचते हैं. आज अभिषेक जैसे लोगों के कारण कई बच्चों और गरीब परिवारों के चेहरे पर ख़ुशियां आ रही हैं. 29 सितंबर को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में यह कार्यक्रम  संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम में सभी स्कूलों के बच्चों को बुलाया गया था. वहीं ग्वालियर जिले से 40 किमी दूर चीनौर ग्राम में स्थित मिडिल स्कूल के छात्राओं को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था. ये वही जगह है, जहां से डिजिटल स्कूल की शुरुआत हुई.


पूरी स्टोरी पढ़ने के लिए क्लिक करें.


यहां पढ़ने वाली छात्राएं बहुत ख़ुश थीं. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो उपराष्ट्रपति के साथ बैठकर फ़ोटो खींचवाएंगी. 15 साल की दिव्या बताती हैं कि एक समय ऐसा था, जब गांव में स्कूल नाम मात्र का था. लोग सिर्फ़ नाम लिखवाते थे ताकि डिग्री मिल जाए, मगर आज गांव की ही नहीं आस-पास के इलाके की बी लड़कियां कंप्यूटर की पढ़ाई करने आती हैं. ये हमारे लिए किसी सपने से कम नहीं है.



दिव्या के साथ आईं एक टीचर जो स्कूल में ही कंप्यूटर पढ़ाती हैं. उन्होंने बताया कि हमें पहले कंप्यूटर चलाना नहीं आता था. मगर हमने इसी स्कूल से सीखा और बच्चों को पढ़ा रही हूं. आज इसके कारण ज़िंदगी में बहुत बदलाव हो रहे हैं.


सोचिए, भारत के कई गांवों में स्कूल नहीं हैं, कई ऐसे स्कूल हैं जहां टीचर नहीं हैं, जहां टीचर और स्कूल हैं वहां पढ़ाने वाला कोई नहीं है. अगर ऐसे में डिजिटल देश की ज़रूरत बन गई है. आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कम ख़र्चे पर पूरे देश के बच्चों को बेहतरीन शिक्षा दी जा सकती है. आने वाले दिनों में ये संभव भी है.


 


 


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2019 चुनाव: 'चाय पे चर्चा' के ज़रिए आम आदमी से जुड़ने की कोशिश में AAP


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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में दमदार उपस्थिति दर्ज़ कराने के लिए कमर कस चुकी आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मतदाताओं तक पहुंचने के लिए ‘चाय पे चर्चा’ का रास्ता अपनाया है.’चाय पे चर्चा’ 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले सुर्खियों में आयी थी जब भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने देशभर में मतदाताओं से संवाद करने के लिए ये तरीका अपनाया था. आप, दिल्ली में एक भी सीट नहीं जीत पायी थी. हालांकि उसने पंजाब में चार लोकसभा सीटें जीती थीं.


वैसे अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आप ने कहा कि उसने बीजेपी से ये अवधारणा उधार नहीं ली है. पूर्वोत्तर दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र के आप प्रभारी दिलीप पांडे ने कहा, ‘हम आम आदमी तक पहुंचने के लिए 2012 की सर्दियों से ही चाय पे चर्चा कर रहे हैं.’


पार्टी पहले ही दिल्ली में सात में से पांच लोकसभा सीटों के प्रभारियों की घोषणा कर चुकी है. पांडे ने कहा कि आप ने उनके निर्वाचन क्षेत्र में अब तक 300 ‘चाय पे चर्चा’ बैठकें की हैं. पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि शेष संसदीय क्षेत्रों में भी ऐसी बैठकों की योजना बनायी गयी है.पार्टी सूत्रों ने कहा कि फरवरी 2014 में अहमदाबाद में हुई मोदी की चाय पे चर्चा, जिसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और टेलीविजन चैनलों के माध्यम से पूरे देश में दिखाया गया था, उसके विपरीत आप की बैठकें ज्यादा करीब और सीधी होती हैं, जहां स्थानीय मुद्दे और राजनीतिक विषय चर्चा के केंद्र में होते हैं.


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IL&FS बेलआउट: राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर साधा निशाना, कहा- चौकीदार की दाढ़ी में तिनका


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राफेल डील को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रविवार को कर्ज संकट से जूझ रही कंपनी ILFS के बेलआउट पैकेज को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा.कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने ट्वीट में आरोप लगाया कि इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (ILFS) कंपनी को साल 2007 में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री) ने 70 हजार करोड़ का गिफ्ट सिटी नाम का प्रोजेक्ट दिया, लेकिन इस प्रोजेक्ट के तहत कोई काम नहीं हुआ, बल्कि इसमें जालसाजियां सामने आईं.


उन्होंने कहा कि कर्ज के बोझ तले दबी इस कंपनी को बचाने के लिए मोदी सरकार अब जनता के पैसों से उसे बेलआउट (मदद के लिए रुपये देना) करवा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय जीवन बीमा निगम लिमिटेड (एलआईसी) और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) पर इस कंपनी की मदद के लिए दबाव डाल रही है.





राहुल गांधी ने कहा, ‘लोग जिंदगी भर की अपनी जमा पूंजी एलआईसी में डालते हैं. लोगों को LIC पर भरोसा है, आखिर उनका पैसा किसी जानसाज़ कंपनी को बचाने के लिए क्यों इस्तेमाल किया जाए.’


बता दें कि आईएलएंडएफएस समूह पर कुल 91,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और उसे फंड की भारी कमी से जूझना पड़ रहा है. कंपनी 27 अगस्त के बाद कर्ज पर ब्याज के भुगतान में कई बार चूक कर चुकी है. एलआईसी इस कंपनी में 25.34 प्रतिशत और एसबीआई 6.42 प्रतिशत की हिस्सेदार है.


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'सबरीमाला पहुंचने को कोई महिला कई किलोमीटर खचाखच भीड़ में खड़ी रह सकती है?'


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केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में आए फैसले के मद्देनज़र त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने रविवार को कहा कि असली महिला श्रद्धालुओं के भगवान अय्यप्पा मंदिर में आने की संभावना नहीं है और केवल महिला कार्यकर्ता ही मंदिर आएंगी.देश की शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में 10 से 50 साल की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था. अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि सैकड़ों साल पुरानी ये हिंदू धार्मिक व्यवस्था अवैध एवं असंवैधानिक है.


केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन के साथ यहां बैठक के बाद पद्मकुमार ने कहा कि त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) केंद्र से 100 एकड़ वन क्षेत्र की मांग करेगा, ताकि शीर्ष अदालत के फैसले को लागू करने के लिए श्रद्धालुओं को और सुविधाएं मुहैया करायी जाए.


उन्होंने कहा कि मंदिर की देखरेख करने वाला बोर्ड मौजूदा संदर्भ में अदालत के आदेश को लागू करने में आने वाली चुनौतियों और कठिनाइयों का हवाला देते हुए समीक्षा याचिका दाखिल करने पर भी विचार करेगा.शीर्ष न्यायालय के फैसले पर अफसोस ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए केवल संवैधानिक, बुनियादी और लैंगिक मसलों पर ही विचार किया.


पद्मकुमार ने बताया, ‘पिछले वार्षिक सत्र में एक ख़ास दिन अप्रत्याशित भीड़ के कारण श्रद्धालुओं को लगातार 17 घंटे से अधिक समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ा था.’ पिछले 14 जनवरी को मकराविलक्कु के दिन तकरीबन साढ़े पांच लाख श्रद्धालु मंदिर में आए थे.


उन्होंने बताया, ‘क्या ये किसी महिला के लिए संभव है कि वो वन क्षेत्र की कई किलोमीटर की यात्रा कर खचाखच भीड़ में खड़ी हो.’ टीडीबी प्रमुख ने दावा किया कि ऐसे वास्तविक भक्त जो सबरीमला मंदिर की परंपराओं और रीति रिवाजों का सम्मान करते हैं और यहां की परिस्थितियों से वाकिफ हैं, उनके मंदिर में आने की संभावना नहीं है.


उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले के नाम पर केवल कुछ महिला कार्यकर्ता ही पैदल चल कर मंदिर आएंगी.’ पद्मकुमार ने कहा कि टीडीबी हालांकि महिला श्रद्धालुओं के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा. महिलाएं यहां 16 अक्टूबर से आना प्रारंभ करेंगी जब मंदिर इस साल तीन महीने लंबे वार्षिक तीर्थाटन के लिए खुलेगा.


उन्होंने कहा कि मौजूदा संदर्भ में श्रद्धालुओं को विशेष सुविधाएं मुहैया कराना बोर्ड के लिए कठिन और चुनौतीपूर्ण होगा. कुमार ने कहा, ‘इसलिए अदालत के आदेश को लागू करने के लिए हम केंद्र सरकार से पेरियार टाइगर रिजर्व की 100 एकड़ या उससे अधिक भूमि मुहैया कराने का आग्रह करेंगे. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति भी आवश्यक है.’


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पेट्रोल के दाम 100 रुपये होते ही बंद हो जाएंगे पंप!


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तेल की आसमान छूती कीमतों से आम आदमी की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. तेल की लगातार बढ़ती कीमतें सिर्फ आम आदमी के लिए ही नहीं बल्कि पेट्रोलियम इंडस्ट्री के लिए भी बड़ी चुनौती साबित हो रही है. तेल की इन कीमतों से पेट्रोलियम इंडस्ट्री पिछली सदी के अंत में बहुचर्चित Y2K बग जैसी तकनीकी चुनौती को सामने खड़ा देख रही है.पेट्रोल के दाम के शतक लगाने से पहले ही इंडस्ट्री को इस चुनौती से निपटना होगा. इसमें असफल होने का मतलब है कि पेट्रोल पंपों के डिस्पेंसिंग यूनिट (डीयू मीटर, जो दाम और तेल की मात्रा दिखाते हैं) काम करना बंद कर देंगे. मतलब ये कि अगर पेट्रोल की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर को पार करती है तो पेट्रोल पंप बंद हो जाएंगे.


टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अभी पेट्रोल पंपों पर जो डिस्पेंसिंग यूनिट लगे हैं, वो रुपए में 2 अंक और पैसे भी 2 अंकों के लिहाज से सेट किए गए हैं. इस तरह मौजूदा डिस्पेंसिंग यूनिट जो अधिकतम कीमत दिखा सकते हैं, वो 99.99 रुपए है. ऐसे में अगर पेट्रोल की कीमत 100 रुपए हो जाती है तो डिस्पेंसिंग यूनिट में 0.00 रुपए दिखेगा.


ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन एम प्रभाकर रेड्डी ने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियां एकदम आखिरी वक्त में जाग रही हैं. डिस्पेंसिंग यूनिट्स को जब डिजिटल बनाया गया था, ये बात दूर-दूर तक किसी ने सोचा भी नहीं था कि पेट्रोल के दाम एक दिन 100 रुपए प्रति लीटर तक हो जाएगा. इसका सारा खामियाजा डीलर्स और उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा, क्योंकि सिस्टम को अपग्रेड करने में वक्त लगेगा.पेट्रोल के दाम जिस तेज़ी से बढ़ रहे हैं उसे देखते हुए इसके जल्द ही 3 अंकों को छूने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. देश के कुछ शहरों में पेट्रोल 91 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच चुका है.


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अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड में बुर्का पहनकर घुसा पुलिस अफसर


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केरल में एक निजी अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड में बुर्का पहनकर घुसने के आरोप में वाले 42 वर्षीय पुलिस अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस ने रविवार को बताया कि घटना इडुक्की जिले के अल अशर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में शुक्रवार की रात को हुई.थोडुपुझा के पुलिस निरीक्षक वीसी विष्णुकुमार ने इस घटना के बारे में बताया है कि अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड में आठ महिलाएं अपने नवजात बच्चों के साथ थीं. इसके अलावा भर्ती महिलाओं के कुछ रिश्तेदार और दो नर्स भी वार्ड में मौजूद थीं. जब बॉडी बिल्डर नूर समीर मुस्लिम महिलाओं के वस्त्र में वार्ड में घुसा था.


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महिला की जूतियां और चलने के अंदाज से कुछ लोगों को शक हुआ और उन्होंने आवाज लगाई. इसके बाद समीर को अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने पकड़ लिया, लेकिन जब उसने बताया कि वह पुलिस अधिकारी है, तो उसे छोड़ दिया गया.यह भी पढ़ें: केरल में अब भी 3.42 लाख लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर


पुलिस ने बताया कि आरोपी अब भी फरार है और यह अभी पता नहीं चला है कि वह वार्ड में क्यों घुसा था. पुलिस अधिकारी के खिलाफ आईपीएस की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.


 


Article source: http://www.jagran.com/punjab/amritsar-14724451.html