Sunday, 31 December 2017

VIDEO- अहमद पटेल का सरकार पर निशाना, पाक से बैंकॉक में वार्ता क्यों?


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 कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने पुलवामा में आत्मघाती हमले के बाद पाकिस्तान को लेकर सरकार की नीतियों पर निशाना साधा है. पटेल ने बैंकॉक में भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत को आड़े हाथों लिया है और सवाल पूछा है कि जब सीमा पार से लगातार भारतीय सुरक्षाबल को निशाना बनाया जा रहा है तो पाकिस्तान से बातचीत क्यों हो रही है? विडियो देखें.

VIDEO- 3 तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली इशरत जहां BJP में शामिल


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 तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाली पश्चिम बंगाल की इशरत जहां बीजेपी में शामिल हो गईं. साल 2014 में इशरत जहां के पति ने दुबई से फोन पर उन्हें तीन तलाक दिया था, जिसके बाद इशरत जहां ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी. बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के महासचिव सायंतन बसु ने इशरत जहां के बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की और इशरत जहां को बीजेपी का झंडा देकर पार्टी में स्वागत किया गया. इस मौके पर तीन तलाक पर समर्थन के लिए इशरत जहां ने पीएम मोदी और बीजेपी की तारीफ भी की. विडियो देखें.

VIDEO- पुलवामा फिदायीन हमले में शामिल तीसरे आतंकी की तलाश तेज


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 पुलवामा के लेथपोरा सीआरपीएफ़ कैम्प पर आत्मघाती हमला करने वाले तीसरे आतंकी की तलाश रात गुजरने के बाद फिर से शुरू हो गई है. इससे पहले कल रात दो आतंकियों के मारे जाने के बाद कैम्प में छिपे बैठे तीसरे आतंकी को खोजने का अभियान रोक दिया गया था. मारे गए दोनों आतंकी कश्मीर के ही रहने वाले हैं, जिनकी पहचान पुलवामा के मंजूर अहमद बाबा और त्राल के फरदीन अहमद के तौर पर हुई है. मारे गए आतंकियों में एक जम्मू-कश्मीर पुलिस के कॉन्सटेबल का बेटा था. वहीं इस आतंकी हमले में पांच जवान भी शहीद हो गए. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश जवानों और उनके परिवार वालों के साथ खड़ा है. विडियो देखें. 

मुंबई आग हादसा: पब के 2 मैनजर गिरफ्तार, मालिक अभी भी फरार


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मुंबई के कमला मिल्स कंपाउंड में हुए आग हादसे में सोमवार को पुलिस ने वन-एबव पब के दो मैनेजरों को गिरफ्तार किया है. गुरुवार देर रात हुए आग हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 21 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.आग हादसे के बाद से सभी आरोपी फरार चल रहे थे. उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ था. पुलिस ने उनकी तलाश के लिए 5 टीमें बनाई थी. शनिवार को पब के सभी तीन मालिकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था.


बीएमसी से 5 अधिकारी निलंबित
आग हादसे के बाद घटना स्‍थल पर पहुंचे सीएम देवेंद्र फडणवीस ने हादसे के लिए जिम्‍मेदार बीएमसी के पांच अधिकारियों को सस्‍पेंड कर दिया था. इस दौरान सीएम ने कहा था कि अगर जांच में बीएमसी अधिकारियों की लापरवाही सामने आई तो उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी. इसी के साथ मुख्‍यमंत्री ने शहर में अन्य सभी जगहों पर फायर ऑडिट करने के भी आदेश जारी किए. उन्‍होंने अधिकारियों ने आदेश दिया कि जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा उसे तुरंत गिराने के आदेश दिए जाएंगे.गुरुवार रात 12:30 बजे हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, हादसा गुरुवार की रात 12:30 बजे हुआ. उस दौरान पब में एक बर्थडे पार्टी चल रही थी और ‘ऑल वुमन लास्ट नाइट’ थीम पर महिलाओं की एक पार्टी चल रही थी. जिस वक्त आग लगी, तब कुछ महिलाओं ने खुद को बचाने के लिए वॉशरूम में लॉक कर लिया. ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से हुई है. पुलिस ने ज्यादातर लाशें वॉशरूम से बरामद की हैं.


बिना लाइसेंस के चल रहा था रेस्टोरेंट-पब
बताया जा रहा है कि जिस रेस्टोरेंट में आग सबसे पहले लगी, वो बगैर लाइसेंस के चल रहा था. रेस्टोरेंट मालिक पर गैर इरादतन हत्या के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस पूरे मामले से म्युजिक कंपोजर शंकर महादेवन के बेटे सिद्धार्थ महादेवन का नाम भी सामने आया है. मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक, बिल्डिंग में स्थित मोजो बिस्त्रो रेस्तरां के मालिक हैं सिद्धार्थ महादेवन. और बीएमसी के सूत्रों के मुताबिक, इस रेस्तरां के अपर सेक्शन में 25 गैस सिलिंडर रखी हुई थीं.


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मुंबई आग हादसे में ‘संकटमोचक’ बना सिक्योरिटी गार्ड, बचाई 100 लोगों की जान

साल 2018 में पूरी दुनिया को टोपी पहनाना चाहती हैं विद्या बालन!


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 विद्या बालन को नए साल से बहुत उम्मीदें हैं. 1 दिसंबर को नए साल के पहले दिन के साथ ही विद्या का बर्थडे भी होता है. साल 2017 में विद्या की फिल्म 'तुम्हारी सुलु' दर्शकों ने बहुत पसंद की. देखिए, अब 2018 में विद्या की क्या ख्वाहिश है. 

नितिन पटेल को मिला वित्‍त मंत्रालय, रुपाणी बोले- मुद्दा खत्‍म हुआ


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गुजरात कैबिनेट में पसंद का मंत्रालय न मिलने से नाराज चल रहे उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद पसंदीदा वित्त मंत्रालय मिलने पर आज अपना कार्यभार संभाल लिया. इससे पहले पटेल ने अपने आवास पर संवाददाताओं से कहा, ‘बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने सुबह के समय बात की और मुझे आश्वासन दिया कि मुझे कैबिनेट में मेरे कद के अनुरूप नंबर दो का विभाग दिया जाएगा.’पटेल ने कहा, ‘शाह ने मुझसे मेरे विभागों का कार्यभार संभालने को कहा, इसलिए मैं आज कार्यभार संभाल लूंगा. मुख्यमंत्री विजय रूपाणी दोपहर के समय राज्यपाल ओपी कोहली से मुलाकात करेंगे और मुझे आवंटित नए विभाग के बारे में पत्र सौपेंगे.’ पसंदीदा मंत्रालय मिलने पर कार्यभार संभालने के तुरंत बाद नितिन पटेल अपने समर्थकों से मिलने अपने विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मेहसाणा के लिए रवाना हो गए.


दोपहर बाद पटेल के मेहसाणा पहुंचने के तुरंत बाद रूपाणी ने गांधीनगर में घोषणा की कि पटेल को वित्त मंत्रालय दिया गया है और मुद्दा अब खत्म हो गया है. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमने विभागों में कुछ बदलाव किए हैं. हमने नितिन भाई को वित्त मंत्रालय दिया है. इसके साथ मुद्दा समाप्त हो गया है. भाजपा जैसे बड़े परिवार में इस तरह की चीजें होती हैं. मैं राज्यपाल को पहले ही पत्र भेजकर उन्हें विभागों में बदलाव के बारे में सूचित कर चुका हूं.’ पटेल ने उल्लेख किया कि मामला कुछ विभागों के बारे में नहीं था, बल्कि ‘आत्म-सम्मान’ का था.


उन्होंने कहा, ‘मैंने पार्टी आलाकमान से कहा था कि या तो मुझे सम्मानजनक विभाग दिए जाएं या मुझे कैबिनेट से कार्यमुक्त कर दिया जाए.’ वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि वह 40 साल से ‘वफादार और अनुशासित’ सिपाही की तरह भाजपा के साथ काम कर रहे हैं. रूपाणी के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार में पटेल के पास अन्य विभागों के साथ ही वित्त और शहरी विकास जैसे मंत्रालय भी थे.इस बार वित्त मंत्रालय सौरभ पटेल को दे दिया गया और शहरी विकास मंत्रालय खुद रूपाणी ने अपने पास रख लिया था. इस तरह पटेल के पास सड़क एवं भवन निर्माण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, नर्मदा, कल्पसर और अन्य परियोजना संबंधी विभाग ही रह गए. विभाग आवंटन को लेकर नाराज नितिन पटेल ने खुद को मिले विभागों का कार्यभार संभालने से मना कर दिया था जिससे शीर्ष बीजेपी नेतृत्व को वरिष्ठ पाटीदार नेता को संतुष्ट करने के लिए हरकत में आना पड़ा.


रूपाणी ने 28 दिसंबर को विभागों की घोषणा करते हुए कहा था, ‘यह सच नहीं है कि जिस मंत्री के पास वित्त मंत्रालय है, वह कैबिनेट में नंबर दो का मंत्री है. नितिन पटेल हमारे वरिष्ठ नेता हैं और वह नंबर दो रहेंगे.’ वहीं, पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने कहा था कि यदि नितिन पटेल 10 अन्य विधायकों के साथ भाजपा छोड़ते हैं और नयी सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से हाथ मिलाते हैं तो वह उन्हें समर्थन देंगे और कांग्रेस नेतृत्व से यह सुनिश्चित करने के लिए बात करेंगे कि पटेल को वह सम्मान मिले जिसके वह हकदार हैं.


हार्दिक ने कहा था, ‘यदि वह (नितिन पटेल) भाजपा छोड़ने का फैसला करते हैं और 10 अन्य विधायक उनके साथ बीजेपी छोड़ने को तैयार हैं तो हम नितिन भाई को वह पद दिलाने के लिए कांग्रेस से बात करेंगे जिसके वह हकदार हैं.’ वरिष्ठ कांग्रेस नेता विर्जी थुम्मार ने भी कहा था कि यदि नितिन पटेल भगवा पार्टी छोड़ते हैं तो उन्हें कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.


कांग्रेस ने हालांकि स्पष्ट किया था कि थुम्मार ने यह बात व्यक्तिगत स्तर पर कही है और कैबिनेट में विभाग आवंटन भाजपा का आंतरिक मामला है. गुजरात की 182 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 99 और कांग्रेस को 77 सीट मिली थीं.


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VIDEO: 'ख़बर पक्की है' में देखें सभी वायरल खबरों का सच


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 न्यूज़18 इंडिया के शो 'खबर पक्की है' में देखिए सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबरों के पीछे का सच. देखें वीडियो

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पुलवामा हमला: 16 साल का फिदायीन निकला पुलिस कांस्टेबल का बेटा


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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा सेक्टर के अवंतीपुरा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में भारतीय सेना के 5 जवान शहीद हो गए. सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया. इनमें से एक आतंकी की शिनाख्त श्रीनगर में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल के बेटे के रूप में हुई है.फिदायीन आतंकी फरदीन अहमद खांडे महज 16 साल का है. कुछ महीने पहले ही वह आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुआ था. फरदीन के पिता गुलाम मोहम्मद खांडे जम्मू कश्मीर पुलिस में पुलिस कांस्टेबल हैं.


जानकारी के मुताबिक, ये आतंकी हिजबुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर बॉय रहे बुरहान वानी के गांव त्राल का रहने वाला था. 10वीं में पढ़ने के दौरान ही उसने जैश-ए-मोहम्मद ज्वाइन कर ली थी. तीन-चार महीने में उसका इस तरह ब्रेन वॉश किया गया कि वह फिदायीन हमलावर बन गया.


सीआरपीएफ ने बताया कि दूसरे आतंकी की शिनाख्त मंजूर बाबा के रूप में हुई है. 22 साल का मंजूर पुलवामा का ही रहने वाला था. उसके पिता का नाम अली अहमद है. वहीं, तीसरे आतंकी की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है.बताया जा रहा है कि तीसरा आतंकी शाम तक बिल्डिंग में ही छिपा हुआ था. सीआरपीएफ ने बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में धमाका किया था. उसके बाद से फायरिंग नहीं हुई. ऐसे में माना जा रहा है कि धमाके में तीसरा आतंकी भी मारा गया है. फिलहाल वहां सर्च ऑपरेशन जारी है.


पुलिस कांस्टेबल के बेटे के रूप में एक फिदायीन की शिनाख्त होने से सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस हैरान है. 2003 के बाद ऐसा पहला मौका है, जब कोई स्थानीय कश्मीरी की फिदायीन के तौर पर शिनाख्त हुई हो.


जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ स्थानीय आतंकियों को आतंक के रास्ते से हटाने के लिए कई योजनाएं चला रही है. उनके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. लेकिन, इसके बाद भी स्थानीय आतंकी सामने आ रहे हैं.


बता दें कि शनिवार देर रात करीब 2 बजे 3 आतंकी सीआरपीएफ के कैंप में घुस गए थे. आतंकियों ने पहले ग्रेनेड से हमला किया. फिर फायरिंग शुरू कर दी. इस दौरान सेना के 5 जवान शहीद हो गए. 3 जवान जख्मी हुए हैं. जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. आतंकी संगठन का कहना है कि यह फिदायीन हमला उनके आतंकी कमांडर नूर त्राली की मौत का बदला लेने के लिए किया गया है.


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कोहरे से घिरा दिल्ली NCR, एयरपोर्ट पर सभी ऑपरेशन सस्पेंड, 15 ट्रेनें भी कैंसिल


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दिल्ली, एनसीआर और उत्तर भारत में घना कोहरा छाया हुआ है. इसकी वजह से दिल्ली से उड़ान भरने वाली 5 घरेलू और 7 इंटरनेशनल उड़ाने लेट हो गई हैं. जबकि, एक फ्लाइट कैंसिल कर दी गई है. दिल्ली एयरपोर्ट पर विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो गई है. ऐसे में सभी ऑपरेशन स्टैंडबाय मोड पर कर दिए गए हैं.कोहरे का असर रेलवे पर भी पड़ा है. दिल्ली से जाने वाली 15 ट्रेनें कैंसिल कर दी गई है. 56 ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जबकि 20 ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है. ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ठंड और कोहरे में काफी दिक्कतें हो रही हैं.



रविवार को भी कोहरे की वजह से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतराराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर सभी ऑपरेशन स्टैंडबाय मोड पर कर दिए गए थे. कुछ देर बात 10 उड़ानों को डायवर्ट कर दिया गया था. रविवार को कम दृश्यता के चलते 40 से अधिक फ्लाइट्स का रूट बदला गया है और 90 से अधिक फ्लाइट्स प्रभावित हुईं.




कोहरे से रोडवेज भी प्रभावित हुआ है. विजिबिलिटी काफी कम होने से वाहन चालकों को काफी दिक्कत हो रही है. कई इलाकों से सड़क हादसों की खबर भी आ रही है.





वैसे मौसम वैज्ञानिकों ने संभावना जताई है कि क्षेत्र में अगले दो दिन मौसम शुष्क रहेगा और ठंड से कोई राहत नहीं मिलेगी. बता दें कि उत्तर भारत में ठंड अपना असर दिखा रही है. पंजाब और हरियाणा अब भी ठंड की गिरफ्त में है. रविवार को भी जहां ज्यादातर स्थानों पर कोहरा छाया रहा और हिसार सबसे ठंडा क्षेत्र रहा जहां तापमान शून्य से 3.9 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से तीन डिग्री कम था.


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‘काम कीजिए, नहीं तो कंपनी नष्ट हो जाएगी’, एयर इंडिया चीफ का संदेश


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तमिलनाडु में MGR की तरह कामयाब हो पाएंगे 'नेता' रजनीकांत?


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मशहूर फिल्म अभिनेता एम.जी. रामचंद्रन जब पहली बार वर्ष 1977 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे तो भी कुछ राजनीतिक पंडितों ने कहा था कि ‘वह अनर्थकारी साबित होंगे.’यह भी कहा गया कि आम चुनाव में उनकी जीत एक सामान्य योग्यता वाले व्यक्ति यानी एक मीडियोकर की जीत है. पर गद्दी पर बैठने के बाद एम.जी.आर. ने स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए महत्वाकांक्षी और बेहतर मध्याह्न भोजन कार्यक्रम सहित राज्य में कई नए काम किए. बीच में कुछ महीनों को छोड़ कर वे 1977 से 1987 तक मुख्यमंत्री रहे.


कुल मिलाकर वे एक सफल मुख्यमंत्री साबित हुए थे. उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था. 1917 में जन्मे एम.जी.आर. का 1987 में निधन हो गया.


अब जबकि तमिलनाडु के एक अन्य बड़े अभिनेता रजनीकांत ने राजनीति में कदम रखा है तो उनके बारे में भी कुछ हलकों में उसी तरह की आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं. डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने तो उन्हें अनपढ़ तक कह दिया है.


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रजनीकांत ने कहा है कि वे पार्टी बनाएंगे और अगले चुनाव में सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.

एम.जी.आर. के सत्ता में आने से ठीक पहले तमिलनाडु की जैसी राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति थी, उससे आज की स्थिति अधिक खराब लग रही है. ऐसे में यदि कोई सत्ता में आकर उस स्थिति में थोड़ा भी सुधार करने की कोशिश करे तो उसे लोग हाथों हाथ लेंगे, ऐसा कहा जा रहा है. देखना होगा कि यह मौका रजनीकांत को मिलता है या नहीं.


रजनीकांत ने कहा है कि वे पार्टी बनाएंगे और अगले चुनाव में सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. उनका यह भी दावा है कि वे तमिलनाडु की राजनीतिक व्यवस्था को बदल कर रख देंगे. वे पैसा,पावर और पॉलिटिक्स के लिए राजनीति में नहीं आ रहे हैं.
एम.जी.आर. के मुकाबले राजनीति में नए हैं रजनीकांत


रजनीकांत ने यह बात इसीलिए कही है क्योंकि इन दिनों तमिलनाडु की राजनीति में इन्हीं तीन तत्वों का अधिक बोलबाला है. जाहिर है कि रजनीकांत यदि सत्ता में आ जाएं और वे राजनीति व शासन व्यवस्था को सुधारने के लिए कुछ भी लीक से हटकर काम करने की कोशिश करें तो वे राजनीति में एम.जी.आर.की तरह ही जम सकते हैं.


वैसे तो तत्कालीन डीएमके नेता एम.जी. रामचंद्रन सन् 1962 में ही विधान परिषद के सदस्य बन गए थे. यानी राजनीति से उनका नाता रजनीकांत की अपेक्षा पुराना था. फिर भी वे पहले फिल्मों पर ही अधिक ध्यान दे रहे थे. डीएमके सबसे बड़े नेता और मुख्यमंत्री रहे अन्नादुरै के निधन के बाद करुणानिधि ने डीएमके की कमान संभाल ली. एम.जी.आर. ने जब देखा कि करुणानिधि अपने पुत्र एम.के. मुत्थु को आगे बढ़ा रहे हैं, तो एम.जी.आर. ने विद्रोह कर दिया. नतीजतन उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया. सन् 1972 में एम.जी.आर.ने एआईएडीएमके बना लिया. 1977 के विधान सभा चुनाव में उनके दल को बहुमत भी मिल गया.


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रामचंद्रन पहली बार वर्ष 1977 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे

रजनीकांत की तरह कभी एम.जी.आर. की फिल्मों का भी था जादू


यह सब फिल्मों के जरिए जनता पर एम.जी.आर. ने जो जादू चलाया था, उसके कारण संभव हुआ. इधर रजनीकांत का जादू भी कम नहीं है. मुख्यमंत्री बनने के बाद एम.जी.आर. ने स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन के कार्यक्रम को बेहतर बनाया. उसमें पौष्टिक सामग्री की आपूर्ति करवाई. वैसे तमिलनाडु में 1925 से ही मध्याह्न भोजन कार्यक्रम चल रहा था. महिलाओं के लिए उन्होंने अलग से विशेष बसें चलवाईं. राज्य में शराबबंदी की. राज्य के ऐतिहासिक स्थलों और मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया. इस तरह के कुछ अन्य काम भी किए.
वैसे भी उत्तर भारत के राज्यों की अपेक्षा दक्षिण भारत के राज्य विकास और सुशासन के क्षेत्र में आगे रहे हैं. एक फिल्मी कलाकार एम.जी.आर. के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद भी उसमें कोई अंतर नहीं आया, ऐसी खबरें मिलती रहीं. हां, अपने पुत्र के प्रति करूणानिधि के झुकाव को देख कर तो एमजीआर ने पार्टी तोड़ दी, पर उन्होंने खुद अपने उतराधिकारी के रूप में जयललिता को आगे बढ़ाया.


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साउथ में बॉस के नाम से मशहूर हैं रजनीकांत.

एम.जी.आर. की तरह ही रजनीकांत भी तमिलनाडु में अत्यंत लोकप्रिय अभिनेता हैं. पर देखना है कि वे राजनीतिक चालें चलने में कितने माहिर साबित होते हैं. परंपरागत विवेक उनमें कितना है. वैसे तो राह आसान नहीं है, फिर भी यदि उन्हें सत्ता में आने का मौका मिला तो देखना होगा कि वे डॉ. स्वामी जैसे नेताओं और अन्य राजनीतिक पंडितों की आंशंकाओं को किस हद तक गलत साबित कर पाते हैं.


अनपढ़ के आरोप पर यह कहा जा सकता है कि मद्रास के पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज भी बहुत ही कम पढ़े-लिखे थे. वे अंग्रेजी तक नहीं जानते थे. पर वे परंपरागत विवेक से लैस थे. कामराज ने कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद भी सफलता पूर्वक संभाला था. पता नहीं इस मामले में रजनीकांत कहां टिकते हैं.


(Surendra Kishore)


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VIDEO- वक्त की नजाकत है, चुनावों में हिस्सा लूंगा: रजनीकांत


Love story: इंटरव्यू लेने आई उस लड़की पर दिल हार बैठे थे रजनीकांत


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