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साल 2017 खत्म होते-होते भारत में इंस्टेंट ट्रिपल तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के खिलाफ कानून बन गया. इसके साथ-साथ येरुशलम मुद्दे पर भी दुनिया दो हिस्सों में बंटी आई. अगर साल 2017 को इस्लामिक देशों और इस्लामिक राजनीति में बदलाव का साल कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी.तलाक, तलाक, तलाक
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में रहती है. ऐसे में इंस्टेंट ट्रिपल तलाक का खत्म होना न सिर्फ भारत में मुस्लिम महिलाओं की दशा बदलेगा, मानवाधिकार और शरीयत पर आने वाले कुछ सालों में कई फर्क पैदा करेगा.
तेल की धार2017 में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें काफी नीचे गईं. इस कमी का असर तेल आधारित इन देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ा. 2018 में सउदी अरब और यूएई चीज़ों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाएंगे. बाकी के देश भी अपना-अपना वैट लागू कर सकते हैं.
महिलाओं की ड्राइविंग
महिलाओं के अधिकारों के लिहाज से ये साल काफी अच्छा रहा. सउदी में इस साल महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाज़त मिल गई. इसके साथ ही उन्हें आने वाले समय औरतों को स्टेडियम जाने की इजाज़त भी होगी. सउदी के राजकुमार ने इस साल अपने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के साथ कुछ ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी बनाने वाली है जिसके बीच पर बिकिनी पहन कर घूमने की इजाज़त होगी.
सिनेमा की वापसी
सउदी अरब में 35 साल बाद सिनेमा हॉल वापस आ रहे हैं. साल 1980 में कट्टरपंथी इस्लाम की आमद के साथ ही अरब में सिनेमा हॉल पर प्रतिबंध लग गया था. लेकिन अब ये देश वापस अपनी बेड़ियां ढीली कर रहे हैं. इसके साथ ही 2017 में गेम ऑफ थ्रोन्स के दो ऐक्टर और स्टार जॉन ट्रवोल्टा भी साउदी पहुंचे थे. इस तरह की बातें इस्लामिक मुल्कों की राजनीति में बड़ा बदलाव करेंगी.
ट्रंप और येरुशलम
2017 में अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउदी अरब की यात्रा की. इसके साथ ही उन्होंने येरुशलम को इज़रायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने की घोषणा कर दी. ये फैसला यूएन में भले ही वापस हो गया मगर इससे पता चलता है कि आने वाले समय में इस्लामिक मुल्कों और दुनिया की राजनीति एक जबरदस्त बदलाव देखने वाली है.
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