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संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है. पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर हंगामा और फिर तीन तलाक बिल पेश होने के बाद भी विपक्ष की पार्टियां राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस की रणनीति को लेकर असमंजस में हैं.कांग्रेस गुजरात चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए बयान पर पहले जवाब मांगने की कोशिश करती दिखी. मोदी के बयान पर माफी को लेकर कांग्रेस के सांसदों ने एक हफ्ते तक संसद की कार्यवाही भी प्रभावित की.
राहुल गांधी ने अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की पहली मीटिंग ली तो उन्होंने कई मुद्दों बर बात की. इसके बाद उन्होंने नेताओं-कार्यकर्ताओं को सड़क पर आंदोलन करने की नसीहत दी. लेकिन इस बीच उन्होंने बीजेपी को झूठ का पैकेट तक बताया.
हालांकि, ये मुद्दा तब गायब हो गया जब राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुमाम नबी आजाद ने वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया. सूत्रों के अनुसार, आजाद और जेटली के बीच लिखित में समझौता हुआ. इसमें यह भी सुनिश्चित किया गया कि शांति बनाए जाने के बाद इस पर बयानबाजी नहीं होगी. लेकिन, राहुल गांधी ने अरुण जेटली पर हमला किया. उन्होंने वित्तमंत्री को झूठा कहते हुए एक ट्वीट किया. हालांकि, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इसे आश्चर्य के तौर पर लिया. इससे बीजेपी नाराज हो गई.राहुल के ट्वीट के बाद कांग्रेस के कुछ नेता असमंजस में पड़ गए. वह ये सोचने लगे कि यदि राहुल जेटली की माफी से सहमत हैं तो उन्होंने उनपर हमला क्यों किया? पार्टी के कार्यकर्ता जो राहुल की रणनीति से उत्साहित थे, वे भी ठंडे पड़ गए.
पार्टी में दूसरा असमंजस तीन तलाक बिल को लेकर है. संसद के सत्र से पहले राहुल गांधी ने एक मीटिंग ली थी. इस में यह तय किया गया था कि कांग्रेस बिल का विरोध नहीं करेगी. कांग्रेस महिला आरक्षण बिल की मांग कर रही है. ऐसे में तीन तलाक का विरोध करने पर उसकी यह मांग कमजोर पड़ सकती है. असम की सांसद और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव से इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखने के लिए कहा गया.
कांग्रेस पहले तीन तलाक में आपराधिक क्लॉज को लेकर सवाल उठाया था. लेकिन, बीच में उसने अपना स्टैंड बदल दिया और इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजने की बात करने लगी. सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की रणनीति में बदलाव उसके ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की नई रणनीति के तहत है. राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव के दौरान मंदिर-मंदिर दर्शन करके इस नई रणनीति को आगे बढ़ाया था.
एआईएमएम सांसद असउद्दीन ओवैसी ने इस पर बयान दिया, कांग्रेस जनेऊ की राजनीति कर रही है और वह एक्सपोज हो गई है. हालांकि, इन राजैनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच साल 2018 राहुल गांधी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.
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