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भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो द्वारा बनाए ‘सबसे अधिक वजनी’ उपग्रह जीसैट-11 का पांच दिसंबर को फ्रेंच गुआना के एरियानेस्पेस के एरियाने-5 रॉकेट से प्रक्षेपण किया जाएगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि इसका वजन करीब 5,854 किलोग्राम है. इस सैटेलाइट से देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध होंगी और इंटरनेट की स्पीड भी सुधार आएगा.उसने बताया कि यह इसरो का बनाया अब तक का ‘सबसे अधिक वजन’ वाला उपग्रह है. जीसैट-11 अगली पीढ़ी का ‘हाई थ्रुपुट’ संचार उपग्रह है और इसका जीवनकाल 15 साल से अधिक का है. इसे पहले 25 मई को प्रक्षेपित किया जाना था लेकिन इसरो ने अतिरिक्त तकनीकी जांच का हवाला देते हुए इसके प्रक्षेपण का कार्यक्रम बदल दिया.
शुरुआत में उपग्रह भू-समतुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में ले जाया जाएगा और उसके बाद उसे भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा. एरियाने-5 रॉकेट जीसैट-11 के साथ कोरिया एयरोस्पेस अनुसंधान संस्थान (केएआरआई) के लिए जियो-कोम्पसैट-2ए उपग्रह भी लेकर जाएगा. यह उपग्रह मौसम विज्ञान से संबंधित है.
पिछले सप्ताह इसरो ने पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी) सी-43 के जरिए अतंरिक्ष में बड़ी उड़ान भरी थी. पीएसएलवीसी-43 के जरिए 31 सैटलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की इस साल में यह छठी उड़ान है. PSLV-C 43 पृथ्वी का निरीक्षण करने वाले भारतीय उपग्रह एचवाईएसआईएस और 30 अन्य सैटेलाइट को अपने साथ अंतरिक्ष में लेकर गया है. इनमें से 23 सैटेलाइट अमेरिका के हैं.(एजेंसी इनपुट के साथ)
Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/karobar/sensex-nifty-bse-share-market-4-498771.html
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