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छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव पूरे हो चुके हैं और अब हर किसी को नतीजों का इंतज़ार है. नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल्स ने पार्टियों और नेताओं की नींद उड़ा दी है. क्योंकि इस बार आंकड़े सीधे नहीं, बल्कि उलझाने वाले हैं. ये एग्जिट पोल्स कितने सही साबित होंगे; ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इनसे हवा के रुख का इशारा जरूर मिल गया है.छत्तीसगढ़ के लिए आए 10 एग्ज़िट पोल्स में से 3 में बीजेपी की जीत का अनुमान है, वहीं चार एग्ज़िट पोल्स में कांग्रेस बाजी मारती दिख रही है. जबकि तीन एग्जिट पोल्स में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जताई गई है. छत्तीसगढ़ की 90 सीटों की विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 46 विधायकों का समर्थन जरूरी है.
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एग्जिट पोल्स के नतीजे आते ही पूर्व सीएम और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के मुखिया अजीत जोगी ने बयान दिया कि उन्हें इन एग्जिट पोल्स पर विश्वास नहीं है और 11 दिसंबर को वह किंग के रूप में उभरेंगे. उनका यह बयान कर्नाटक नतीजों से ठीक पहले के एचडी कुमारस्वामी के बयान की याद आ गई, जिसमें उन्होंने इसी अंदाज में कहा था कि वह किंगमेकर नहीं किंग बनकर उभरेंगे…और हुआ भी यही.
बीजेपी लगाएगी चौका या कांग्रेस का वनवास होगा खत्म
इस चुनाव में बीजेपी चौका लगाने के लिए उतरी है, तो कांग्रेस अपना 15 साल का वनवास खत्म करने के लिए. लेकिन जोगी के लिए यह चुनाव प्रदेश की राजनीति में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की चुनौती है. इसलिए ज़ाहिर है कि उनकी नज़र त्रिशंकु विधानसभा पर होगी. शायद यही वजह है कि वोटिंग से पहले तक बीजेपी का साथ नहीं देने के लिए आठ ग्रंथों की कसम खाने वाले जोगी अब नतीजों का इंतज़ार करने की बात करने लगे हैं.
माया-जोगी के गठबंधन पर भी लगा दांव
छत्तीसगढ़ में मुख्य मुकाबला भले ही बीजेपी कांग्रेस के बीच हो, लेकिन चुनाव में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ और बसपा के गठबंधन की चर्चा भी खूब रही. जिन एग्ज़िट पोल्स में बीजेपी या कांग्रेस की जीत का साफ अनुमान है, उनमें भी JCCJ+BSP को औसतन 5-7 सीट मिलने का अनुमान है. ऐसे में बीजेपी या कांग्रेस अगर 42-43 सीटों पर आकर अटक जाते हैं, तो सरकार बनाने के लिए उन्हें जोगी की तरफ देखना होगा.
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हालांकि, गठबंधन में जोगी की सहयोगी मायावती बीजेपी के खिलाफ मुखर हैं और बीजेपी के साथ जाने के लिए उन्हें मायावती को भी मनाना होगा. वहीं, अगर बीजेपी के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति आती है और वह जोगी के पाले में गेंद डाल देती है, तो वह अपने लिए सीएम पद की मांग भी कर सकते हैं. संभवतः जोगी इसी की उम्मीद कर रहे हैं, क्योंकि इसी स्थिति में वह किंग बन सकते हैं.
कांग्रेस में रहते हुए भी जोगी की प्रदेश कांग्रेस के नेताओं खासकर पीसीसी चीफ भूपेश बघेल से बनी नहीं. दोनों की अनबन कभी किसी से छिपी भी नहीं रही, हालांकि अंतागढ़ सीडी कांड के बाद प्रदेश कांग्रेस कमिटी जोगी के खिलाफ मुखर हो गई, केंद्रीय नेतृत्व ने जोगी के बेटे अमित जोगी को पार्टी से निष्कासित कर दिया. वहीं, कुछ महीनों बाद उन्होंने भी कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया. जोगी परिवार और कांग्रेस के बीच आखिरी कड़ी जोगी की पत्नी रेणु जोगी थीं, जिन्होंने इस बार टिकट नहीं दिए जाने पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया.
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क्या जोगी से हाथ मिलाएगी कांग्रेस?
ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि ज़रूरत पड़ने पर प्रदेश कांग्रेस के नेता जोगी से हाथ मिलाएंगे या नहीं? हालांकि, यह गौर करने वाली बात है कि जोगी या उनके परिवार ने कभी भी गांधी परिवार को निशाने पर नहीं लिया, ऐसे में राहुल गांधी मध्यस्थता करते हैं या नहीं यह भी देखना होगा. रही बात जोगी की तो गांधी परिवार के प्रति अपनी निष्ठा का हवाला देकर वह कांग्रेस की तरफ हाथ बढ़ा सकते हैं.
एक संभावना यह भी
बीएसपी ने जेसीसीजे के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया है. वह यहां 33 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. अगर पार्टी को जोगी की तुलना में अधिक सीटें मिलती हैं और त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में बीएसपी की मदद से कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना हो, तो 2019 में महागठबंधन की संभावनाओं को देखते हुए मायावती जोगी का साथ छोड़ कांग्रेस का साथ दे सकती हैं.
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