Tuesday, 31 July 2018

ममता ने राजनाथ से की मुलाकात पूछा, क्या केन्द्र प. बंगाल में भी चाहता है NRC?


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ममता बनर्जी ने गृहमंत्री से पूछा कि क्या वो असम की तरह पश्चिम बंगाल में भी एनआरसी तैयार करना चाहते है. मंगलवार को प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या केंद्र सरकार असम की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी (एनआरसी) तैयार करने की कवायद चाह रही है.ममता ने असम में एनआरसी तैयार करने की कवायद के लिए बीजेपी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिए लोगों को बांटने का आरोप लगाया है. दिल्ली में ममता ने मंगलवार को राजनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की और दावा किया कि उन्होंने उन 40 लाख लोगों के नाम उन्हें सौंपे हैं जिनके नाम सोमवार को एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं किए गए.


ममता ने राजनाथ से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं यहां एनआरसी पर बात करने के लिए आई हूं. उन 40 लाख लोगों के नाम सौंपे जिनके नाम छूट गए हैं. मैंने उन्हें बताया कि उनका नेतृत्व दावा कर रहा है कि अगला एनआरसी बंगाल में बनेगा. उन्हें किसने अधिकार दिया है?’’


ये भी पढ़ें: असम NRC मुद्दाः ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज, सिविल वॉर की दी थी चेतावनीएनआरसी लाने के फैसले को ‘‘आपदा’’ करार देते हुए ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की कि वह असम के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए संशोधन करें. बाद में गृह मंत्री ने बयान जारी कर कहा कि एनआरसी का मसौदा असम समझौते के प्रावधानों के मुताबिक और सु्प्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार किया गया है.


राजनाथ ने बयान में कहा, ‘‘मैंने ममता से कहा कि एनआरसी का मसौदा असम समझौते के प्रावधानों के मुताबिक और केंद्र, असम की राज्य सरकार और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन के बीच एनआरसी 1951 को अद्यतन करने के लिए पांच फरवरी 2005 को हुई त्रिपक्षीय बैठक में लिए गए फैसलों के मुताबिक प्रकाशित किया गया है. ’’


राजनाथ ने यह भी कहा कि उन्होंने ममता को बताया था कि एनआरसी की कवायद ‘‘पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी, गैर-भेदभावकारी और कानूनी तरीके’’ से अंजाम दी जा रही है. उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी को परेशान नहीं किया जाएगा और प्रक्रिया के हर चरण में सभी लोगों को अपना पक्ष रखने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे.


सत्ताधारी बीजेपी ने ममता की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि वह अवैध प्रवासियों को वोट बैंक की तरह देखती हैं जबकि भाजपा देश की सुरक्षा एवं अपने नागरिकों के अधिकारों के लिए ज्यादा चिंतित है.


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TRAI चीफ आर एस शर्मा ने कहा- बेवजह आरोप संस्थान की गरिमा गिराते हैं


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ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने मंगलवार को कहा कि दूरसंचार उद्योग ने उनकी जो ‘उचित आलोचना’ की वह उन्हें स्वीकार है लेकिन बिना किसी सबूत के लगाए गए पक्षपात के आरोप उन्हें परेशान करते हैं. इससे संस्थान की गरिमा भी कम होती है.शर्मा नौ अगस्त को ट्राई प्रमुख के पद से रिटायर हो रहे हैं. एक इंटरव्यू में शर्मा ने दूरसंचार उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तो बातचीत की लेकिन पिछले हफ्ते आधार संख्या को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के विवाद पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी.


उल्लेखनीय है कि बीते शनिवार को शर्मा ने अपनी आधार संख्या जारी कर हैकरों को उन्हें नुकसान पहुंचाने की चुनौती दी थी. इसके बाद कई लोगों ने उनसे जुड़ी जानकारियां साझा की और कईयों ने उन्हें ट्रोल किया. हालांकि, शर्मा इस विवाद में खुद को एक ‘विजेता’ के तौर पर देखते हैं।


उनके कुछ फैसलों को लेकर दूरसंचार उद्योग से की गई ‘उचित आलोचना’ को वह अपनी तरक्की के तौर पर देखते हैं.गौरतलब है कि दूसरे नेटवर्क पर कॉल जुड़ने की दर में कमी, पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्ट की संख्या, नई कंपनी जियो के मुफ्त कॉल की शुरुआती पेशकश को अनुमति देने और बाजार बिगाड़ू मूल्य निर्धारण नियम से जुड़े अपने फैसलों को लेकर शर्मा को दूरसंचार उद्योग की काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था.


शर्मा ने कहा, ‘‘पक्षपात का निराधार आरोप लगाना अच्छी बात नहीं है. हां उचित आलोचना सही है. लेकिन पक्षपाती होने के बेसिरपैर के आरोप सही नहीं है.’’


ट्राई के चेयरमैन ने कहा कि यदि किसी पक्ष को नियामक के निर्णय सही नहीं लगते हैं तो वह कानूनी रास्ता अख्तियार कर सकता है. इसलिए उनका मानना है कि आलोचना करने और आरोप लगाकर उसे प्रचार का मुद्दा बनाने से बेहतर है कि सही कानूनी मंच पर वह पक्ष अपनी बात रखे. कई पक्ष बहुत से मसलों पर अपनी चिंताओं को लेकर अदालत गए और अदालत ने उन पर अपना फैसला दिया.


आरोपों से विचलित होने के प्रश्न पर शर्मा ने कहा कि निश्चित तौर पर यह परेशान करते हैं. साथ ही निराधार आरोप संस्थान की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं.


शर्मा ने कहा कि ग्राहक हित के प्रति ट्राई के ज्यादा दृढ़ रहने का यह मतलब कतई नहीं कि वह उद्योग के खिलाफ काम कर रहा है. संस्थान एक ढांचे के तहत काम करता है और हम उसे बहुत ज्यादा खींच नहीं सकते.


उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरुआत में दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनियों के संगठन सीओएआई ने मौजूदा दूरसंचार नियामक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि नया ट्राई प्रमुख और नियामक ऐसा होना चाहिए जो अपने अधिकार क्षेत्र और सीमाओं को समझता हो. उन्हें उद्योग और ग्राहक कल्याण के बीच संतुलन रखना चाहिए.


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NRC से बाहर हुए 40 लाख लोगों के बायोमीट्रिक डाटा लेने पर विचार कर रहा है केंद्र


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केंद्र ने मंगलवार को सु्प्रीम कोर्ट से कहा कि वह उन 40 लाख लोगों के बायोमीट्रिक्स का ब्यौरा लेने पर विचार कर रहा है जिनके नाम असम में एनआरसी के अंतिम मसौदा में शामिल नहीं हैं. ताकि गलत पहचान के आधार पर अन्य राज्यों में उनके प्रवेश को रोका जा सके.केंद्र की ओर से उपस्थित अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर.एफ. नरीमन की पीठ से कहा कि पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों ने आशंका जताई है कि वैसे लोग जिनके नाम एनआरसी के दूसरे और अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, वे अन्य राज्यों में पलायन कर सकते हैं.


वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘उन राज्यों की आशंकाओं को दूर करने के लिये सरकार 40 लाख से अधिक लोगों का बायोमीट्रिक डाटा एकत्र करने पर विचार कर रही है, ताकि अगर उन्हें विदेशी घोषित किया जाता है और वे गलत पहचान के आधार पर दूसरे राज्यों में चले जाते हैं तो संबंधित अधिकारी उनका पता लगा सकें.’’


इस पर पीठ ने कहा कि सरकार जो भी करना चाहती है वो कर सकती है और न्यायालय इसकी जांच करेगा. पीठ ने कहा, ‘‘आप जो भी चाहें करें, फिलहाल हम टिप्पणी करना नहीं चाहेंगे. आप इसे करें और तब हम इसकी जांच करेंगे. हमारी चुप्पी सहमति या आश्वासन का प्रतीक नहीं है.’’ये भी पढ़ें: NRC मुद्दे पर संसद में कांग्रेस का विरोध तुष्टिकरण की घटिया राजनीति: केशव प्रसाद मौर्य


शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन 40 लाख से अधिक लोगों के नाम एनआरसी के अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी क्योंकि यह सिर्फ मसौदा है. पीठ ने केंद्र को दावों और मसौदा एनआरसी के प्रकाशन से उपजी आपत्तियों पर फैसला करने के लिये समय-सीमा तय करने समेत इसका स्वरूप और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने को कहा.


पीठ ने केंद्र से इसके तौर-तरीके और एसओपी 16 अगस्त तक मंजूरी के लिये उसे सौंपने को कहा. सुनवाई के अंत में ट्रांसजेंडरों के एक संगठन ने पीठ से अनुरोध किया कि वह 20 हजार ट्रांसजेंडरों को एनआरसी फॉर्म भरने का दूसरा मौका दे.


पीठ ने कहा, ‘‘आपने मौका गंवा दिया. हम समूची कवायद को अब दोबारा शुरू नहीं कर सकते.’’ कोर्ट ने हालांकि कहा कि वह मुख्य मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 16 अगस्त को सभी वादकालीन आवेदनों (इंटरलोक्यूटरी ऐप्लिकेशन) पर सुनवाई करेगा.


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सुषमा स्वराज का ट्वीट, ईरान में फंसे 21 भारतीय मछुआरे जल्द लौटेंगे स्वदेश


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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर 21 भारतीय मछुआरों के स्वदेश लौटने पर ट्वीट कर खुशी जाहिर की है. तमिलनाडु के 21 मछुआरे ईरान के नखीतघी इलाके में फंस गए थे. सुषमा ने ट्विटर पर बताया है कि भारतीय दूतावास और बंदार अब्बास स्थित वाणिज्य दूतावास की मदद से ईरान में फंसे भारतीय मछुआरों को ईरान ने रिहा किया है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मछुवारों की घर वापसी की प्रक्रिया तीन अगस्त से शुरू की जाएगी.बता दें सुषमा स्वराज ट्विटर पर खासा एक्टिव रहती हैं और विदेशों मे फंसे भारतीयों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती हैं.




हाल ही में शादी से दो हफ्ते पहले पासपोर्ट खो जाने पर अमेरिका में काम कर रहे एक भारतीय की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मदद की है. डी रवि तेजा वॉशिंगटन डीसी में जॉब करते हैं. दो हफ्ते बाद उनकी शादी है. इसके लिए 10 अगस्त को वो भारत आने वाले थे, लेकिन इस बीच उनका पासपोर्ट खो गया. पासपोर्ट खोने के बाद वह अमेरिका में फंस गए. ऐसे में उन्होंने विदेश मंत्री को ट्वीट कर उनसे मदद की गुहार लगाई.


तेजा ने सुषमा स्वराज को ट्वीट किया था, “सुषमा स्वराज जी मेरा पासपोर्ट अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में खो गया है. 13-15 अगस्त को मेरी शादी है. इसके लिए मैं 10 अगस्त को भारत की यात्रा करने वाला हूं. प्लीज मेरी मदद करें, ताकि मैं वक्त पर शादी में पहुंच सकूं. आप मेरी एकमात्र उम्मीद की किरण हैं, जो भी जरूरी हो वो कीजिए.”


डी रवि तेजा के ट्वीट के बाद पहले तो सुषमा स्वराज स्वराज ने लिखा, “डी रवि तेजा… आपने बहुत गलत समय पर अपना पासपोर्ट खोया है. बहरहाल, आप अपनी शादी के लिए वक्त पर पहुंचे इसके लिए हम आपकी मदद करेंगे.”


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एयर होस्टेस मां को पायलट बेटी का यूनीक फेयरवेल, उड़ाया मां का आखिरी विमान


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एयर इंडिया की चालक दल की सदस्य के रूप में 38 साल काम करने के बाद मंगलवार को अपनी आखिरी उड़ान पूरी करने के बाद पूजा चिंचन्कर अपने आंसू रोक नहीं पायीं. मुंबई से बेंगलुरु के बीच आखिरी उड़ान के साथ पूजा मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गयीं.पूजा के लिए यात्रियों ने जमकर तालियां बजायीं और उनका उत्साहवर्धन किया. उड़ान के दौरान घोषणा में पूजा की सेवा के लिए उनका आभार भी जताया गया. लेकिन पूजा के लिए यह विदाई और भी यादगार बन गयी क्योंकि उनकी इस आखिरी उड़ान का जिम्मा उनकी ही बेटी अशरिता ने संभाला था. अशरिता एयर इंडिया की पायलट हैं.


अशरिता सोमवार से ही इस उड़ान के बारे में ट्विटर पर लिख रही थी. उनके ट्वीट वायरल हो गए और लोगों ने मां-बेटी दोनों के लिए ही प्यार भरे और सद्भावनापूर्ण संदेश लिखे.




अशरिता ने लिखा, ‘‘मेरी मां का सपना था कि एयर होस्टेस के रूप में उनकी आखिरी उड़ान की पायलट मैं बनूं. 38 सालों की गौरवशाली सेवा के बाद जब वह सेवानिवृत्त होंगी, मैं उनकी विरासत को आगे बढ़ाऊंगी.’’



एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह संयोग था कि अशरिता वह विमान उड़ा रही थी जो उनकी मां की विदाई उड़ान थी.


एयरलाइन ने अशरिता के लिए ट्विटर पर लिखा, ‘‘इस खास उड़ान के लिए आपको और आपकी मां दोनों को हमारी दिल से शुभकामनाएं. वह उड़ान जब आपकी मां हमारे यात्रियों की पूरे समर्पण के साथ सेवा का सौभाग्य आगे आपके हाथों में सौंपेंगी. विरासत बनी रहेगी.’’


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डाक्टरों को बच्चियों का खतना करने का आदेश नहीं दे सकते


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माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों के दाऊदी बोहरा समाज में प्रचलित महिलाओं के खतना प्रथा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके पीछ आखिर क्या वैज्ञानिक आधार है। कोर्ट डाक्टरों को छोटी बच्चियों का खतना करने का आदेश नहीं दे सकता। इतना ही नहीं कोर्ट ने कहा कि इस प्रथा को संवैधानिक प्रावधानों पर परखा जाएगा। प्रथा का समर्थन करने वाले ये साबित करें कि ये प्रचलन धर्म का अभिन्न हिस्सा है और ये उन्हें संविधान के अनुच्छेद 26 में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में आता है।


ये टिप्पणियां मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिलाओं के खतना पर रोक की मांग पर सुनवाई के दौरान की। प्रथा के पक्ष में दलीलें दे रहे दाऊदी बोहरा वोमेन एसोसिएशन फार रिलीजियस फ्रीडम के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जब कहा कि प्रथा को महिला का निजी अंग काटना कहना गलत है ऐसा अफ्रीका में होता है। भारत के दाऊदी बोहरा समाज में महिलाओं का खाफ्ज होता है जिसमें निजीं अंग काटा नहीं जाता सिर्फ उसमें हल्का निशान लगाया जाता है। ये क्रूर या कष्टदायक नहीं है। इसे पवित्रता चिन्ह कहा जाता है।ये धर्म का अभिन्न हिस्सा है। इसे मां की मौजूदगी में प्रशिक्षित दायी अंजाम देती है। इसकी तय प्रक्रिया है।




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इन दलीलों पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि ये प्रक्रिया न तो अस्पताल में होती है और न ही इसे प्रशिक्षित डाक्टर करता है। बेहोशी की दवा (एनेश्थीशिया) भी नहीं दी जाती। कोर्ट ने सवाल किया कि 7 साल की बच्ची जब इसका प्रतिरोध करती है तो उसे कौन पकड़ता है। सिंघवी ने कहा कि कोर्ट आदेश दे दे कि आगे से इसे सिर्फ प्रशिक्षित डाक्टर करेंगें। कोर्ट उनका बयान दर्ज कर सकता है। वे इस प्रक्रिया को डाक्टर से कराने को तैयार हैं। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या आप ये चाहते हैं कि कोर्ट अनुच्छेद 142 के में प्राप्त शक्ति के तहत डाक्टरों को ये आदेश दे कि वे बच्चियों की खतना प्रक्रिया सिर्फ अस्पताल में करें। कोर्ट ये आदेश कैसे दे सकता है। इस प्रथा के पीछे क्या वैज्ञानिक आधार है। जिस चीज का वैज्ञानिक आधार नहीं होता डाक्टर उसे नहीं करता। कोई भी डाक्टर ऐसा नहीं करेगा।


सिंघवी ने कहा कि पूरे मुस्लिम समाज मे पुरुषों का खतना होता है कहीं कहीं महिलाओँ का भी होता है। महिलाओं के खतने पर रोक लगाना बराबरी के मौलिक अधिकार का हनन है। उन्होंने कहा कि बच्चे तो टीका (वैक्सीनेशन) का भी विरोध करते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि पुरषों का खतना जन्म के सात दिन में होता है। उसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माने जाने की रिपोर्ट है। जबकि इसमें नहीं है और टीका लगने से बच्चे को बाद में ब्लीडिंग और दर्द नहीं होता। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस प्रथा को संवैधानिक प्रावधानों की निगाह से देखा जाएगा वे साबित करें कि ये धर्म का अभिन्न हिस्सा है। बहस नौ अगस्त को फिर होगी।




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केन्द्र ने बताया मौलिक अधिकार का हनन


केन्द्र ने प्रथा का विरोध करते हुए कहा कि ये जीवन के मौलिक अधिकार का हनन है। जैसे सती और देवदासी प्रथा पर रोक लगाई गई है वैसे ही इस पर भी लगनी चाहिए। अगर किसी बच्चे के साथ बचपन में अन्याय होता है तो वह बालिग होने पर मुकदमा कर सकता है लेकिन ये एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे बाद में बदला नहीं जा सकता। ये कष्टकारक है इसे धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं कहा जा सकता।


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By Ravindra Pratap Sing


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बीमा के सहारे इलाज कराना होगा मुश्किल, इरडा ने जारी किये नए दिशानिर्देश


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नीलू रंजन, नई दिल्ली। अगर आप स्वास्थ्य बीमा लेकर किसी भी अस्पताल में इलाज कराने पहुंच जाते हैं तो आप भविष्य में मुश्किल में पड़ सकते हैं। बीमा नियामक इरडा के नए दिशानिर्देश लागू होते हैं तो आप सिर्फ उन्हीं अस्पतालों में मेडिकल बीमा का लाभ ले पाएंगे जो नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार हास्पीटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) से प्रमाणित होंगे। देश के सभी अस्पतालों को इरडा ने एनएबीएच में पंजीकरण के लिए एक वर्ष का वक्त दिया है। अभी देश में केवल एक फीसद अस्पताल ही एनएबीएच से प्रमाणित हैं।


भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने 27 जुलाई को सभी बीमा कंपनियों और टीपीए को नया दिशानिर्देश जारी किया है। इसके अनुसार बीमा कंपनियों को रजिस्ट्री ऑफ हास्पीटल्स इन द नेटवर्क ऑफ इंश्योरेंस (रोहिणी) में पंजीकरण कराना होगा। रोहिणी डाटा को इंश्योरेंस इंफोर्मेशन ब्यूरो तैयार करता है। इस तरह से स्वास्थ्य बीमा की सुविधा देने वाली हर बीमा कंपनी और टीपीए की पूरी जानकारी रोहिणी पर देना अनिवार्य कर दिया गया है।




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इरडा के नए दिशानिर्देश में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें केवल उन्हीं अस्पतालों को बीमा के तहत इलाज करने की छूट दी गई है, जिसके पास एनएबीएच का कम-से-कम इंट्री लेवल का सर्टिफिकेट हो। या फिर नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) का राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट हो। यानी अब स्वास्थ्य बीमा कंपनियां केवल उन्हीं अस्पतालों में कराये इलाज के बिल का भुगतान कर सकेंगी, जिनके पास एनएबीएच या एनक्यूएएस का सर्टिफिकेट होगा।


समस्या यह है कि पूरे देश में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 60 हजार अस्पताल हैं। इनमें केवल 600 अस्पताल ही एनएबीएच या एनक्यूएएस से प्रमाणित है। जाहिर है देश के कई इलाके ऐसे होंगे, जहां प्रमाणित एक भी अस्पताल नहीं हो। ऐसे में वहां के लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। यही नहीं, स्वास्थ्य बीमा कराने वाले लोगों के लिए यह जानकारी रखना मुश्किल है कि कौन-सा अस्पताल प्रमाणित है और कौन-सा नहीं। अभी तक मरीज किसी भी निजी अस्पताल में अपना इलाज करा लेता था और बीमा कंपनियां बीमा कवर के अनुसार अस्पताल को सीधे भुगतान कर देती थी।




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वैसे इरडा ने बीमा कंपनियों और टीपीए को इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए एक साल का वक्त दिया है। लेकिन एक साल के भीतर देश के 59400 अस्पतालों को सर्टिफिकेशन करना आसान काम नहीं होगा। देखना यह है कि इरडा इन व्यवहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अपने दिशानिर्देशों में कोई ढील देती है या नहीं।


सीएससी से मिल सकेगा आयुष्मान भारत स्कीम का लाभ




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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आयुष्मान भारत के लाभार्थी अब कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय और सीएससी के बीच एक करार हुआ है, जिसके तहत देश के तीन लाख सीएससी से 10 करोड़ गरीब परिवारों के 50 करोड़ लाभार्थियों तक स्कीम का लाभ पहुंचाया जाएगा। स्कीम के तहत प्रत्येक गरीब परिवार को सालाना पांच लाख रुपए का बीमा कवर मिलेगा। इसके अलावा सीएससी से केवाईसी दस्तावेजों को स्कैन, अपलोड, लेमिनेशन और सत्यापन कराया जा सकेगा।


केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने समझौते पर खुशी जताई। नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत स्कीम के क्ति्रयान्वयन में 3 लाख सीएससी और 2.5 लाख पंचायतों की मदद ली जाएगी। इस काम के लिए सभी सीएससी सेंटरों को प्रति लाभार्थी 30 रुपये मिलेंगे। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि सीएससी का संचालन करने वाले ग्रामीण उद्यमी आयुष्मान भारत को सफलतापूर्वक लागू कराने में अहम भूमिका निभाएंगे।


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By Ravindra Pratap Sing


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