Tuesday, 31 July 2018

बीमा के सहारे इलाज कराना होगा मुश्किल, इरडा ने जारी किये नए दिशानिर्देश


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नीलू रंजन, नई दिल्ली। अगर आप स्वास्थ्य बीमा लेकर किसी भी अस्पताल में इलाज कराने पहुंच जाते हैं तो आप भविष्य में मुश्किल में पड़ सकते हैं। बीमा नियामक इरडा के नए दिशानिर्देश लागू होते हैं तो आप सिर्फ उन्हीं अस्पतालों में मेडिकल बीमा का लाभ ले पाएंगे जो नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फार हास्पीटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) से प्रमाणित होंगे। देश के सभी अस्पतालों को इरडा ने एनएबीएच में पंजीकरण के लिए एक वर्ष का वक्त दिया है। अभी देश में केवल एक फीसद अस्पताल ही एनएबीएच से प्रमाणित हैं।


भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) ने 27 जुलाई को सभी बीमा कंपनियों और टीपीए को नया दिशानिर्देश जारी किया है। इसके अनुसार बीमा कंपनियों को रजिस्ट्री ऑफ हास्पीटल्स इन द नेटवर्क ऑफ इंश्योरेंस (रोहिणी) में पंजीकरण कराना होगा। रोहिणी डाटा को इंश्योरेंस इंफोर्मेशन ब्यूरो तैयार करता है। इस तरह से स्वास्थ्य बीमा की सुविधा देने वाली हर बीमा कंपनी और टीपीए की पूरी जानकारी रोहिणी पर देना अनिवार्य कर दिया गया है।




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इरडा के नए दिशानिर्देश में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें केवल उन्हीं अस्पतालों को बीमा के तहत इलाज करने की छूट दी गई है, जिसके पास एनएबीएच का कम-से-कम इंट्री लेवल का सर्टिफिकेट हो। या फिर नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) का राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट हो। यानी अब स्वास्थ्य बीमा कंपनियां केवल उन्हीं अस्पतालों में कराये इलाज के बिल का भुगतान कर सकेंगी, जिनके पास एनएबीएच या एनक्यूएएस का सर्टिफिकेट होगा।


समस्या यह है कि पूरे देश में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 60 हजार अस्पताल हैं। इनमें केवल 600 अस्पताल ही एनएबीएच या एनक्यूएएस से प्रमाणित है। जाहिर है देश के कई इलाके ऐसे होंगे, जहां प्रमाणित एक भी अस्पताल नहीं हो। ऐसे में वहां के लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। यही नहीं, स्वास्थ्य बीमा कराने वाले लोगों के लिए यह जानकारी रखना मुश्किल है कि कौन-सा अस्पताल प्रमाणित है और कौन-सा नहीं। अभी तक मरीज किसी भी निजी अस्पताल में अपना इलाज करा लेता था और बीमा कंपनियां बीमा कवर के अनुसार अस्पताल को सीधे भुगतान कर देती थी।




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वैसे इरडा ने बीमा कंपनियों और टीपीए को इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए एक साल का वक्त दिया है। लेकिन एक साल के भीतर देश के 59400 अस्पतालों को सर्टिफिकेशन करना आसान काम नहीं होगा। देखना यह है कि इरडा इन व्यवहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अपने दिशानिर्देशों में कोई ढील देती है या नहीं।


सीएससी से मिल सकेगा आयुष्मान भारत स्कीम का लाभ




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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आयुष्मान भारत के लाभार्थी अब कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसे लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय और सीएससी के बीच एक करार हुआ है, जिसके तहत देश के तीन लाख सीएससी से 10 करोड़ गरीब परिवारों के 50 करोड़ लाभार्थियों तक स्कीम का लाभ पहुंचाया जाएगा। स्कीम के तहत प्रत्येक गरीब परिवार को सालाना पांच लाख रुपए का बीमा कवर मिलेगा। इसके अलावा सीएससी से केवाईसी दस्तावेजों को स्कैन, अपलोड, लेमिनेशन और सत्यापन कराया जा सकेगा।


केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने समझौते पर खुशी जताई। नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत स्कीम के क्ति्रयान्वयन में 3 लाख सीएससी और 2.5 लाख पंचायतों की मदद ली जाएगी। इस काम के लिए सभी सीएससी सेंटरों को प्रति लाभार्थी 30 रुपये मिलेंगे। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि सीएससी का संचालन करने वाले ग्रामीण उद्यमी आयुष्मान भारत को सफलतापूर्वक लागू कराने में अहम भूमिका निभाएंगे।


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By Ravindra Pratap Sing


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/desh/finance-minister-arun-jaitley-aiims-convocation-418577.html

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