Friday, 30 November 2018

डबल मर्डर: बच्ची की लाश नदी से मिली, तब पता चला कहां दफन थी मां की लाश?


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‘तुम कॉल डिटेल्स चेक करवाओ और तुम ज़रा सीसीटीवी के फुटेज अरेंज करो..’ बेटी के साथ गायब हुई नंदा के घर पूछताछ करने के बाद पुलिस को यह पता चल चुका था कि नंदा अपनी बेटी के साथ मंजू के घर के लिए निकली थी. कॉल डिटेल्स और फुटेज का इंतज़ाम होता, तब तक मंजू से पूछताछ की गई. मंजू ने कहा कि ‘मुझे नहीं पता कि उस दिन नंदा मेरे घर आने वाली थी, आई भी नहीं’. अब सवाल पेचीदा हुआ कि नंदा और छोटी सी बच्ची एंजेल कहां गायब हो गए?’इसका कोई चक्कर-वक्कर तो नहीं था?’ गुजरात के दाहोद में पुलिस की जांच टीम इस केस समझने की कोशिश में थी. ‘सर, वो 48 साल की औरत थी. तीन-चार साल की बच्ची को गोद लिया था उसने. कोई चक्कर होना मुश्किल लगता है.’ अगर ऐसा नहीं था तो बात कहां अटक रही थी? तभी सीसीटीवी फुटेज मिले और उसमें नंदा नन्ही सी एंजेल के साथ मंजू के घर जाती हुई साफ दिखाई दे रही थी.


‘ये मंजू झूठ बोल रही है. इसको आड़े हाथों लेना पड़ेगा.’ नंदा के घर के लोगों ने यह भी बताया था कि बीते 17 नवंबर को नंदा कर्ज़ में दी रकम लेने के लिए मंजू के घर गई थी. पुलिस को समझ में आ रहा था कि मामला पैसों के लेनदेन का था इसलिए नंदा और एंजेल के गायब होने के बारे में मंजू को ज़रूर कुछ पता था लेकिन वह छुपा रही थी. मंजू और उसके पति दिलीप से लगातार पूछताछ की जा रही थी और दोनों किसी जानकारी से इनकार कर रहे थे.


फिर कॉल डिटेल्स की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नंदा और मंजू के बीच उस दिन बातचीत हुई थी और उसके बाद ही वह मंजू के घर के लिए निकली थी. अब मंजू का झूठ पूरी तरह पकड़ा जा चुका था. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर पूछताछ करना शुरू की लेकिन मंजू और दिलीप अब भी कुछ बताने से बच रहे थे. ‘नंदा और उसकी बच्ची कहां है? हमें नहीं पता सर. वो घर आने वाली थी लेकिन आई नहीं थी.’Gujarat murder case, murder of friend, double murder, murder in dahod, mom daughter killed, गुजरात हत्याकांड, सहेली की हत्या, डबल मर्डर, दाहोद में हत्या, मां-बेटी की हत्या


पुलिस के पास शक करने की वजह थी लेकिन कोई ऐसा सबूत नहीं मिला था जिससे दोनों को मजबूर किया जा सके. जुर्म भाग तो सकता है, लेकिन छुप नहीं सकता इसलिए 23 नवंबर को दाहोद पुलिस के पास खबर आई. ‘सर, लिमखेड़ा के पास हदफ नदी से एक लाश मिली है.’ पुलिस ने फौरन उस लाश की शिनाख्त करवाई और यह लाश एंजेल की थी. अब मंजू और दिलीप से सख़्त पूछताछ का वक्त आ गया था. इस बार, दोनों कुछ देर बाद ही टूट गए और सच बयान करते हुए पूरी कहानी सुना दी.


अस्ल में, आंगनवाड़ी में साथ काम करते हुए मंजू ने नंदा से तीन लाख रुपये कर्ज़ के तौर पर ब्याज पर लिये थे. रकम न चुका पाने के कारण ब्याज बढ़ता जा रहा था और अब मंजू को 6 लाख रुपये अदा करने थे. वहीं ब्याज पर रकम देने का काम करने वाली नंदा ने मंजू पर रकम लौटाने का दबाव भी बना दिया था. मंजू और दिलीप के पास अदा करने के लिए ये रकम थी भी नहीं और फिर कहीं एक इरादा ये भी था कि यह रकम दबोच ली जाए.’क्या सहेली है तेरी, रोज खिटखिट-खिटखिट करती है पैसों को लेकर. और तू मेरा माथा खराब करती है.’ दिलीप और मंजू के बीच इन पैसों को लेकर आए-दिन तनातनी बनी रहती. ‘पैसा लिया है तो चुकाना भी पड़ेगा ना. कैसे चुकाना है, ये सोचना चाहिए.’ इसी पसोपेश के चलते दोनों जल्द ही इस नतीजे पर पहुंच गए थे कि कर्ज़ नहीं चुकाएंगे बल्कि नंदा के पैसे हड़प कर लेंगे.


एंजेल के सामने ही दोनों ने अपने घर पर नंदा को मौत के घाट उतारा, जो छोटी सी एंजेल ने अपनी आंखों से देख लिया. मंजू और दिलीप को डर लगा कि कहीं एंजेल किसी को बता न दे या गवाही न दे दे इसलिए दोनों उसे बहलाकर ले गए और उसे नदी में फेंक दिया. बस, यही दोनों की गलती थी जो उन्हें बाद में भारी पड़ी. इसके बाद घर लौटकर दोनों ने नंदा की लाश को ठिकाने लगाने के बारे में सोचा.


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सबसे अच्छी तरकीब उन्हें यही लगी कि लाश को ऐसे ठिकाने लगाया जाए कि लाश कहीं, किसी को मिले ही नहीं. अगली रात को करीब 17 बोरी यानी करीब ढाई सौ किलोग्राम सीमेंट मंगवाया. मंजू और दिलीप ने घर के पास ही बनी पानी की टंकी में लाश डालकर सीमेंट उंड़ेल दिया. पानी में मिलकर सीमेंट कॉंक्रीट हो गया टंकी बन गई नंदा की कब्र. पानी की टंकी से पानी गायब हो गया, टंकी पूरी कॉंक्रीट स्ट्रक्चर बन गई और लाश की गंध आने का कोई जोखिम भी नहीं रहा.


दोनों शातिर अपराधी नहीं थे लेकिन जैसे उन्होंने हत्या और लाश को ठिकाने के काम को अंजाम दिया, तरीका बिल्कुल शातिराना था. नंदा के गायब होने के पूरे दस दिन बाद पुलिस ने टंकी तुड़वाकर नंदा की लाश बरामद की और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा.


(स्टोरी इनपुट्स : गुजरात ब्यूरो, न्यूज़18)


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G-20 से अलग जापान, अमेरिका और भारत के बीच मीटिंग, मोदी ने नाम दिया 'JAI'


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने वैश्विक और बहुपक्षीय हितों के बड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अपनी पहली त्रिपक्षीय बैठक को लेकर जी 20 शिखर सम्मेलन से इतर शुक्रवार को मुलाकात की.रणनीतिक महत्व के हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के अपनी शक्ति प्रदर्शित करने के मद्देनजर यह बैठक काफी मायने रखती है. मोदी ने साझा मूल्यों पर साथ मिलकर काम जारी रखने पर जोर देते हुए कहा , ‘‘JAI” (जापान, अमेरिका, भारत) की बैठक लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित है…‘JAI’ का अर्थ जीत शब्द से है.’’


प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह बैठक तीन राष्ट्रों की दूरदृष्टि का समन्वय है. जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि वह प्रथम ‘‘जेएआई त्रिपक्षीय ’’ में भाग लेकर खुश हैं. ट्रंप ने बैठक में भारत के आर्थिक विकास की सराहना की.


तीनों नेताओं ने संपर्क, सतत विकास, आतंकवाद निरोध और समुद्री एवं साइबर सुरक्षा जैसे वैश्विक एवं बहुपक्षीय हितों के सभी बड़े मुद्दों पर तीनों देशों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून एवं सभी मतभेदों के शांतिपूर्ण हल पर आधारित मुक्त, खुला, समग्र और नियम आधारित व्यवस्था की ओर आगे बढ़ने पर अपने विचार साझा किए.मोदी, ट्रंप और आबे बहुपक्षीय सम्मेलनों में त्रिपक्षीय प्रारूप में बैठक करने के महत्व पर भी सहमत हुए.


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किसानों ने दिल्लीवालों से कहा: 'माफ कीजिएगा! हमारा मकसद आपको परेशान करना नहीं था'


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केंद्र सरकार की किसान नीति के खिलाफ किसानों ने गुरुवार और शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की सख्या में किसान दिल्ली पहुंचे थे. शुक्रवार को किसानों का दो दिवसीय प्रदर्शन समाप्त हुआ. विरोध मार्च समाप्त होने के साथ ही किसानों ने एक नोट जारी किया जिसमें माफी भी मांगी गई है और कुछ ऐसे तथ्य भी दिए हैं जिनपर ध्यान देने की जरूरत है.शुक्रवार की सुबह जब लगभग 20 हजार किसान रामलीला मैदान से मार्च निकालने की तैयारी कर रहे थे तब दिल्लीवासी अपने घरों से दफ्तरों की तरफ निकल रहे थे, जैसा कि अपेक्षित था किसानों के मार्च की वजह से कई लोगों को जाम में फंसना पड़ा.


विरोध करने वाले किसानों को अपनी मांग के अलावा, लोगों की असुविधा के बारे में भी था. इसलिए उन्होंने रामलीला मैदान के बाहर और मार्च के दौरान नजर आने वाले लोगों को एक नोट दिया, इस नोट में लिखा हुआ है- माफ कीजिएगा! हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी. हम किसान हैं. आपको तंग करना हमारा इरादा नहीं है. हम खुद बहुत परेशान हैं. सरकार और आपको अपनी बात सुनाने बहुत दूर से आए हैं हमें आपका बस एक मिनट चाहिए.


इसके बाद नोट में बताया गया है कि किसानों से दाल, सब्जी और फल बहुत सस्ते दामों में पर खरीद लिए जाते हैं और उन्हें दोगुना दामों पर बेचा जाता है. नोट में बताया गया है कि किसान हर चीज सस्ती बेचते हैं और महंगी खरीदते हैं. पिछले बीस साल में तीन लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. नोट में किसानों का कहना है कि मुसीबत की चाबी सरकार के पास है लेकिन सरकार किसानों को देखना नहीं चाहती.


आपको बता दें कि किसान पूर्ण कर्जमाफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिए जाने की मांग के साथ दिल्ली पहुंचे थे. इस दौरान किसानों ने राम मंदिर नहीं कर्जमाफी चाहिए जैसे नारे भी लगाए.


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किसान संगठनों ने सरकार को दी चेतावनी- 'आम चुनाव में सिखाएंगे सबक'


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किसानों को कर्ज से मुक्ति और फसल का उचित समर्थन मूल्य दिलाने के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों ने चेतावनी दी है कि वह आम चुनाव में किसान विरोध पार्टियों को सबक सिखाएंगे. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर देश भर के 207 किसान संगठनों द्वारा शुक्रवार को आयोजित संसद मार्च का समर्थन किया गया.समिति के नेता और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा, ‘अब स्पष्ट है कि मौजूदा सरकार अब तक की सबसे अधिक किसान विरोधी सरकार साबित हुई है. किसान विरोधी सरकार को हराना है और जो किसान हितैषी होने का दावा कर रहे हैं उनको डराना है. जिससे वे बाद में वादे से मुकर न जाएं.’


संसद मार्ग पर आयोजित किसान सभा में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित विभिन्न गैर राजग दलों के नेता शामिल हुए. इस दौरान किसानों की कर्ज से मुक्ति और फसल का पूरा दाम दिलाने सहित 21 सूत्री मांग पत्र (किसान चार्टर) पेश किया गया.


यादव ने इसे किसान घोषणा पत्र बताते हुए कहा कि पहली बार किसान एक ही झंडे के नीचे एकजुट हुए, पहली बार किसानों ने सिर्फ विरोध नहीं किया बल्कि विकल्प (प्रस्तावित कानून का मसौदा) भी दिया है और पहली बार किसानों के साथ वकील, शिक्षाविद, डॉक्टर और पेशेवर सहित संपूर्ण शहरी समाज एकजुट हुआ है.ये भी पढ़ें: अन्‍नदाता के बहाने फिर एकजुट हुआ विपक्ष, राहुल-केजरीवाल ने साधा मोदी पर निशाना


इससे पहले लगभग 35 हजार किसानों ने सुबह साढ़े दस बजे रामलीला मैदान से संसद भवन तक किसान मुक्ति यात्रा के साथ पैदल मार्च किया. इस कारण से मध्य दिल्ली स्थित रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक कनॉट प्लेस सहित अधिकतर इलाकों में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई. किसान मुक्ति यात्रा के लिए देश भर से आए. हजारों किसान गुरुवार से ही रामलीला मैदान में एकजुट थे.


पुलिस ने सुरक्षा कारणों से किसान यात्रा को संसद भवन तक पहुंचने से पहले ही संसद मार्ग थाने से आगे नहीं बढ़ने दिया. इस कारण से किसानों ने संसद मार्ग पर ही किसान सभा आयोजित की. किसानों को संबोधित करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने आरोप लगाया, ‘सरकार शुरुआत से ही कॉपोरेट समर्थक नीतियां लागू कर रही है और उसने किसानों के लिए एक भी बड़ा कदम नहीं उठाया.’ये भी पढ़ें: वायरल हुआ किसानों का पत्र, पढ़कर भर आएंगी आंखें


पाटकर ने कहा, ‘भाजपा सरकार का मकसद किसानों, आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों के हाथों में देने का है.’ अखिल भारतीय किसान महासभा (एआईकेएम) के महासचिव राजाराम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने नोटबंदी के जरिए ‘काले धन को सफेद धन में बदलने’ की कोशिश की. उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी का असर देशभर के किसानों पर पड़ा है.’


वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने इस आंदोलन को निर्णायक बताते हुए कहा, ‘इस बार मज़दूर और किसान अकेला नहीं है. डाक्टर, वकील, छात्र और पेशेवर पहली बार अपनी ड्यूटी छोड़कर किसानों के साथ आए हैं.’ उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलनकारी दोनों प्रस्तावित विधेयकों को पारित करने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे.


किसानों की मांगों पर विपक्ष के सभी दल एकजुट: राहुल गांधी


वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों की मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि किसानों की इस मांग के साथ विपक्ष के सभी दल एकजुट हैं. उन्होंने सभा में मौजूद अन्य दलों के नेताओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘हमारी विचारधारा अलग हो सकती है, मगर किसान और युवाओं के भविष्य के लिए हम सब एक हैं. मोदी जी और भाजपा से हम कहना चाहते हैं कि अगर हमें कानून बदलना पड़े, मुख्यमंत्री बदलना पड़े या प्रधानमंत्री बदलना पड़े, हम किसान का भविष्य बनाने के लिए एक इंच भी पीछे नहीं हटने वाले हैं.’


सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा: केजरीवाल


इस दौरान केजरीवाल ने कृषि उपज मूल्य के निर्धारण से सबंधित स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने से मोदी सरकार के मुकरने को किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है. केजरीवाल ने कहा कि सरकार को किसानों का तत्काल प्रभाव से पूरा कर्ज माफ कर भविष्य में फसल की उचित कीमत का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए जिससे किसान आत्मनिर्भर बन सकें. इसके बाद प्राकृतिक आपदाओं से फसल के नुकसान से किसान को बचाने के लिए बीमा के बजाय दिल्ली की तर्ज पर मुआवजा योजना लागू की जानी चाहिए.


फसल अच्छी न होने पर किसानों को भूखा रहना पड़ता है: फारुख अब्दुल्ला


जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने किसान आंदोलन को केन्द्र सरकार के लिए खतरे की घंटी बताया. उन्होंने किसानों से कहा, ‘हम आपकी बदहाली से वाकिफ हैं. हमें पता है आपको खेत पर किस हाल में काम करना पड़ता है और जब फसल अच्छी नहीं होती है तो आपको भूखा रहना पड़ता है.’


‘किसानों में सरकार गिराने की ताकत’


समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा किसानों के उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य पाने के उनके अभियान को मजबूत करने का काम किया है. उन्होंने कहा, ‘हम आपके प्रदर्शनों का समर्थन करने के लिए हमेशा यहां आए हैं और ऐसा करते रहेंगे.’ उन्होंने कहा कि किसानों को कम नहीं आंकना चाहिए और उनके पास ‘सरकार गिराने’ की ताकत है.


अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव अतुल अनजान ने आरोप लगाया कि किसानों के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार के उदासीन रवैये ने कृषि क्षेत्र में संकट पैदा किया और स्थिति खराब हो रही है.


येचुरी ने कहा, ‘हम अगले चुनाव में इस सरकार को हटा देंगे’


माकपा नेता सीताराम येचुरी, भाकपा नेता एस सुधाकर रेड्डी, आप सांसद संजय सिंह और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुए. येचुरी ने कहा, ‘हमारे पास वोटों की ताकत है. अगर सरकार अपना रुख नहीं बदलती है तो उसे सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश एकजुट है और हम अगले चुनावों में मोदी को हटा देंगे.’


भाकपा के महासचिव सुधाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार सबसे ज्यादा ‘किसान विरोधी सरकार’ है. उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक पारित करने की कोशिश की लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हुआ. अगर भाजपा दोबारा जीत जाती है तो वह विवादित विधेयक को पारित करने के लिए कदम उठाएगी.’


तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश त्रिवेदी ने कहा, ‘भारत के किसान हमारे सामने खड़े हैं. यह भारत का अभियान है. ममता जी ने आपके लिए प्रेम व्यक्त किया है. अगर आपका संकल्प मजबूत हैं तो आप सब कुछ हासिल कर सकते हैं.’


राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश में किसानों की स्थिति बदलने की जरुरत है लेकिन सरकार उनकी दुर्दशा की ओर ‘सहानुभूति’ नहीं दिखा रही है.


सरकार ने किसानों से वादाखिलाफी की: शरद यादव


वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने कहा कि किसानों के साथ मोदी सरकार ने जो वादाखिलाफी की है उसे किसान माफ नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, ‘हम किसानों की मांग के साथ खड़े हैं और संसद के आगामी सत्र में किसानों द्वारा प्रस्तावित विधेयक पर यहां मौजूद सभी नेताओं के दल से समर्थन मिलेगा.’


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सैनिकों को स्नाइपर गोलीबारी से बचाने के लिए स्वदेशी बुलेटप्रूफ बंकर तैयार: BSF


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पाकिस्तान से लगती देश की सीमा की रक्षा करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शुक्रवार को कहा कि उसने अपने सैनिकों को खतरनाक स्नाइपर गोलीबारी से बचाने के लिए स्वदेशी तौर पर विकसित बुलेटप्रूफ बंकर तैयार किए गए हैं. बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बल पाकिस्तान से लगते अग्रिम क्षेत्रों में होने वाले बदलावों के बारे में सरकार को सूचित करने के लिए पश्चिमी मोर्चे पर गांवों की जमीनी सर्वेक्षण एवं विश्लेषण शुरू कर रहा है.बीएसएफ महानिदेशक रजनीकांत मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष जम्मू में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से स्नाइपर गोलीबारी जैसी कई घटनाएं होने के बाद एक व्यापक जवाबी योजना बनाई गई है. उन्होंने बीएसएफ के 54वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर कहा, ‘बीएसएफ ने लक्षित और सोच विचारकर जवाबी कार्रवाई की जिसके परिणामस्वरूप रेंजर्स (पाकिस्तान के सीमा रक्षक) को उनकी चौकियों तक सीमित कर दिया गया.’


उन्होंने कहा, ‘बीएसएफ की कार्रवाई को काबू नहीं कर पाने पर रेंजर्स पूरे मोर्चे को खोलने को मजबूर हुए और पूरी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारी गोलीबारी शुरू हो गई. बीएसएफ ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की चौकियों को लक्षित तरीके से निशाना बनाया जिससे उसे भारी नुकसान हुआ.’


उन्होंने कहा कि हाल की उस घटना को ध्यान में रखते हुए जिसमें पाकिस्तानी बार्डर एक्शन टीम (बीएटी) ने जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक जवान की हत्या कर दी थी. बल पिछले पांच वर्षों में इस सीमा पर होने वाली ऐसी सभी घटनाओं का ‘वैज्ञानिक’ विश्लेषण शुरू कर रहा है.ये भी पढ़ें: जम्‍मू-कश्‍मीर : बडगाम में मुठभेड़ जारी, दो आतंकी ढेर, तीन जवान घायल


डीजी ने कहा, ‘हम ऐसे सुझाव लेकर आएंगे जिनसे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और यदि कोई सिविल, मैकेनिकल या परिचालन कार्य की जरूरत होगी तो वह भी करेंगे.’ उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने अपने जवानों को दुश्मन के निशानेबाजों से बचाने के लिए बुलेटप्रुफ संतरी बंकर आंतरिक रूप से विकसित किए हैं जो सीमा चौकियों की रक्षा करने वाले जवानों की बेहतर तरीके से सुरक्षा कर पाएंगे.


एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नया बंकर बख्तरबंद है. व्यापक दृष्टि के लिए इसके ऊपर एक पेरिस्कोप लगा है और इसमें सीमा चौकी पर एक समय में चार जवान बैठ सकते हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या बल ने हाल में राजस्थान के सीमांत नगर जैसलमेर में कोई अध्ययन किया है और यह बताया है कि मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ रही है. डीजी ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी अध्ययन या रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है.ये भी पढ़ें: श्रीनगर: पैलेट गन की शिकार हुई 18 महीने की हिबा, शायद ही लौटे आंखों की रोशनी


मिश्रा ने कहा कि जम्मू में स्मार्ट बाड़ लगाने की दो पायलट परियोजनाएं संतोषनक रूप से काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि इसी तरह की सेंसर आधारित स्मार्ट बाड़ अगले एक दो महीने में बांग्लादेश से लगती पूर्वी सीमा पर आने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यह स्मार्ट बाड़ असम के धुबरी में 60 किलोमीटर के क्षेत्र में होगी. इससे घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी. बीएसएफ की स्थापना एक दिसम्बर 1965 को हुई थी. बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती देश की 6,386 किलोमीटर लंबी सीमा की रक्षा करती है.


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