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केंद्र सरकार की किसान नीति के खिलाफ किसानों ने गुरुवार और शुक्रवार को राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की सख्या में किसान दिल्ली पहुंचे थे. शुक्रवार को किसानों का दो दिवसीय प्रदर्शन समाप्त हुआ. विरोध मार्च समाप्त होने के साथ ही किसानों ने एक नोट जारी किया जिसमें माफी भी मांगी गई है और कुछ ऐसे तथ्य भी दिए हैं जिनपर ध्यान देने की जरूरत है.शुक्रवार की सुबह जब लगभग 20 हजार किसान रामलीला मैदान से मार्च निकालने की तैयारी कर रहे थे तब दिल्लीवासी अपने घरों से दफ्तरों की तरफ निकल रहे थे, जैसा कि अपेक्षित था किसानों के मार्च की वजह से कई लोगों को जाम में फंसना पड़ा.
विरोध करने वाले किसानों को अपनी मांग के अलावा, लोगों की असुविधा के बारे में भी था. इसलिए उन्होंने रामलीला मैदान के बाहर और मार्च के दौरान नजर आने वाले लोगों को एक नोट दिया, इस नोट में लिखा हुआ है- माफ कीजिएगा! हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी. हम किसान हैं. आपको तंग करना हमारा इरादा नहीं है. हम खुद बहुत परेशान हैं. सरकार और आपको अपनी बात सुनाने बहुत दूर से आए हैं हमें आपका बस एक मिनट चाहिए.
इसके बाद नोट में बताया गया है कि किसानों से दाल, सब्जी और फल बहुत सस्ते दामों में पर खरीद लिए जाते हैं और उन्हें दोगुना दामों पर बेचा जाता है. नोट में बताया गया है कि किसान हर चीज सस्ती बेचते हैं और महंगी खरीदते हैं. पिछले बीस साल में तीन लाख से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं. नोट में किसानों का कहना है कि मुसीबत की चाबी सरकार के पास है लेकिन सरकार किसानों को देखना नहीं चाहती.
आपको बता दें कि किसान पूर्ण कर्जमाफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिए जाने की मांग के साथ दिल्ली पहुंचे थे. इस दौरान किसानों ने राम मंदिर नहीं कर्जमाफी चाहिए जैसे नारे भी लगाए.
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