Friday, 31 August 2018

भारत में एक साल लेट शुरू हो सकती है बुलेट ट्रेन परियोजना


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अगस्त 2022 तक बुलेट रेल के 50 किलोमीटर के छोटे खंड को चालू करने पर विचार कर रहा है. पहले इसे इस अवधि में पूरे 508 किलोमीटर के मार्ग को चालू करने का लक्ष्य रखा गया था. सूत्रों ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना कार्यक्रम से पीछे चल रही है.नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि भारत के 75 वें स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, 2022 तक अगर काम पूरा नहीं हो पाता है तो गुजरात में सूरत से बिलिमोरा तक के एक छोटे खंड का परिचालन शुरू किया जा सकता है. सूत्रों ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए “व्यावहारिक समय सीमा” 2023 हो सकती है.


एनएचएसआरसीएल के सूत्रों ने बताया, “बुलेट ट्रेन परियोजना के निष्पादन में बाधा केवल भूमि अधिग्रहण तक ही सीमित नहीं है. इसमें कई प्रक्रियाएं शामिल हैं और कई विस्तृत योजनाएं हैं, जो अभी भी चल रही हैं.


सूत्र ने बताया, “हमारे आकलन के अनुसार, परियोजना पूरा होने में एक वर्ष की देर हो सकती है. पूरे 508 किलोमीटर के इस मार्ग को 2023 के अंत तक चालू किया जा सकता है.” पूरे हाई स्पीड रेल गलियारे में 1,434 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी जिसमें महाराष्ट्र में 353 हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी. बाकी जमीन गुजरात में होगी.इसे गुजरात के 19 गांवों और महाराष्ट्र के 104 गांवों में 7,000 भूखंडों में बांटा गया है. इस परियोजना में महाराष्ट्र के तीन जिलों और गुजरात में आठ जिलों के अलावा दादरा और नागर हवेली के एक छोटे से क्षेत्र को लिया गया है. हालांकि, अब तक बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में केवल 0.9 हेक्टेयर जमीन का भौतिक हस्तांतरण हो सका है.


एक अन्य स्रोत ने कहा, ” यह एक ऐसा खंड है जो समय सीमा पर पूरा होगा. इसके अलावा, यह एक प्रोटोटाइप के रूप में कार्य कर सकता है, जो हमें उच्च स्पीड ऑपरेशन में शामिल प्रौद्योगिकियों का परीक्षण करने में मदद करेगा.” इस परियोजना में भारतीय रेलवे नेटवर्क के मौजूदा स्टेशन के ऊपर वडोदरा स्टेशन का निर्माण शामिल है. एक 220 मीटर गर्डर (जो स्वयं एक इंजीनियरिंग चुनौती होगी) का निर्माण इस स्टेशन परियोजना का हिस्सा होगा.


इस परियोजना की कई चुनौतियों का वर्णन करते हुए सूत्र ने कहा, “यह गर्डर ही मात्र वर्ष 2022 के अंत में ही पूरा होने की संभावना है.” सूत्रों ने कहा कि पालघर (महाराष्ट्र) और नवसारी (गुजरात) के किसानों के प्रतिरोध का हवाला देते हुए कहा कि एनएचएसआरसीएल जापान से 80 फीसदी ऋण के साथ 1.08 लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण करने की दिसंबर 2018 की समय सीमा पर खरा नहीं उतरेगा.


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चीन के नेपाल को लुभाने के बीच काठमांडू तक रेल लाइन बिछाएगा भारत


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भारत और नेपाल ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक महत्व के रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग को विकसित करने के लिए सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. यह रेलमार्ग बिहार के रक्सौल शहर को नेपाल की राजधानी काठमांडू से जोड़ेगा.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से द्विपक्षीय मुलाकात की. दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापार संबंधों को और मजबूत बनाने समेत द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा भी की.


दोनों नेताओं की इस साल यह तीसरी बैठक थी. इससे पहले ओली की अप्रैल में भारत यात्रा के दौरान मोदी से मुलाकात हुई थी. उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की मई में नेपाल यात्रा के दौरान दोनों नेता मिले थे.


बैठक के बाद मोदी ने कहा, ‘‘विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई. इसमें भारत-नेपाल संबंधों से जुड़ी विभिन्न पहलू शामिल हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने आर्थिक, व्यापार तथा सांस्कृतिक संबंधों को आगे और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की. हमारे देशों के बीच संपर्क मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई.’’विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रिश्तों के सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की. कुमार ने कहा, ‘‘दोनों नेता गर्मजोशी से मिले.’’


कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की मौजूदगी में भारत सरकार और नेपाल सरकार के बीच सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए. यह समझौता रक्सौल (भारत) और काठमांडू (नेपाल) के बीच ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के आरंभिक इंजीनियरिंग एवं यातायात सर्वेक्षण के लिए किया गया है.’’


इस सहमति ज्ञापन पर भारत की ओर से राजदूत मंजीव सिंह पुरी और नेपाल की ओर से वहां के भौगोलिक ढांचा एवं निर्माण मंत्रालय के सचिव मधुसुदन अधिकारी ने हस्ताक्षर किए. रक्सौल-काठमांडू रेलमार्ग से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा और थोक में सामान की आवाजाही सरल हो सकेगी.


इस रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण कार्य भारत की कंपनी कोंकण रेल कार्पोशन करेगा. यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दो साल पहले ही चीन ने तिब्बत से नेपाल के बीच रेलमार्ग स्थापित करने पर सहमति जताई थी.


भारत और नेपाल के बीच तीन और रेलमार्ग स्थापित करने की योजना है. इनमें न्यू जलपाईगुड़ी-काकरभित्ता, नौटवाना-भैराह्वा और नेपालगंज रोड-नेपालगंज रेलमार्ग शामिल हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने चौथे बिम्स्टेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल) शिखर सम्मेलन के दौरान थाईलैंड और बांग्लादेश के प्रधानमंत्रियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठक और चर्चा हुई. उन्होंने श्रीलंका और म्यांमार के राष्ट्रपतियों के साथ भी बैठकें की.

हेलमेट के खिलाफ गुजराती शख्स का 13 साल से असहयोग आंदोलन, जानिए क्‍यों


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विजयसिंह परमारअगर आप राजकोट में होते तो आप 63 साल के अशोक पटेल को जरूर जानते. बिना हेलमेट के स्कूटर पर चल रहे अशोक ने अपने गले में तख्ती लगा रखी है – ‘ये मेरा सिर है.’ अशोक हेलमेट को जरूरी
बनाने के कानून का विरोध कर रहे हैं.


2005 से, जब से गुजरात सरकार ने हेलमेट को जरूरी बनाया है तब से अशोक इस कानून के विरोध में असहयोग आंदोलन पर हैं. राजकोट में अशोक पटेल की बंगाली मिठाइयों की दो दुकानें हैं. अपने बेटे को बिजनेस सौंप कर वे हेलमेट के विरोध में एक फुल टाइम एक्टिविस्ट बन गए हैं.ये भी पढें: सामूहिक विवाह में 7 जोड़ों ने हेलमेट पहन की शादी, सात की जगह लिए 8 फेरे!


2005 में जब हेलमेट को अनिवार्य करने का कानून हाई कोर्ट के स्वतः संज्ञान लेने के बाद से लाया गया तभी से से अशोक इसका विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है, “एक बार 2005 में जब मैं बिना हेलमेट के चला जा रहा था तब पुलिस ने रोक कर मुझ पर फाइन किया. मैंने फाइन देने से मना कर दिया. मुझे कोर्ट ले जाया गया वहां भी मैंने इनकार कर दिया. मुझे फिर पांच दिन के लिए कोर्ट की अवमानना के आरोप में जेल भेजा गया.’


फर्राटे से अंग्रेजी बोलने वाले अशोक अपने इस अभियान को महात्मा गांधी का हवाला देते हैं. उनका कहना है, “गांधी जी कहते हैं कि जो कानून तर्कसम्मत नहीं है वो अपने आप में हिंसा है. इसके लिए
गिरफ्तार किया जा सकता है. अहिंसा के कानून के मुताबिक हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं बल्कि अहिंसा से ही दिया जा सकता है. मैं भी यही करता हूं. शांतिपूर्वक कानून तोड़ता हूं और फिर जेल भेज दिया जाता
हूं.”



अशोक पटेल अपने अभियान पर

वे ये भी कहते हैं कि क्या सरकार ये गारंटी दे सकती है कि जो आदमी हेलमेट पहने है वो मरेगा नहीं. बहुत सारे लोग खराब सड़कों के कारण होने वाले एक्सीडेंट से मारे जाते हैं. फिर वाहनों के चलने के लायक
सड़के क्यों नहीं बनवाती सरकार.


उनका दावा है कि हेलमेट बनाने वालों के सिंडिकेट और कुछ तकतवर लोग इस कानून के पीछे हैं. इससे भी बढ़कर बाजार में बिक रहे हेलमेट न तो पूरी तरह से सेफ हैं और न ही जीवन की हिफाजत करने की
गारंटी देने वाले हैं. इसलिए मैं अपना विरोध जारी रखूंगा चाहे जितनी बार भी मुझे जेल भेजा जाय. उनके गले में एक और तख्ती है, जिसपर लिखा है, “अगर कोई डर गया तो दूसरे उसे और दबाते हैं.”

कश्मीर: आर्मी कैंप पर गोलीबारी कर फरार हुए आतंकी


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जम्मू-कश्मीर के खुदवानी, कुलगाम स्थित आर्मी कैंप पर आतंकी हमला  हुआ है. सूत्रों का कहना है कि आतंकी पूरी तैयारी के साथ आर्मी कैंप पर हमला करने आए थे. हमले में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है.घटना की सूचना पाकर मौके पर भारी मात्रा में सुरक्षाबल तैनात हैं. पुलिस ने पूरे इलाके की नाकेबंदी कर ली है. आतंकियों की तलाश जारी है.


बता दें इसी बीच  हिजबुल मुजाहिदीन ने पुलिसवालों के अगवा घरवालों को रिहा करने का दावा किया है. हिजबुल के कमांडर रियाज नाइकू ने कहा कि सभी अगवा लोगों को छोड़ दिया गया है. उसने पुलिसवालों को चेतावनी दी है कि वे आतंक विरोधी अभियानों में शामिल न हो नहीं तो उन्‍हें निशाना बनाया जाएगा.


नाइकू ने कहा कि पुलिसवालों के रिश्‍तेदारों को इसलिए अगवा किया गया ताकि यह संदेश दिया जा सके कि आतंकी जब चाहे तब उनके घरों को निशाना बना सकते हैं. बता दें किआतंकियों ने गुरुवार रात कम से कम आठ ऐसे लोगों को अगवा कर लिया था जिनके परिजन जम्मू कश्मीर पुलिस में काम करते हैं.इसे भी पढ़ें-
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‘अभी यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं, शादी के लिए लड़कों की उम्र हो 18 साल’

बालों की नीलामी कर तिरुपति मंदिर ने कमाए 7.84 करोड़ रुपये


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(जनार्दन वेलुरु)देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक तिरुमाला तिरुपति मंदिर ने मंदिर में चढ़ाए गए बालों से 7.84 करोड़ रुपये की कमाई की है. अगस्त महीने में 5600 किलोग्राम बाल नीलामी के लिए रखे गए थे. बालों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया था. इसके अलावा सफेद बालों की एक अलग श्रेणी थी.


बालों को लंबाई के आधार पर श्रेणियों में बांटा गया था. प्रथम श्रेणी में 31 इंच और उससे से अधिक लंबाई के बाल, द्वितीय श्रेणी 16-30 इंच लंबे बाल और तृतीय श्रेणी 10-15 इंच लंबे बालों को रखा गया था.


मंदिर ने 22494 रुपये प्रति किलो की कीमत पर 8300 किलो प्रथम श्रेणी के बालों को ई-नीलामी के लिए रखा, जिनमें से 1600 किलोग्राम बालों की नीलामी हुई और मंदिर को 356 करोड़ रुपये प्राप्त हुए.द्वीतीय श्रेणी के 37800 किलो बाल 13223 रुपये प्रति किलो की दर से नीलामी के लिए रखे गए. इनमें से 2000 किलोग्राम बाल बेचे गए और मंदिर को 3.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए.


3014 रुपये प्रति किलो की दर से तृतीय श्रेणी के 800 किलोग्राम बाल नीलामी के लिए रखे गए थे. इनके जरिए मंदिर ने 24.11 रुपये कमाए.


6700 किलो सफेद बाल 5462 रुपये प्रति किलो की दर से नीलामी के लिए रखे गए थे. इनमें से 12 किलो बालों की बिक्री हुई जिनके जरिए मंदिर ने 65.55 लाख रुपये कमाए.


बता दें कि तिरुपति मंदिर में बाल चढ़ाने की परंपरा है, श्रद्धालू बढ़ी संख्या में यहां अपने बालों का चढ़ावा देते हैं.

'अभी यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं, शादी के लिए लड़कों की उम्र हो 18 साल'


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विधि आयोग यानि लॉ कमीशन ने पर्सनल लॉ और यूनिफार्म सिविल कोड पर केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि मौजूदा हालात में यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं है. हर धर्म के अपने पर्सनल लॉ है और उन्हें बेहतर बनाने की जरूरत है.इससे पहले केंद्र सरकार ने विधि आयोग से कानूनी राय मांगी थी कि क्या देश में हर धर्म के लोगों के लिए एक यूनिफार्म सिविल कोड होना चाहिए. साथ ही कई ऐसे प्रथा जैसे ट्रिपल तलाक, बहु विवाह और हलाला जैसी चीजों पर राय मांगी गई थी. 187 पन्नो के विस्तृत रिपोर्ट में विधि आयोग ने हर पहलू पर अपनी राय दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि-


इस स्टेज पर यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं है. मौजूदा पर्सनल कानूनों में सुधार की जरूरत है. धार्मिक परम्पराओं और  मूल अधिकारों के बीच सामंजस्य बनाने की ज़रूरत है. ट्रिपल तलाक को सुप्रीम कोर्ट पहले ही रदद् कर चुका है.


हालांकि केंद्र सरकार ट्रिपल तलाक पर एक कानून बनाने की सोच रही है लेकिन रिपोर्ट इसको लेकर किसी कानून का जिक्र नहीं करती. कमीशन के मुताबिक एकतरफा तलाक की स्थिति में घरेलू हिंसा रोकथाम कानून और IPC 498 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. रिपोर्ट में ट्रिपल तलाक की तुलना सती, देवदासी, दहेज प्रथा जैसी परम्पराओं से की है. कहा गया है कि ट्रिपल तलाक न तो धार्मिक परम्पराओं और न ही मूल अधिकारों से जुड़ा है. अगर ट्रिपल तलाक पर लगाम लगता है तो हलाला भी खत्म हो जाएगा.मुस्लिम में बहुविवाह करने वाले  लोगों की संख्या नगण्य है. ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा है, जिन्होंने कई शादी करने के मकसद से मुस्लिम धर्म अपनाया.


कई मुस्लिम देशों में दो विवाह को लेकर सख्त कानून है. पाकिस्तान में दूसरा विवाह करने के लिए पहली पत्नी की मंजूरी जरूरी है. पहली पत्नी की मर्ज़ी के बिना दूसरी शादी करना अपराध है. इसलिए ये बेहतर होगा कि निकाहनामे में जिक्र होना चाहिए कि बहुविवाह करना अपराध होगा. हालांकि कमीशन  ने कहा कि वो फिलहाल इसकी सिफारिश नही कर रहा क्योंकि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है.


मुस्लिम समाज में प्रचलित कॉन्ट्रैक्ट मैरिज महिलाओं के लिए फायदेमद है. अगर कॉट्रेक्ट की शर्तों पर सही तरह से अमल हो तो वो फायदेमंद है.


रिपोर्ट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मॉडल निकाहनामा पर विचार करने के लिए कहा गया है.


लॉ कमीशन ने सभी धर्मो के अवैध (शादी से बाहर के) बच्चों के लिए स्पेशल कानून बनाने की सिफारिश की है. कहा गया है कि इन बच्चों को अपने माता-पिता की सम्पति में बराबर हक़ मिलना चाहिए.


लॉ कमीशन ने स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 में बदलाव की बात की है. अभी कोर्ट में हुई शादी को कानूनी मान्यता देने से पहले परिवार वालों को 30 दिन का नोटिस पीरियड दिया जाता है.


लॉ कमीशन ने कहा कि ये पीरियड खत्म होना चाहिए या उस दौरान कपल को सुरक्षा दी जानी चाहिए. कमीशन का मानना है कि इस पीरियड का अंतर्जातीय शादी का विरोध करने वाले परिवारवाले गलत इस्तेमाल करते है. साथ ही ये शादी के लिए धर्मांतरण को बढ़ावा देता है.


रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि लड़का और लड़की दोनों की शादी की उम्र 18 साल होनी चाहिए. मौजूदा स्थिति में लड़के की शादी की उम्र 21 और लड़की की 18 है. इससे इस मान्यता को बढ़ावा मिलती है कि लड़की हमेशा लड़के से छोटी होनी चाहिए.


साथ ही तलाक को और आसान बनाने की भी बात कही गई है. इससे कानूनी पचड़े में पड़े शादीशुदा जोड़े की जिंदगी आसान हो जाएगी.


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/team-india-west-indies-chris-gayle-mahendra-singh-dhoni-ind-vs-wi-465168.html

टूटे ट्रैक का खुद पता लगाएगी ट्रेन, भारत में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल


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भारत में पहली बार अधिकारियों ने रेल दुर्घटनाएं रोकने के लिए मुम्बई और अहमदाबाद को जोड़ने वाली 508 किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन परियोजना के मार्गों में किसी भी प्रकार की दरार का पता लगाने वाली स्वचालित प्रणाली लगाने का फैसला किया है.बुलेट ट्रेनें आग का पता लगाने वाली उन्नत प्रणाली और डिब्बों को पटरी से उतरने से रोकने वाले उपायों से लैस होंगी तथा भूकंपजनित घटनाओं से भी पूरे बुलेट ट्रेन ढांचे को सुरक्षा मिलेगी.


बुलेट ट्रेन परियोजना का क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों ने कहा कि यह प्रणाली सुरक्षा उपायों में एक अहम पहलू होगी.


उन्होंने कहा कि वर्तमान रेल नेटवर्क में अब तक यह प्रौद्योगिकी नहीं अपनाई गई है. लेकिन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक जाने वाली इन ट्रेनों में ऐसी प्रौद्योगिकी का उपयोग अहम हो जाता है.कॉरपोरेशन की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यह प्रणाली रेलमार्गों में विद्युत नियंत्रण परिपथ का इस्तेमाल करेगी. नियंत्रण परिपथ में त्रुटि आने पर मार्ग में दरार की पहचान करने में मदद मिलेगी.’


रिपोर्ट के अनुसार इस प्रौद्योगिकी से रेलवे ट्रैक पर दरारों का पता लगाने के लिए नियमित निरीक्षण के दौरान लगने वाला काफी वक्त बचेगा. प्रति किलोमीटर इस प्रणाली पर क्या लागत आएगी, इसका आकलन किया जा रहा है लेकिन इस प्रौद्योगिकी को लगाने का फैसला पहले ही चुका है.


बुलेट ट्रेन गलियारे को अगस्त, 2022 तक चालू करने का प्रस्ताव है. इसके जरिए रोजाना एक दिशा में 17,900 लोग जा पायेंगे. व्यवहार्यता अध्ययन के अनुसार 2033 तक इन यात्रियों की संख्या बढ़कर 31,700 हो जाएगी.


 


Article source: http://khabar.ibnlive.com/news/khel/team-india-west-indies-chris-gayle-mahendra-singh-dhoni-ind-vs-wi-465168.html