Friday, 30 November 2018

किसान संगठनों ने सरकार को दी चेतावनी- 'आम चुनाव में सिखाएंगे सबक'


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किसानों को कर्ज से मुक्ति और फसल का उचित समर्थन मूल्य दिलाने के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर आंदोलनरत किसानों ने चेतावनी दी है कि वह आम चुनाव में किसान विरोध पार्टियों को सबक सिखाएंगे. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर देश भर के 207 किसान संगठनों द्वारा शुक्रवार को आयोजित संसद मार्च का समर्थन किया गया.समिति के नेता और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा, ‘अब स्पष्ट है कि मौजूदा सरकार अब तक की सबसे अधिक किसान विरोधी सरकार साबित हुई है. किसान विरोधी सरकार को हराना है और जो किसान हितैषी होने का दावा कर रहे हैं उनको डराना है. जिससे वे बाद में वादे से मुकर न जाएं.’


संसद मार्ग पर आयोजित किसान सभा में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित विभिन्न गैर राजग दलों के नेता शामिल हुए. इस दौरान किसानों की कर्ज से मुक्ति और फसल का पूरा दाम दिलाने सहित 21 सूत्री मांग पत्र (किसान चार्टर) पेश किया गया.


यादव ने इसे किसान घोषणा पत्र बताते हुए कहा कि पहली बार किसान एक ही झंडे के नीचे एकजुट हुए, पहली बार किसानों ने सिर्फ विरोध नहीं किया बल्कि विकल्प (प्रस्तावित कानून का मसौदा) भी दिया है और पहली बार किसानों के साथ वकील, शिक्षाविद, डॉक्टर और पेशेवर सहित संपूर्ण शहरी समाज एकजुट हुआ है.ये भी पढ़ें: अन्‍नदाता के बहाने फिर एकजुट हुआ विपक्ष, राहुल-केजरीवाल ने साधा मोदी पर निशाना


इससे पहले लगभग 35 हजार किसानों ने सुबह साढ़े दस बजे रामलीला मैदान से संसद भवन तक किसान मुक्ति यात्रा के साथ पैदल मार्च किया. इस कारण से मध्य दिल्ली स्थित रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक कनॉट प्लेस सहित अधिकतर इलाकों में यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई. किसान मुक्ति यात्रा के लिए देश भर से आए. हजारों किसान गुरुवार से ही रामलीला मैदान में एकजुट थे.


पुलिस ने सुरक्षा कारणों से किसान यात्रा को संसद भवन तक पहुंचने से पहले ही संसद मार्ग थाने से आगे नहीं बढ़ने दिया. इस कारण से किसानों ने संसद मार्ग पर ही किसान सभा आयोजित की. किसानों को संबोधित करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने आरोप लगाया, ‘सरकार शुरुआत से ही कॉपोरेट समर्थक नीतियां लागू कर रही है और उसने किसानों के लिए एक भी बड़ा कदम नहीं उठाया.’ये भी पढ़ें: वायरल हुआ किसानों का पत्र, पढ़कर भर आएंगी आंखें


पाटकर ने कहा, ‘भाजपा सरकार का मकसद किसानों, आदिवासियों की जमीन उद्योगपतियों के हाथों में देने का है.’ अखिल भारतीय किसान महासभा (एआईकेएम) के महासचिव राजाराम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने नोटबंदी के जरिए ‘काले धन को सफेद धन में बदलने’ की कोशिश की. उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी का असर देशभर के किसानों पर पड़ा है.’


वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ ने इस आंदोलन को निर्णायक बताते हुए कहा, ‘इस बार मज़दूर और किसान अकेला नहीं है. डाक्टर, वकील, छात्र और पेशेवर पहली बार अपनी ड्यूटी छोड़कर किसानों के साथ आए हैं.’ उन्होंने कहा कि इस बार आंदोलनकारी दोनों प्रस्तावित विधेयकों को पारित करने की मांग से पीछे नहीं हटेंगे.


किसानों की मांगों पर विपक्ष के सभी दल एकजुट: राहुल गांधी


वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसानों की मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि किसानों की इस मांग के साथ विपक्ष के सभी दल एकजुट हैं. उन्होंने सभा में मौजूद अन्य दलों के नेताओं का जिक्र करते हुए कहा, ‘हमारी विचारधारा अलग हो सकती है, मगर किसान और युवाओं के भविष्य के लिए हम सब एक हैं. मोदी जी और भाजपा से हम कहना चाहते हैं कि अगर हमें कानून बदलना पड़े, मुख्यमंत्री बदलना पड़े या प्रधानमंत्री बदलना पड़े, हम किसान का भविष्य बनाने के लिए एक इंच भी पीछे नहीं हटने वाले हैं.’


सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा: केजरीवाल


इस दौरान केजरीवाल ने कृषि उपज मूल्य के निर्धारण से सबंधित स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने से मोदी सरकार के मुकरने को किसानों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि सरकार ने किसानों की पीठ में छुरा घोंपा है. केजरीवाल ने कहा कि सरकार को किसानों का तत्काल प्रभाव से पूरा कर्ज माफ कर भविष्य में फसल की उचित कीमत का भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए जिससे किसान आत्मनिर्भर बन सकें. इसके बाद प्राकृतिक आपदाओं से फसल के नुकसान से किसान को बचाने के लिए बीमा के बजाय दिल्ली की तर्ज पर मुआवजा योजना लागू की जानी चाहिए.


फसल अच्छी न होने पर किसानों को भूखा रहना पड़ता है: फारुख अब्दुल्ला


जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने किसान आंदोलन को केन्द्र सरकार के लिए खतरे की घंटी बताया. उन्होंने किसानों से कहा, ‘हम आपकी बदहाली से वाकिफ हैं. हमें पता है आपको खेत पर किस हाल में काम करना पड़ता है और जब फसल अच्छी नहीं होती है तो आपको भूखा रहना पड़ता है.’


‘किसानों में सरकार गिराने की ताकत’


समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा किसानों के उत्पाद के लिए बेहतर मूल्य पाने के उनके अभियान को मजबूत करने का काम किया है. उन्होंने कहा, ‘हम आपके प्रदर्शनों का समर्थन करने के लिए हमेशा यहां आए हैं और ऐसा करते रहेंगे.’ उन्होंने कहा कि किसानों को कम नहीं आंकना चाहिए और उनके पास ‘सरकार गिराने’ की ताकत है.


अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव अतुल अनजान ने आरोप लगाया कि किसानों के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार के उदासीन रवैये ने कृषि क्षेत्र में संकट पैदा किया और स्थिति खराब हो रही है.


येचुरी ने कहा, ‘हम अगले चुनाव में इस सरकार को हटा देंगे’


माकपा नेता सीताराम येचुरी, भाकपा नेता एस सुधाकर रेड्डी, आप सांसद संजय सिंह और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुए. येचुरी ने कहा, ‘हमारे पास वोटों की ताकत है. अगर सरकार अपना रुख नहीं बदलती है तो उसे सत्ता से बाहर कर दिया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश एकजुट है और हम अगले चुनावों में मोदी को हटा देंगे.’


भाकपा के महासचिव सुधाकर रेड्डी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा सरकार सबसे ज्यादा ‘किसान विरोधी सरकार’ है. उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार ने भूमि अधिग्रहण (संशोधन) विधेयक पारित करने की कोशिश की लेकिन विपक्षी दलों के विरोध के कारण विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हुआ. अगर भाजपा दोबारा जीत जाती है तो वह विवादित विधेयक को पारित करने के लिए कदम उठाएगी.’


तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश त्रिवेदी ने कहा, ‘भारत के किसान हमारे सामने खड़े हैं. यह भारत का अभियान है. ममता जी ने आपके लिए प्रेम व्यक्त किया है. अगर आपका संकल्प मजबूत हैं तो आप सब कुछ हासिल कर सकते हैं.’


राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि देश में किसानों की स्थिति बदलने की जरुरत है लेकिन सरकार उनकी दुर्दशा की ओर ‘सहानुभूति’ नहीं दिखा रही है.


सरकार ने किसानों से वादाखिलाफी की: शरद यादव


वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव ने कहा कि किसानों के साथ मोदी सरकार ने जो वादाखिलाफी की है उसे किसान माफ नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, ‘हम किसानों की मांग के साथ खड़े हैं और संसद के आगामी सत्र में किसानों द्वारा प्रस्तावित विधेयक पर यहां मौजूद सभी नेताओं के दल से समर्थन मिलेगा.’


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सैनिकों को स्नाइपर गोलीबारी से बचाने के लिए स्वदेशी बुलेटप्रूफ बंकर तैयार: BSF


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पाकिस्तान से लगती देश की सीमा की रक्षा करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शुक्रवार को कहा कि उसने अपने सैनिकों को खतरनाक स्नाइपर गोलीबारी से बचाने के लिए स्वदेशी तौर पर विकसित बुलेटप्रूफ बंकर तैयार किए गए हैं. बीएसएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बल पाकिस्तान से लगते अग्रिम क्षेत्रों में होने वाले बदलावों के बारे में सरकार को सूचित करने के लिए पश्चिमी मोर्चे पर गांवों की जमीनी सर्वेक्षण एवं विश्लेषण शुरू कर रहा है.बीएसएफ महानिदेशक रजनीकांत मिश्रा ने कहा कि इस वर्ष जम्मू में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से स्नाइपर गोलीबारी जैसी कई घटनाएं होने के बाद एक व्यापक जवाबी योजना बनाई गई है. उन्होंने बीएसएफ के 54वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर कहा, ‘बीएसएफ ने लक्षित और सोच विचारकर जवाबी कार्रवाई की जिसके परिणामस्वरूप रेंजर्स (पाकिस्तान के सीमा रक्षक) को उनकी चौकियों तक सीमित कर दिया गया.’


उन्होंने कहा, ‘बीएसएफ की कार्रवाई को काबू नहीं कर पाने पर रेंजर्स पूरे मोर्चे को खोलने को मजबूर हुए और पूरी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारी गोलीबारी शुरू हो गई. बीएसएफ ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की चौकियों को लक्षित तरीके से निशाना बनाया जिससे उसे भारी नुकसान हुआ.’


उन्होंने कहा कि हाल की उस घटना को ध्यान में रखते हुए जिसमें पाकिस्तानी बार्डर एक्शन टीम (बीएटी) ने जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक जवान की हत्या कर दी थी. बल पिछले पांच वर्षों में इस सीमा पर होने वाली ऐसी सभी घटनाओं का ‘वैज्ञानिक’ विश्लेषण शुरू कर रहा है.ये भी पढ़ें: जम्‍मू-कश्‍मीर : बडगाम में मुठभेड़ जारी, दो आतंकी ढेर, तीन जवान घायल


डीजी ने कहा, ‘हम ऐसे सुझाव लेकर आएंगे जिनसे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है और यदि कोई सिविल, मैकेनिकल या परिचालन कार्य की जरूरत होगी तो वह भी करेंगे.’ उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने अपने जवानों को दुश्मन के निशानेबाजों से बचाने के लिए बुलेटप्रुफ संतरी बंकर आंतरिक रूप से विकसित किए हैं जो सीमा चौकियों की रक्षा करने वाले जवानों की बेहतर तरीके से सुरक्षा कर पाएंगे.


एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नया बंकर बख्तरबंद है. व्यापक दृष्टि के लिए इसके ऊपर एक पेरिस्कोप लगा है और इसमें सीमा चौकी पर एक समय में चार जवान बैठ सकते हैं. यह पूछे जाने पर कि क्या बल ने हाल में राजस्थान के सीमांत नगर जैसलमेर में कोई अध्ययन किया है और यह बताया है कि मुस्लिमों की जनसंख्या बढ़ रही है. डीजी ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी अध्ययन या रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं है.ये भी पढ़ें: श्रीनगर: पैलेट गन की शिकार हुई 18 महीने की हिबा, शायद ही लौटे आंखों की रोशनी


मिश्रा ने कहा कि जम्मू में स्मार्ट बाड़ लगाने की दो पायलट परियोजनाएं संतोषनक रूप से काम कर रही हैं. उन्होंने कहा कि इसी तरह की सेंसर आधारित स्मार्ट बाड़ अगले एक दो महीने में बांग्लादेश से लगती पूर्वी सीमा पर आने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यह स्मार्ट बाड़ असम के धुबरी में 60 किलोमीटर के क्षेत्र में होगी. इससे घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी. बीएसएफ की स्थापना एक दिसम्बर 1965 को हुई थी. बीएसएफ पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती देश की 6,386 किलोमीटर लंबी सीमा की रक्षा करती है.


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KCR को झटका, प्राइवेट अस्‍पतालों ने सरकारी योजना में फ्री इलाज करने से किया इनकार


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तेलंगाना में कई अस्‍पतालों ने सरकार की योजनाओं के तहत लोगों का इलाज करने से मना कर दिया है. तेलंगाना नेटवर्क हॉस्पिटल एसोसिएशन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस फैसले की जानकारी दी. इसके तहत सरकार की फ्लैगशिप योजना जैसे आरोग्‍यश्री, ईएचएस और जेएचएस में मरीजों का इलाज नहीं जाएगा. यह फैसला एक दिसंबर यानी शुक्रवार आधी रात से लागू हो जाएगा.चुनाव के ठीक पहले तेलंगाना नेटवर्क हॉस्पिटल एसोसिएशन का ये फैसला के चंद्रशेखर राव और और उनकी पार्टी तेलंगाना राष्‍ट्र समिति (TRS) के लिए बहुत बड़ा झटका है. इसका सीधा प्रभाव चुनाव पर पड़ सकता है.


हॉस्पिटल एसोसिएशन के कहना है कि 1200 करोड़ के बिल का भुगतान नहीं हुआ है और निजी अस्पताल अब और नुकसान सहन करने की हालत में नहीं है. अस्पतालों ने ओपीडी और मेडिकल जांच की सुविधाएं 20 नवंबर से बंद कर दी थीं. अब एक दिसंबर की रात से 949 तरह के सभी इलाज बंद हो जाएंगे.


इसका असर गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले करीब 85 लाख परिवारों और 3 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी और पत्रकारों पर पड़ेगा.


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बीजेपी को नहीं मिला सबरीमाला का 'प्रसाद', केरल उपचुनाव में मिली दो सीटें


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केरल में निकाय उपचुनावों में सत्‍ताधारी सीपीएम के नेतृत्‍व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट(एलडीएफ) का जलवा बरकरार रहा है. एलडीएफ ने 39 में से 21 सीटें जीती हैं. कांग्रेस नेतृत्‍व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(यूडीएफ) को 12 सीटें मिली. सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ आक्रामक बीजेपी के लिए नतीजे अच्‍छे नहीं रहे. उसे केवल दो सीटें मिली हैं. नतीजों का ऐलान शुक्रवार को हुआ.सबरीमाला मामले के सुर्खियों में आने के बाद राज्‍य में पहली बार कोई चुनाव था. हालांकि नतीजों से पहले राजनीतिक विश्‍लेषक उम्‍मीद जता रहे थे कि सबरीमाला मामले के चलते हिंदुओं की नाराजगी का फायदा बीजेपी को मिल सकता है. वहीं एलडीएफ को नुकसान झेलना पड़ सकता तो यूडीएफ के वोट बीजेपी के पास जा सकते हैं. लेकिन नतीजे सामने आने के बाद ये सब दावे धरे के धरे रह गए. सत्‍ताधारी एलडीएफ ने न केवल अपनी सीटें बरकरार रखीं बल्कि वोट प्रतिशत भी बढ़ाया.


बीजेपी की सीट एक से बढ़कर दो हो गई. कागजों में देखने पर लगता है कि यह 100 प्रतिशत का इजाफा है लेकिन हकीकत में तस्‍वीर काफी अलग है. केरल बीजेपी अध्‍यक्ष श्रीधरन पिल्‍लई ने बताया कि सबरीमाला पर प्रदर्शन के चलते असर हुआ और यह इदुक्‍की, अलापुझा और पथनमथिट्टा जिलों में वोट प्रतिशत बढ़ने से दिखता भी है.


बीजेपी ने थ्रिसूर जिले के पराप्‍पुक्‍करा में अपना वार्ड गंवा दिया. यह वार्ड एलडीएफ ने जीता. थ्रिसूर जिले में बीजेपी को लोकसभा चुनावों में वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्‍मीद है. पथनमथिट्टा जिले में भी ऐसा ही रहा. यहां पर पांडलम राजघराने का प्रभाव है. बीजेपी यहां पर दो वार्ड में तीसरे नंबर पर रही. कट्टर मुस्लिम सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी को भी दो वार्ड मिले हैं. इस पार्टी पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी के साथ गठजोड़ का आरोप लगता रहा है.


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स्वदेश निर्मित 'ट्रेन 18' का दूसरा ट्रायल, 180 KM की स्पीड पर होगा टेस्ट


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भारत में निर्मित टी-18 ट्रेन का शनिवार को दूसरी बार ट्रायल किया जाएगा. शताब्दी एवं राजधानी से तेज स्पीड से भागने वाली इस ट्रेन का पहला ट्रायल सोमावर को हुआ था. सोमवार को ट्रेन 115 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाई गई थी, जबकि शनिवार को इसे 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जाएगा.दूसरे ट्रायल के लिए ट्रेन को कोटा पहुंचाया गया है. ट्रायल को देखते हुए रेल प्रशासन ने सवाईमाधोपुर-कोटा-शामगढ़ के बीच के सभी पीडब्ल्यूआई को अलर्ट पर रखा है. ट्रैक व उसके आसपास मवेशी न आएं इसके लिए ट्रायल वाले सेक्शन में जगह-जगह पर रेलकर्मचारियों तैनात करने की व्यवस्था की गई है.


मेक इन इंडिया के तहत बनाई गई है ट्रेन


बता दें कि ‘ट्रेन 18’ को मेक इन इंडिया के तहत देश में ही तैयार किया गया है. ट्रेन का पहला ट्रायल मुरादाबाद से बरेली के बीच में 115 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर किया गया था. इस दौरान देखा गया कि ट्रेन में किसी तरह की कोई समस्या तो नहीं आ रही है. ट्रेन के पहियों के बेयरिंग सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं इसपर भी ध्यान दिया गया.ट्रेन 18 में मिलेंगी ये सुविधाएं


यह ट्रेन की कई अत्याधुनिक सुविधाओं से लैसे है. ट्रेन में सीसीटीवी कैमरे, वाई-फाई, इंफोटेनमेंट समेत अन्य कई सुविधाएं भी मिलेंगी. ‘ट्रेन 18’ के मध्य में दो एक्जिक्यूटिव कंपार्टमेंट होंगे. प्रत्येक में 52 सीट होंगी, वहीं सामान्य कोच में 78 सीटें होंगी. इस ट्रेन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यात्री ड्राइवर केबिन को अंदर से देख सकते हैं.


इस वजह से नाम पड़ा ट्रेन 18इस ट्रेन को ‘ट्रेन 18’ नाम इसलिए दिया गया है कि रेलवे इसे 2018 में लॉन्च करने वाला है. बता दें कि यह ट्रेन शताब्दी ट्रेन से 15 प्रतिशत कम वक्त लेगी. इस ट्रेन को बनने में भी मात्र 18 महीने का वक्त लगा है.


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बुलेट ट्रेन के लिए रेलवे ने खोला खाता, NRI महिला ने बेची अपनी जमीन


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जर्मनी की एक प्रवासी भारतीय ने गुजरात में अपनी पैतृक जमीन मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए सौंपी है. यह रेलवे की ओर से इस परियोजना के लिए राज्य में अधिग्रहित की गई जमीन का पहला हिस्सा है. यह जानकारी नेशनल हाई स्पीड रेल कार्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी ने शुक्रवार को दी.अधिकारी ने बताया कि सविता बेन जर्मनी में एक भारतीय रेस्त्रां चलाती हैं. वह मूल रूप से चनसाड गांव से हैं और 33 वर्ष पहले विवाह के बाद जर्मनी चली गई थीं. चनसाड में एनएचएसआरसीएल को 11.94 एकड़ निजी जमीन की जरूरत थी और सविता बेन ने अपनी जमीन 30,094 रुपये में बेच दी.


एनएचएसआरसीएल के प्रवक्ता धनंजय कुमार ने कहा, ‘वह जमीन परियोजना के लिए देने के लिए विमान से भारत आईं और हम इसके लिए उनके अत्यंत आभारी हैं कि वह इसके लिए तैयार हुईं. वह वापस जर्मनी लौट गईं जहां वह अपने पुत्र के साथ रहती हैं और वहां एक रेस्त्रां चलाती हैं. यह जमीन का पहला टुकड़ा जो हमने परियोजना के लिए राज्य में अधिग्रहित किया है.’


508 किलोमीटर लंबे गलियारे के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में करीब 1400 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी जिसमें से 1120 हेक्टेयर निजी स्वामित्व वाली है. करीब 6000 भूस्वामियों को मुआवजा देना होगा. वर्तमान में एनएचएसआरसीएल मुम्बई में परियोजना के लिए मात्र 0.09 प्रतिशत जमीन अधिग्रहित कर पाया है और उसे जमीन अधिग्रहण मुद्दों को लेकर दोनों राज्यों में विरोधों का सामना करना पड़ रहा है.रेलवे उन जिलों में सहमति शिविरों का आयोजन कर रहा है जहां उसे जमीन की जरूरत है ताकि वह किसानों को अपनी जमीन देने के लिए मना सके.


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मुस्लिमों को आरक्षण के बारे में पूछने पर भड़के KCR, कहा- तेरे बाप को बोलूंगा ना


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कांग्रेस और बीजेपी के धुआंधार प्रचार अभियान और अल्पसंख्यक समाज की नाराजगी से तेलंगाना के कार्यकारी मुख्‍यमंत्री के चंद्रशेखर राव अपना संतुलन खोने लगे हैं. मुसलमानों को 12 फीसदी आरक्षण के वादे के बारे में पूछने पर वे बिफर जा रहे हैं. तेलंगाना के काग़ज़नगर में केसीआर की एक जनसभा में जब एक अल्पसंख्यक समाज के वोटर ने खड़े होकर मुसलमानों को 12 प्रतिशत आरक्षण देने के वादे की याद दिलाई तो वे उस मतदाता के बाप तक पहुंच गए.केसीआर ने मंच से कहा, ‘बैठो, तेरे बाप को बोलूंगा, बैठो.’ मतदाता के सवाल पूछने पर वे अपना आपा खो चुके थे. उन्होंने गुस्से में उस मतदाता को आठ बार चुपचाप बैठने को कहा, लेकिन मतदाता अपने सवाल का जवाब चाहता था. केसीआर ने कहा, ‘बात करते हैं, बैठो खामोश बैठो. वही 12 प्रतिशत ही बोल रहे हैं, ख़ामोश बैठो. बैठ जाओ. 12 प्रतिशत के बारे में पूछ रहा है. बैठो, खामोश बैठो. बोल रहा हूं, बैठो. बैठो न, तुम्हारे बाप को बोलूंगा, क्या बात है. तमाशा कर रहे.’


इसके बाद मतदाता को बैठा दिया गया. बाद में केसीआर ने कहा कि हो सकता है किसी विपक्षी दल ने सवाल करने वाले शख्स को भिजवाया हो. इससे पहले आदिलाबाद में एक जनसभा में उन्‍होंने कहा कि ये बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हमारे देश के मतदाताओं को सही उम्मीदवार चुनने की पर्याप्त समझ नहीं है.



केसीआर ने अपनी जनसभाओं को प्रजा आशीर्वाद सभा नाम दिया है और आदिलाबाद में ऐसी ही सभा के दौरान जनता की समझदारी और अक्ल पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा, ‘भारत में मतदाता उतने समझदार नहीं हैं कि सही उम्मीदवार का चुनाव कर सकें. वे बिना सोचे-समझे वोट डालते हैं और गलत उम्मीदवार को चुन लेते हैं.’


चुनाव के मौके पर केसीआर के इस तरह के बयानों को उनके विरोधी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. पिछले दिनों एक जनसभा में उन्‍होंने मंच से कहा कि अगर तेलंगाना की जनता उनको हरा देती है, तो वो अपने घर जाकर आराम से सो जाएंगे, बाकी बाद में जनता को खुद समझ आ जाएगा. उनके इस बयान को उनके पहली बार हार स्वीकार करने वाले बयान के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि बाद में टीआरएस के नेताओं ने सफाई दी कि इसको हार स्वीकार करने वाले बयान की तरह नहीं लेना चाहिए और केसीआर ऐसा कहकर सिर्फ जनता को ताकीद दे रहे थे.


राहुल गांधी अब केसीआर के हारने पर घर जाकर सो जाने वाले बयान का भी खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. तेलंगाना के परगी विधानसभा में जनसभा में राहुल गांधी ने कहा, ‘तेलंगाना की जनता बहुत खुश होगी, अगर केसीआर अपने फार्महाउस में जाकर सो जाते हैं. अभी वे 300 करोड़ खर्च कर बनाये गए आलीशान सीएम हाउस में आराम करते रहे हैं. अब जनता उनको आराम करवाएगी. KCR अब आराम करें और कांग्रेस तेलंगाना के ख्याल रख लेगी.’


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