Wednesday, 1 November 2017

राष्ट्रपति कोविंद ने की अमेरिका में हुए आतंकवादी हमले की निंदा


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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने न्यूयॉर्क में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में भारत अमेरिका के साथ है.राष्ट्रपति भवन ने अपने आधिकारिक टि्वटर हैंडल से पोस्ट किया है, न्यूयॉर्क शहर में हुए आतंकवादी हमले की खबर से सकते में हूं. पीड़ित परिवारों के प्रति हमारी संवेदनाएं. भारत, अमेरिका के साथ है.राष्ट्रपति कोविंद.




मैनहट्टन में साइकिल सवारों और पैदल चलने वालों के लिए तय रास्ते पर कल 29 वर्षीय एक व्यक्ति ने ट्रक घुसाया और वहां चल रहे लोगों को कुचल दिया. हमले में आठ लोग मारे गये हैं जबकि 11 अन्य घायल हुए हैं.

...मगर कुमार की बेचैनी को अब कौन समझता है!


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आम आदमी पार्टी क्या कुमार विश्वास के साथ प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव पार्ट-2 की योजना बना रही है?कभी कुमार के खासमखास रहे अरविंद केजरीवाल ने उन्हें 2 नवंबर को होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय परिषद से किनारे कर दिया है. जबकि इससे पहले पार्टी की चार राष्ट्रीय परिषद में कुमार ने संचालन किया था.


यही नहीं कुमार को संघ और बीजेपी का एजेंट बताने वाले ओखला के विधायक अमानतुल्ला का निलंबन रद्द कर उन्हें सख्त संदेश दे दिया गया है.


‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है! मैं तुझसे दूर कैसा हूं, तू मुझसे दूर कैसी है! ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है…!’इन लाइनों को लिखने वाले कुमार विश्वास इन दिनों आम आदमी पार्टी के विश्वास और अविश्वास के बीच उलझे हुए हैं. पार्टी और पद को लेकर उनकी बेचैनी क्यों और कैसी है, यह या तो वे समझ रहे होंगे या फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल.


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कितनी पुरानी है कुमार-केजरीवाल में दरार?


दरअसल, दोनों नेताओं में यह तल्‍खी शुरू होती है 2014 के लोकसभा चुनाव से. वरिष्‍ठ पत्रकार सुभाष निगम के मुताबिक ‘कुमार चाहते थे कि आम आदमी पार्टी लोकसभा चुनाव लड़ने की बजाय दिल्‍ली में फोकस करे. लेकिन उनकी राय नहीं मानी गई.’


‘विश्‍वास गाजियाबाद से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन उन्‍हें भेज दिया गया अमेठी. पार्टी ने पूरी ताकत केजरीवाल के चुनाव क्षेत्र बनारस में लगाया. जबकि कुमार अमेठी में राहुल गांधी और स्‍मृति ईरानी के सामने अकेले पड़ गए.’


‘इस साल की शुरुआत में हुए पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव में उन्‍होंने पंजाब में प्रचार करने की इच्‍छा जताई थी. पंजाब में नशे के खिलाफ गाना तैयार किया. लेकिन केजरीवाल ने न उन्‍हें पंजाब भेजा और न उन्‍हें स्‍टार प्रचारकों में जगह मिली.’


‘इसीलिए वह आम आदमी पार्टी की तरफ से आयोजित पंजाब और गोवा की रैलियों में भी नजर नहीं आए.’ निगम के मुताबिक ‘पार्टी में कुमार को हमेशा अलग-थलग रखा गया इसलिए वे मौका आने पर तंज कसते रहे.’


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बताया जाता है कि इसीलिए एमसीडी चुनाव में हार के बाद भी पार्टी नेताओं पर कुमार ने सवाल उठाए. उन्‍होंने ‘वी द नेशन’ नाम से वीडियो जारी की. इसने आग में घी का काम किया. इससे दोनों पक्षों में तल्‍खी बढ़ गई. ओखला से विधायक अमानतुल्ला खान ने उन्हें बीजेपी और संघ का एजेंट बता दिया.


जबकि कुमार विश्वास ने कहा कि ‘वी द नेशन’ में देश के नागरिक की आवाज है, इससे पार्टी संगठन, सरकार, सिस्टम कोई भी नाराज हो सकता है, पर मैं अपनी आवाज उठाता रहूंगा.


हालांकि आम आदमी पार्टी इस बार उनकी मांगों के आगे झुक गई. विश्‍वास पर आरोप लगाने के आरोप में अमानतुल्ला खान को सस्‍पेंड कर दिया गया. कुमार को राजस्थान का प्रभारी बना दिया. लेकिन यह कवायद सिर्फ रिपेयरिंग थी. मन के अंदर का मैल दूर नहीं हुआ था.


कुमार ने वहां काम शुरू किया. नतीजा यह हुआ कि छात्र संघ चुनाव में पार्टी की छात्र इकाई ने शानदार प्रदर्शन किया. लेकिन अब अमानतुल्ला खान का निलंबन रद्द होते ही कुमार का गुबार फूट पड़ा. अब ऐसा दौर चल रहा है जिसमें आम आदमी पार्टी के कई वरिष्‍ठ नेताओं का कुमार से ‘विश्‍वास’ उठ रहा है.


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कुछ कहता है ये ट्वीट


दिल्‍ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने 30 अप्रैल को ट्वीट किया था कि ‘कुमार मेरा छोटा भाई है. कुछ लोग हमारे बीच दरार दिखा रहे हैं, ऐसे लोग पार्टी के दुश्मन हैं. वो बाज आएं. हमें कोई अलग नहीं कर सकता.’ केजरीवाल का यह ट्वीट बताता है कि दरार तो पुरानी है.

कब कसेगा भ्रष्टाचार पर शिकंजा, 2017 में सिर्फ 36% को सज़ा


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भ्रष्टाचार मुल्क की जड़ों में समा चुका है. बाबुओं से लेकर मंत्री और नेताओं तक पर करप्शन के गंभीर आरोप लगते रहते हैं. हालात इतने बदतर हैं कि निजी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. हालिया सालों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज़ उठती रही हैं. साथ ही कड़े कानून बनाने की मांग हुई है.सिविल सोसाइटी और मीडिया के दवाब में लगातार सरकारी एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दे रही हैं. राज्य सभा में जवाब देते हुए सरकार ने 30 अगस्त 2017 को बताया कि बीते ढाई सालों में 1629 भ्रष्टाचार के खिलाफ केस दर्ज हुए. इनमें शामिल 9960 लोगों को आरोपी बनाया गया.


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 9960 लोगों में से 60% गैर सरकारी लोग थे. इनकी तादाद 6023 थी. जबकि सरकारी कर्मचारियों की तादाद 3896 रही. अगर भ्रष्टाचार में शामिल नेताओं की बात करें तो ये संख्या महज़ 41 रही. जानिए भ्रष्टाचार के आरोप में किस साल कितने केस हुए दर्ज और कितने लोगों पर कसा एजेंसियों का शिकंजा?


साल 2015 में हुई कड़ी कार्रवाई
साल दर साल कार्रवाई पर नज़र डालें तो 2015 में सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी गई. 2015 में 5957 मामले भ्रष्टाचार के दर्ज किए गए. इसमें सबसे ज़्यादा आरोपी गैर सरकारी थी. जबकि सरकारी कर्मचारियों की बात करें तो उनकी संख्या 1958 रही. इस साल 21 भ्रष्ट नेताओं पर करप्शन के केस दर्ज हुए. ढाई साल की कार्रवाई में सबसे ज़्यादा धरपकड़ इसी साल हुई.



हज़ारों करप्शन के मामले लंबित
जांच से लेकर अदालत तक कोर्ट में भ्रष्टाचार के हज़ारों केस लंबित पड़े हुए हैं. 2015 के अंत तक इन केसों की तादाद 6663, जो 2015 में 6502 और जून 2017 तक 6414 रह गई. अगर भ्रष्टाचार के केस में आरोप लोगों की बात की जाए तो 2015 तक ये संख्या 35572, 2016 तक 34298 और जून 2017 के अंत तक 35770 थी.


नेताओं की बात करें तो 2015 तक ये तादाद 131, 2016 तक 113 और जून 2017 तक 115 थी. लेकिन सज़ा की बात करें तो न्याय मिलना कठिन दिखाई देता है.



कितनों को मिली सज़ा?
देश में कार्रवाई हो भी जाए लेकिन न्याय मिलना काफी कठिन है. लंबी कानूनी प्रक्रिया और कानूनी दांव पेंच के चलते साल 2015 में 21 नेताओं में से 1 को ही दोषी ठहराया गया. 2016 में ये संख्या 3 और 2017 में एक भी नेता भ्रष्टाचार के मामले में दोषी नहीं साबित हुआ.


2015 से 2017 तक ढाई सालों में कई भ्रष्ट सरकारी, गैर सरकारी और नेताओं को दोषी ठहराया गया. साल 2015 में 878, साल 2016 में 1005 और साल 2017 में 420 आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामले दोषी पाया गया.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर राहुल का तंज, लिखा- 'जेटली, ये ख्याल अच्छा है'


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सोशल मीडिया पर इन दिनों राहुल गांधी छाए हुए हैं. अपने ट्वीट्स से वह फैन्स का दिल जीत रहे हैं. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की रैंक में सुधार पर राहुल ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर चुटकी ली है.राहुल गांधी ने ग़ालिब के शेर, ‘हमको मालूम है जन्नत की हकीकत, लेकिन दिल को बहलाने को ग़ालिब ख्याल अच्छा है’ को थोड़ा बदलते हुए ट्वीट किया, “सबको मालूम है ‘ease of doing business’ की हकीकत, लेकिन ख़ुद को खुश रखने के लिए ‘Dr Jaitley’ ये ख्याल अच्छा है”




इससे पहले राहुल गांधी ने अपने पालतू कुत्ते पीडी का एक वीडियो ट्वीट करते हुए बताया था कि उनके ट्वीट्स कौन करता है. उनका यह ट्वीट काफी चर्चित हुआ था और सोशल मीडिया पर इस पर कई मीम्स भी बने थे.


बता दें कि राहुल गांधी बुधवार से तीन दिनों के गुजरात दौरे पर हैं. वह आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गुजरात में कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं.

गुजरात में बोले राहुल- 'एक नाम बता दो, जिसे मोदी ने जेल में डाला हो'


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गुजरात चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपने तीन दिवसीय दौरे पर वहां है. नवसृजन यात्रा के दौरान वह बुधवार को भरुच पहुंचे. यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘प्रदेश में उद्योगपतियों की सरकार है. यहां पैसा है तो सबकुछ है. ये ही गुजरात मॉडल है. लेकिन, कांग्रेस की सरकार आती है तो यहां किसानों, युवाओं, गरीबों और छात्रों की सरकार होगी.’राहुल ने कहा, ‘हिंदुस्तान का मतलब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नहीं है. नोटबंदी और जीएसटी ने देश को बर्बाद कर दिया. एक नाम बता दो जिसे मोदी ने जेल में डाल दिया. विजय माल्या बाहर बैठा है और इंग्लैंड में मजे ले रहा है. तीन साल से वे सत्ता में हैं. कितने स्विस अकाउंट होल्डर्स जेल में हैं.’


गुजरात सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘टाटा नैनो के लिए नरेंद्र मोदी ने 33 हजार करोड़ बैंक लोन दिया. ये तकरीबन फ्री में था, कम से कम रेट में. आपकी जमीन ली. टाटा कंपनी को दी. लेकिन, 33 हजार करोड़ में गुजरात के किसानों का कर्ज माफ हो सकता है. आपने नैनो गाड़ी को सड़क पर देखा है? पूरे हिंदुस्तान में देखो, कहीं नहीं दिखती.’


प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, गुजरात के 90 फीसदी कॉलेज इंडस्ट्रलिस्ट के हाथों में है. इतनी फीस है कि गरीब इन कॉलेजों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं. यहां किसान और गरीब रो रहा है और कर्ज में डूबा हुआ है.

Tuesday, 31 October 2017

PM मोदी समेत कई वर्ल्ड लीडर्स ने की न्यूयॉर्क हमले की निंदा


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 न्यूयॉर्क के मैनहटन में हुए 'लोन वुल्फ' की तर्ज पर हुए आतंकी हमले पर पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समेत दुनियाभर के लीडर्स ने दुख जताया. सभी ने इस हमले की निंदा करते हुए, हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई.

वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ट्वीट कर कहा कि वह न्यूयॉर्क हमले के बारे में जानकर हैरान हैं. उनकी संवेदना मृतकों के परिवार के साथ है. इस दुख की घड़ी में भारत अमेरिका के साथ खड़ा है. 



आतंकी घटनाओं को रोकने के मुद्दे पर पूरी दुनिया को एक होने का संदेश देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करते हुए कहा कि वह न्यूयॉर्क सिटी में हुए हमले की निंदा करते हैं. उनकी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ है, जिन्होंने अपने लोग इस हमले में खो दिए या जिनके लोग इस हमले में घायल हुए.



वहीं ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने ट्वीट कर कहा कि इस कायरतापूर्व घटना से वह चकित हैं और उनकी संवदेना पीड़ितों के साथ है. उन्होंने यह भी कहा कि एक साथ होकर ही आतंक जैसे बुराई को हम हराएंगे. ब्रिटेन अमेरिका के साथ खड़ा है.



वहीं पूर्व प्रेसिडेंट बिल क्ल‍िंटन ने भी ट्वीट कर कहा कि न्यूयॉर्क का यह हमला हमें डराने के लिए किया गया है. हालांकि हम आतंक‍ के खिलाफ खड़े रहेंगे और इस दुख की घड़ी में हमारी संवेदना पीड़ितों के साथ है. उन्होंने तुरंत कार्रवाई के लिए NYPD को धन्यवाद भी कहा.



इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ट्वीट करके संवेदना जताई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले की निंदा करते हुए ट्वीट किया, ‘न्यूयॉर्क में एक बीमार किस्म के आदमी ने हमला किया, सुरक्षा एजेंसिया इसपर अपनी नजरें बनाए हुए हैं’. ट्रंप ने ट्वीट किया, ‘मीडिल ईस्ट में हराने के बाद अब ISIS को वापस नहीं आने देंगे और न ही अमेरिका में घुसने देंगे’. राष्ट्रपति ट्रंप हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी संवेदना भी जाहिर की है.



आपको बता दें कि न्यूयॉर्क के मैनहटन में मंगलवार दोपहर को एक ट्रक सवार ने साइकिल और पैदल पथ पर लोगों को रौंदना शुरू कर दिया. घटना में 8 लोगों की मौत हो गई है जबकि 10 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है. पुलिस ने हमलावर सेफ़ुलो साइपोवको हिरासत में ले लिया है. आरोपी के पास से 2 नकली बंदूक भी बरामद हुई हैं. न्यूयॉर्क पुलिस ने इलाके को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है.

हिमाचल प्रदेश चुनाव के लिए केंद्रीय बलों के 65 हजार जवानों की तैनाती


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 हिमाचल विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष कराने जिम्मा अर्धसैनिक बलों पर होगा. हिमाचल विधानसभा चुनाव इसी नवंबर के महीने में है. केंद्र सरकार ने हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए अर्धसैनिक बलों की 65 कंपनियां भेज रही है जिनमें करीब 6500 जवान होंगे. इसके अलावा 10 कंपनियों यानी एक हजार अर्धसौनिक बलों की मांग और की गई है. 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस से 23 कंपनियां, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 15 कंपनियां, सीमा सुरक्षा बल की 15 कंपनियां और सशस्त्र सीमा बल की 12 कंपनियां ली जाएंगी. उन्होंने बताया कि टुकड़ियां रवाना हो चुकी हैं और चुनाव आयोग के निर्देशों के मुताबिक उन्हें राज्य में तैनात किया जाएगा.


हिमाचल प्रदेश की 68 विधानसभा सीटों के लिए 50,25,941 मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे. पिछले विधानसभा चुनाव में 459 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा जिनमें 425 पुरुष व 34 महिलाएं थीं. इस बार विधानसभा चुनाव में 338 प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें 319 पुरुष व 19 महिलाएं हैं.


प्रदेश चुनाव आयोग के मुताबिक स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव करवाने के लिए 37,605 लोगों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात किया गया है. वृद्ध आश्रमों में रह रहे व कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के लिए पांच निर्वाचन क्षेत्रों में सहायक मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं.


दिव्यांगों को ही पूरी तरह से मतदान करवाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी. इनमें धर्मशाला के गाबली स्थित वृद्ध आश्रम के लिए दाड़ी तीन, लाहुल स्पीति में की, बल्ह में वृद्ध आश्रम भंगरोटू के लिए भंगरोटू एक, शिमला ग्रामीण के बसंतपुर वृद्ध आश्रम के लिए बसंतपुर व कसौली क्षेत्र के अंतर्गत कुष्ठ रोग चिकित्सालय धर्मपुर शामिल हैं.


चुनाव सामग्री सभी स्थानों में भेज दी गई है जबकि फोटो मतदाता पर्चिया दो नवंबर को भेजी जाएंगी. दृष्टिबाधित मतदाताओं के लिए ब्रेल में मतदाता पर्चिया छापी गई हैं जिन्हें दो नवंबर को भेज दिया जाएगा.


शातिपूर्ण मतदान के लिए प्रदेश में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ अन्य सभी आवश्यक प्रबंध पूरे करने में चुनाव आयोग जुटा है.  दस और कंपनियां मांगने के अलावा 11 हजार पुलिस कर्मी व छह हजार गृहरक्षक भी चुनाव ड्यूटी पर तैनात होंगे.  प्रदेश में अभी तक 74,058 शस्त्र जमा करवाए गए हैं.