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भ्रष्टाचार मुल्क की जड़ों में समा चुका है. बाबुओं से लेकर मंत्री और नेताओं तक पर करप्शन के गंभीर आरोप लगते रहते हैं. हालात इतने बदतर हैं कि निजी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है. हालिया सालों में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज़ उठती रही हैं. साथ ही कड़े कानून बनाने की मांग हुई है.सिविल सोसाइटी और मीडिया के दवाब में लगातार सरकारी एजेंसियां भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दे रही हैं. राज्य सभा में जवाब देते हुए सरकार ने 30 अगस्त 2017 को बताया कि बीते ढाई सालों में 1629 भ्रष्टाचार के खिलाफ केस दर्ज हुए. इनमें शामिल 9960 लोगों को आरोपी बनाया गया.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 9960 लोगों में से 60% गैर सरकारी लोग थे. इनकी तादाद 6023 थी. जबकि सरकारी कर्मचारियों की तादाद 3896 रही. अगर भ्रष्टाचार में शामिल नेताओं की बात करें तो ये संख्या महज़ 41 रही. जानिए भ्रष्टाचार के आरोप में किस साल कितने केस हुए दर्ज और कितने लोगों पर कसा एजेंसियों का शिकंजा?
साल 2015 में हुई कड़ी कार्रवाई
साल दर साल कार्रवाई पर नज़र डालें तो 2015 में सबसे ज़्यादा भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी गई. 2015 में 5957 मामले भ्रष्टाचार के दर्ज किए गए. इसमें सबसे ज़्यादा आरोपी गैर सरकारी थी. जबकि सरकारी कर्मचारियों की बात करें तो उनकी संख्या 1958 रही. इस साल 21 भ्रष्ट नेताओं पर करप्शन के केस दर्ज हुए. ढाई साल की कार्रवाई में सबसे ज़्यादा धरपकड़ इसी साल हुई.

हज़ारों करप्शन के मामले लंबित
जांच से लेकर अदालत तक कोर्ट में भ्रष्टाचार के हज़ारों केस लंबित पड़े हुए हैं. 2015 के अंत तक इन केसों की तादाद 6663, जो 2015 में 6502 और जून 2017 तक 6414 रह गई. अगर भ्रष्टाचार के केस में आरोप लोगों की बात की जाए तो 2015 तक ये संख्या 35572, 2016 तक 34298 और जून 2017 के अंत तक 35770 थी.
नेताओं की बात करें तो 2015 तक ये तादाद 131, 2016 तक 113 और जून 2017 तक 115 थी. लेकिन सज़ा की बात करें तो न्याय मिलना कठिन दिखाई देता है.

कितनों को मिली सज़ा?
देश में कार्रवाई हो भी जाए लेकिन न्याय मिलना काफी कठिन है. लंबी कानूनी प्रक्रिया और कानूनी दांव पेंच के चलते साल 2015 में 21 नेताओं में से 1 को ही दोषी ठहराया गया. 2016 में ये संख्या 3 और 2017 में एक भी नेता भ्रष्टाचार के मामले में दोषी नहीं साबित हुआ.
2015 से 2017 तक ढाई सालों में कई भ्रष्ट सरकारी, गैर सरकारी और नेताओं को दोषी ठहराया गया. साल 2015 में 878, साल 2016 में 1005 और साल 2017 में 420 आरोपियों को भ्रष्टाचार के मामले दोषी पाया गया.
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