Friday, 1 June 2018

कैराना उपचुनाव: क्या सच में जाटों ने RLD गठबंधन को वोट दिया?


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यूपी की कैराना लोकसभा सीट पर महागठबंधन समर्थित आरएलडी उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने बीजेपी की उम्मीदवार मृगांका सिंह को 44,618 वोटों से हरा दिया है. 2014 लोकसभा चुनावों में आरएलडी को एक भी सीट नहीं मिली थी ऐसे में तब्बसुम पार्टी की एकमात्र प्रतिनिधि तो हैं ही साथ ही यूपी की तरफ से एकमात्र मुस्लिम सांसद भी बन गई हैं. इस जीत के लिए कैराना में सपा, बसपा, आरएलडी ने अपनी पूरी ताकत झोंकी हुई थी और अब ऐसा दावा किया जा रहा है कि जाट-मुस्लिम-दलित समीकरण से ये जीत हासिल की गई है. हालांकि सिर्फ 58% वोटिंग के बाद आरएलडी का ये दावा कि पार्टी ने जाट वोट बैंक हासिल कर लिया है कई सवाल खड़े कर रहा है.RLD से अभी भी दूर ही हैं जाट!
कैराना की जीत के बाद आरएलडी के युवराज ये दावा करते नज़र आए कि ‘जिन्ना पर गन्ना’ भारी पड़ गया है. हालांकि कैराना सीट के वोटिंग पैटर्न और इतिहास पर नज़र डालें तो ये 44 हज़ार वोटों की जीत पश्चिमी यूपी में महागठबंधन के लिए ही परेशानियां बढ़ाने वाली नज़र आती हैं. साल 2004 के लोकसभा चुनावों से इस पूरे वोटिंग पैटर्न को देखने से बात कुछ-कुछ समझ में आती है. 2004 के लोकसभा चुनावों तक जाट वोटबैंक का बड़ा हिस्सा आरएलडी के खाते में ही था और इन चुनावों में इस सीट पर 66% वोटिंग हुई थी. आरएलडी की तरफ से अनुराधा चौधरी मैदान में थी और उन्होंने बीएसपी के शाहनवाज़ को 3 लाख 42 हज़ार वोटों से शिकस्त दी थी.


2009 लोकसभा चुनावों की बात करें तो उन चुनावों में भी तब्बसुम हसन ने बीएसपी के टिकट जीत हासिल की थी लेकिन तब आरएलडी एनडीए में थी और उसके सपोर्ट से हुकुम सिंह ने बीजेपी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ा था. दलित-मुस्लिम समीकरण से तब्बसुम जीती तो थीं लेकिन हुकुम सिंह ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी. जीत का अंतर 13 हज़ार से भी कम रहा था. इन चुनावों में भी वोटिंग टर्नआउट 58% के आस-पास था और 7 बार कैराना विधानसभा से विधायक रहे हुकुम सिंह का जाटों ने खुलकर सपोर्ट किया था. ये ही वो साल था जब आरएलडी ने अपना जाट वोट बैंक सफलतापूर्वक बीजेपी को ट्रांसफर कर दिया.


2011 में आरएलडी ने यूपीए का हाथ थाम लिया और जाटों के एक बड़े हिस्से ने बीजेपी को वोट देकर खुद को ठगा हुआ महसूस किया. 2013 के मुज़फ्फरनगर दंगों ने इलाके में जाट बनाम मुस्लिम का समीकरण पैदा कर दिया और गन्ना किसान यूनियन तक ख़त्म हो गई. ‘अजगर’ से ‘मजगर’ पर शिफ्ट हुई आरएलडी के लिए ये बड़ा झटका था क्योंकि जाट वोटबैंक अब बीजेपी की तरफ खिसक गया था और मुसलमान भी सपा के खाते में जाता हुए दिखाई दे रहा था. 2014 के लोकसभा चुनावों में इसका असर भी देखने को मिला और अजीत सिंह अपनी पैतृक सीट बागपत से ही हार गए. कैराना की बात करें तो यहां रिकॉर्ड 73% वोटिंग हुई. जाटों ने आरएलडी को नकार दिया और पार्टी यहां चौथे नंबर पर खिसक गई. बीजेपी के हुकुम सिंह ने सपा के नाहिद हसन को 2 लाख 36 हज़ार वोटों से हरा दिया. तीसरे पर बसपा से कंवर हसन रहे जबकि आरएलडी के करतार सिंह भड़ाना को सिर्फ 42 हज़ार वोट मिले थे.



क्या है कैराना का जातीय समीकरण


कुल वोटर : 16,12989


(अनुमानित)
मुसलमान : 5.5 लाख
दलित : 2 लाख
पिछड़ी जाति (जाट, सैनी, प्रजापति, कश्यप): 4 लाख
गुर्जर : 1 लाख तीस हज़ार
राजपूत: 75 हजार
ब्राह्मण: 60 हजार
वैश्य: 55 हजार


सिर्फ 58% वोटिंग से ये साफ़ है कि लोगों ने 2014 के लोकसभा चुनावों की तरह इस उपचुनाव को तवज्जो नहीं दी. कांग्रेस, बसपा, सपा और आरएलडी के साथ आने से मुसलमानों का 5 लाख से ज्यादा वोट, दलित के 2 लाख वोट, जाटों के 1 लाख 70 हज़ार और गैर ओबीसी जाटों के ढाई लाख वोटों का एक हिस्सा तबस्सुम के पक्ष में आएगा इसका अनुमान लगाया गया था.


बीजेपी और महागठबंधन के बीच लड़ाई प्रमुख रूप से जाट और गैर जाट ओबीसी वोटों के लिए ही थी. तबस्सुम को 481182 वोट मिले हैं जबकि बीजेपी की मृगांका सिंह को 436564 वोट मिले हैं. बीजेपी के कोर वोट बैंक राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य और गैर जाट ओबीसी में सैनी-प्रजापति अगर अपने 100% वोट डाल भी देते तो भी मृगांका 4 लाख तक नहीं पहुंच पाती. इससे सपष्ट है कि सिर्फ 58% वोटिंग में जाटों के एक बड़े हिस्से और ओबीसी-दलित के छोटे ही सही पर एक हिस्से ने भी बीजेपी को वोट दिया है.



बीजेपी नहीं महागठबंधन के लिए भी है रेड अलर्ट
ज्यादातर जानकार इस बात पर सहमत नज़र आ रहे हैं कि गोरखपुर और फूलपुर के बाद कैराना-नूरपुर की हार बीजेपी के लिए अच्छा मैसेज नहीं है. लेकिन कैराना उपचुनाव के वोट शेयर को देखा जाए तो बीजेपी इस बात से आश्वस्त हो जाएगी कि इलाके ने जाट अब भी उससे पूरी तरह नहीं रूठे हैं. गन्ना किसानों के बकाया के मुद्दे को लेकर लोगों में नाराजगी ज़रूर है लेकिन वो अभी भी वोटिंग से जाहिर नहीं हुई है.


उधर महागठबंधन के लिए कैराना उपचुनाव ये संदेश लेकर आया है कि सिर्फ गठबंधन करने और वोटबैंक का अंदाज़ा लगाकर खुश हो आजे की जगह ज़मीन पर काम करने की ज़रुरत बनी हुई है. जयंत-अजीत सिंह के कैराना में लगातार जाटों को फोकस कर रैली और जन सभाएं करने और सपा-बसपा-कांग्रेस के सपोर्ट के बावजूद भी अगर बीजेपी की हार का अंतर सिर्फ 44 हज़ार है तो 2019 में पश्चिमी यूपी की चुनौती काफी बड़ी होने वाली है.


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बेखौफ बदमाशों ने जूस की दुकान में की बमबाजी


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यूपी के इलाहाबाद में बेखौफ बदमाशों के हौसले लगातार बुलंद है. इसकी ताजा तस्‍वीर गुरुवार को देखने को मिली,जब दिन-दहाड़े बदमाशों ने जूस की दुकान में बमबाजी कर दहशत मचा दी.इस घटना के बाद से दुकानदार और इलाके के लोग सकते में हैं.वहीं मौके पर पहुंची पुलिस बदमाशों की तलाश में जुटी है.बमबाजी की यह घटना धूमन गंज थाना क्षेत्र के प्रीतमनगर इलाके की है,जहां जूस की दुकान पर अचानक हुई बमबाजी के चलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई.सरेआम हुयी बमबाजी की घटना से दुकान का एक कर्मचारी जख्मी हो गया.यह घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गयी, जिसमें साफ दिख रहा है कि बाइक से पहुंचे बदमाशों ने दुकान पर बमबाजी की और फरार हो गए.


बमबाजी की घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस बाइक सवार बदमाशों को पकड़ने में जुट गयी है,  लेकिन पुलिस अभी तक बदमाशों का पता नही लगा सकी है. वहीं इस घटना के पीछे दुकानदार ने किसी तरह की पुरानी रंजिश से इनकार किया है.


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चेंगन्नूर सीट पर बीजेपी की हार आगामी लोकसभा चुनाव के लिए है एक खास संकेत


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(ज़का जैकब)कैराना उपचुनाव में बीजेपी की हार के साथ-साथ केरल की चेंगन्नूर विधानसभा सीट भी चिंता का विषय बन गई है. खास बात ये है कि पिछले चुनावों में बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा था लेकिन इस बार चेंगन्नूर सीट से न सिर्फ बीजेपी हारी बल्कि अपने लोकप्रिय नेता श्रीधरन पिल्लई को मैदान में उतारने के बावजूद पिछली बार की तुलना में उसे कम वोट मिले.


सीपीएम के सजी चेरियान ने 20,000 से भी ज़्यादा वोटों से जीत दर्ज की. केरल जैसे छोटे राज्य में इतने वोटों से जीतना बड़ी बात है. ज़ाहिर है कि चेरियान को ईसाइयों का भी वोट मिला है. इस विधानसभा सीट में करीब 50000 ईसाई मतदाता हैं.


ये भी पढ़ेंः OPINION: केरल में हार के लिए जिम्मेदार है BJP हाईकमान, जानिए क्योंमध्य केरल में नसरानी ईसाई पारंपरिक रूप से कांग्रेस का वोटर रहा है. हालांकि कुछ अपवाद भी रहे हैं जब टॉमस आइज़ैक व राजू अब्राहम जैसे मार्क्सवादी नेताओं को भी इन लोगों ने वोट किया है क्योंकि वो उनके समुदाय के थे. लेकिन इस चुनाव में तथ्य बताते हैं कि ईसाई बाहुल्य इलाकों में भी एलडीएफ उम्मीदवारों को वोट मिला है.


यहां तक कि 2016 के विधानसभा चुनाव में उत्तर केरल के थलासेरी, मलप्पुरम, कासरगोड व कन्नूर जैसे मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भी लेफ्ट को वोट मिले. इसने बीजेपी को हराने में बड़ी भूमिका अदा की.


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एक ऐसे राज्य में जहां अल्पसंख्यकों की जनसंख्या 45 फीसदी है, वहां अगर बीजेपी कुछ अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है तो उसे एक सिरे से अपनी रणनीति पर विचार करना होगा.


बीजेपी के लिए चिंता का विषय ये भी है कि उसके उम्मीदवार श्रीधरन पिल्लई को पिछली बार की तुलना में 7000 वोट कम मिले, जबकि उसे वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद थी. इसलिए एनडीए के पास इस बात को मानने के पर्याप्त कारण है कि एसएनडीपी के वेलापल्ली नटेसन का समर्थन प्राप्त बीडीजेएस ने अपने कार्यकर्ताओं को लेफ्ट का समर्थन करने की मौन स्वीकृति दे दी थी.


उपचुनाव के कुछ दिन पहले ही वेलापल्ली ने एक इंटरव्यू में कहा था कि चेंगन्नूर सीट के लिए सीपीएम उम्मीदवार काफी मज़बूत है.


बीजेपी अगर आगामी चुनावों में उत्तर भारत में होने वाले अपने नुकसान को पूरा दक्षिण भारत से पूरा करना चाहती है तो ज़ाहिर है कि केरल से हो पाना लगभग असंभव है.


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दिल्‍ली में एक घर में मिला तीन नाइजीरियाई नागरिकों का शव


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दिल्‍ली के उत्‍तम नगर में एक घर के अंदर से तीन नाइजीरियाई नागरिकों का शव मिलने से सनसनी फैल गई. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों नागरिकों के शवों को कब्‍जे में लेकर पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस मौत के कारणों की जांच में लग गई है.जानकारी के अनुसार उत्‍तम नगर पुलिस को सूचना मिली थी एक घर के अंदर कुछ नाइजीरियाई नागरिक पड़े हैं. उन्‍हें उठाने का प्रयास किया गया लेकिन कोई भी उठ नहीं रहा है. पुलिस ने सूचना के आधार पर मौके पर पहुंचकर देखा तो पाया गया कि तीनों नाइजीरियाई नागरिकों की मौत हो चुकी थी. पुलिस ने आशंका जाहिर की है कि ड्रग्‍स की ओवर डोज मात्रा लेने के कारण ही तीनों की मौत हो गई. पुलिस ने तीनों के शवों को कब्‍जे में लेकर पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.


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गुजरात में 12वीं की इस किताब के मुताबिक 'राम ने किया था सीता को अगवा'


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मेघदूत शारावगुजरात स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल टेक्स्टबुक (GSBST) की किताब में एक बार फिर बड़ी गलती सामने आई है. क्लास 12th की संस्कृत की किताब के इंग्लिश वर्ज़न में लिखा है कि सीता को राम ने अगवा किया था. किताब के एक पैराग्राफ में कालीदास की कविता रघुवंशम की व्याख्या में ये गलती की गई है. संस्कृत किताब के अंग्रेजी वर्ज़न के पेज नंबर 106 में लिखा है ” उसमें लक्ष्मण के उस भावुक संदेश की व्याख्या है जो उन्होंने राम को सुनाई जब राम ने सीता को अगवा किया.”


किताब की ये गलती कई लोगों पर सवाल उठाती है. पहली वो टीम जिसने किताब को एक भाषा से दूसरी भाषा में अुनवाद किया. टीम ने अबैन्डेन्ड (abandoned) की जगह ऐब्डक्टिड (abducted) शब्द का इस्तेमाल किया है. जो कि गलत है क्योंकि हिन्दी, गुजराती और मराठी वर्जन में ‘सीता त्याग’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.


ये भी पढ़ें: गुजरात बोर्ड की दसवीं की परीक्षा के रिज़ल्ट घोषित, लड़कियों ने फिर मारी बाज़ीGSBST के चेयरमेन ने किताब की गलतियों को स्वीकारते हुए कहा कि इस तरह की गलतियां बोर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं. चेयरमेन डॉ. नितिन पेठानी ने कहा कि हम जल्द ही गलतियों को सुधार देंगे. उन्होंने कहा कि किताब में ऐब्डक्टिड (abducted) शब्द का गलती से इस्तेमाल किया गया है और फ्रूफ रीडिंग टीम ने भी ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया. हम जल्द से जल्द गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन लोगों को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया जाएगा.


गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ मनीष दोशी ने कहा “गुजरात स्टेट बोर्ड बहाने बना रहा है. हर साल कई किताबों में कई गलतियां सामने आती हैं. इन लोगों के लिए ये बहुत सामान्य बात हो गई है. बोर्ड इसे गंभीरता से नहीं लेता. छात्रों के बारे में सोचिए वो कितने कंफ्यूज हो गए होंगे जब उन्होंने पढ़ा कि सीता का अपहरण राम ने किया. ये तो भगवान राम का भी अपमान है.”


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Thursday, 31 May 2018

कैदी की संदिग्‍ध हालात में मौत,परिजनों ने इलाज में लापरवाही बरतने का लगाया अारोप


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यूपी के बहराइच जिला कारागार में बंद कैदी की संदिग्‍ध परिस्‍थतियों में मौत हो गई है. बंदी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.देर शाम बंदी की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था,जहां डॉक्‍टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.वहीं कैदी की मौत के बाद से उसके परिजन भड़के हुए हैं. परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है.जिले की कोतवाली देहात क्षेत्र के नगरौर निवासी हसन अब्बास उर्फ मुन्ना को कोतवाली देहात पुलिस ने 25 नवम्बर 17 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था.मृतक बंदी पर किशोरी के अपहरण और दुराचार सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था. तभी से कैदी जेल में बंद था.परिजनों के मुताबिक आज सुबह जेल प्रशासन द्वारा उन्हें सूचना दी गई कि उनके भाई की हालत गंभीर है, जिसके चलते उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जब उन्होंने जिला अस्पताल आकर देखा तो उनके भाई की मौत हो टुकी थी.


मृतक के भाई जहीर अब्बास का कहना है कि जब उन्होंने डॉक्टरों से जानकारी की तो उन्हें डॉक्टर ने बताया कि जेल प्रशासन के लोग उसे मृत अवस्था में जिला अस्पताल लेकर आए थे.


जब इस संबंध में प्रभारी जेल अधीक्षक सुरेश सिंह से बात की गई तो उन्होंने आला अफसरों द्वारा बयान दिये जाने की बात कह कर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया.


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जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की टीम पर आतंकी हमला


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जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की टीम पर आतंकियों ने हमला कर दिया. हालांकि इस हमले में किसी के भी जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है. दोनों तरफ से हुई फायरिंग के बाद अतांकी भागने में कामयाब हो गए हैं. फिलहाल सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन जारी है.जानकारी के अनुसार जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा के ईदगाह रोड पर हर रोज की तरह ही गश्‍त कर रही सीआरपीएफ की टीम पर आतंकियों ने हमला कर दिया. बताया जाता है कि आतंकियों ने सीआरपीएफ की टीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. आतंकियों की फायरिंग के जवाब में जब सुरक्षाबलों ने फायरिंग की तो आतंकी मौके से फरार हो गए. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है. बताया जाता है कि सुरक्षाबल अभी भी इलाके में ही कहीं छुपे हुए हैं.


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