Monday, 1 October 2018

जब तनुश्री दत्ता ने कहा NO तो इस आइटम गर्ल ने किया था नाना पाटेकर के साथ वो गाना


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तनुश्री दत्ता के नाना पाटेकर पर आरोप लगाने के बाद से एक चीज की गूगल सर्च रातों-रात बढ़ गई है. वो है फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ जिसके बारे में शायद पहले आपको पता भी नहीं था. लेकिन इससे ऐसा विवाद जुड़ा कि अब सभी की जुबान पर उसी फिल्म का नाम है. इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस रिमी सेन थीं और इसके एक गाने में तनुश्री दत्ता काम करने वाली थीं. लेकिन हालात इतने बिगड़ गए कि वह इससे अलग हो गईं.तनुश्री दत्ता फिल्म में एक गाना कर रही थीं. लेकिन इस गाने की शूटिंग के दौरान कुछ ऐसा हुआ कि तनुश्री को काम छोड़ना पड़ा और वह फिल्म के सेट से चली गईं. उनका जाना भी आसान नहीं था. तमाम हंगामे के बाद जब वह निकलीं तो उनकी गाड़ी पर हमला भी किया गया था. इस बीच वो गाना छूट गया जिसके सेट पर ये सब हुआ. लेकिन ऐसा नहीं था कि ये गाना टाल दिया गया. इस गाने में तनुश्री दत्ता की जगह किसी और को लिया गया


बता दें कि ‘नियत का सौदा है’ नाम से आए उस गाने में राखी सांवत ने तड़का लगाया और उनके साथ नाना पाटेकर भी नजर आए. तनुश्री के आरोपों के मुताबिक यही वो गाना था जिसकी शूटिंग के दौरान बातें हद से बाहर हो गई थीं. तनुश्री का कहना था कि नाना पाटेकर अपनी मर्जी से इस गाने का हिस्सा बने थे. वहीं उन्होंने कोरियोग्राफर से ऐसे स्टेप्स डालने को कहा था जिसके जरिए वो तनुश्री को छू सकें.


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पत्नी कृष्णा के पैर दबाते थे राज कपूर, बेटी ने बताया कैसा था 'मां-पापा' का रिश्ता


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शोमैन राजकपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है. कृष्‍णा राज कपूर पिछले काफी समय से बीमार थीं. पिछले दिनों उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने की वजह से उन्हें अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था. जिसके बाद सोमवार(1 अक्टूबर) की सुबह उनका निधन हो गया.शोमैन की पत्नी कृष्णा ने पति राज कपूर के साथ इंडस्ट्री को बदलते और कई चेहरों को स्टार बनते देखा. लेकिन उनकी खुद की जिंदगी भी किसी फिल्म से कम नहीं थी. क्योंकि इसमें कई उतार-चढ़ाव थे. खासतौर पर अपनी पर्सनल लाइफ को संभालना उनके लिए कोई आसान काम नहीं था. क्योंकि राज कपूर अक्सर अफेयर्स की वजह से सुर्खियों में रहते थे. इसकी वजह से उनकी शादीशुदा जिंदगी को कई बार मुश्किल वक्त से गुजरना पड़ा.


कृष्‍णा राज कपूर को जब भी उनके अफेयर की खबरें मिलती उन्हें अपने परिवार की चिंता सताने लगती थी. लेकिन इन दोनों का एक अटूट कनेक्शन था जो उनके बच्चों को भी महसूस होता था. खासतौर पर बेटी रीमा जैन को. रीमा ने एक इंटरव्यू में अपने मां-पापा के रिश्ते को लेकर बातें शेयर की थीं. रीमा ने बताया, मीडिया में चाहे जिस तरह की खबरें लिखी गईं और कहा गया लेकिन पापा हमारी मां को बेहद चाहते थे. सच ये है कि वह उम्रभर मां के लिए दीवाने रहे. उन्होंने कभी उस तरह से जताया नहीं लेकिन सच यही था. दोनों का रिश्ता कुछ ऐसा था कि पापा घर आकर मां (कृष्णा) के पैर भी दबाया करते थे. ऐसा करते हुए वो मजाक बनाते थे, ‘राज कपूर का क्या हाल बना दिया, मेरी बीवी मुझे पैर दबाने लगा रही है, घर की मुर्गी दाल बराबर.’ पापा को न्यू ईयर सेलिब्रेट करना बहुत पसंद था. क्योंकि इसी दिन मां का बर्थडे भी होता था.


बता दें कि राज कपूर ने साल 1946 में 22 साल की उम्र में कृष्णा मल्होत्रा से शादी की थी. कृष्णा शोमैन राज कपूर के पिता पृथ्वी राज कपूर के मामा की बेटी थीं. उनके पांच बच्चे रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, राजीव कपूर, ऋतु नंदा और रीमा जैन हैं.यह भी पढ़ें:


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इसके साथ ही करीना ने ये भी कहा,  मैं फिल्मी ​परिवार से हूं और वो राजनीतिक खानदान से ताल्लुक रखते हैं. हमारे बीच दिलचस्प बातचीत होगी.

अब तनुश्री दत्ता के निशाने पर आए बिग बी, सुनकर नाराज हो सकते हैं बच्चन फैन्स


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तनुश्री दत्ता की चुप्पी टूटी तो की बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर नाना पाटेकर पर उंगलियां उठ गईं. इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है. ट्विंकल खन्ना ने तो ट्विटर पर उस दिन की पूरी हकीकत शेयर करते हुए एक ट्वीट किया है. स्वरा भास्कर, प्रियंका चोपड़ा, ऋचा चड्डा, परिणीति चोपड़ा जैसी तमाम एक्ट्रेसेज ने आगे आकर तनुश्री का साथ दिया. वहीं इंडस्ट्री के स्तंभ माने जाने वाले बड़े एक्टर्स यानी अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सलमान खान इस मामले कन्नी काटते नजर आए.हाल ही में एक इवेंट के दौरान जब अमिताभ बच्चन से तनुश्री दत्ता वाले मामले पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ना वह तनुश्री हैं ना नाना पाटेकर तो वो कैसे जवाब दे सकते हैं. अब ‘बिग बी’ के इसी जवाब पर तनुश्री दत्ता ने प्रतिक्रिया दी है.


हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में तनुश्री ने कहा, मुझे काफी दुख पहुंचा है, क्योंकि ये वो लोग हैं जो सामाजिक मुद्दों पर फिल्में करते हैं. लेकिन जब अपने सामने हो रही चीजों पर खड़े होने या राय रखने की बात आती है तो ऐसे बयान देते हैं जिनका कोई मतलब नहीं निकलता.


बता दें कि आमिर ने भी इस मामले में एक हल्का जवाब देकर इसे टाल दिया था. जब आमिर से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘अगर सच में ऐसा कुछ हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए. जब ऐसी चीजें सुनने को मिलती हैं तो दुख होता है.’ वहीं सलमान खान से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं है.यह भी पढ़ें:


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Sunday, 30 September 2018

देश के 150 जिलों में केंद्रीय विद्यालय नहीं, 50 जिले नवोदय विद्यालय से वंचित


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देश के करीब 150 जिलों में केंद्रीय विद्यालय (केवी) और 50 जिलों में जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) अभी भी नहीं हैं जबकि केंद्रीय विद्यालय संगठन की स्थापना नवंबर 1962 में और नवोदय विद्यालय समिति की स्थापना 1985 में हुई थी. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आंकड़ों से यह बात सामने आई है.ये भी पढ़ें- 500 भारतीय स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देगी ब्रिटिश काउंसिल


मानव संसाधन विकास मंत्रालय के ब्यौरे के अनुसार, तमिलनाडु ने अब तक नवोदय विद्यालय योजना को स्वीकार नहीं किया है. मंत्रालय का कहना है कि देश के सभी जिले में एक-एक नवोदय विद्यालय स्वीकृत किये गए हैं.


ये भी पढ़ें- IISc Bengaluru बनी देश की बेस्ट यूनिवर्सिटी, जानिए दुनिया में कौन है टॉप परसंसद के मानसून सत्र के दौरान एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मध्य दिल्ली, मुम्बई, मुम्बई उप शहरी, हैदराबाद, कोलकाता जिलों में नवोदय विद्यालय मंजूर नहीं किये गए हैं क्योंकि इन जिलों में कोई ग्रामीण आबादी नहीं है.


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मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना के 26 जिले, मणिपुर के सात जिले, अरूणाचल प्रदेश, असम के छह-छह जिले, पश्चिम बंगाल के तीन जिले, हरियाणा, महाराष्ट्र के एक-एक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय नहीं है.


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जम्मू कश्मीर पुलिस की जो वर्दी कभी रुतबा थी आज बन गई है मुश्किलों का सबब


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(आकाश हसन)हाल ही में जब एक पड़ोसी हज से वापस आए तो ज़ोहरा ने पूछा कि पापा कब वापस आएंगे? ज़ोहरा के पापा अब्दुल रशीद जम्मू कश्मीर पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर थे. पिछले साल 28 अगस्त को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में एक आतंकी हमले में उनकी मौत हो गई थी.


वह अपने क्लासरूम में थी जब उसका भाई दौड़ता हुआ आया और उसके पिता के मृत शरीर के पास लेकर गया. ज़ोहरा ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी. जब ज़ोहरा को किसी भी तरह से समझाना मुश्किल हो गया तो उसकी मां नसीमा ने बताया कि उसके पिता हज गए हुए हैं. उनकी पोस्टिंग वहीं है.


नसीमा बताती हैं, ‘सरकारी नौकर के रूप में उनकी गांव में अच्छी प्रतिष्ठा थी. आतंकी (आमतौर पर स्थानीय युवक) पहले भी गांव में आते थे. उनको पता था रशीद पुलिस में हैं लेकिन उन्होंने कभी हमला नहीं किया.’ये भी पढ़ेंः टेरर फंडिंग का नागौर कनेक्शन ! एनआईए ने दिल्ली से किया आरोपी को गिरफ्तार


जब अब्दुल रशीद ज़िंदा थे तो उनके दो बेटे इरशाद और फैज़ल ने भी स्पेशल पुलिस ऑफीसर (एलपीओ) के रूप में पुलिस फोर्स ज्वाइन किया था. हालांकि रशीद की मौत के बाद उसके बड़े बेटे फैज़ल ने एक स्थानीय मस्जिद से घोषणा की कि उसने पुलिस की नौकरी से त्यागपत्र दे दिया है. पिता की मौत के बाद छोटा बेटा इरशाद तब से घर पर है और अभी तक उन्होंने ड्यूटी ज्वाइन नहीं किया है.


नसीमा कहती हैं, ‘मैं नहीं चाहती कि मेरे बेटे पुलिस में जाएं. मेरे पति एक अच्छे इंसान थे. वर्दी की वजह से उनकी जान गई.’


जम्मू कश्मीर में जिस तरह से पुलिस वालों पर हमले हो रहे हैं उसकी वजह से सिर्फ इस साल 30 पुलिस वाले मारे जा चुके हैं. यहां तक कि आतंकी एक पुलिस वाले के घर में घुस आए और उनके परिवार वालों का अपहरण कर लिया. पुलिस और स्थानीय आतंकियों के बीच लड़ाई गहरी होती जा रही है क्योंकि आतंकियों के परिवार वालों को लगता है कि पुलिस उन्हें परेशान करती है.


पुलिस वालों पर लगातार इसलिए भी हमले बढ़ रहे हैं क्योंकि आतंकवाद को रोकने के लिए उनकी भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है. कश्मीर में 2008 में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद से पुलिस वालों की छवि खराब हुई है. बाद में 2010 और 2016 के विरोध प्रदर्शन में पुलिस पर सामान्य नागरिकों को विरोध के दौरान मारने के आरोप लगे. यह भी आरोप लगा कि केंद्रीय बलों की तुलना में उनका रवैया ज्यादा सख्त था.


पुलिस वालों के सामाजिक संबंध कैसे प्रभावित हुए हैं?


इस वक्त पुलिस वालों के परिवार वाले काफी मुश्किल में हैं और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. हाल में हुए हमलों को देखते हुए इस वक्त दक्षिण दिल्ली में रहने वाले पुलिस वालों को घर न जाने की सलाह दी गई है.


पुलवामा के रहने वाले जम्मू कश्मीर पुलिस के एक जवान ने कहा कि हमारी नौकरी ने हमारे सामाजिक संबंधों पर गहरा असर डाला है. वह बताते हैं कि उनके परिवार में आठ लोग हैं और वह अकेले कमाने वाले हैं इसलिए नौकरी छोड़ने का कोई विकल्प उनके पास नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं मुश्किल से अपने घर जा पाता हूं. मुझे नहीं पता कि मेरे रिश्तेदार कैसे हैं. मेरे काम की वजह से मैं समाज से पूरी तरह कट गया हूं. हमारे अधिकारी अपने घर जा पाते हैं और सुरक्षित तरीके से रहते हैं लेकिन हम सुरक्षित नहीं हैं.’


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रहमान भट्ट (बदला हुआ नाम) इस वक्त आतंक-निरोधी विंग के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में काम कर रहे हैं. उन्होंने अपना गांव छोड़ दिया है और अपनी बीवी-बच्चों के साथ श्रीनगर के एक गांव में रह रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमें यहां बच्चों की ज़्यादा फीस देनी पड़ती है. हम सोच रहे हैं कि गांव वाला घर बेचकर हमेशा के लिए यहां बस जाएं.


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चलती ट्रेन से मोबाइल फोन या कोई कीमती चीज गिरे तो इस तरह से वापस पा सकते हैं


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चलती ट्रेन को अलार्म चेन खींचकर रोकना कानूनी अपराध है. इसके लिए ऐसा करने वाले पर जुर्माना लग सकता है और उसे जेल भी जाना पड़ सकता है. यात्रियों को अक्सर इससे जुड़े कानूनों की जानकारी नहीं होती. कई बार यात्री मोबाइल वगैरह गिर जाने पर भी ट्रेन की चेन खींचकर उसे रोक लेते हैं. लेकिन रेलवे कानून के तहत यह अपराध है. ऐसा करने वालों पर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) पूरी नज़र रखती है और बिना कारण चेन खींचने वालों को पकड़कर उनपर कड़ी कार्रवाई की जाती है.ऐसे में हम आपको ट्रेन की अलार्म चेन खींचने नियम बता रहे हैं ताकि कहीं आपको इन नियमों की जानकारी न होने के चलते जेल की हवा न खानी पड़े. और अगर आपका मोबाइल या कोई कीमती वस्तु चलती ट्रेन से गिर जाए तो वह भी आपको मिल जाए. सबसे पहले जानें कि किन परिस्थितियों में आप खींच सकते हैं ट्रेन की चेन-


अलार्म चेन खींचने पर तुरंत नहीं रुकती है ट्रेन
जैसा की इस जंजीर का नाम ही अलार्म चेन होता है. तो इसे खींचने का मतलब ड्राइवर के लिए बस एक अलार्म बजाना होता है. इसे खींचने से ट्रेन धीमी होती है लेकिन पूरी तरह से रुकती नहीं क्योंकि इसे खींचने से केवल ट्रेन के 8 से 12 पहिए ही प्रभावित होते हैं. दरअसल एक बोगी में 8 पहिए होते हैं उनपर तो सीधा असर पड़ता है साथ ही पीछे वाली बोगी के आगे के चार पहिए भी कई बार अचानक से रुकते हैं.


150 सौ साल पुराना ब्रेकिंग आइडिया आज भी कर रहा है काम
ट्रेन की जंजीर यूं काम करती है कि यह ट्रेन के मुख्य ब्रेक पाइप से जुड़ी होती है. इस पाइप के बीच हवा का एक निश्चित दबाव बना रहता है. इसे बनाया था जॉर्ज वेस्टिंगहाउस ने. और ट्रेन का ब्रेक आज भी उन्हीं के मॉडल पर काम कर रहा है. इस साल इस तरह के ब्रेकिंग सिस्टम के 150 साल पूरे हो गए हैं.


लोकोपायलट चाहे तभी रुकती है ट्रेन
पहले ट्रेन में अलार्म चेन बोगियों की दीवारों पर हर तरफ दी जाती थी. लेकिन गलत तरह से इसका बहुत इस्तेमाल होने के चलते इनकी संख्या घटा दी गई. अब ये ट्रेन की हर बोगी के बीचो-बीच वाले कंपार्टमेंट में होती है.


जिस कोच की अलार्म चेन खींची जाती है. उसके ब्रेक वाले एअरपाइप में लगा वॉल्व निकल जाता है और एअर रिलीज होने लगती है. जिससे ट्रेन धीमी होने लगती है. ट्रेन के ब्रेक का एअर प्रेशर कम हो रहा है इसे लोकोपायलट (ट्रेन का ड्राइवर) अपने सामने लगे प्रेशर मीटर पर देख लेता है. ऐसी हालत में वह तीन बार हॉर्न बजाने के बाद ट्रेन रोकता है. ये तीन हॉर्न ट्रेन के गार्ड और सुरक्षाकर्मियों को ‘चेन पुलिंग हुई है’ बताने का संकेत होते हैं. जिसके बाद वे नीचे उतरते हैं और चेक करते हैं कि कहां चेन पुलिंग हुई है? ऐसे में अगर कोई ट्रेन ने उतरकर जा रहा होता है तो रेलवे सुरक्षाकर्मी उसे पकड़ भी लेते हैं.


ऐसे पता चलता है कहां से खींची गई है ट्रेन की जंजीर
कुछ ट्रेनों की बोगियों में इमरजेंसी फ्लैशर्स भी लगे होते हैं जिससे पता चल जाता है कि कहां से ट्रेन की जंजीर खींची गई है. अगर फ्लैशर्स नहीं लगे होते तो ट्रेन के गार्ड को जाकर देखना होता है कि ट्रेन के किस कोच में वॉल्व निकला हुआ है? जहां एअरपाइप का वाल्व निकला होता पता चल जाता है कि चेन पुलिंग वहीं से हुई है.


ट्रेन की चेन पुलिंग के लिए क्या हो सकती हैं सजा?
इंडियन रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 141 के तहत अगर कोई यात्री या कोई दूसरा व्यक्ति बिना किसी जरूरी वजह के जंजीर का प्रयोग करता है या रेलवे कर्मचारी के काम में हस्तक्षेप करता है तो रेलवे प्रशासन, यात्रियों और रेल के कर्मचारियों के काम में व्यवधान डालने के चलते दोषी को एक साल की सजा और 1 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं. किसी भी हालत में यह सजा इससे कम नहीं होनी चाहिए –


चेन पुलिंग से रेलवे को हर साल होता है करोड़ों का नुकसान
2015 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार बहुत ज्यादा चेन पुलिंग के कारण रेलवे को एक साल में 3,000 करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बाद एक प्रायोगिक कदम के तौर पर कुछ ट्रेन में जंजीरें हटा दी गई थीं और उनकी जगह पर ट्रेन के लोकोपायलट यानि ड्राइवर और असिस्टेंट लोको पायलट यानि असिस्टेंट ड्राइवर का नंबर दे दिया गया था. जिसपर किसी इमरजेंसी की हालत में कॉल करके ट्रेन रोकने के लिए कारण बताकर मदद मांगी जा सकती थी. इसे अभी बड़े स्तर पर लागू नहीं किया गया है.


बड़े एक्सीडेंट का कारण बन सकती है चेन पुलिंग
तेज रफ्तार ट्रेन की चेन खींचने पर एक्सीडेंट भी हो सकता है. भारत में किसी बड़े एक्सीडेंट की घटना तो नहीं हुई है लेकिन फ्रांस में 1988 में तेज रफ्तार ट्रेन की चेन खींचने के चलते डिब्बे आपस में भिड़ गए थे और ट्रेन पटरी से उतर गई थी. इस रेल एक्सीडेंट में 56 लोगों की मौत हो गई थी.


मोबाइल गिर जाए तो क्या करें?
अगर मोबाइल चलती ट्रेन से गिरा है और किसी सूनसान जगह गिरा है तो उसका मिल जाना 90 फीसदी तय है. आपको बस इतना करना है कि मोबाइल के गिरते ही नीचे मोबाइल की ओर देखने की बजाए सामने के इलेक्ट्रिक पोल पर पड़ा हुआ नंबर देखना है. अब आप RPF की हेल्पलाइन पर कॉल करें और उन्हें बताएं कि आपका मोबाइल किन स्टेशन के बीच और कितने नंबर इलेक्ट्रिक पोल के पास गिरा है? RPF आपका मोबाइल ढूंढ लेगी. आप वापस उस स्टेशन पर जाकर उसे अपनी पहचान बताकर अपना मोबाइल कलेक्ट कर सकते हैं.


जरूरी नहीं है चेन खींचना, इन तरीकों से भी मिल सकती है मदद
दक्षिणी रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन अधिकारी एस धनंजय ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए चेन खींचने के बजाए यात्री क्या कर सकते हैं के मसले पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि यात्रियों को छोटी-छोटी बातों में रेल की चेन नहीं खींचनी चाहिए. रेलवे के अधिकारी कहते हैं कि वे किसी छोटी-मोटी इमरजेंसी की हालत में ट्रेन कैप्टन, टीटीई, आरपीएफ के ट्रेन एस्कॉर्ट, कोच अटेंडेंट और किसी दूसरे रेलवे के स्टाफ को आप इसकी जानकारी दे सकते हैं.


रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स यानि (RPF) का ऑल इंडिया सिक्योरिटी हेल्पलाइन नंबर 182 है. इसे आप किसी भी वक्त डायल करके मदद मांग सकते हैं. इनसे मदद मांगने पर फील्ड RPF तुरंत हरकत में आती है और वाजिब मदद तुरंत पहुंचा दी जाती है.


ऐसे ही GRP की हेल्पलाइन का नंबर है 1512. इसे भी डायल करके सुरक्षा आदि की मांग की जा सकती है. रेल पैसेंजर हेल्पलाइन नंबर है 138. रेल यात्रा के दौरान किसी परेशानी की हालत में इस नंबर को डायल करके भी मदद की मांग की जा सकती है.


 


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