Saturday, 30 June 2018

#SerialKillers: हर शिकार के लिए एक नया गमछा खरीदता था ये रिक्शेवाला


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देश दुनिया के सीरियल किलर्स #SerialKillers पर आधारित इस विशेष वीकेंड सीरीज़ में आप पिछले दो सप्ताह में  5 कहानियां पढ़ चुके हैं. इस हफ्ते पढ़िए भारत के एक ऐसे सीरियल किलर की कहानी जिसने अपनी एक लत के लिए खेला कत्ल का खेल.READ: #SerialKillers : हर कत्ल के लिए लेता था कुल्हाड़ी, हथौड़े या फावड़े जैसा नया हथियार


फरीदाबाद की एक इंडस्ट्री में काम करने वाला सीकरी निवासी रवि ओल्ड फरीदाबाद पुलिस चौकी के पास खड़ा था. साल 2014 की एक रात करीब सवा नौ बजे का वक्त था, तभी एक रिक्शे वाला रवि के पास पहुंचा. रवि रिक्शे में बैठ गया और कहा कि उसे एक बीयर खरीदना है तो किसी वाइन शॉप पर चले. थोड़ी दूर जाकर रिक्शा एक सुनसान सी जगह पर रुका. रिक्शे वाले ने कहा कि वह दो मिनट में हल्का होकर आता है. रवि इंतज़ार कर रहा था कि तभी उसके गले में पीछे से एक गमछा पड़ा, जो कसता चला गया.


READ: Serial Killer: काम था दवाएं देना लेकिन वो देता रहा मौतउस गमछे की जकड़ और बढ़ती गई और कुछ ही देर बाद रवि का दम घुटने लगा और उसकी आंखें बंद हो गईं. रवि के निढाल होते ही वह गमछा उसके गले से हटा. रिक्शे वाले ने वह गमछा वहीं फेंका और रवि की जेब से पर्स और मोबाइल फोन लेकर चला गया. थोड़ी देर बाद रवि को होश आ गया. बस यही उस रिक्शे वाले की गलती थी कि वह रवि को मरा हुआ समझकर छोड़ गया. यही गलती कुछ ही दिनों में इस किलर को ले डूबी.


रवि को समझा गया हत्यारा
रिक्शे वाले किलर के हाथों बाल-बाल बचे रवि को कुछ ही दिनों में पुलिस ने पकड़ लिया. पुलिस का मानना था कि रवि ही वह सीरियल किलर है, जो पिछले तीन महीनों से एक के बाद एक हत्याएं कर रहा है. रवि ने किसी तरह पुलिस को यकीन दिलाया कि वह सीरियल किलर नहीं, बल्कि उस किलर का एक शिकार था जो हमले में बाल-बाल बचा.


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अस्ल में, उस रिक्शे वाले किलर ने रवि की जेब से जो पर्स चुराया था, उसमें से पैसे निकालकर वह पर्स फरीदाबाद के सेक्टर 15 में निर्माणाधीन एक मेट्रो स्टेशन के नज़दीक फेंक दिया था. इस पर्स में रवि का फोटो भी था और इसी को सुराग मानते हुए पुलिस रवि तक पहुंच गई थी. लेकिन रवि की गवाही के बाद यह एक हद तक साफ हो गया था कि सीरियल किलर तक पहुंचने का महीनों से चल रहा पुलिस का सफर अभी खत्म नहीं हुआ.


एक और शिकार बचने में हुआ कामयाब
कुछ ही दिनों बाद रिक्शे वाले उस किलर के हाथों एक और व्यक्ति तेजेंद्र बच गया. तेजेंद्र भी उसी तरह लूट का शिकार हुआ था जैसे रवि. तेजेंद्र पुलिस के पास पहुंचा और उसने बताया कि उसे बेहोशी की हालत में वह किलर एनआईटी इलाके में फेंक कर उसका सामान लूटकर फरार हो गया. तेजेंद्र से पुलिस को एक खास बात यह पता चली कि वह रिक्शे वाला पूरे समय अपना मुंह गमछे से ढंके रहता था. इसके अलावा उसकी कद काठी के बारे में भी उसने जानकारी दी.


अब गमछा था किलर की पहचान
तेजेंद्र की गवाही के बाद साफ था कि वह किलर अपने दस्तखत के तौर पर गमछा अपने शिकार के पास छोड़ देता है. तीन महीनों में हुईं 5 हत्याओं में मृतकों के पास से गमछा ज़रूर बरामद किया गया था. एकाध केस में यह पता चल चुका था कि मृतक गमछा नहीं पहनता था लेकिन यह अब तक साफ नहीं था कि गमछा मृतकों का ही था, कातिल का या इत्तेफाकन किसी का. रवि और तेजेंद्र की गवाही के बाद साफ था कि यह गमछा उस किलर की पहचान है.


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रिक्शा चलाने वाला एक शख्स जो गमछे से मुंह ढंके रहता है, ऐसे आदमी की खोज में पुलिस भटक रही थी तभी एक ऐसे व्यक्ति के संदिग्ध होने की टिप मिली. एक पुलिस वाला सिविल ड्रेस में उस रिक्शे वाले के पास पहुंचा और सवारी के तौर पर उसे कहीं चलने को कहा. रिक्शे वाले ने रिक्शे को एक सुनसान जगह पर उसी बहाने से रोका. पुलिस वाला चौकन्ना था कि उस पर पीछे से हमला होगा. हमला हुआ, गले में गमछा डाला गया लेकिन कुछ ही पलों में पुलिस वाले ने जवाब देते हुए उस रिक्शे वाले को काबू कर लिया और यह गमछा किलर पुलिस की गिरफ्त में आ गया.


गमछा किलर की कहानी : गांजा, सुल्फा, शराब
गमछे वाले सीरियल किलर के रूप में बदनाम होने वाला यह शख़्स उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले का रहने वाला रिंकू था. जनवरी 2015 में जब इसे पकड़ा गया तब इसकी उम्र 27 साल थी. नशेड़ियों की संगत में नशे का आदी हो चुका था और गांव में वह उतना पैसा नहीं कमा पाता था जिससे नशे की तलब पूरी हो सके. इसी कारण से गरीब घर का लड़का रिंकू पैसे कमाने 2009 के आसपास दिल्ली आया था. यहां उसने दोस्तों की मदद से रिक्शे का इंतज़ाम कर उन्हीं की तरह रिक्शा चलाना शुरू किया. लेकिन इससे भी उसे ज़रूरत पूरी करने जितने पैसे नहीं मिल पा रहे थे.


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नशे के गुलाम रिंकू को जिस दिन सवारी न मिलती तो वह नशा नहीं कर पाता और बिना नशे के वह बेचैन हो उठता था. इसी बेचैनी में उसने जुर्म की दुनिया में एंट्री ली और अपने दो दोस्तों की मदद से दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में 2009 से 2012 तक तीन कत्लों को अंजाम दिया. उसे शक की बिना पर पुलिस ने पकड़ा भी लेकिन वह 2014 में ज़मानत पर रिहा हो गया. इसके बाद रिंकू फिर अपने गांव गया लेकिन तीन महीनों से ज़्यादा वह गांव में रह नहीं सका और नशे की ज़रूरत उसे फरीदाबाद ले गई.


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दिल्ली में रिंकू पुलिस की नज़र में आ चुका था इसलिए फरीदाबाद चला गया. शुरुआत में उसने वहां अपनी बहन की मदद से कुछ दिन बिताए फिर एक रिक्शे का इंतज़ाम कर लिया. और रिक्शे वाले गमछे किलर के रूप में यहां रिंकू ने तीन महीनों के भीतर पांच हत्याओं को अंजाम दिया.


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पीएम मोदी के गढ़ से 2019 के लिए चुनावी अभियान का आगाज़ करेंगे राहुल गांधी


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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात में जल्द चुनावी अभियान का आगाज़ करेंगे. इस वक्त गुजरात में 77 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है. राहुल गांधी का यह अभियान 11 और 15 जुलाई को राज्य के दौरे के साथ ही शुरू हो जाएगा.राहुल गांधी ने पिछले साल 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य में काफी यात्राएं की थीं और चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन में सुधार के साथ 77 सीटें हासिल होने का श्रेय उनकी इन्हीं यात्राओं को दिया गया था. कांग्रेस को 182 सदस्यीय गुजरात विधानसभा में 2012 में सिर्फ 54 सीटें मिली थीं जो कि 2017 में बढ़कर 77 हो गईं.


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गुजरात विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने सत्ताधारी बीजेपी और उसके नेतृत्व पर निशाना साधने में आक्रामक रवैया अपनाया था. राहुल गांधी सौराष्ट्र के जूनागढ़, राजकोट और भावनगर जिलों का दौरा करेंगे. इन इलाकों में कांग्रेस ने दो दशक बाद बेहतर प्रदर्शन किया और पिछले विधानसभा चुनाव में ज्यादातर सीटें कांग्रेस को इन्हीं इलाकों में मिलीं.ये भी पढ़ेंः मंदसौर रेप केस: राहुल गांधी बोले- बच्चियों की हिफाजत के लिए एकजुट हो देश


पार्टी सूत्रों ने बताया कि वह राज्य में पार्टी के नेताओं के साथ लंबी बैठकें कर उनसे विचार-विमर्श करेंगे. राहुल गांधी दिसंबर तक राज्य के तीन से चार दौरे कर सकते हैं. वह यहां लोगों से दो बार संपर्क स्थापित करेंगे.


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दिल्ली: बुराड़ी के एक घर में मिली 11 लाश, खुला हुआ था दरवाज़ा


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दिल्ली के बुराड़ी स्थित एक घर से ग्यारह लोगों के शव मिले हैं. मृतकों में तीन नाबालिगों सहित 7 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल हैं. यह घटना बुराड़ी स्थित संत नगर की गली नंबर-2 की है. पुलिस जब घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची तो उन्हें संदिग्ध हालत में दस लाश जाल से लटकी मिलीं. इनमें से कई के मुंह और आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी, तो कुछ के पैर भी बंधे हुए पाए गए. वहीं एक बुर्जुग महिला का शव जमीन पर पड़ा था. बताया जा रहा है कि वह महिला इन बच्चों की मां हैं. अंदेशा है उनका गला दबाया गया है.मोहल्ले के लोगों का कहना है कि भाटिया फैमिली राजस्थान से यहां आई थी. उस घर में बुज़ुर्ग महिला के अलावा उनकी एक बेटी, दो बेटे, दो बहुएं, दो पोतियां, दो पोते और एक नातिन रहती थीं. पोतों की उम्र 16-17 साल के बीच बताई जा रही है. वहीं पड़ोसियों ने बताया कि कुछ ही दिन पहले महिला की नातिन प्रियंका की सगाई हुई थी. महिला का तीसरा बेटा चित्तौड़गढ़ में रहता है जिसका नाम दिनेश है. दिनेश सिविल कांट्रेक्टर है और वो अभी चित्तौड़गढ़ में ही है.


बताया जा रहा है कि मृतक परिवार की किराने और प्लायवुड की दुकान है. रात करीब पौने बारह बजे उन्होंने अपनी दुकान बंद की थी. यह दुकान रोज तड़के ही खुल जाया करती थी, लेकिन सुबह जब एक आदमी दूध लेने गया तो उसने दुकान बंद देखी. इसकी वजह जानने के लिए जब वो उनके घर गया तो घर का दरवाज़ा खुला हुआ था. वह सीढ़ियों से ऊपर पहुंचा तो देखा कि घर के लोग छत पर लगी जाल से लटके हुए हैं. बाद में उसने दूसरे पड़ोसियों को सूचना दी और पुलिस को बुलाया गया.



पुलिस इस मामले में सामूहिक हत्या और फिर आत्महत्या की आशंका जता रही है. पुलिस का कहना है कि परिवार ने संभवत: गरीबी से परेशान होकर यह कदम उठाया होगा, लेकिन घर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.
दिल्ली के संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि जांच जारी है किसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि हर संभव एंगल से जांच की जा रही है.वहीं पड़ोसियों के मुताबिक, यह परिवार बेहद अच्छा था, जिसकी कभी किसी से अनबन होते नहीं देखी गई.


मौके पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी पहुंच गए हैं.


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GSTN चेयरमैन ने कहा- दूसरे साल में GST को आसान बनाने पर होगा काम


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भारत के एतिहासिक टैक्स सुधारों में से एक ‘गूड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स’ (जीएसटी) ठीक एक साल पहले लागू हुआ था. 30 जून 2017 की आधी रात को प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी लागू किया था और अब केंद्र सरकार इसे चार साल की अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानती है.जीएसटी लागू होने के एक साल पूरा होने पर जीएसटी नेटवर्क के चेयरमैन अजय भूषण पांडे ने कहा कि दूसरे वर्ष में जीएसटी की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में काम किया जाएगा. उन्होंने बताया कि केंद्र जीएसटी रिटर्न भरने के लिए भी इनकम टैक्स रिटर्न की तरह ही एक फॉर्म लेकर आएगा. इसके साथ ही जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी नेटवर्क को राज्य स्वामित्व वाली इकाई बनाने की मंजूरी भी दे दी है.


जीएसटी की पहली सालगिरह के के मौके पर NEWS18 ने को GSTN चेयरमैन अजय भूषण पांडे से खास बातचीत की…


आप एक साल में जीएसटी की भूमिका का विश्लेषण किस तरह से करते हैं?जीएसटी का पहला साल हमारे देश के लिए बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया. एक बड़ा कर सुधार लागू किया गया और एक साल के भीतर यह स्थिर भी हो गया है जो काफी अहम बात है. अगर आप जीएसटी से पहले की स्थिति पर ध्यान दें तो तब 35 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश थे, जिनमें से प्रत्येक का अपनी वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) सिस्टम, अपने कानून, अपनी पंजीकरण प्रणाली, रिटर्न दाखिल करने की प्रणाली और यहां तक कि आईटी सिस्टम भी अलग था.


प्रत्येक राज्य में केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर भी थे. हमने 37 विभिन्न प्रकार के टैक्स को मिलाकर एक सिस्टम बनाया जो वास्तव में एक राष्ट्र, एक कर और फिर एक प्रणाली बन गया.


जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं की संख्या में 63-64 लाख की वृद्धि हुई है. आज हमारे सिस्टम में एक करोड़ 13 लाख टैक्स पेयर्स रजिस्टर्ड हैं, जो सभी एक कानून, एक सिस्टम, एक इंटरफेस और एक फॉर्म के तहत आते हैं. तो जीएसटी के माध्यम से बड़े बदवाल की कोशिश की गई है जो हमारे देश के लिए गर्व और संतुष्टि का विषय है कि हम एक साल में ऐसा कर सके. संघीय ढांचा होने के बाद भी इतने बड़े देश में ऐसा टैक्स सुधार, मुझे नहीं लगता है कि दुनिया में पहले कहीं ऐसा प्रयास हुआ होगा.


क्या कोई देश भारत द्वारा अपनाए गए जीएसटी मॉडल को अपनाना चाहता है?
विचारों के आदान-प्रदान के लिए कुछ हाई-प्रोफाइल मीटिंग हुई हैं. कई देशों ने हमारे मॉडल की तारीफ की है, लेकिन मॉडल को अपनाने के लिए अभी तक किसी भी देश ने औपचारिक रुचि व्यक्त नहीं की है.


यह आरोप लग रहा है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का उपयोग टैक्स से बचने के लिए किया जा रहा है. क्या आप इसे दूर करने के लिए सूचना-प्रौद्यौगिकी का सहारा लेने की सोच रहे हैं?
जीएसटी के बारे में अच्छी बात यह है कि इसमें हर खरीद और बिक्री की जानकारी सिस्टम में उपलब्ध रहती है, अगर कोई भी चेन को तोड़ने की कोशिश करता है तो उसे ट्रैक किया जा सकता है. जीएसटी से पहले इसका पता लगाना बहुत मुश्किल था, तब का सिस्टम न तो पूरी तरह से डिजिटल था और न ही आपस में जुड़ा हुआ था. हर राज्य की अलग प्रणाली थी, इसलिए सूचनाओं को साझा करने का कोई रास्ता नहीं था. अब सिस्टम ऐसा है, किसी को तभी इनपुट क्रेडिट मिलेगा जब एक विक्रेता बिक्री चालान अपलोड करेगा. अगर बिक्री चालान अपलोड किए बिना कोई इनपुट क्रेडिट लेता है तो उसे पहचानना बहुत आसान होगा. इस प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त डेटा एनालिटिक्स और अन्य आईटी उपकरण की जरूरत है.


यह कई दोषी करदाताओं को रोक देगा और ईमानदार करदाताओं को प्रोत्साहित करेगा. जो लोग टैक्स नहीं देते हैं, वे भी महसूस करेंगे कि लंबे वक्त तक छिपे रहना मुश्किल है और जल्द ही इसमें शामिल हो जाएंगे.


जो टैक्स नहीं देते क्या आपके पास उनकी अनुमानित संख्या है?
नहीं, मैं ऐसा कोई अनुमान नहीं लगाऊंगा, क्योंकि आप जानते हैं कि मैं ऐसा नहीं कर सकता. यह जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों या उचित सर्वेक्षणों द्वारा किया जाना चाहिए. जहां तक जीएसटी का सवाल है तो हमारे लिए उचित नहीं है कि हम इस तरह का अनुमान लगाएं क्योंकि यह हमारा काम नहीं है.


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क्या इस बात की संभावना है कि नया जीएसटी-आर फॉर्म लाया जाएगा? अगर हां तो यह किस तरह का होगा?
हां, जैसा कि आपको याद होगा, जब जीएसटी की शुरुआत हुई थी तब हमारे पास जीएसटी 1, 2 और 3 सिस्टम था, कुछ कठिनाइयों की वजह से जीएसटी 1, 2 को रोक दिया गया, जीएसटी-आर 3बी पेश किया गया. नवंबर में जीएसटी परिषद ने जीएसटी 1, 2, 3 और 3बी के स्थान पर जीएसटीआर फॉर्म पर काम करने लिए मीटिंग रखी थी.


परिषद ने हमे एक फॉर्म पर काम करने के लिए कहा जो कि आसान होना चाहिए. फॉर्म का डिजाइन तैयार किया जा चुका है और इसे जीएसटी काउंसिल कि अंतिम मीटिंग में मंजूरी भी मिल गई, अब इसे लागू करने की दिशा में काम किया जा रहा है, इसे लागू करने के लिए नियम और कानून में कुछ बदलावों की आवश्यकता होगी. इसके लिए आईटी सिस्टम में भी बदलवाव की जरूरत होगी.


जीएसटी परिषद ने इसके लिए हमें छह महीने का वक्त दिया है, उम्मीद है हम इतने वक्त में ऐसा कर लेंगे.


नए परिवर्तन व्यापक रूप से वैसे ही होंगे जैसे कि लोग चाहते हैं लेकिन इसमें जीएसटी 1, 2 और 3 जैसा कुछ नहीं होगा, जिसमें एक सूचना एक डीलर से दूसरे डीलर तक जाने के बाद आगे बढ़ती है.


इसका प्रवाह यूनिडायरेक्शनल होगा. विक्रेता इसमें अपनी बिक्री का विवरण दर्ज करेंगे और उन्हें खरीद का विवरण दर्ज करने की जरूरत नहीं होगी. जो एक विक्रता के लिए बिक्री है वह दूसरे के लिए खरीद है. खरीरददार को विक्रेता द्वारा अपलोड किए गए चालान के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा.


मैं कहूंगा कि यह टीडीएस और आयकर के समान है.


जीएसटी नेटवर्क को राज्य स्वामित्व वाली इकाई बनाने के आप कितने करीब हैं?
जीएसटी परिषद की पिछली बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी कि जीएसटी नेटवर्क 100 प्रतिशत सरकारी स्वामित्व वाला होना चाहिए, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार का हिस्सा होगा. इस दिशा में काम किया जा रहा है. गैर-सरकारी इकाई द्वारा सरकारी इकाई को शेयर ट्रांसफर किए जा रहे हैं.


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जीएसटी को लेकर आने वाले साल में क्या बड़ी योजना है?
हमारी प्रणाली स्थिर हो चुकी है और अब हम जीएसटी को आसान बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. जैसा कि मैंने बताया इसके लिए हम एक फॉर्म लेकर आ रहे हैं. हम इसे जितना हो सके उतना आसान बनाने की कोशिश करेंगे. छोटे डीलर्स को पूरा फॉर्म नहीं भरना होगा, उन्हें फॉर्म के कुछ ही हिस्सों को भरना होगा. यह एक इंटरेक्टिव फॉर्म की तरह होगा जिसमें केवल जरूरी सवाल ही पूछे जाएंगे जो कि इस बात पर आधारित होंगे कि पूरा रिटर्न भरा गया है या नहीं.


हम इस बात पर भी काम कर रहे हैं कि विक्रेता अपने चालान को कब अपलोड करते हैं, महीने के अंत में इसके आधार पर रिटर्न का मसौदा का तैयार किया जा सकता है. यह दूसरी योजना है जिसपर हम काम कर रहे हैं.


हमारी एक और योजना छोटे व्यापारियों के लिए एक सॉफ्टवेयर बनाने की है जिसका उपयोग कर वह रिटर्न दाखिल करने में कर सकें.


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उत्तराखंड: खाई में गिरी बस, 30 लोगों की मौत की आशंका, 20 शव बरामद


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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित धूमाकोट के पास एक बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई. इस हादसे में 30 लोगों की मौत की आशंका है. बताया जा रहा है कि यह बस क्वीनस गांव से रामनगर जा रही थी.पुलिस के मुताबिक, उन्होंने 20 शव बरामद किए हैं, जबकि 12 अन्य लोग घायल हुए हैं. पुलिस ने घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया है. गढ़वाल के कमिश्नर दिलीप जवालकर ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका व्यक्त की है.


उधर ममुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बस दुर्घटना पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए जिला प्रशासन को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं. स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एसडीआरएफ बचाव कार्य में जुट गए हैं.


विस्तृत जानकारी के लिए बने रहें हमारे साथ…


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