Friday, 29 June 2018

दिल्ली सरकार की पहल से मज़ेदार हुआ छात्रों का अंग्रेजी से इंग्लिश तक का सफर


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इरम आग़ा
‘रियलिस्टक’  राम, ‘पारवफुल’ प्रतीक, ‘जॉयफुल’ जयराज, ‘एंबीसियस’ अंश, ‘हीरोइक’ हरी, ‘वर्साइल’ विश्वजीत, ‘नॉटी’ निधी और ‘रिसपॉन्सबिल’ रेखा. ये नाम किसी खास वर्ग के नहीं हैं, बल्कि गर्मियों में दिल्ली सरकार की तरफ से चलाई जा रही स्पोकन इंग्लिश की स्पेशल क्लास में छात्रों ने खुद को दिए हैं.अंग्रेजी हमेशा से स्कूलों में नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा रही है. ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में अंग्रेजी आज जरूरत बन चुकी है, लेकिन अंग्रेजी में बातचीत सिखाने के लिए हमेशा गलत तरीके चुने जाते हैं. शायद अंग्रेजी के महत्व को समझकर ही कमजोर तबकों से आने वाले दिल्ली के छात्रों ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से छोटी उम्र में ही अंग्रेजी सिखवाने का अनुरोध किया.


इसके बाद दिल्ली सरकार ने 2 जून से 30 जून के बीच ब्रिटिश काउंसिल, इंडिया-मैकमिलन एजुकेशन, एकेडमी फॉर कंप्यूटर्स ट्रेनिंग (गुजरात) और ट्रिनिटी कॉलेज लंदन के सहयोग से विशेष कक्षाओं की व्यवस्था की.न्यूज़ 18 ने लिया जायजा
न्यूज़ 18 ने पश्चिम दिल्ली के हरि नगर के राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय में एक क्लास में कक्षा 10 के विद्यार्थियों से मुलाकात की. यहां छात्रों को पढ़ा रहे टीचर का निकनेम भी मजेदार है. ‘क्लेवर’ चाहत छात्रों को हर दिन होने वाली बातचीत के जरिए अंग्रेजी बोलना सीखा रहे थे.


उनकी ट्रिक ने काम भी किया. छात्र खुशी-खुशी बातचीत में शामिल हो गए और अंग्रेजी में पार्क जाने और स्वस्थ रहने के लिए वह क्या करते हैं इस बारे में बताने लगे. इस दौरान कक्षा में ‘ferocious और ‘Mesmerised’ जैसे शब्द सुनाई दिए.


इन स्पेशल क्लासेज़ में पारंपरिक कक्षाओं की तरह टीचर पेन और किताबें ले जाने के लिए बाध्य नहीं हैं. छात्रों को ब्रिटिश काउंसिल द्वारा स्टडी मैटेरियल दिए गए हैं. इसका सबसे अच्छा फायदा यह दिख रहा है कि छात्र पढ़ाई में ज्यादा मन लगा पा रहे हैं और एक दूसरे का सहयोग करते हुए सीख रहे हैं.


‘क्लेवर’ चाहत को यह निकनेम उनके ही छात्रों से मिला है, जिनका कहना है, ‘छात्र तो गलती करते ही हैं, लेकिन मैं उन्हें क्लास के बीच में या बातचीत के बीच में नहीं रोकता. मैं उन्हें शर्मिंदा करने के लिए सही नहीं करता हूं. क्लास में उनके साथ उन्हें सही करते हैं और वो इसी तरह सीखते हैं.’


आनंदा ऐश्वर्या को फिलहाल कोई निकनेम नहीं मिला है, लेकिन वह भी छात्रों की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं. हरि नगर के दूसरे क्लास में पढ़ाते हुए ऐश्वर्या सरल लेकिन प्रभावी शिक्षण विधियों का से बच्चों को सिखा रही हैं. ऐश्वर्या का कहना है,’मैं उन्हें लिखने के लिए नहीं कहती, बल्कि उन्हें इंग्लिश में बातचीत करने के लिए कहती हूं. मैं बातचीत से पढ़ाना पसंद करती हूं लेक्चर देकर नहीं. इसी तरह इंग्लिश को आसान बनाया जा सकता है.’


अंग्रेजी की जरूरत क्यों?
प्रिंस का कहना है कि उनका प्राइवेट स्कूल में एडमिशन इसलिए नहीं हुआ, क्योंकि वह अंग्रेजी नहीं बोल सकते, इस कारण से वह निराशा महसूस करते हैं. उन्होंने बताया कि ट्यूशन के दौरान प्राइवेट स्कूलों के बच्चे अंग्रेजी में ही बातचीत करते हैं, जिस कारण वह उनसे मेलजोल नहीं बढ़ा पाते.


हॉलीवुड फिल्म ‘एवेंजर्स: इन्फिनिटी वॉर’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार कक्षा में इस फिल्म पर चर्चा होनी थी. उन्होंने भी फिल्म देखी थी लेकिन वह फिल्म देखने के बाद भी इसके बारे में कुछ भी नहीं बोल सके. जब उन्होंने कोशिश की तो सबसे मजाक बना दिया. लेकिन अब प्रिंस आत्मविश्वास से भरे हुए हैं. उनका कहना है कि यह फिल्म एक्शन से भरपूर थी.


‘जॉली’ जतिन का कहना है कि वो अंग्रेजी में हमारा मजाक उड़ाते थे और हमे पता भी नहीं चलता था कि वह क्या कह रहे हैं. लेकिन अब वह पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने कहा कि अगले इंटर स्कूल कॉम्पिटिशन में अगर किसी ने उनका मजाक उड़ाया तो वह अंग्रेजी में जवाब देते हुए कहेंगे कि वह भी उनके लिए वैसा ही महसूस करते हैं.


जिन छात्रों ने इन स्पेशल क्लासेज़ में हिस्सा लिया वे सभी कमजोर वर्गों से आते हैं. टीचर जैमी मैथ्यू ने कहा कि कक्षा के बाद बच्चों को अंग्रेजी बोलने और समझने में आसानी होगी. इसके साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा यह भी निश्चित है.


Article source: http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-14398190.html

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