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ड्रग्स माफिया देश भर में किस तरह फैल चुका है? और किस तरह ड्रग्स के शिकार हो रहे हैं आम लोग? ऐसी तीन कहानियां कल यानी बुधवार को आप पढ़ चुके हैं. आज यानी गुरुवार को पढ़िए ड्रग्स के कारोबार में ड्रग्स तस्करों से जुड़ी दो कहानियां.READ: उड़ता हिंदुस्तान: हर इंजेक्शन में बंद है एक चुभती हुई कहानी
पंजाब में ड्रग्स के कारोबार की समस्या सुर्खियों में है और वहां हालात बेकाबू हो चुके हैं. गोवा देश का ऐसा राज्य है जहां ड्रग्स का कारोबार बरसों से बदस्तूर जारी है. गोवा के ड्रग्स नेटवर्क में पुलिस, राजनीति और विदेशियों के शामिल होने की खबरें आती रही हैं और यहां ड्रग्स के कारण और कई तरह के गंभीर अपराधों को अंजाम दिया जाता है. अब यहां ड्रग्स पैडलिंग यानी ड्रग्स एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने के तरीकों में लगातार नयी तरकीबों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी पैडलिंग को फोकस में रखती है पहली कहानी और दूसरी कहानी एक बानगी है कि कैसे सामान्य नौजवान ड्रग्स के धंधे और नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं. सिवाय नामों के इन कहानियों में सब कुछ वास्तविक है.
मारिया और जोएल को सिर्फ उसकी आवाज़ सुनाई देती थी क्योंकि वह सामने नहीं आता था, सिर्फ फोन पर बात करता था. यह आवाज़ दोनों को सिर्फ अगले एक कदम के बारे में बताती थी और दोनों से हर अगले कदम पर कोई अजनबी आकर मिलता था. किसी अजनबी का कोई नाम नहीं था और न ही शक्ल थी. कभी हुड में तो कभी नकाब में अपने चेहरे ढांके हुए ये लोग मिलते थे और काम को अंजाम देकर गायब हो जाते थे.
पिछले साल यानी 2017 में एड्स की मरीज़ मारिया और जोएल गोवा में थे. फोन पर आवाज़ आई और मारिया से कहा गया कि उसे अगली सुबह कौन सी फ्लाइट पकड़नी है और कहां उतरना है. इसी तरह जोएल को भी बताया गया लेकिन उसे अलग फ्लाइट से अलग जगह उतरना था. इस आवाज़ का हुक्म मानकर दोनों ने अपनी-अपनी फ्लाइट्स पकड़ीं और बताई गई जगह पर उतरे. उतरने पर मारिया को एक अजनबी ने एक भारी पैकेट दिया और तभी उसका फोन बजा. मारिया को बताया गया कि अब उसे कौन सी फ्लाइट लेकर कहां जाना है.
मारिया ने वैसा ही किया और अगली जगह पर उसे तय हुई रकम का लिफाफा मिल गया जिसमें एक होटल की बुकिंग के दस्तावेज़ भी थे. उधर, जोएल के साथ भी यही सब घट रहा था. अब मारिया को किसी बस से एक और जगह जाने को कहा गया. इसी तरह कई माध्यमों से वह गोवा के ही एक शहर में पहुंची थी जहां उसे वह भारी पैकेट किसी को देना था. गोवा के ही दूसरे शहर में जोएल को भी ऐसा ही करना था. दोनों को सख्त हिदायत थी कि दोनों कोई फोन नहीं करेंगे और जब जिसे पैकेट देना होगा, बता दिया जाएगा.

दोनों अपने-अपने होटल के कमरों में बस अगले कॉल का इंतज़ार कर रहे थे. पूरा दिन बीत गया. दो दिन हो गए. तीसरे दिन एक कॉल आया और कहा गया कि अगले दस मिनट में एक आदमी होटल रूम में आएगा. वह फोन पर बात करवाएगा. बाकी की रकम देगा. उसे पैकेट देकर तुरंत होटल से चेकआउट करना है और एक बस पकड़कर दूसरी जगह चले जाना है.
इधर मारिया को दस मिनट में पूरी तैयारी करनी थी और उधर जोएल को. जैसा कहा गया था वैसा ही हुआ और एक आदमी ने मारिया को तय रकम दी और पैकेट लेकर फौरन गायब हो गया. ऐसे ही जोएल के साथ हुआ. दोनों ने चेकआउट किया और बताई गई बस लेकर गोवा के ही दूसरे कस्बे में चले गए. ऐसे ही गोवा में चल रही थी ड्रग्स की तस्करी. मारिया और जोएल जैसे कई किरदार गोवा में हैं जिन्हें ड्रग्स पैडलर के नाम से जाना जाता है.
साल 2017 में पहली बार दो ऐसे कोरियरों को पकड़ा गया था जिनके पास से 55 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत की कोकीन बरामद की गई थी, तब ड्रग्स पैडलिंग का यह बदला हुआ तरीका सामने आया था. गोवा में ड्रग्स के गैंग्स रशियन माफिया द्वारा संचालित होते हैं और नाइजीरियाई समेत कई विदेशी इस धंधे में दलालों का काम करते हैं. ड्रग पैडलिंग के लिए आर्थिक रूप से कमज़ोरों, मरीज़ों, स्टूडेंट्स और बच्चों तक को इस्तेमाल किया जाता है. इस पूरे धंधे में कई परतें हैं और दूर से देखने पर लगता है कि यह पूरा धंधा संगठित नहीं है.
हैदराबाद में जमाया ड्रग्स का धंधा
गोवा से एलएसडी, हशीश, कोकीन और एक्सटेसी लाकर हैदराबाद में बेचे जाने के धंधे में कई बेरोज़गार नौजवान, छात्र और युवतियां शामिल हो चुकी हैं. ऐसी ही एक कहानी तब सामने आई जब हैदराबाद पुलिस ने 24 साल के हमीद को गिरफ्तार किया. हमीद की कहानी ने कई सुराग दिए कि कैसे हैदराबाद में नौजवान ड्रग्स के नशे और इस नेटवर्क की गिरफ्त में आ रहे हैं.

हमीद अपने दो दोस्तों के साथ पहली बार साल 2013 में गोवा घूमने गया था. वहां उसने अपना जन्मदिन मनाने के लिए ये छुट्टियां प्लैन की थीं और गोवा के कई बीच उसने दोस्तों के साथ घूमे. अपने दोस्तों के साथ हमीद एक होटल में रुका था. गोवा में घूमने के लिए बाइक्स किराये पर लेने के लिए जब हमीद ने एक आदमी से संपर्क किया तो उसने हशीश आॅफर की. पार्टी और जश्न के मूड में डूबे हमीद और उसके दोस्तों ने तब पहली बार किसी ड्रग्स का नशा ट्राय किया.

हशीश आॅफर करने वाला यह आदमी चूंकि बाइक किराये पर देता था इसलिए हमीद ने इसके साथ कॉंटेक्ट नंबर शेयर कर लिया. कुछ ही समय बाद हमीद फिर गोवा गया और इस आदमी से संपर्क किया. इस बार हमीद अकेला गोवा में था इसलिए उसने इस आदमी से ज़्यादा मात्रा में हशीश मांगी और कहा कि वह अपने साथ ले जाकर हैदराबाद में दोस्तों के साथ इसका मज़ा लेना चाहता है. उसने हमीद को मांगी गई मात्रा में हशीश बेच दी.
अब हमीद हैदराबाद लौटा तो उसने एक प्लैन बना लिया था. अपने फ्रेंड सर्कल में उसने हशीश खरीदने के लिए मैसेज छोड़ दिया. हैदराबाद पहुंचकर हमीद ने खास दोस्तों के साथ आधी हशीश का नशा किया और लाई गई आधी हशीश को दोस्तों के नेटवर्क में बेचा तो उसे दोगुना दाम तक मिल गया. अगली बार हमीद फिर अकेला गोवा गया तो उस आदमी ने बताया कि वह हशीश के साथ ही एलएसडी और एक्सटेसी का इंतज़ाम भी करवा सकता है.
अब हमीद अपने नशे के साथ ही ड्रग्स को साइड बिज़नेस बनाना तय कर चुका था. उस आदमी के साथ कमीशन फिक्स हुआ और हमीद को उसने एक फ्रेंच आदमी से मिलवाया जो गोवा में ड्रग्स के धंधे में एक कुख्यात नाम था. इस फ्रेंच आदमी ने हमीद को ड्रग्स देने से पहले काफी पूछताछ की और काफी देर तक वह ड्रग्स देने से मना करता रहा. कई घंटों बाद जब उस फ्रेंच आदमी ने हमीद के बारे में अपने सूत्रों से सब ठीक होने की जानकारी ले ली तब उसे ड्रग्स दी.
इस ड्रग्स को हमीद किताब में तरीके से छुपाकर हैदराबाद ले जाने वाला था. इस बार वह बस से हैदराबाद गया ताकि किसी किस्म का खतरा न हो. हमीद सुरक्षित हैदराबाद पहुंचा और उसने यह ड्रग्स वहां अपने नेटवर्क में बेच दी. धीरे-धीरे हमीद का यह धंधा हैदराबाद में जम चुका था और उसके खरीदारों का नेटवर्क बढ़ता ही जा रहा था.

महीने में दो से तीन बार हमीद ड्रग्स लेने के लिए गोवा जाता था. हर खतरे से बचने के लिए वह अकेले ही गोवा जाता था और उसने किसी को इस धंधे में शामिल नहीं किया था. ज़्यादातर वह बस से ही आया-जाया करता था जो सुरक्षा के लिहाज़ से एक और ज़रूरी कदम था. और तो और, हमीद इस धंधे में इतना शातिर हो चुका था कि एक हद के बाद उसने अपने दोस्तों पर भी भरोसा करना छोड़ दिया था. अब वह अपने कस्टमरों को लेकर भी सतर्क था और दोस्तों की सिफारिशों को भी कई बार दरकिनार कर देता था.
हमीद का धंधा सिर्फ दो सालों में हैदराबाद के नौजवानों और स्टूडेंट्स के बीच फैल चुका था. करीब दो साल पहले एक कस्टमर ने पुलिस को इस बारे में जब टिप दे दी तो हमीद को पकड़ लिया गया और उसका लगातार फैल रहा धंधा अचानक ठप हो गया. फिलहाल हमीद बेल पर जेल से बाहर है और अब उसका कहना है कि वह खुद ड्रग्स का सेवन छोड़ चुका है और उसने इस धंधे से तौबा कर ली है. अब वह कोई अच्छी नौकरी तलाशने में लगा है और नये सिरे से ज़िंदगी शुरू करना चाहता है. हमीद जैसे कई नौजवान हैदराबाद में हैं जो या तो ड्रग्स के शिकार हैं या ड्रग्स पैडलिंग या नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं.
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