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मैसूर पुलिस की कानूनी कार्रवाई में पता चला है कि वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी, शहर में 100 विदेशी छात्र फर्जी सर्टफिकेट के सहारे अवैध रूप से रह रहे हैं.कॉलेज ने ही इन छात्रों को फर्जी सर्टिफिकेट प्रदान किए हैं.
मैसूर शहर के कमिश्नर सुब्रमण्येश्वर राव ने इस बारे में कहा, “हमने मैसूर में रह रहे विदेशियों के खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू किया. हमें ऐसे 100 छात्रों के बारे में पता चला. हमने उनसे सर्टिफिकेट मांगा तो उन्होंने तुरंत सर्टिफिकेट दिखा दिए, लेकिन हमने पाया की सर्टिफिकेट झूठे हैं, जिन कोर्स के ये सर्टिफिकेट हैं वह कॉलेज में पढ़ाए ही नहीं जाते हैं.”
ये छात्र अपनी वीजा अवधि समाप्त होने के दो से आठ साल के बाद भी यहां रह रहे हैं. छात्र सोमालिया, सूडान, तंजानिया और लेबनान जैसे देशों से संबंधित बताए जा रहे हैं.पुलिस कमिश्नर सुब्रमण्येश्वर राव ने कहा कि छात्रों के वीजा की अवधि बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है, उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए.
फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे रहने वाले छात्रों में से कम से कम 30 को मैसूर के एक गर्ल्स कॉलेज ने फर्जी सर्टिफिकेट दिए हैं, वहीं एक कम्प्यूटर ट्रेनिंग सेन्टर ने 60 से ज्यादा छात्रों को अवैध सर्टिफिकेट दिए.
पुलिस ने कहा कि वे आपराधिक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी से इनकार नहीं कर रहे हैं. पिछले तीन महीने में 900 छात्र शहर छोड़कर जा चुके हैं.
बता दें कि शहर में करीब 2100 छात्र स्टूडेंट वीजा पर रह रहे हैं.
Article source: https://aajtak.intoday.in/story/blind-girl-gangraped-in-delhi-one-accused-arrested-as-victim-identified-him-by-his-voice-1-1001325.html
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