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जोया मतीनदिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली अक्षिता दिल्ली के उत्तम नगर में रहती हैं. पहले स्कूल और अब कॉलेज जाने के लिए वह कई घंटों का सफर करती हैं. मेट्रो कनेक्टिविटी होने के बावजूद उसे दिन में दो बार बस या ऑटो लेना पड़ता है. इस दौरान उसे छेड़खानी और सार्वजनिक जगहों पर फब्तियां झेलनी पड़ती है. उसने बताया, ‘अक्सर मैं काफी डरी हुई रहती हूं. एक बार एक आदमी ने मेरा मेट्रो स्टेशन से कॉलेज तक पीछा किया.’
अक्षिता की कहानी देश की किसी भी महिला की कहानी हो सकती है. महिलाओं के मुद्दों पर थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन सर्वे में भी यह समस्या सामने आई थी और इस सर्वे में भारत को महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश बताया गया था. यह रैंकिंग स्वास्थ्य, भेदभाव, सांस्कृतिक परंपराओं, यौन हिंसा, गैर यौन हिंसा और मानव तस्करी के पैमाने के आधार पर तय की गई.
केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने हालांकि इस सर्वे को खारिज कर दिया और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के सर्वे के तरीके को विस्तार से बताने को कहा. मंत्री को अपने सवालों के जवाब का इंतजार है लेकिन दिल्ली में महिलाओं को बस, ऑटो और मेट्रो में सफर के दौरान डर का अंदेशा हर वक्त बना रहता है.नोएडा में काम करने वाली 24 साल की एक युवती ने बताया, ‘सफर करना बहुत बुरा अनुभव होता है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किसी समय और किस साधन से सफर कर रहे हैं. मुझे अलर्ट, तैयार रहना होता है और मैं कभी भी अपना फोन बंद नहीं करती हूं. हर समय मुझे अपनी सुरक्षा का डर लगा रहता है.’
इस पैनल ने भी 2017 के रॉयटर्स फाउंडेशन सर्वे के नतीजों को पुष्ट किया. रॉयटर्स फाउंडेशन सर्वे में दिल्ली को दुनिया में महिलाओं के लिए चौथा सबसे खतरनाक शहर बताया गया था. उपराज्यपाल ने पिछले साल इस पैनल का गठन किया था और इसे महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जड़ का पता लगाने को कहा गया था. पैनल ने बताया कि कॉलेज कैंपस, सार्वजनिक यातायात और सुनसान जगहों को महिलाओं के लिए असुरक्षित बताया गया.
दो महिलाओं ने सफर के दौरान होने वाली समस्याओं के बारे में बताया. ओखला मेट्रो स्टेशन के बाहर एक लड़की ने बताया, ‘यदि मैं मजबूत और दृढ़ दिखती हूई भावशून्य चेहरे के साथ चलती हूं तो मुझे लगता है कि हमले या छेड़छाड़ से बच जाऊंगी.’ एक अन्य लड़की ने बताया, ‘भले ही मैं इस रास्ते से रोजाना सफर करती हूं लेकिन मुझे खुद को लगातार याद दिलाना पड़ता है कि सब ठीक है, मैं सुरक्षित हूं.’
दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर संजय बेनीवाल ने न्यूज18 से बात करते हुए महिलाओं की समस्याओं के कई कारण बताए. उन्होंने कहा, ‘भीड़भाड़ वाली बसों या बस व मेट्रो स्टेशन पर अंधेरे की वजह से महिलाएं आसान शिकार बन जाती है.’
इससे उनका सफर महंगा हो जाता है और इससे उनकी जेब पर भी असर पड़ता है. इस अध्ययन में बताया गया कि किस तरह से महिलाएं सफर की सुरक्षा की पढ़ाई की गुणवत्ता से तुलना करती हैं.
दक्षिण दिल्ली में खाना बनाने का काम करने वाली रीना मुखर्जी इसी तरह का एक उदाहरण हैं. उनकी बेटी के 12वीं में अच्छे नंबर आए थे और उसका दक्षिण दिल्ली के अच्छे कॉलेज में दाखिला हो गया था लेकिन लंबे सफर के डर से रीना ने अपनी बेटी का दाखिला वहां नहीं कराया. अभी उनकी बेटी दयाल सिंह कॉलेज में पढ़ती है.
2015 में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘हिम्मत’ ऐप लॉन्च की थी. इस ऐप के जरिए यूजर संकट होने पर पुलिस, दोस्तों और परिवार के लोगों को अलर्ट भेज सकता था. हालांकि संसदीय समिति ने पाया कि यह ऐप अपने लक्ष्य में असफल रही है क्योंकि काफी कम लोग इसका उपयोग कर रहे हैं. अब इस ऐप में बदलाव किए गए हें और यह हिंदी व अंग्रेजी में भी उपलब्ध है. साथ ही इसमें रजिस्ट्रेशन भी आसान हो गया है.
Article source: http://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/noida/including-medical-student-5-thieves-arrested-by-noida-police-1002338.html
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