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देश के प्रसिद्ध संत कबीर दास के 500वें प्राकट्य उत्सव के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत कबीर नगर जिले के मगहर में कबीर की मज़ार पर जाकर चादर चढ़ाई. पीएम मोदी ने यहां कबीर अकादमी का भी शिलान्यास किया. इसके अलावा प्रधानमंत्री ने एक जनसभा को संबोधित किया, जहां कबीर के कई दोहों को सुनाते हुए लोगों के साथ-साथ विरोधियों को भी संदेश देते दिखे.मगहर में पीएम मोदी ने कबीर को कुछ यूं किया याद…
- कबीर का सारा जीवन सत्य की खोज में बीता. कबीर की साधना मानने से नहीं बल्कि जानने से होती है.
महात्मा कबीर चरणों की धूल से माथे का तिलक बन गए. वे विचार बन कर आए और व्यवहार बन कर अमर हो गए.पढ़ें- पीएम मोदी के मगहर दौरे के सियासी मायने
वह सिर से पैर तक मस्तमौला, स्वभाव के फक्कड़, आदत में अक्खड़, भक्त के सामने सेवक, बादशाह के सामने प्रचंड दिलेर, दिल के साफ, दिमाग के दुरुस्त, भीतर से कोमल बाहर से कठोर थे. वह जन्म के धन्य से नहीं, कर्म से वंदनीय हो गए.
संत चेतना जागरण के लिए वह काशी से मगहर आए, उन्होंने कहा कि अगर हृदय में राम बसते हैं तो मगहर भी सबसे ऊंचा है.
काशी ने कबीर को आध्यात्मिक चेतना और गुरु से मिलाया था. उन्होंने सामान्य लोगों की बातों को बोलचाल की भाषा में पिरोया था.
कबीर के दोहों को समझने के लिए किसी शब्दकोष की जरूरत नहीं है. उन्होंने जन-जन तक अपनी बातों को पहुंचाया.
कबीर ने कहा था कि जब मैं था तो हरि नहीं, जब हरि था तो मैं नहीं, मतलब अपने अहंकार में डूबा था तब कुछ नहीं दिखा.
कबीर ने कहा था आदर्श शासक वही है, जो जनता के दर्द को समझता है. वह भगवान राम को आदर्श शासक मानते थे.
संत कबीर कहते थे कि मत मांगों, मांगना मरने के बराबर है. वे श्रम को प्रधान समझते थे.
पीएम मोदी ने अपने भाषण के अंत में कहा कि संत कबीर को जन-जन तक पहुंचाया जाए और उसी के अनुसार आचरण भी किया जाए. इसमें कबीर अकादमी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
Article source: https://aajtak.intoday.in/story/blind-girl-gangraped-in-delhi-one-accused-arrested-as-victim-identified-him-by-his-voice-1-1001325.html
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